बांदा: बुंदेलखंड का ऐतिहासिक गढ़, जानें चारों विधानसभा सीटों की पूरी तस्वीर
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है. प्रदेश में सियासी हलचलें तेज होती जा रही हैं. यही कारण है कि प्रदेश के तमाम जिलों का सियासी समीकरण से लेकर धार्मिक और अन्य पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है. ऐसे में आइए जानते हैं कि बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित बांदा जिले का इतिहास. यहां की संस्कृति, राजनीति और सामाजिक विविधता के लिहाज से इसकी महत्ता.
कालिंजर का ऐतिहासिक किला, बुंदेला और चंदेल शासकों की विरासत, 1857 के विद्रोह में भूमिका और स्वतंत्रता आंदोलन की सक्रिय भागीदारी बांदा को अलग पहचान देती है. मौजूदा समय में भी यह जिला राजनीतिक रूप से अहम है, क्योंकि बांदा लोकसभा क्षेत्र में जिले की चार विधानसभा सीटें आती हैं और पांचवीं विधानसभा सीट चित्रकूट जिले की है.
बांदा का इतिहास क्या है?
बांदा का इतिहास काफी पुराना माना जाता है. जिला प्रशासन के इतिहास संबंधी दस्तावेज के मुताबिक यहां पाषाण युग और नवपाषाण काल से मानव सभ्यता के प्रमाण मिले हैं. जिले के नाम को ऋषि बामदेव से भी जोड़ा जाता है, जिनके नाम से ‘बामदा’ और बाद में ‘बांदा’ नाम प्रचलित होने की बात कही गई है.
बुंदेलखंड के इतिहास में कालिंजर दुर्ग का विशेष स्थान है. चंदेल शासकों के दौर में कालिंजर सत्ता का महत्वपूर्ण केंद्र रहा. इसके बाद इस क्षेत्र पर विभिन्न राजवंशों और मुगल सत्ता का प्रभाव रहा. बाद के दौर में बुंदेलों का प्रभाव बढ़ा और बांदा नवाबी दौर का भी महत्वपूर्ण केंद्र बना.
1857 के विद्रोह में नवाब अली बहादुर द्वितीय ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा संभाला. बांदा में विद्रोह का असर व्यापक रहा और ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्थानीय लोगों ने भी संघर्ष किया. जिला प्रशासन के इतिहास के अनुसार स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन में भी बांदा की भागीदारी रही. महात्मा गांधी ने 1929 में बांदा का दौरा किया था.
बांदा जिला कब और कैसे बदला?
समय के साथ बांदा की प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव हुआ. 1998 में चित्रकूट को अलग जिला बनाए जाने के बाद बांदा में पांच तहसीलें बांदा, नरैनी, बबेरू, पैलानी और अतर्रा रहीं. अब ये जिला चित्रकूटधाम मंडल का मुख्यालय भी है.
वर्तमान में बांदा जिले का क्षेत्रफल करीब 4,408 वर्ग किलोमीटर है. जिले में पांच तहसील, आठ ब्लॉक, 471 ग्राम पंचायत और 761 राजस्व गांव हैं.
बांदा की जनसंख्या कितनी है?
2011 की जनगणना के अनुसार बांदा जिले की कुल आबादी 17,99,410 थी. इसमें 9,65,876 पुरुष और 8,33,534 महिलाएं शामिल थीं. यानी जिले में महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में कम रही और कुल लिंगानुपात 863 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष था.
लिंग के आधार पर बांदा की आबादी
श्रेणी - आबादी
कुल जनसंख्या - 17,99,410
पुरुष - 9,65,876
महिला - 8,33,534
लिंगानुपात - 863 महिलाएं/1000 पुरुष
नोट: ये आंकड़े 2011 Census पर आधारित हैं. 2027 की जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन नई पूर्ण जनसंख्या गणना के आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं.
बांदा की साक्षरता दर और महिला-पुरुष अंतर
2011 के आंकड़ों के अनुसार बांदा की कुल साक्षरता दर 66.67 प्रतिशत थी. पुरुषों की साक्षरता दर 77.78 प्रतिशत, जबकि महिलाओं की साक्षरता दर 53.67 प्रतिशत रही. यानी पुरुष और महिला साक्षरता के बीच करीब 24.11 प्रतिशत अंक का अंतर था.
साक्षरता दर
कुल - 66.67%
पुरुष - 77.78%
महिला - 53.67%
पुरुष-महिला अंतर 24.11 प्रतिशत अंक
2011 में जिले में कुल 10,02,937 लोग साक्षर थे, जिनमें 6,30,626 पुरुष और 3,72,311 महिलाएं थीं.
बांदा में किस धर्म की कितनी आबादी?
2011 Census के मुताबिक बांदा में हिंदू आबादी 16,37,549, यानी करीब 91 प्रतिशत थी. मुस्लिम आबादी 1,57,612, यानी करीब 8.76 प्रतिशत थी.
इसके अलावा ईसाई, जैन, सिख और बौद्ध समुदायों की संख्या अपेक्षाकृत कम है. Census के धार्मिक आंकड़ों में कुछ लोगों ने अपना धर्म नहीं बताया था.
बांदा का सियासी समीकरण क्या है?
बांदा की राजनीति को समझने के लिए विधानसभा और लोकसभा दोनों के परिणामों को देखना जरूरी है. जिले में चार विधानसभा सीटें हैं तिंदवारी, बबेरू, नरैनी और बांदा. इनमें नरैनी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है.
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जिले की चार में से तीन सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि बबेरू सीट समाजवादी पार्टी के खाते में गई थी. यानी उस चुनाव में भाजपा का बांदा जिले में दबदबा रहा, लेकिन बबेरू ने विपक्ष के लिए राजनीतिक आधार बनाए रखा.
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 2022 में तिंदवारी में रामकेश निषाद को करीब 86.8 हजार वोट मिले और उन्होंने भाजपा के लिए सीट जीती.
बांदा लोकसभा सीट का समीकरण
बांदा लोकसभा क्षेत्र में कुल पांच विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं बबेरू, नरैनी, बांदा, चित्रकूट और मानिकपुर. इनमें पहले तीन बांदा जिले में और बाकी दो चित्रकूट जिले में आते हैं.
2024 के लोकसभा चुनाव में बांदा सीट पर समाजवादी पार्टी की कृष्णा देवी पटेल ने जीत दर्ज की. विधानसभा-वार आंकड़ों में सपा को बबेरू, नरैनी और चित्रकूट में मजबूत बढ़त मिली, जबकि बांदा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा आगे रही. मानिकपुर में मुकाबला बेहद करीबी रहा.
यही वजह है कि बांदा की राजनीति को केवल किसी एक दल का मजबूत गढ़ मानना आसान नहीं है. 2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा की मजबूत स्थिति और 2024 लोकसभा चुनाव में सपा की वापसी ने जिले के राजनीतिक समीकरण को दिलचस्प बना दिया है.
बांदा में किन मुद्दों पर रहती है नजर?
बुंदेलखंड का यह क्षेत्र लंबे समय से रोजगार, कृषि, सिंचाई, पेयजल, पलायन और विकास जैसे मुद्दों से जुड़ा रहा है. इसके साथ ही कालिंजर और अन्य ऐतिहासिक स्थलों के कारण पर्यटन की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण हैं.
जिले की अर्थव्यवस्था और स्थानीय राजनीति में खेती के साथ खनन और इससे जुड़े रोजगार का भी असर दिखाई देता है. जिला प्रशासन की वेबसाइट पर वर्तमान में नए खनन क्षेत्रों से संबंधित जिला सर्वेक्षण रिपोर्टों का भी उल्लेख है.
इतिहास मजबूत, सियासत में मुकाबला दिलचस्प
बांदा की पहचान सिर्फ कालिंजर और बुंदेलखंड की ऐतिहासिक विरासत तक सीमित नहीं है. यह जिला सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है. 2011 की जनगणना में करीब 18 लाख की आबादी, 66.67 प्रतिशत साक्षरता और हिंदू-मुस्लिम सहित विभिन्न समुदायों की मौजूदगी इसकी सामाजिक संरचना को दर्शाती है.
वहीं चुनावी तस्वीर बताती है कि भाजपा का विधानसभा स्तर पर मजबूत प्रदर्शन और 2024 में बांदा लोकसभा सीट पर सपा की जीत यहां की राजनीति में मुकाबले की स्थिति को दिखाती है. आने वाले चुनावों में रोजगार, विकास, कृषि, पानी और स्थानीय समस्याओं के साथ-साथ जातीय-सामाजिक समीकरण भी राजनीतिक परिणामों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हो सकते हैं.
बांदा जिले में कितनी विधानसभा सीटें हैं?
बांदा जिले की राजनीति को समझने के लिए यहां की चार विधानसभा सीटों को जानना जरूरी है. जिले में तिंदवारी, बबेरू, नरैनी और बांदा विधानसभा क्षेत्र आते हैं. इनमें नरैनी विधानसभा सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है. जिला निर्वाचन कार्यालय के मौजूदा रिकॉर्ड में इन सीटों के क्रमांक क्रमशः 232, 233, 234 और 235 हैं.
1. तिंदवारी विधानसभा सीट
तिंदवारी विधानसभा सीट का क्रमांक 232 है. यह बांदा जिले की चार विधानसभा सीटों में शामिल है, लेकिन लोकसभा स्तर पर यह बांदा लोकसभा क्षेत्र के बजाय हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. जिला प्रशासन की 2025 की अंतिम मतदान केंद्र सूची में भी तिंदवारी को 47-हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत दर्ज किया गया है.
वर्तमान उत्तर प्रदेश विधानसभा में इस सीट से रामकेश निषाद (BJP) विधायक हैं.
2. बबेरू विधानसभा सीट
बबेरू विधानसभा क्षेत्र का क्रमांक 233 है. यह सीट बांदा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. जिले के राजनीतिक समीकरण में बबेरू इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां मुख्य राजनीतिक मुकाबला भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच देखने को मिलता रहा है.
मौजूदा विधानसभा में इस सीट का प्रतिनिधित्व विशंभर सिंह यादव (समाजवादी पार्टी) कर रहे हैं. यानी बांदा जिले की चार विधानसभा सीटों में फिलहाल बबेरू वह सीट है, जहां विपक्षी समाजवादी पार्टी की मौजूदगी है.
3. नरैनी विधानसभा सीट
नरैनी विधानसभा सीट का क्रमांक 234 है और यह अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीट है. यह भी बांदा लोकसभा क्षेत्र में आती है. जिला निर्वाचन कार्यालय के रिकॉर्ड में इसे स्पष्ट रूप से 234-Naraini (SC) के रूप में दर्ज किया गया है.
मौजूदा विधायक ओममनी वर्मा (BJP) हैं. नरैनी सीट का महत्व इसलिए भी है क्योंकि आरक्षित सीट होने के कारण यहां दलों की रणनीति में अनुसूचित जाति के मतदाताओं की भूमिका अहम रहती है.
4. बांदा विधानसभा सीट
बांदा विधानसभा क्षेत्र का क्रमांक 235 है और यह जिले की सबसे प्रमुख शहरी विधानसभा सीटों में से एक है. यह सीट बांदा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. जिला प्रशासन के मौजूदा रिकॉर्ड के मुताबिक यहां से प्रकाश द्विवेदी (BJP) विधायक हैं.
जिला मुख्यालय इसी विधानसभा क्षेत्र में होने के कारण बांदा सीट का स्थानीय राजनीति में विशेष महत्व है. शहर से जुड़े विकास, रोजगार, सड़क, पेयजल, व्यापार और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दे यहां चुनावी चर्चा में प्रमुख रहते हैं.
डेटा के स्रोत: जनसंख्या, पुरुष-महिला आंकड़े, प्रशासनिक जानकारी: बांदा जिला प्रशासन और Census 2011
साक्षरता और Gender-wise Literacy: Census 2011 / District Census Handbook
धार्मिक जनसंख्या: Office of the Registrar General & Census Commissioner, Census 2011, C-01
विधानसभा क्षेत्र और चुनावी आंकड़े: Election Commission of India और जिला निर्वाचन कार्यालय, बांदा
बांदा का इतिहास: बांदा जिला प्रशासन की आधिकारिक History page
2024 लोकसभा चुनाव का विधानसभा-वार रुझान: Election Commission of India / 2024 चुनाव डेटा
'नीचे टॉर्च मारकर देखते थे... 27 बार मेरे कपड़े उतारे', इस एक्ट्रेस ने सुनाया अपने तिहाड़ जेल के दिनों का दर्दनाक किस्सा
Sandeepa Virk Recalls Jail Days: पंजाबी और कन्नड़ फिल्मों से अपनी पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस संदीपा विर्क (Sandeepa Virk) को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में पिछले साल गिरफ्तार किया गया. उन पर आरोप था कि उन्होंने एक महिला से फिल्मों में लीड रोल दिलाने के लिए 6 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की थी. जिसके लिए ईडी ने उनके खिलाफ जांच की और उन्हें दिल्ली की तिहाड़ जेल में भेज दिया था. उन्होंने हाल ही में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बिताए अपने दर्दनाक दिनों को याद किया. उन्होंने बताया कि कैसे वहां पर औरतों के सारे कपड़े उतारकर चेकिंग की जाती थी और अपमान किया जाता था. इतना ही नहीं उन्होंने यह भी बताया कि चेकिंग के दौरान लड़कियों के नीचे टॉर्चर मारकर देखते थे और उनके भी चेकिंग के लिए 27 बार सारे कपड़े उतारे गए. आइए जानते हैं कि उन्होंने अपने जेल के दिनों के इस दर्दनाक किस्से के बारे में क्या-क्या बताया.
जेल में खाने से लेकर सोने तक हर चीज थी खराब
संदीपा विर्क ने हाल ही में TDM Manthan के साथ पॉडकास्ट किया. इस दौरान उन्होंने अपने जेल के दिनों के भयावह एक्सपीरियंस को शेयर किया गया. बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि तिहाड़ जेल में सबसे खराब और डरावना एक्सपीरियंस क्या था. इस पर उन्होंने बताया कि वहां की हर चीज, खाने से लेकर सोने तक सब खराब थी. वहां कैंटीन की लाइन में लड़ाई होती थी और चेकिंग के दौरान पूरा नंगा कर दिया जाता था. उन्होंने कहा, 'जेल में खाने की चीज, टॉयलेट, कैंटीन, मेडिकल डिपार्टमेंट से लेकर सोने तक सब कुछ खराब था. अगर आप वहां पर कैंटीन की लाइन में भी लग रहे हो तो वहां पर भी लड़ाई-झगड़ा होता था.'
इसके आगे जब उसने पूछा गया कि मूवी से कितना अलग है ये जेल. तो इस पर उन्होंने कहा, 'असली की जेल बिल्कुल मूवी की तरह होती है, जिस तरह फिल्मों की जेल में कैदी के कपड़े उतवाए जाते हैं. वैसे ही असली की जेल कपड़े उतरवाए जाते हैं. जैसे मूवी में दिखाते हैं कि चल कपड़े उतार, वैसे ही असल की जेल में बोला जाता था.'
'नीचे टॉर्च मारकर देखते थे...
इसके आगे उन्होंने जेल में कैसे चेकिंग की जाती थी, उस बारे में बताया. उन्होंने बताया कि जेल में चेकिंग के दौरान अपमान किया जाता था और नीचे (प्राइवेट पार्ट्स) टॉर्च मारकर देखते थे. उन्होंने कहा, 'जेल में चेकिंग के दौरान अपमान करते हुए नंगा कर देते हैं. कई लड़कियों के प्राइवेट पर टॉर्च मारकर देखते थे. उन लोगों को इनती भी शर्म नहीं होती है कि वो सर्दी में भी कैदियों के सारे कपड़े उतरवा देते हैं. वहां पर कोई क्या सोना-चांदी लेकर जाएगा. अगर किसी को कुछ ले जाना ही होगा तो वो तो वैसे भी ले ही जाएगा.'
संदीपा से यह पूछा गया कि आपने इमोशनली इस तरह की चेकिंग को कैसे झेला तो इस पर उन्होंने कहा कि वहां पर औरत ही होती हैं जो नंगा करके चेकिंग करती थी. लेकिन मैं उनके साथ कंफर्टेबल नहीं थी. उन्होंने कहा, 'जेल में औरते ही कपड़े उतरवा कर चेकिंग करती थी. मैं अपनी बहन और मां के सामने कंफर्टेबल हो सकती हूं, जिस तरह वो लोग देखते हैं, मैं 100 औरतें के सामने कंफर्टेबल नहीं हो सकती हूं.'
27 बार उतारे गए सारे कपड़े
इसके आगे जब एक्ट्रेस से पूछा गया कि जेल में इस तरह चेकिंग कितनी बार और कब-कब होती थी. इस पर उन्होंने बताया कि जब जेल में कैदी एंट्री करता है और बाहर जाता है. उस समय चेकिंग होती थी. इसके अलावा जब पुलिस कोर्ट ले जाती है तो सब में चढ़ने से पहेल भी कपड़े उतारकर चेकिंग होती थी. उन्होंने कहा, 'एक दिन में 3 बार सारे कपड़े उतारकर चेकिंग की जाती थी, मेरे जेल के दिनों में 27 बार चेकिंग के दौरान सारे कपड़े उतारे गए' उन्होंने जेल के दिनों के दर्दनाक किस्से को याद कर कहा कि जो लोग सोचते हैं कि क्या हो गया लड़की तो देख रही है. क्या हो गया तुमने कुछ गलती की होगी, जब भी तो जेल जाती हो. इन बातों को सुनकर मुझे गुस्सा आता है.'
ये भी पढ़ें: निक्की तंबोली करने जा रहीं मुस्लिम बॉयफ्रेंड अरबाज से शादी? बताया बच्चे किस धर्म को करेंगे फॉलो
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation






