दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल और चेन्नई में खेले जा रहे फाइनल मुकाबले के लिए दक्षिण क्षेत्र की टीम में जगह नहीं मिलने के बाद कर्नाटक के अनुभवी बल्लेबाज करुण नायर वापस बेंगलुरु लौट आए हैं। इसके बजाय वह चिन्नास्वामी स्टेडियम में केएससीए सचिव एकादश की ओर से थिम्मापैया ट्रॉफी में खेल रहे हैं। यह लाल गेंद से खेली जाने वाली प्रतियोगिता आमतौर पर कर्नाटक की रणजी ट्रॉफी की तैयारियों की शुरुआत मानी जाती है।
करुण नायर शनिवार को चेपॉक में दलीप ट्रॉफी फाइनल से पहले दक्षिण क्षेत्र के अभ्यास सत्र का हिस्सा थे। हालांकि, लगातार दूसरे मुकाबले के लिए टीम में चयन नहीं होने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने रविवार को टीम का साथ छोड़ दिया। इसके अगले ही दिन सोमवार को नायर ने केएससीए सचिव एकादश की ओर से छत्तीसगढ़ के खिलाफ शानदार शतक जड़ दिया।
दलीप ट्रॉफी के दूसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद दक्षिण क्षेत्र के मुख्य कोच विक्रम वर्मा ने कहा कि नायर निजी कारणों से टीम से अलग हुए हैं। हालांकि, नायर की सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट से अलग संकेत मिले। इसके बाद दक्षिण क्षेत्र की टीम में चयन को लेकर सवाल उठने लगे।
विक्रम वर्मा ने कहा कि नायर ने घर जाने के लिए अनुमति ली थी और उन्हें निजी कारणों के चलते वापस जाना पड़ा। उन्होंने यह भी बताया कि टीम संयोजन को ध्यान में रखते हुए नायर को अंतिम एकादश में शामिल नहीं किया गया। उनके मुताबिक, दक्षिण क्षेत्र की टीम के सामने दोनों मुकाबलों में बाएं हाथ के स्पिनरों की चुनौती थी, इसलिए मध्यक्रम में बाएं हाथ के बल्लेबाज को उतारने की रणनीति बनाई गई।
वर्मा ने बताया कि उत्तर क्षेत्र के खिलाफ पहले मुकाबले में युवा कोडिमेला हिमतेजा को मौका दिया गया था। इसके बाद देवदत्त पडिक्कल की वापसी हुई और टीम संयोजन को देखते हुए उन्हें फिर से अंतिम एकादश में जगह दी गई। ऐसे में नायर को बाहर रखना टीम प्रबंधन के लिए आसान फैसला नहीं था, लेकिन टीम के संतुलन को प्राथमिकता दी गई।
दक्षिण क्षेत्र की फाइनल टीम में विशेषज्ञ सलामी बल्लेबाज के तौर पर केवल एन जगदीशन हैं। मुकाबले से पहले कप्तान तिलक वर्मा ने चयन का बचाव करते हुए कहा था कि उपकप्तान रिकी भुई भी पारी की शुरुआत करने की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। भुई ने बेंगलुरु में खेले गए सेमीफाइनल में भी पारी की शुरुआत की थी, जहां उन्होंने 5 और 42 रन बनाए थे।
हालांकि, प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 90 मुकाबले खेल चुके रिकी भुई ने अब तक केवल तीन मैचों में सलामी बल्लेबाज की भूमिका निभाई है। तिलक वर्मा के अनुसार भुई पहले भी पारी की शुरुआत कर चुके हैं और वरिष्ठ खिलाड़ी होने के कारण जरूरत के मुताबिक अपनी भूमिका बदल सकते हैं। इसी वजह से टीम ने उन्हें जगदीशन के साथ पारी की शुरुआत कराने का फैसला किया।
गौरतलब है कि दलीप ट्रॉफी की टीमों का चयन राष्ट्रीय चयनकर्ताओं द्वारा नहीं किया जाता। प्रत्येक क्षेत्र की टीम के लिए संबंधित राज्य क्रिकेट संघों के चयनकर्ता खिलाड़ियों का चयन करते हैं। ऐसे में करुण नायर के लगातार दो मुकाबलों से बाहर रहने और उनके तुरंत बाद दूसरी प्रतियोगिता में शतक लगाने के घटनाक्रम ने दक्षिण क्षेत्र के चयन और टीम संयोजन पर चर्चा तेज कर दी है। नायर फिलहाल मैदान पर अपने बल्ले से जवाब देते नजर आ रहे हैं और उनके प्रदर्शन पर कर्नाटक की आगामी रणजी तैयारियों के दौरान भी नजरें टिकी हैं।
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चेन्नई में खेले जा रहे दलीप ट्रॉफी के फाइनल में पूर्व क्षेत्र ने दक्षिण क्षेत्र के खिलाफ अपनी पकड़ बेहद मजबूत कर ली है। टीम के कप्तान ईशान किशन ने ऐसी शानदार पारी खेली, जिसने पूरे मुकाबले का रुख ही बदल दिया। किशन ने 270 रन की विशाल पारी खेलकर दक्षिण क्षेत्र के गेंदबाजों को पूरी तरह परेशान कर दिया। उनके साथ कुमार कुशाग्र ने भी 101 रन की शतकीय पारी खेली, जिसकी मदद से पूर्व क्षेत्र ने दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया।
मौजूदा स्थिति को देखते हुए पूर्व क्षेत्र ने खिताब पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। बता दें कि चेपॉक मैदान पर प्रथम श्रेणी क्रिकेट में यह केवल तीसरा मौका है, जब किसी टीम ने 700 से अधिक रन का आंकड़ा पार किया है। पूर्व क्षेत्र ने दूसरे दिन का खेल 385 रन पर चार विकेट से आगे शुरू किया था और दिन की शुरुआत से ही रन बनाने का सिलसिला जारी रखा।
दक्षिण क्षेत्र ने विकेट निकालने की उम्मीद में केवल एक ओवर के बाद नई गेंद ले ली, लेकिन मोहम्मद सिराज और एमडी निधीश दोनों ही शुरुआती सफलता दिलाने में नाकाम रहे। ईशान किशन ने सिराज के खिलाफ लगातार दो चौके लगाकर अपने इरादे साफ कर दिए। इसके बाद उन्होंने निधीश के ओवर में भी गेंद को सीमा रेखा के पार पहुंचाया।
कुछ ही देर में कुमार कुशाग्र भी इस रन बरसात में शामिल हो गए। दक्षिण क्षेत्र ने दोनों स्पिन गेंदबाजों त्रिपुराना विजय और श्रेयस गोपाल को आक्रमण पर लगाया, लेकिन इससे भी पूर्व क्षेत्र के बल्लेबाजों पर कोई खास असर नहीं पड़ा। कुशाग्र ने श्रेयस गोपाल के खिलाफ दो चौके लगाकर अपने 90 रन पूरे किए और इसके बाद अपना छठा प्रथम श्रेणी शतक पूरा किया। हालांकि भोजनावकाश से ठीक पहले दक्षिण क्षेत्र को सफलता मिली और कुशाग्र 101 रन बनाकर फाइन लेग पर कैच दे बैठे।
दूसरे छोर पर ईशान किशन का आक्रमण लगातार जारी रहा। उन्होंने श्रेयस गोपाल के एक ही ओवर में तीन चौके लगाए। दक्षिण क्षेत्र ने किशन की लय तोड़ने के लिए देवदत्त पडिक्कल और शेख रशीद जैसे अतिरिक्त गेंदबाजों को भी आजमाया, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। किशन ने 270 गेंदों में अपना दोहरा शतक पूरा कर लिया।
दोहरा शतक पूरा करने के बाद किशन और तेजी से रन बनाने लगे। उन्होंने देखते ही देखते 250 रन का आंकड़ा भी पार कर लिया। दक्षिण क्षेत्र को उम्मीद थी कि अब पूर्व क्षेत्र पारी घोषित कर देगा, लेकिन कप्तान किशन रन बनाने में कोई जल्दबाजी नहीं दिखा रहे थे। टीम के 600 रन पार करने के बाद थकान के कारण किशन को कुछ समय के लिए मैदान से बाहर जाना पड़ा।
इसके बावजूद पूर्व क्षेत्र की रन गति नहीं रुकी। टीम के 700 रन के करीब पहुंचने पर मोहम्मद शमी 28 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद किशन दोबारा मैदान पर लौटे और तिहरा शतक पूरा करने की कोशिश में जुट गए। हालांकि दूसरे छोर से लगातार विकेट गिरने के कारण उनकी यह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। आखिरकार किशन 270 रन पर लॉन्ग ऑन के पास कैच दे बैठे और तिहरे शतक से 30 रन दूर रह गए।
गौरतलब है कि ईशान किशन की इस पारी ने न केवल फाइनल में पूर्व क्षेत्र को मजबूत स्थिति में पहुंचाया है, बल्कि दक्षिण क्षेत्र के थके हुए गेंदबाजों के सामने 708 रन का विशाल लक्ष्य भी खड़ा कर दिया है। दूसरे दिन के अंत में पूर्व क्षेत्र 708 रन पर ऑलआउट हो चुका है और अब दक्षिण क्षेत्र के सामने मुकाबले में वापसी करने की बड़ी चुनौती है। मौजूदा स्थिति में पूर्व क्षेत्र खिताब के बेहद करीब नजर आ रहा है और तीसरे दिन दक्षिण क्षेत्र की बल्लेबाजी मुकाबले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाने वाली है।
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