दशकों से पाकिस्तान की विदेश नीति और उसकी सेना का एक ही रटा रटाया जुमला था। वो यह था कि पाकिस्तान में जो भी पूरा होता है उसके पीछे विदेशी ताकतों का हाथ है। कभी भारत पर उंगली उठाई गई तो कभी अफगानिस्तान को जिम्मेदार ठहराया गया। लेकिन अब पाकिस्तान के सबसे ताकतवर राजनीतिक घराने की वारिस और पाकिस्तान के पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने एक ऐसा बम फोड़ा है जिसने पाकिस्तान के पूरे नैरेटिव को तहस-नहस कर दिया। लाहौर के मन से मरियम नवाज ने कहा कि उनके पंजाब को पड़ोसी देशों से उतना खतरा नहीं है जितना पाकिस्तान के ही दूसरे प्रांतों से है। यह सिर्फ एक बयान नहीं यह एक देश के रूप में पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा की विफलता का सबसे बड़ा आधिकारिक कबूलनामा है।
मरियम नवाज को अपने ही मुल्क के भाइयों से इतना डर क्यों लग रहा है?
दरअसल लाहौर में एआई और टेक्नोलॉजी पर आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने सुरक्षा के मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि यह बड़े दुख की बात है कि आज पंजाब को जो खतरा है वह मेरे पड़ोसी देशों से कम और मेरे पड़ोसी प्रांतों से ज्यादा है। आगे उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे आतंकवाद पड़ोसी सूबों की सीमाओं से पंजाब में दाखिल हो रहा है। गौर कीजिए मरियम नवाज ने यहां किसी तीसरी ताकत का नाम नहीं लिया। उन्होंने साफ-साफ पाकिस्तान के ही अन्य सुबहों यानी कि खैबर पख्तून और बलूचिस्तान की ओर इशारा किया। यह पहली बार है जब पाकिस्तान के किसी शीर्ष नेता ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया कि आतंकवाद की नर्सरी पाकिस्तान के भीतर है ना कि सरहद के उस पार। इस बयान की गंभीरता को समझने के लिए थोड़ा पीछे चलते हैं। जब भी बलूचिस्तान में धमाका होता है या कराची में हमला होता है तो पाकिस्तान की सेना का आईएसपीआर विभाग तुरंत एक प्रेस रिलीज़ जारी करता है जिसमें भारत की जासूसी एजेंसी रॉ का नाम लिया जाता है।
पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी यही झूठ बोला कि भारत उनके देश में अस्थिरता फैला रहा है। लेकिन अब पाकिस्तान मुंह दिखाने लायक नहीं रहा क्योंकि मरियम नवाज ने एक ही झटके में इस पूरी कहानी को पलट दिया। उन्होंने पाकिस्तानी सेना के नैरेटिव को पलट दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि समस्या घर के अंदर है। जब मुख्यमंत्री खुद कह रही हैं कि खतरा पड़ोसी प्रांतों से है तो इसका मतलब है कि पाकिस्तान का विक्टिम कार्ड अब एक्सपायर हो चुका है।
मरियम ने आखिर ऐसा क्यों कहा?
इसके पीछे गहरी राजनीति और सुरक्षा चुनौतियां हैं। खैबर पख्तून में इमरान खान की पार्टी पीटीआई की सरकार है। मरियम का इशारा यह था कि वहां की सरकार आतंकियों को रोकने में नाकाम है या उन्हें शह दे रही है। बलूचिस्तान और केपीके में टीटीपी और बलूच लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए जैसे संगठन सक्रिय हैं। मरियम का डर यह है कि इन प्रांतों से आतंकवादी पंजाब के शांत इलाके में घुस रहे हैं। यह बयान दिखाता है कि पाकिस्तान के प्रांतों के बीच अविश्वास की खाई कितनी गहरी हो चुकी है। पंजाब जो पाकिस्तान का सबसे अमीर और राजनीतिक रूप से प्रभावी प्रांत है, अब अपने ही देश के गरीब और अशांत प्रांतों को दुश्मन की तरह देखने लगा है। मरियम नवाज ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि उन्होंने अब कैमरों को बुलेट प्रूफ बना दिया है। जरा सोचिए जिस देश में कैमरों को भी बुलेट प्रूफ करना पड़े वहां सुरक्षा के क्या हालात होंगे। उन्होंने थर्मल कैमरे और ड्रोन तैनात करने की बात कही ताकि चेक पॉइंट्स पर होने वाले हमले को रोका जा सके। उन्होंने यह भी मान लिया कि पहले चेक पॉइंट पर होने वाले हमलों में 5 से 10 पाकिस्तानी सेना के जवान या पुलिसकर्मी मारे जाते थे। हालांकि उन्होंने दावा किया कि अब नुकसान कम है लेकिन असलियत यह है कि पाकिस्तान का पंजाब अब एक किले में तब्दील हो चुका है जहां उसे अपनों से ही डर लग रहा है।
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सिरखेड़ा गांव की करीब 700 लोगों की आबादी लंबे समय से इसी रास्ते से आने-जाने को मजबूर है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के समय सड़क की हालत और ज्यादा खराब हो जाती है। जगह-जगह गड्ढे और कीचड़ के कारण दोपहिया वाहन चलाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में भारी वाहनों की आवाजाही ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है।
2 किलोमीटर का रास्ता बना हादसों का खतरा
चंल्दू पुलिया और सिरखेड़ा के बीच का यह कच्चा रास्ता कई साल से खराब हालत में है। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ साल पहले इसी रास्ते की खराब हालत के कारण एक नर्स की जान भी जा चुकी है। इसके बाद भी सड़क को पक्का करने की दिशा में कोई बड़ा काम नहीं हुआ। अब ट्रक पलटने की घटना के बाद एक बार फिर सड़क की हालत को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खराब रास्ते के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
फैक्ट्री के भारी वाहनों से बढ़ी परेशानी
ग्रामीणों के मुताबिक, चंल्दू और सिरखेड़ा के बीच स्थित फैक्ट्री के कारण इस रास्ते पर रोजाना भारी वाहनों की आवाजाही होती है। करीब 2 किलोमीटर का संकरा कच्चा रास्ता इन वाहनों का दबाव नहीं झेल पा रहा है। कई जगह सड़क धंस चुकी है और गड्ढे लगातार बढ़ते जा रहे हैं। भारी ट्रक और अन्य वाहन यहां फंसने के साथ-साथ कई बार पलटने के खतरे में रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क पक्की होती तो लोगों को काफी राहत मिल सकती थी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से की पक्की सड़क की मांग
ट्रक पलटने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन और जिम्मेदार विभागों से जल्द कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि करीब 700 लोगों की आवाजाही के लिए इस सड़क का ठीक होना जरूरी है। ग्रामीण चाहते हैं कि चंल्दू पुलिया से सिरखेड़ा तक के 2 किलोमीटर रास्ते को जल्द पक्का किया जाए और भारी वाहनों की आवाजाही को भी सुरक्षित बनाया जाए। ग्रामीणों का सवाल है कि सड़क की हालत कब सुधरेगी और किसी बड़े हादसे से पहले जिम्मेदार विभाग कब जागेगा। अब लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।
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