नेपाल-तिब्बत में आई जानलेवा बाढ़ और सिंगापुर एयरलाइंस-एयर इंडिया की पार्टनरशिप के बाद ऑनलाइन सामने आई नस्लभेदी टिप्पणियों पर सिंगापुर के शीर्ष नेतृत्व, जिसमें प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग भी शामिल हैं, ने कड़े बयान जारी किए हैं। मीडिया से बात करते हुए सिंगापुर के गृह मंत्री के. षणमुगम ने कहा ऐसी खबरें हैं कि एयर इंडिया, सिंगापुर एयरलाइंस जैसे शेयरहोल्डर्स से नई इक्विटी लेगी। इस बात ने ऑनलाइन भारत-विरोधी और नस्लवादी टिप्पणियों को हवा दी है। उदाहरण के लिए, सांप, करी, काले जादू और पराठे जैसी बातें कही जा रही हैं। इसके अलावा, मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि विदेशों से चलाए जा रहे सोशल मीडिया अकाउंट सिंगापुर में भारतीयों के ख़िलाफ़ नस्लवाद को बढ़ावा दे रहे हैं।
शानमुगम ने कहा कि यह देखा गया है कि हाल के दिनों में नस्लवादी टिप्पणियाँ बढ़ी हैं, खासकर सिंगापुर में रहने वाले भारतीयों के मामले में। इनमें से कुछ टिप्पणियाँ विदेशों से शुरू हुईं और वहीं से उन्हें बढ़ावा दिया गया। उन्होंने आगे कहा कि हम एक बहुत छोटा देश हैं जहाँ कई नस्लों और समुदायों के लोग रहते हैं। अगर हम नस्ल या धर्म के आधार पर बँट गए, तो हम उस एकता को खो देंगे जिसने सिंगापुर को मज़बूत बनाया है। इससे मनमुटाव और शक की भावना पैदा होगी।
ऑनलाइन नस्लभेदी टिप्पणियों की पुलिस जांच
यह बात तब सामने आई जब शानमुगम ने कहा कि अधिकारी नेपाल-तिब्बत आपदा और एयर इंडिया में सिंगापुर एयरलाइंस (SIA) के निवेश के बारे में शर्मनाक नस्लभेदी ऑनलाइन टिप्पणियों की जांच कर रहे हैं। नियर मंत्री ने इन टिप्पणियों की निंदा करते हुए इन्हें "शर्मनाक, घटिया और पूरी तरह से अस्वीकार्य" बताया और कहा कि मीडिया आउटलेट्स को कई टिप्पणियां हटानी पड़ीं। चैनल रशिया ने शानमुगम के हवाले से कहा, "मीडिया ने मुझे बताया कि उन्हें कई टिप्पणियां हटानी पड़ीं क्योंकि वे बहुत घटिया थीं। मुझे नहीं पता कि सभी टिप्पणियां सिंगापुर के लोगों ने ही की हैं या नहीं। लेकिन मैं यह जरूर कहूंगा - ये टिप्पणियां शर्मनाक, घटिया और पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं। उन्होंने आगे कहा मैंने पुलिस से इन टिप्पणियों की जांच करने को कहा है।
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हिंद महासागर में भारत ने एक ऐसी रणनीतिक चाल चली है जिसने पड़ोस में पैर पसार रहे चीन के होश उड़ा दिए। श्रीलंका का वो इलाका जो कभी लिट्टे का अभेद किला हुआ करता था और जहां दशकों तक गृह युद्ध की आग दहकी अब वहां भारत विकास का नया अध्याय लिखने जा रहा है। खबर आ रही है कि भारत और श्रीलंका एक बहुत बड़े और रणनीतिक समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच गए हैं। इस डील के तहत श्रीलंका के उत्तरी तट पर स्थित कांकेन संतराई पोर्ट को अब भारत विकसित करेगा। 61 मिलियन का यह प्रोजेक्ट सिर्फ व्यापार के लिए नहीं बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भारत के लिए एक मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। आखिर क्यों भारत के लिए यह छोटा सा बंदरगाह इतना महत्वपूर्ण है और कैसे इस एक डील ने श्रीलंका में भारत की स्थिति को अभूतपूर्व रूप से मजबूत कर दिया है। दरअसल श्रीलंका के उत्तरी तट पर जाफना के ठीक पास स्थित काके संथुराई बंदरगाह है। शनिवार को कोलंबो में एक हाई लेवल मीटिंग होती है जिसमें श्रीलंका के बंदरगाह मंत्री अनुरा और भारत के डिप्टी हाई कमिश्नर मैत्रेय कुलकर्णी शामिल हुए।
इस बैठक में उन सभी अड़चनों को दूर कर लिया गया जो लंबे समय से इस प्रोजेक्ट में बाधा बन रही थी। भारत इस बंदरगाह के विकास के लिए 61 मिलियन की फंडिंग कर रहा है। प्रोजेक्ट की निगरानी के लिए एक जॉइंट मॉनिटरिंग कमेटी और एक टेक्निकल कमेटी बनाने पर भी सहमति बन गई। यानी अब कागजी कारवाई लगभग खत्म हो चुकी है और जमीन पर काम शुरू होने वाला है। बता दें कांके संतुराई बंदरगाह का इतिहास बहुत गहरा है। यह कभी भारत और श्रीलंका के बीच यात्रियों और माल ढुलाई का मुख्य केंद्र हुआ करता था। लेकिन जब श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों यानी कि लिट्टे और श्रीलंकाई सेना के बीच ग्रीष शुरू हुआ तो यह इलाका पूरी तरह से ठप हो गया। दशकों तक चले संघर्ष के दौरान इस बंदरगाह का इस्तेमाल बंद रहा। लेकिन आज जब श्रीलंका अपने सबसे बुरे आर्थिक संकट से उभरने की कोशिश कर रहा है तो भारत ने फिर से मदद का हाथ बढ़ाया है। लिट्टे के दौर में जो इलाका अशांत था वहां भारत का पहुंचना ना केवल विकास का प्रतीक है बल्कि इस क्षेत्र में शांति और भारत के बढ़ते प्रभाव को भी दिखाता है।
भारत इस पर इतना पैसा क्यों लगा रहा है?
बता दें यह पोर्ट भारतीय तट के बेहद करीब है। इससे भारत के दक्षिणी राज्यों और श्रीलंका के बीच आवाजाही बेहद आसान हो जाएगी। श्रीलंका में चीन ने हमंबनटोटा जैसे पोर्ट पर कब्जा कर रखा है। उत्तरी श्रीलंका जाफना में भारत की मौजूदगी चीन की विस्तारवादी नीति पर लगाम लगाएगी। यह पोर्ट भविष्य में दोनों देशों के बीच एक बड़े कमर्शियल हब के रूप में उभरेगा। जिससे जाफना और आसपास के इलाकों की अर्थव्यवस्था सुधरेंगी।
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