EXPLAINER: इंटरनेशनल ही नहीं घरेलू क्रिकेटर्स पर भी पैसों की बारिश करता है बीसीसीआई, जानिए कितनी मिलती है सैलरी?
BCCI Domestic Players Salary Structure: दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई अपने खिलाड़ियों को मोटी सैलरी देता है. बोर्ड न केवल अपने इंटरनेशनल प्लेयर्स को बड़ी सैलरी देता है बल्कि अपने डोमेस्टिक प्लेयर्स पर भी काफी खर्च करता है और उन्हें भी सैलरी में मोटी रकम देता है. ये बात तो पूरी दुनिया जानती है कि भारत में टैलेंट की खदान है, जिसमें से टैलेंटेड प्लेयर्स को तलाश करके बोर्ड उन्हें चैंपियन प्लेयर्स में तब्दील करता है. अक्सर डोमेस्टिक में अच्छा करके खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में जगह बनाते हैं. तो आइए इस आर्टिकल में जान लेते हैं कि बीसीसीआई डोमेस्टिक प्लेयर्स की सैलरी का क्या स्ट्रक्चर है.
रणजी ट्रॉफी में कितनी फीस मिलती है?
- रणजी ट्रॉफी में BCCI ने खिलाड़ियों के लिए अनुभव आधारित स्लैब बनाया हुआ है. 40 या उससे ज्यादा रणजी मैच खेलने वाले खिलाड़ी को प्लेइंग XI में रहने पर हर दिन 60 हजार रुपये मिलते हैं.
- 21 से 40 मैच खेलने वाले खिलाड़ी को 50 हजार रुपये प्रतिदिन और 20 या उससे कम मैच खेलने वाले खिलाड़ी को 40 हजार रुपये प्रतिदिन मिलते हैं. इसका मतलब है कि पांच दिन के पूरे रणजी मैच में 40 से ज्यादा मैच खेलने वाला खिलाड़ी ₹3 लाख तक मैच फीस कमा सकता है.
- वहीं 0-20 मैच वाला खिलाड़ी पूरे पांच दिन खेलने पर करीब 2 लाख रुपये की कमाई कर सकता है.
| रणजी अनुभव | प्लेइंग XI | रिजर्व खिलाड़ी |
|---|---|---|
| 0-20 मैच | ₹40,000/दिन | ₹20,000/दिन |
| 21-40 मैच | ₹50,000/दिन | ₹25,000/दिन |
| 40+ मैच | ₹60,000/दिन | ₹30,000/दिन |
रिजर्व खिलाड़ियों को भी मिलती है रकम
भारतीय क्रिकेट बोर्ड का सिस्टम सिर्फ प्लेइंग XI तक सीमित नहीं है. जो खिलाड़ी अंतिम ग्यारह का हिस्सा हैं, उन्हें तो पैसे मिलते ही हैं, वहीं जो खिलाड़ी स्क्वाड में हैं लेकिन अंतिम XI में जगह नहीं बना पाते, उन्हें भी मैच फीस मिलती है. हालांकि उनकी फीस प्लेइंग XI के मुकाबले कम होती है. यही वजह है कि अनुभव और टीम में भूमिका दोनों कमाई पर असर डालते हैं.
T20 और वनडे घरेलू क्रिकेट में क्या मिलता है?
रणजी के अलावा विजय हजारे ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट भी घरेलू क्रिकेटरों की कमाई का बड़ा हिस्सा हैं. 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में प्लेइंग XI के खिलाड़ी को ₹25,000 प्रति मैच और रिजर्व खिलाड़ी को ₹12,500 मिलते हैं. अलग-अलग प्रतियोगिताओं में फीस की गणना का तरीका और स्लैब अलग हो सकता है.
BCCI फीस कैसे तय करता है?
BCCI ने घरेलू खिलाड़ियों की फीस बढ़ाने का फैसला मुख्य रूप से घरेलू क्रिकेट को आर्थिक रूप से ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए किया. 2021 में BCCI ने वरिष्ठ पुरुष घरेलू क्रिकेटरों की फीस को अनुभव के आधार पर ₹40,000, ₹50,000 और ₹60,000 प्रतिदिन के तीन स्तरों में बांटा था. बोर्ड ने साफ तौर पर घरेलू क्रिकेट को भारतीय क्रिकेट की “रीढ़” बताते हुए फीस बढ़ाने का फैसला किया था.
यानी जितना ज्यादा अनुभव और मैच खेलने का रिकॉर्ड, उतनी ज्यादा मैच फीस. इसके अलावा खिलाड़ी प्लेइंग XI में है या रिजर्व, यह भी भुगतान तय करने में महत्वपूर्ण है.
एक सीजन में कितनी कमाई करता है खिलाड़ी?
अब अगर आप इस बात पर गौर करेंगे कि वह एक साल में कितने रुपयों की कमाई करते हैं, ये इस बात पर निर्भर करता है कि खिलाड़ी कितने मैच खेलता है और उसकी टीम कितनी दूर तक पहुंचती है. 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, कोई खिलाड़ी अगर पूरे रणजी लीग चरण में खेलता है तो उसकी मैच फीस करीब 11.2 लाख तक पहुंच सकती है. रणजी के साथ विजय हजारे और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में भी लगातार खेलने पर सालाना कमाई और बढ़ जाती है.
इंटरनेशनल प्लेयर्स को बीसीसीआई कितनी सैलरी देता है?
इस बात में कोई शक नहीं है कि बीसीसीआई उन बोर्ड्स में शुमार है, जो अपने प्लेयर्स को सबसे अधिक सैलरी देता है. बीसीसीआई प्लेयर्स को 4 ग्रेड में बांटकर सैलरी देता है. यहां देखिए किस कैटगिरी के प्लेयर को बीसीसीआई कितनी सैलरी देता है.
Grade A+ (7 करोड़ सालाना): बीसीसीआई सबसे अधिक सैलरी अपने A+ कैटगिरी वाले खिलाड़ियों को देता है. इसमें भारत के सिर्फ 3 खिलाड़ी ही शामिल हैं. रोहित शर्मा, विराट कोहली और जसप्रीत बुमराह.
Grade A (₹5 करोड़ सालाना): इसमें तीनों फॉर्मेट खेलने वाले और शीर्ष रैंकिंग वाले खिलाड़ी जैसे शुभमन गिल, जसप्रीत बुमराह और रवींद्र जडेजा शामिल हैं.
Grade B (₹3 करोड़ सालाना): फॉर्मेट से संन्यास या कम खेलने वाले सीनियर खिलाड़ी जैसे रोहित शर्मा, विराट कोहली, केएल राहुल, हार्दिक पांड्या और ऋषभ पंत इस ग्रेड का हिस्सा हैं.
Grade C (₹1 करोड़ सालाना): इसमें उभरते हुए और सीमित ओवरों के खिलाड़ी जैसे रिंकू सिंह, संजू सैमसन, अक्षर पटेल और अभिषेक शर्मा शामिल हैं.
महिला क्रिकेटर्स को भी 3 कैटगिरी में बांटा
महिला क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए भी बीसीसीआई हर संभव प्रयास करता है. बोर्ड घरेलू स्तर पर खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए अलग-अलग टूर्नामेंट कराता है. तो वहीं इंटरनेशनल वुमेन्स प्लेयर्स को भी मोटी सैलरी देता है, जो 3 ग्रेड में बंटी हुई है.
Grade A: 50 लाख सालाना (हरमनप्रीत कौर, स्मृति मंधाना जैसी खिलाड़ी).
Grade B: 30 लाख सालाना.
Grade C: 10 लाख सालाना
इंटरनेशनल प्लेयर्स को मिलती है मैच फीस
बीसीसीआई अपने इंटरनेशनल प्लेयर्स को सैलरी में करोड़ों रुपये देता है. इतना ही नहीं सैलरी के साथ-साथ मैच फीस के रूप में भी मोटी रकम देता है. Test Match के लिए खिलाड़ी को लगभग 15 लाख रुपये प्रति मैच मिलते हैं. वनडे इंटरनेशनल के लिए लगभग 6 लाख रुपये प्रति मैच और टी20 इंटरनेशनलके लिए लगभग 3 लाख रुपये प्रति मैच मिलते हैं.
रिटायरमेंट के बाद पेंशन भी देता है BCCI
बीसीसीआई ने साल 2022 में अपने पेंशन प्लान में संशोधन किया था और पूर्व खिलाड़ियों और अंपायरों को मिलने वाली पेंशन में बढ़ोत्तरी की थी. या यूं कहें, रकम को दोगुना कर दिया था. उदाहरण के लिए जिन खिलाड़ियों को पहले मंथली 15 हजार रुपये पेंशन मिल रही थी, तो उसे अब 30 हजार मिल रही है. जिसे पहले 30 हजार मिल रही थी, उसे अब 52 हजार 500 रुपये मंथली पेंशन मिल रही है.
ये भी पढ़ें: क्रिकेट फैंस की लगेगी लॉटरी! भारत-पाकिस्तान के बीच होगी सीरीज, ICC तैयार कर रहा स्पेशल प्लान
पंजाब में सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों पर बढ़ा भरोसा, एक साल में दाखिले 164 फीसदी बढ़े
पंजाब में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के बीच सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में उपचार के लिए पहुंचने वाले लोगों की संख्या में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है. सरकार के अनुसार, यह बढ़ोतरी राज्य के नशा मुक्ति और रिहैबिलिटेशन नेटवर्क के प्रति लोगों के बढ़ते भरोसे का संकेत है.
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में 9,577 लोगों ने दाखिला लिया था, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 25,290 हो गई. यानी एक साल में दाखिलों में 164 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई. वर्ष 2026 में भी यह सिलसिला जारी है और जुलाई तक 14 हजार से अधिक लोग इन केंद्रों में पहुंच चुके थे.
‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के बाद बढ़ी पहुंच
राज्य सरकार के मुताबिक दाखिलों में यह तेज वृद्धि मार्च 2025 में शुरू किए गए ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के बाद देखने को मिली. सरकार का कहना है कि ज्यादा परिवार अब नशे की समस्या को छिपाने के बजाय उपचार और संस्थागत मदद की ओर कदम बढ़ा रहे हैं.
यह बदलाव नशे की समस्या से प्रभावित लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. उपचार सुविधाओं की जानकारी और उपलब्धता बढ़ने से उन लोगों तक भी पहुंच बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जो लंबे समय तक औपचारिक उपचार व्यवस्था से दूर रहे.
रिहैबिलिटेशन केंद्रों में भी बढ़े दाखिले
नशा मुक्ति केंद्रों के साथ-साथ सरकारी रिहैबिलिटेशन केंद्रों में भी दाखिलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. वर्ष 2024 में इन केंद्रों में 2,644 लोगों ने दाखिला लिया था, जबकि 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 8,574 हो गया.
इस तरह रिहैबिलिटेशन केंद्रों में दाखिलों में 224 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई. जुलाई 2026 तक ही 5,800 से अधिक लोग इन केंद्रों में दाखिल हो चुके थे. यह संख्या वर्ष 2025 में दर्ज कुल दाखिलों की करीब 68 प्रतिशत है.
OOAT क्लीनिक से भी मिल रही उपचार सुविधा
सरकार के उपचार नेटवर्क में आउटपेशेंट ओपिओइड-असिस्टेड ट्रीटमेंट (OOAT) क्लीनिक भी अहम भूमिका निभा रहे हैं. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में OOAT क्लीनिकों में 13,033 नए रजिस्ट्रेशन हुए थे. 2025 में यह संख्या बढ़कर 17,702 हो गई.
वहीं अगस्त 2026 तक 12,500 से अधिक नए मरीज OOAT क्लीनिकों में अपना रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं. इससे संकेत मिलता है कि नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए अस्पताल में भर्ती होने के अलावा आउटपेशेंट उपचार का विकल्प भी बड़ी संख्या में उपलब्ध हो रहा है.
धारा 64A के तहत 11 हजार से ज्यादा लोगों को राहत
राज्य सरकार ने नशे की लत से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए कानूनी प्रावधानों का भी इस्तेमाल किया है. सरकार के मुताबिक 27 अगस्त 2026 तक 11 हजार से अधिक लोगों को एनडीपीएस अधिनियम की धारा 64A के तहत प्रतिरक्षा प्रदान की जा चुकी है.
इस प्रावधान का उद्देश्य कुछ निर्धारित परिस्थितियों में नशे की लत से प्रभावित व्यक्तियों को उपचार और पुनर्वास की दिशा में ले जाना है.
मंत्री बोले- उपचार नेटवर्क पर बढ़ रहा भरोसा
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने दाखिलों में हुई वृद्धि को अभियान का उत्साहजनक संकेत बताया. उन्होंने कहा कि अधिक लोग उपचार के लिए आगे आ रहे हैं और परिवार संस्थागत सहायता की मांग कर रहे हैं.
मंत्री के अनुसार ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है तस्करों के खिलाफ कार्रवाई, नशे से प्रभावित लोगों का उपचार एवं रिहैबिलिटेशन और बच्चों को नशे से दूर रखने के लिए रोकथाम.
सरकार का दावा है कि इन प्रयासों का लक्ष्य केवल नशे की समस्या पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों को उपचार से जोड़कर उन्हें सामान्य जीवन की ओर वापस लाना और परिवारों को दोबारा मजबूत करना भी है.
यह भी पढ़ें -
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation







