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Explainer: मलबे से निकली DU की सियासत! NSUI-ABVP आमने-सामने, MCD ऑफिस में तोड़फोड़, DUSU चुनाव से पहले क्यों मचा बवाल?
Satya Niketan : दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से सटे सत्य निकेतन में रविवार को हुआ इमारत हादसा अब सिर्फ एक दुर्घटना नहीं रह गया है. दरअसल, राहत-बचाव अभियान के बीच ही यह मामला सीधे कैंपस की राजनीति में तब्दील हो गया, क्योंकि यह सब कुछ ऐसे समय पर हुआ जब दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ यानी डूसू के चुनाव की तारीख बेहद करीब है.
बता दें डूसू चुनाव के लिए 18 सितंबर को मतदान होना है. इसके अलावा मौके के आसपास छात्रों के पीजी और डूसू चुनाव नजदीक होने के चलते घटनास्थल पर छात्र संगठनों की सक्रियता देखी जा रही है. हादसे पर अलग-अलग छात्र संगठन एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं, राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के बीच भी टकराव की स्थिति बनी हुई है.
Delhi: Death toll in the Satya Niketan building collapse rises to 7; a total of 12 people have been rescued so far: Delhi Police pic.twitter.com/83lDDuM0Ew
— ANI (@ANI) September 7, 2026
छात्र संगठन इतनी तेजी से मौके पर क्यों पहुंच गए?
बता दें जिस पीजी बिल्डिंग का एक हिस्सा ढहा, वहां बड़ी तादाद में डीयू के छात्र किराए पर रहते थे. ये मामला सीधे छात्रों की जान से जुड़ा है, ऐसे में हर बड़ा छात्र संगठन खुद को छात्रों के साथ खड़ा दिखाने के लिए तेजी से मौके पर पहुंच रहा है.
घटनास्थल पर सबसे पहले सक्रिय दिखा कौन सा संगठन?
एनएसयूआई कार्यकर्ता सूचना मिलते ही तुरंत मौके पर पहुंच गए और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर हाथों-हाथ मलबा हटाने में जुट गए. संगठन के अध्यक्ष विनोद जाखड़ खुद घटनास्थल पर मौजूद रहे और उन्होंने बताया कि मलबे के नीचे दबे छात्र मदद के लिए चीख-पुकार मचा रहे थे. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि हादसे वाली इमारत का संचालन कथित रूप से भाजपा के एक विधायक से जुड़ा हुआ था, हालांकि इस दावे की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है. जाखड़ ने इलाके में चल रहे अवैध पीजी और उनकी लचर निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए.
#WATCH | Delhi: Ambulance arrives at the scene of the Satya Niketan building collapse to transport rescued individuals to nearby medical facilities. A rescue and relief operation is currently underway. pic.twitter.com/1h5DEa6UpN
— ANI (@ANI) September 7, 2026
दूसरी तरफ ABVP का रुख कैसा रहा?
एबीवीपी ने इस पूरे मामले को प्रशासनिक नाकामी और एमसीडी की ढिलाई से जोड़ते हुए आक्रामक रुख अपनाया. संगठन के कार्यकर्ताओं ने सिविक सेंटर स्थित एमसीडी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर एमसीडी कमिश्नर के इस्तीफे की मांग रख दी. इस प्रदर्शन के दौरान कार्यालय में तोड़फोड़ की घटना भी सामने आई जिसने पूरे प्रकरण को और सुर्खियों में ला दिया है.
मौके पर दोनों संगठनों में टकराव किस तरह हुआ?
रेस्क्यू अभियान जारी रहने के बीच ही घटनास्थल पर एनएसयूआई और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस और झड़प हो गई. दोनों तरफ से एक-दूसरे पर आरोप लगाए गए. हालांकि पुलिस और प्रशासन की सक्रियता के चलते हालात ज्यादा नहीं बिगड़े और बचाव कार्य बिना रुकावट के जारी रह पाया है.
इस समय पर हादसा होना डूसू चुनाव के लिहाज से इतना अहम क्यों है?
दरअसल, गौर करने वाली बात यह है कि यह पूरा घटनाक्रम ऐसे मौके पर सामने आया है जब डूसू चुनाव की प्रक्रिया अपने अंतिम और सबसे अहम दौर में है. मतदान 18 सितंबर को होना तय है, जबकि नतीजे 19 सितंबर को घोषित किए जाएंगे. उम्मीदवारों के नामांकन की आखिरी तारीख 10 सितंबर रखी गई है. ऐसे में ठीक चुनाव से पहले हुआ यह हादसा छात्र सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को कैंपस की राजनीति के केंद्र में ला सकता है, क्योंकि हर संगठन के लिए यह दिखाना जरूरी हो जाता है कि संकट के समय वह छात्रों के साथ किस तरह खड़ा रहा.
Satya Niketan Building Collapse | Delhi Police has formed 10 separate teams to apprehend Hariram, the alleged building owner. The teams include personnel from the local district police, Special Staff, and other operational units. Each team is being led by an officer of the… pic.twitter.com/KBDlj3CprZ
— ANI (@ANI) September 7, 2026
आने वाले दिनों में इसका असर कैंपस की सियासत पर कैसे दिख सकता है?
चूंकि यह हादसा ठीक डूसू चुनाव प्रचार के पीक सीजन से पहले हुआ है, राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस बार चुनाव प्रचार में छात्र आवास की सुरक्षा, अवैध पीजी-हॉस्टल पर निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दे बड़ी जगह घेर सकते हैं. जिस तरह एनएसयूआई और एबीवीपी दोनों ने घटनास्थल पर अपनी मौजूदगी और बयानबाजी के जरिए एक-दूसरे को पीछे छोड़ने की कोशिश की उससे संकेत मिलता है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में डूसू चुनाव प्रचार का एक बड़ा हिस्सा बन सकता है.
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