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Jharkhand: झारखंड में बनेंगी नई सैटेलाइट टाउनशिप, स्मार्ट सिटी जैसी सुविधाओं से लैस होंगे शहर

Jharkhand: झारखंड सरकार शहरों के बढ़ते विस्तार और लोगों को बेहतर नागरिक सुविधाएं देने के लिए नई सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की तैयारी कर रही है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को राज्य के शहरीकृत जिलों में स्मार्ट सिटी की तर्ज पर नई टाउनशिप विकसित करने की संभावनाएं तलाशने और इसकी ठोस कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है. इसका मुख्य उद्देश्य बढ़ती आबादी और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए शहरों का योजनाबद्ध तरीके से विस्तार करना है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार (3 सितंबर) को झारखंड मंत्रालय में ग्रेटर रांची डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीआरडीए) और रांची स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़े जमीन के मामलों को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की. इस दौरान राज्य में शहरी विकास, नए इलाकों के विस्तार और आधुनिक सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई.

क्या है सैटेलाइट टाउनशिप का प्लान?

सरकार राज्य के अलग-अलग शहरीकृत जिलों में ऐसी जगहों की पहचान करेगी, जहां भविष्य में नए शहरी केंद्र बनाए जा सकें. इन जगहों का चयन केवल जमीन की उपलब्धता देखकर नहीं किया जाएगा. इसके लिए कई महत्वपूर्ण पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा. इसमें जमीन की स्थिति के साथ सड़क और दूसरी कनेक्टिविटी, पानी, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, सार्वजनिक परिवहन और अन्य जरूरी सुविधाओं को देखा जाएगा. साथ ही रोजगार की संभावनाओं और आने वाले वर्षों में बढ़ने वाली आबादी की जरूरतों का भी आकलन किया जाएगा. यानी सरकार की कोशिश होगी कि जहां नई टाउनशिप बने, वहां लोगों को रहने के साथ रोजगार और जरूरी सुविधाएं भी आसपास मिल सकें.

स्मार्ट सिटी जैसी सुविधाओं पर जोर

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शहरी विकास का मतलब केवल सड़क और भवन बनाना नहीं होना चाहिए. नए शहरी इलाकों को आधुनिक, सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जाए. इन टाउनशिप में लोगों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं, आसान आवागमन और अच्छी सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे मौजूदा शहरों पर बढ़ता आबादी का दबाव कम करने में मदद मिलेगी.

रोजगार और निवेश के नए अवसर

नई सैटेलाइट टाउनशिप को केवल रहने की जगह के रूप में विकसित करने की योजना नहीं है. सरकार यहां निवेश, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर भी ध्यान देगी. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जमीन से जुड़े काम और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं में तेजी लाने का निर्देश दिया है. साथ ही विभागों के बीच बेहतर तालमेल रखने और योजनाओं की नियमित समीक्षा करने को कहा गया है.

भविष्य की आबादी को ध्यान में रखकर योजना

मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा कि शहरों के विकास की योजनाएं केवल आज की जरूरतों के आधार पर नहीं बननी चाहिए. आने वाले वर्षों में बढ़ने वाली आबादी और भविष्य की जरूरतों को भी ध्यान में रखना जरूरी है. इसी सोच के तहत राज्य के शहरीकृत जिलों में नए शहरी केंद्र विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं. अब संबंधित जिलों में जमीन, कनेक्टिविटी, नागरिक सुविधाओं और रोजगार की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा. इसके आधार पर सरकार आगे की कार्ययोजना तैयार करेगी.

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Vaibhav Suryavanshi ने Duleep Trophy Final में मचाया गदर, Tilak Varma के माइंड गेम को किया फेल

दलीप ट्रॉफी के फाइनल में पहले ही दिन युवा वैभव सूर्यवंशी ने अपने आक्रामक अंदाज से दक्षिण क्षेत्र के गेंदबाजों को दबाव में डाल दिया। पूर्व क्षेत्र की ओर से पारी की शुरुआत करने उतरे वैभव और अभिमन्यु ईश्वरन ने शुरुआती 15 ओवर में ही 100 रन जोड़कर मुकाबले का रुख बदल दिया। इस दौरान साउथ ज़ोन  के कप्तान तिलक वर्मा भी काफी परेशान नजर आए और उन्होंने वैभव का ध्यान भटकाने की कोशिश में उनसे कुछ कहासुनी की।

करीब 10वें ओवर के आसपास तिलक वैभव के पास पहुंचे और उन्हें उकसाने की कोशिश की। उस समय वैभव कुछ ओवर पहले ही मोहम्मद सिराज के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी कर चुके थे। दक्षिण क्षेत्र के तेज गेंदबाज पूर्व क्षेत्र के दोनों सलामी बल्लेबाजों पर अपेक्षित दबाव नहीं बना पा रहे थे। ऐसे में तिलक ने खुद मोर्चा संभालने की कोशिश की।

हालांकि उनकी तरफ से की गई टिप्पणी भी ज्यादा लंबी नहीं चली। वैभव के पास जाकर तिलक ने कहा, "क्या रे, ये उपकप्तान?" और इसके बाद वहां से हट गए। वैभव पर इस बात का कोई खास असर दिखाई नहीं दिया और पूर्व क्षेत्र की बल्लेबाजी उसी गति से आगे बढ़ती रही।

बता दें कि दलीप ट्रॉफी भारतीय घरेलू प्रथम श्रेणी क्रिकेट की प्रमुख प्रतियोगिताओं में से एक है। इसमें देश के अलग-अलग क्षेत्रों की टीमें हिस्सा लेती हैं और युवा खिलाड़ियों के साथ अनुभवी क्रिकेटरों को भी खुद को साबित करने का मौका मिलता है। ऐसे मुकाबलों में प्रदर्शन खिलाड़ियों के आगे के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय अवसरों के लिए काफी अहम माना जाता है।

फाइनल में पूर्व ज़ोन के कप्तान ईशान किशन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। उन्हें उम्मीद थी कि शुरुआती घंटे में तेज गेंदबाजों को पिच से मदद मिल सकती है। मोहम्मद सिराज के पहले ओवर में गेंद ने सीम और उछाल भी दिखाया, लेकिन वैभव और ईश्वरन ने जल्द ही गेंदबाजी आक्रमण की रणनीति को समझ लिया।

वैभव ने खास तौर पर ऑफ साइड में शानदार शॉट लगाए, जबकि ईश्वरन ने लेग साइड पर गेंदबाजों को निशाना बनाया। दोनों ने बिना अनावश्यक जोखिम लिए तेजी से रन बनाए। उनकी बल्लेबाजी का दबाव इतना बढ़ गया कि तिलक वर्मा को आठवें ओवर से ही सीमा रेखा के पास पांच क्षेत्ररक्षकों को लगाना पड़ा। लाल गेंद के क्रिकेट में इतनी जल्दी इतने ज्यादा सीमा क्षेत्ररक्षकों को लगाना आम रणनीति नहीं मानी जाती, लेकिन उस समय दक्षिण क्षेत्र को रन रोकने के लिए यह बदलाव करना पड़ा।

ईश्वरन ने अपनी शानदार लय जारी रखते हुए 14वें ओवर में ही अर्धशतक पूरा कर लिया। उन्होंने केवल 46 गेंदों में यह उपलब्धि हासिल की। दूसरी तरफ वैभव भी अर्धशतक की ओर बढ़ रहे थे और उनकी बल्लेबाजी में वही आक्रामकता दिखाई दे रही थी जिसके लिए वह कम उम्र में चर्चा में आए हैं।

हालांकि 16वें ओवर में दक्षिण क्षेत्र को बड़ी सफलता मिली। बाएं हाथ के तेज गेंदबाज सीवी मिलिंद ने छोटी गेंद फेंकी, जिस पर वैभव अपना विकेट गंवा बैठे। उनकी पारी भले ही अर्धशतक तक नहीं पहुंच सकी, लेकिन उन्होंने शुरुआती चरण में अपनी टीम को जिस स्थिति में पहुंचाया, उसने मैच की दिशा तय कर दी थी।

इसके बाद पूर्व ज़ोन को एक और झटका लगा। अभिमन्यु ईश्वरन और एस मोहन के बीच मैदान पर हुई गलतफहमी के कारण ईश्वरन रन आउट हो गए। इस तरह साउथ ज़ोन क्षेत्र ने पहले सत्र में दोनों सलामी बल्लेबाजों को पवेलियन भेज दिया।

पहले सत्र की समाप्ति तक पूर्व क्षेत्र का स्कोर दो विकेट पर 133 रन था। शुरुआती घंटे में तेज गेंदबाजों को मिलने वाली संभावित मदद के बावजूद पूर्व ज़ोन के बल्लेबाजों ने जिस तरह दक्षिण क्षेत्र के आक्रमण का सामना किया, उससे उनकी तैयारी और आत्मविश्वास साफ दिखाई दिया। खासकर वैभव सूर्यवंशी ने कम उम्र में बड़े मंच पर जिस बेखौफ अंदाज का प्रदर्शन किया, उसने दलीप ट्रॉफी फाइनल के पहले ही सत्र को चर्चा में ला दिया हैं।
Sun, 06 Sep 2026 19:54:00 +0530

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