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Kal Ka Mausam: मानसूनी टर्फ ने लिया विकराल रूप, अगले 48 घंटे 10 राज्यों में रेड अलर्ट; जानें IMD का अपडेट

कल का मौसम, 6 सितंबर: देशभर में मानसून एक बार फिर अपने प्रचंड रूप में आ चुका है और कई राज्यों में आसमान से आफत बरसने की पूरी तैयारी है. पूर्वोत्तर असम से लेकर बंगाल की खाड़ी तक फैला कम दबाव का टर्फ अब बेहद ताकतवर हो चुका है, जिसकी वजह से पूरे उत्तर और मध्य भारत की मानसूनी हवाओं में जबरदस्त हलचल मच गई है. इस मौसमी बदलाव के चलते दिल्ली एनसीआर समेत कई राज्यों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है. मौसम विभाग ने आने वाले 48 घंटों को बेहद संवेदनशील बताते हुए कई इलाकों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है. 

उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के तमाम जिलों में मूसलाधार बारिश के साथ 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने की आशंका है. पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश से भूस्खलन का बड़ा खतरा बना हुआ है, जबकि मैदानी इलाकों में बहने वाली नदियां उफान पर आ चुकी हैं जिससे बाढ़ जैसे हालात बन रहे हैं. ऐसे मुश्किल हालात को देखते हुए प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि जब तक बेहद जरूरी न हो, घर से बाहर निकलने से बचें.

10 राज्यों का कैसा होगा हाल

राज्य शहर अधिकतम तापमान न्यूनतम तापमान
दिल्ली दिल्ली 34°C 27°C
उत्तर प्रदेश लखनऊ 33°C 26°C
मेरठ 32°C 25°C
गाजियाबाद 33°C 26°C
आगरा 34°C 26°C
गोरखपुर 31°C 25°C
बिहार पटना 31°C 26°C
मुजफ्फरपुर 30°C 25°C
भागलपुर 31°C 26°C
पूर्णिया 29°C 25°C
झारखंड रांची 25°C 23°C
जमशेदपुर 28°C 24°C
धनबाद 27°C 23°C
बोकारो 27°C 24°C
उत्तराखंड देहरादून 26°C 23°C
नैनीताल 21°C 19°C
हरिद्वार 28°C 23°C
ऋषिकेश 27°C 22°C
हिमाचल प्रदेश शिमला 24°C 18°C
मनाली 15°C 9°C
कांगड़ा 23°C 17°C
मंडी 22°C 16°C
जम्मू-कश्मीर श्रीनगर 27°C 18°C
जम्मू 30°C 24°C
अनंतनाग 25°C 16°C
बारामूला 24°C 15°C
पश्चिम बंगाल कोलकाता 29°C 26°C
जलपाईगुड़ी 28°C 24°C
हावड़ा 30°C 25°C
बीरभूम 29°C 25°C
पंजाब अमृतसर 32°C 25°C
जालंधर 31°C 24°C
लुधियाना 32°C 25°C
पटियाला 33°C 26°C
राजस्थान जयपुर 32°C 25°C
जोधपुर 34°C 26°C
उदयपुर 30°C 24°C
कोटा 31°C 25°C
मध्य प्रदेश भोपाल 27°C 23°C
ग्वालियर 32°C 25°C

दिल्ली-एनसीआर में बादलों का डेरा और राहत की बौछारें

राजधानी दिल्ली और आसपास के शहरों में 6 सितंबर को मौसम काफी सुहावना लेकिन चुनौतीपूर्ण बना रहेगा. सुबह से ही आसमान में घने काले बादलों का पहरा रहेगा और दिनभर रुक-रुक कर हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश देखने को मिल सकती है. इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चलेंगी, जिससे उमस भरी गर्मी से जूझ रहे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी. दिल्ली में अधिकतम तापमान 34 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है. हालांकि तेज हवाओं और जलभराव के चलते सड़कों पर जाम की समस्या खड़ी हो सकती है. मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो दिल्ली में अगले कुछ दिनों तक बादलों की ऐसी ही आवाजाही बनी रहेगी.

उत्तर प्रदेश में तेज आंधी और भारी बारिश की चेतावनी

उत्तर प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में अगले दो दिनों तक बादलों की जोरदार गर्जना और मूसलाधार बारिश का दौर देखने को मिलेगा. पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल तक करीब दो दर्जन से अधिक जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है. मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, मुरादाबाद, आगरा, मथुरा, कानपुर, सीतापुर, प्रयागराज और गोरखपुर जैसे इलाकों में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने का अंदेशा है. लखनऊ में पारा 33 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस के करीब दर्ज हो सकता है. आकाशीय बिजली गिरने की आशंका के चलते किसानों और खुले में काम करने वाले लोगों को पक्के मकानों की शरण लेने की सलाह दी गई है.

बिहार और झारखंड में नदियों का बढ़ता जलस्तर

बिहार में भी मानसूनी बारिश ने रफ्तार पकड़ ली है. पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया, भागलपुर, कटिहार और सहरसा समेत कई जिलों में भारी बारिश के साथ 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चल सकती हैं. पटना में अधिकतम तापमान 31 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है. लगातार बारिश से गंगा, कोसी और गंडक जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे तटीय इलाकों पर पानी भरने लगा है. पड़ोसी राज्य झारखंड के रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो और गिरिडीह में भी मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. रांची में पारा लुढ़ककर 25 डिग्री तक आ सकता है, जिससे वहां ठंडक का अहसास बढ़ने लगेगा.

पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ का बड़ा खतरा

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में हालात सबसे ज्यादा नाजुक बने हुए हैं. उत्तराखंड के देहरादून, ऋषिकेश, नैनीताल, हरिद्वार और चमोली में बादलों के फटने, भारी बारिश और अचानक बाढ़ आने का बड़ा जोखिम बना हुआ है. पहाड़ों से मलबा और बड़े पत्थर सड़कों पर गिरने से कई प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित हो रहे हैं. हिमाचल प्रदेश के शिमला, मनाली, कुल्लू और कांगड़ा में तेज आंधी के साथ भारी बारिश का दौर जारी है. मनाली में न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस तक गिर चुका है. प्रशासन ने दोनों राज्यों में पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को नदी किनारे न जाने और संवेदनशील पहाड़ी रास्तों पर सफर न करने की सख्त हिदायत दी है. जम्मू कश्मीर के कई जिलों में भी तेज हवाओं और बादलों की गड़गड़ाहट के साथ बारिश का अंदेशा है.

पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बंगाल का हाल

मैदानी और पश्चिमी राज्यों में भी मौसमी चक्र का असर साफ दिखने लगा है. पंजाब के अमृतसर, लुधियाना और जालंधर में 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली आंधी और बारिश की चेतावनी है. राजस्थान के जोधपुर, कोटा, उदयपुर और जयपुर में मेघगर्जन के साथ बौछारें पड़ने की उम्मीद है. मध्य प्रदेश के भोपाल और ग्वालियर समेत कई अंचलों में 60 किलोमीटर की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलेंगी. उधर पश्चिम बंगाल के कोलकाता, हावड़ा और जलपाईगुड़ी में भारी बारिश से जनजीवन पर असर पड़ने की संभावना जताई गई है. समूचे देश में यह मानसूनी सिस्टम अगले दो दिनों तक जमकर सक्रिय रहेगा, इसलिए सभी को पूरी सावधानी बरतने की जरूरत है.

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Explainer: पाकिस्तान क्रिकेट में क्यों होती है इतनी उथल-पुथल? कोच, कप्तान और खिलाड़ियों को किस वजह से किया जाता है बाहर, जानें कारण

Pakistan Cricket : पाकिस्तान क्रिकेट आज अपने पतन की ओर बढ़ रहा है. एक समय पर पाकिस्तान क्रिकेट का विश्व भर में बोल-बाला था. पाकिस्तान ने अपने दमदार खेल से दुनिया को अपने कदमों में कर लिया था. पाकिस्तान ने साल 1992 में वनडे वर्ल्ड कप की ट्रॉफी पर कब्जा किया था. चैंपियन पाकिस्तान अब किसी भीगी बिल्ली की तरह हो गया है. आज पाकिस्तान क्रिकेट टीम किसी आईसीसी टूर्नामेंट के फाइनल में भी नहीं पहुंच पाती है. वहीं एशिया में होने वाले इवेंट से भी पाकिस्तान सेमीफाइनल या फाइनल में हारकर बाहर हो जाती है. 

पाकिस्तान क्रिकेट में आए दिन कोच को बदल दिया जाता है. कप्तानों को तो पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ऐसे बदल देता है, जैसे कि कोई अपने कपड़े बदल देता है. पाकिस्तान के क्रिकेटर्स का तो इससे भी बुरा हाल है. आज जो खिलाड़ियों टीम के लिए खेल रहा है. कल वो टीम में होगा या नहीं ये उसे भी नहीं पता होता है. पाकिस्तान क्रिकेट में खिलाड़ियों को और कप्तानों को जल्दी-जल्दी और लगातार बदलने की परंपरा सी चालू हो गई है.

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कोच भी समय से पहले ही बदल दिए जाते हैं. पीसीबी ने पिछले कुछ सालों में अनगिनत कोच बदल डाले हैं. इनमें देश और विदेश के तमाम कोच का नाम है. वहीं पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड में भी पिछले कुछ सालो में थोक में बदलाव हुए हैं. कब किसको अपना पद छोड़नी पड़ जाए कहा नहीं जा सकता है. पाकिस्तान क्रिकेट में अब इस्तीफों का दौर शुरू हो गया है. पाकिस्तान क्रिकेट की बेहतरी पर नहीं बल्कि टीम का बुरा हाल करने को शायद अब प्राथमिकता दी जा रही है.

क्यों हुई पाकिस्तान क्रिकेट की बद से बदत्तर हालत?

Pakistan Cricket Team

पूर्व कोच ने चीप सिलेक्टर पर दिया बड़ा बयान

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कोच जेसन गिलेस्पी ने द ऑस्ट्रेलियन न्यूज पेपर को दिए इंटरव्यू में कहा कि, 'मुझे इन खिलाड़ियों के लिए बहुत बुरा लग रहा है, क्योंकि यह उनकी रोजी-रोटी का सवाल है. बाहर से देखने पर साफ लगता है कि पाकिस्तानी खिलाड़ी डर के साथ क्रिकेट खेल रहे हैं. सलमान अली आगा इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट में टीम की कप्तानी करते हैं, दूसरे टेस्ट में उन्हें टीम से बाहर कर दिया जाता है और तीसरे टेस्ट से पहले उन्हें घर लौटने वाले प्लेन में बैठा दिया जाता है. आखिर कोई सिस्टम ऐसे कैसे काम कर सकता है? इसके लिए साफ तौर पर आकिब जावेद को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. 

वहीं पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कोच मोहम्मद युसूफ ने भी अपने सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड, चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि, 'अधिकारियों का मौजूदा दौरे से खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ को वापस बुलाने का हालिया फैसला सिर्फ प्रदर्शन से जुड़ा नहीं लगता है. हम जहीर अब्बास, जावेद मियांदाद, इंजमाम-उल-हक, या सईद अनवर जैसे महान खिलाड़ियों को रिप्लेसमेंट के तौर पर नहीं भेज रहे हैं. इसके बजाय यह कदम अंदरूनी गड़बड़ी, राय में अंतर और विवादों के जाने-पहचाने चक्र को दिखाता है, जिसने लंबे समय से पाकिस्तान क्रिकेट को परेशान किया है'.

पाकिस्तान क्रिकेट में बार-बार बदलाव क्यों होते हैं?

1 - हार के बाद तुरंत बड़ा फैसला : पाकिस्तान क्रिकेट टीम को जैसे ही लगातार निराशाजनक प्रदर्शन के बाद हार मिलती है. वैसे ही उनका क्रिकेट बोर्ड बड़े फैसले लेता है. ऐसा ही कोच इंग्लैंड सीरीज के दौरान हुआ, जब बोर्ड ने लगातार 2 हार के बाद मुख्य कोच सरफराज अहमद और गेंदबाजी कोच उमर गुल को हटा दिया और सात खिलाड़ियों को टीम से बाहर कर घर भेज दिया. इसके साथ ही मिस्बाह उल-हक ने सिलेक्टर के पद इस्तीफा दे दिया.   

2 - कोच को पर्याप्त समय नहीं मिलता : पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने पिछले कुछ सालों में लगातार कोच बदले हैं, जिसके चलते किसी भी कोच को पर्याप्त समय नहीं मिला है. तमाम रिपोर्ट के मुताबिक 2021 से 2026 के बीच कोचिंग स्टाफ में 11 बदलाव हुए हैं.

3 - कप्तानी में अस्थिरता : पीसीबी ने कप्तान भी लगातार बदले हैं. बाबर आजम ने कप्तानी छोड़ी, फिर अलग-अलग फॉर्मेट में अलग कप्तान बनाए गए और बाद में बाबर को फिर जिम्मेदारी दी गई. ऐसी स्थिति में कप्तान को टीम बनाने के लिए जरूरी लंबा समय नहीं मिल पाता. ऐसे में खिलाड़ियों और कप्तानों में तालमेल नहीं बन पाता है.

4 - चयन में निरंतरता की कमी : किस खिलाड़ी को कितने मौके देने हैं और किस भूमिका में खिलाना है. इसके बार में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड सोचे समझे बिना फैसला लेता है. जिस खिलाड़ी को टीम में लेते हैं, उसे जल्दी ही बाहर कर देते हैं. इससे चयन में फेवरेटिज्म दिखता है. इसके साथ ही चयन में स्थिरता भी नजर नहीं आती है. 

6 - पीसीबी में नेतृत्व परिवर्तन का असर : बोर्ड के स्तर पर बदलाव होने पर टीम मैनेजमेंट और चयन नीति भी बदल जाती है. 2022 के बाद पीसीबी नेतृत्व में हुए बदलावों के साथ टीम की कप्तानी और कोचिंग व्यवस्था में भी कई परिवर्तन हुए. इसके चलते टीम में सही कॉम्बिनेशन नहीं बन पाया और टीम का ऐसा हाल हुआ. 

खिलाड़ियों को बाहर करने के कारण

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड, पाकिस्तान टीम के चयनकर्ता, कोच और कप्तान अपने हिसाब से खिलाड़ी चुनते हैं. ऐसे में किसी पुराने खिलाड़ी को बाहर कर किसी नए खिलाड़ियों को टीम में मौका देने पर केवल खराब प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि फॉर्म, टीम कॉम्बिनेशन, फिटनेस, अनुशासन या कथित व्यवहार संबंधी मुद्दे भी अहम रोल निभाते हैं. पाकिस्तान क्रिकेट टीम के हालिया घटनाक्रम में कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों को अचानक इंग्लैंड दौरे से वापस भेजे जाने पर सवाल उठते हैं, लेकिन उनका जवाब अब तक नहीं मिला है.

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  Sports

Vaibhav Suryavanshi ने Duleep Trophy Final में मचाया गदर, Tilak Varma के माइंड गेम को किया फेल

दलीप ट्रॉफी के फाइनल में पहले ही दिन युवा वैभव सूर्यवंशी ने अपने आक्रामक अंदाज से दक्षिण क्षेत्र के गेंदबाजों को दबाव में डाल दिया। पूर्व क्षेत्र की ओर से पारी की शुरुआत करने उतरे वैभव और अभिमन्यु ईश्वरन ने शुरुआती 15 ओवर में ही 100 रन जोड़कर मुकाबले का रुख बदल दिया। इस दौरान साउथ ज़ोन  के कप्तान तिलक वर्मा भी काफी परेशान नजर आए और उन्होंने वैभव का ध्यान भटकाने की कोशिश में उनसे कुछ कहासुनी की।

करीब 10वें ओवर के आसपास तिलक वैभव के पास पहुंचे और उन्हें उकसाने की कोशिश की। उस समय वैभव कुछ ओवर पहले ही मोहम्मद सिराज के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी कर चुके थे। दक्षिण क्षेत्र के तेज गेंदबाज पूर्व क्षेत्र के दोनों सलामी बल्लेबाजों पर अपेक्षित दबाव नहीं बना पा रहे थे। ऐसे में तिलक ने खुद मोर्चा संभालने की कोशिश की।

हालांकि उनकी तरफ से की गई टिप्पणी भी ज्यादा लंबी नहीं चली। वैभव के पास जाकर तिलक ने कहा, "क्या रे, ये उपकप्तान?" और इसके बाद वहां से हट गए। वैभव पर इस बात का कोई खास असर दिखाई नहीं दिया और पूर्व क्षेत्र की बल्लेबाजी उसी गति से आगे बढ़ती रही।

बता दें कि दलीप ट्रॉफी भारतीय घरेलू प्रथम श्रेणी क्रिकेट की प्रमुख प्रतियोगिताओं में से एक है। इसमें देश के अलग-अलग क्षेत्रों की टीमें हिस्सा लेती हैं और युवा खिलाड़ियों के साथ अनुभवी क्रिकेटरों को भी खुद को साबित करने का मौका मिलता है। ऐसे मुकाबलों में प्रदर्शन खिलाड़ियों के आगे के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय अवसरों के लिए काफी अहम माना जाता है।

फाइनल में पूर्व ज़ोन के कप्तान ईशान किशन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। उन्हें उम्मीद थी कि शुरुआती घंटे में तेज गेंदबाजों को पिच से मदद मिल सकती है। मोहम्मद सिराज के पहले ओवर में गेंद ने सीम और उछाल भी दिखाया, लेकिन वैभव और ईश्वरन ने जल्द ही गेंदबाजी आक्रमण की रणनीति को समझ लिया।

वैभव ने खास तौर पर ऑफ साइड में शानदार शॉट लगाए, जबकि ईश्वरन ने लेग साइड पर गेंदबाजों को निशाना बनाया। दोनों ने बिना अनावश्यक जोखिम लिए तेजी से रन बनाए। उनकी बल्लेबाजी का दबाव इतना बढ़ गया कि तिलक वर्मा को आठवें ओवर से ही सीमा रेखा के पास पांच क्षेत्ररक्षकों को लगाना पड़ा। लाल गेंद के क्रिकेट में इतनी जल्दी इतने ज्यादा सीमा क्षेत्ररक्षकों को लगाना आम रणनीति नहीं मानी जाती, लेकिन उस समय दक्षिण क्षेत्र को रन रोकने के लिए यह बदलाव करना पड़ा।

ईश्वरन ने अपनी शानदार लय जारी रखते हुए 14वें ओवर में ही अर्धशतक पूरा कर लिया। उन्होंने केवल 46 गेंदों में यह उपलब्धि हासिल की। दूसरी तरफ वैभव भी अर्धशतक की ओर बढ़ रहे थे और उनकी बल्लेबाजी में वही आक्रामकता दिखाई दे रही थी जिसके लिए वह कम उम्र में चर्चा में आए हैं।

हालांकि 16वें ओवर में दक्षिण क्षेत्र को बड़ी सफलता मिली। बाएं हाथ के तेज गेंदबाज सीवी मिलिंद ने छोटी गेंद फेंकी, जिस पर वैभव अपना विकेट गंवा बैठे। उनकी पारी भले ही अर्धशतक तक नहीं पहुंच सकी, लेकिन उन्होंने शुरुआती चरण में अपनी टीम को जिस स्थिति में पहुंचाया, उसने मैच की दिशा तय कर दी थी।

इसके बाद पूर्व ज़ोन को एक और झटका लगा। अभिमन्यु ईश्वरन और एस मोहन के बीच मैदान पर हुई गलतफहमी के कारण ईश्वरन रन आउट हो गए। इस तरह साउथ ज़ोन क्षेत्र ने पहले सत्र में दोनों सलामी बल्लेबाजों को पवेलियन भेज दिया।

पहले सत्र की समाप्ति तक पूर्व क्षेत्र का स्कोर दो विकेट पर 133 रन था। शुरुआती घंटे में तेज गेंदबाजों को मिलने वाली संभावित मदद के बावजूद पूर्व ज़ोन के बल्लेबाजों ने जिस तरह दक्षिण क्षेत्र के आक्रमण का सामना किया, उससे उनकी तैयारी और आत्मविश्वास साफ दिखाई दिया। खासकर वैभव सूर्यवंशी ने कम उम्र में बड़े मंच पर जिस बेखौफ अंदाज का प्रदर्शन किया, उसने दलीप ट्रॉफी फाइनल के पहले ही सत्र को चर्चा में ला दिया हैं।
Sun, 06 Sep 2026 19:54:00 +0530

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