मायावती ने संत रविदास नगर का नाम बहाल होने का किया स्वागत, अन्य जिलों के पुराने नाम लौटाने की मांग
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने संत रविदास नगर का नाम दोबारा बहाल किए जाने के फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि राज्य के उन अन्य जिलों के नाम भी फिर से बहाल किए जाएं, जिन्हें पहले संतों, महापुरुषों और समाज सुधारकों के नाम पर रखा गया था.
मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि बसपा सरकार ने प्रशासनिक मजबूती और जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए कई नए जिलों का गठन किया था. इन जिलों के नाम समाज के प्रेरणास्रोत महापुरुषों और संतों के नाम पर रखे गए थे.
बसपा सरकार के फैसलों का किया जिक्र
बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी सरकार के दौरान कई ऐसे प्रशासनिक फैसले लिए गए थे, जिनका उद्देश्य क्षेत्रीय विकास और बेहतर प्रशासन व्यवस्था को मजबूत करना था. उन्होंने दावा किया कि नए जिलों का गठन जनता की सुविधा और प्रशासन को लोगों के करीब पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया था. साथ ही, कई जिलों के नाम संतों, समाज सुधारकों और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के सम्मान में रखे गए थे.
1. जैसाकि मीडिया की ख़बरों से सर्वविदित है कि यूपी की वर्तमान सरकार ने, बी.एस.पी. सरकार द्वारा भदोही को राज्य मुख्यालय का दर्जा देते हुये संत रविदास नगर के नाम से नया ज़िला बनाया था और जिसे समाजवादी पार्टी (सपा) की सरकार ने अपनी संकीर्ण जातिवादी मानसिकता के तहत् बदल दिया था, इसे…
— Mayawati (@Mayawati) July 31, 2026
नाम बदलने को लेकर उठाए सवाल
मायावती ने आरोप लगाया कि बाद की सरकारों ने राजनीतिक और जातिगत सोच के चलते कई जिलों के नाम बदल दिए. उन्होंने कहा कि संत रविदास नगर, छत्रपति शाहूजी महाराज नगर और भीमनगर जैसे जिलों के नाम बदलना उचित नहीं था.
उन्होंने कहा कि महापुरुषों के नाम पर रखे गए जिलों का नाम बदलना उनके सम्मान से जुड़ा विषय है. ऐसे नाम समाज को उनके योगदान और विचारों की याद दिलाते हैं.
कांशीराम के नाम पर बने जिले का नाम लौटाने की मांग
मायावती ने विशेष रूप से कासगंज जिले का उल्लेख करते हुए सरकार से इसका पुराना नाम बहाल करने की मांग की. उन्होंने कहा कि बसपा सरकार ने कासगंज को मान्यवर कांशीराम के नाम पर जिला बनाया था, लेकिन बाद में इसका नाम बदल दिया गया.
उन्होंने मांग की कि मान्यवर कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस 9 अक्टूबर से पहले या उसी दिन उनके नाम पर बनाए गए जिले का मूल नाम वापस किया जाए. मायावती ने कहा कि यदि सरकार ऐसा कदम उठाती है तो यह महापुरुषों के सम्मान की दिशा में सकारात्मक पहल होगी.
महापुरुषों के सम्मान को बताया जरूरी
बसपा प्रमुख ने कहा कि संतों और समाज सुधारकों के नाम से जुड़े स्थानों की पहचान बनाए रखना जरूरी है. उनके अनुसार, ऐसे नाम केवल प्रशासनिक पहचान नहीं होते, बल्कि समाज के इतिहास और संघर्षों को भी दर्शाते हैं.
उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार संत रविदास नगर के नाम बहाली के बाद अन्य जिलों के नामों पर भी सकारात्मक निर्णय लेगी.
राजनीतिक गलियारों में तेज हुई चर्चा
मायावती की इस मांग के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जिलों के नाम बदलने का मुद्दा चर्चा में आ गया है. बसपा इसे सामाजिक सम्मान और महापुरुषों की विरासत से जोड़ रही है, जबकि राजनीतिक विश्लेषक इसे राज्य की सियासत में एक महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में देख रहे हैं. अब देखना होगा कि सरकार अन्य जिलों के नामों को लेकर क्या निर्णय लेती है.
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कॉफी का सहारा, मीठे की चाह और बेवजह गुस्सा... कहीं कम नींद तो नहीं इसकी वजह?
नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर नींद पूरी नहीं हो पाती। शुरुआत में इसका असर सिर्फ थकान के रूप में दिखाई देता है लेकिन धीरे-धीरे शरीर कई ऐसे संकेत देने लगता है, जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। कई बार हमें लगता है कि बार-बार चाय या कॉफी की जरूरत, बिना वजह गुस्सा आना या मीठा खाने का मन करना सामान्य बात है लेकिन ये शरीर के ऐसे संकेत हो सकते हैं, जो बता रहे हों कि उसे आराम की जरूरत है।
दरअसल, नींद केवल शरीर को आराम देने का समय नहीं है बल्कि इस दौरान शरीर खुद को ठीक करने, ऊर्जा वापस लाने और दिमाग को व्यवस्थित करने का काम करता है। जब नींद पूरी नहीं होती तो इसका असर हमारी सोच, मूड, भूख और रोगों से लड़ने की क्षमता पर भी पड़ सकता है।
अगर सुबह उठते ही या दिनभर काम करने के लिए बार-बार चाय या कॉफी का सहारा लेना पड़ता है, तो यह कम नींद का संकेत हो सकता है। कैफीन कुछ समय के लिए दिमाग को सक्रिय महसूस करा देती है, जिससे नींद और थकान का एहसास कम होता है लेकिन यह शरीर को वह आराम नहीं दे सकती, जो अच्छी नींद से मिलता है।
कई लोगों को नींद पूरी न होने पर अचानक मीठी चीजें, फास्ट फूड या ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें खाने की इच्छा होने लगती है। इसकी वजह शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव होते हैं। वहीं, कम नींद के कारण भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन प्रभावित होते हैं। ऐसे में शरीर जल्दी ऊर्जा देने वाली चीजों की मांग करने लगता है। इसके अलावा जब दिमाग थका हुआ होता है तो खाने को लेकर खुद पर नियंत्रण रखना भी मुश्किल महसूस होता है।
अगर पहले की तुलना में अब छोटी बातों पर ज्यादा गुस्सा आने लगा है या मन जल्दी खराब हो जाता है, तो इसके पीछे नींद की कमी भी एक वजह हो सकती है। पर्याप्त नींद न मिलने पर दिमाग भावनाओं को संभालने में कमजोर पड़ता है। ऐसे में व्यक्ति छोटी परेशानियों को भी ज्यादा बड़ा महसूस करता है। नींद पूरी होने पर जहां व्यक्ति शांत रह पाता है, वहीं कम नींद की स्थिति में धैर्य कम हो सकता है और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है।
नींद की कमी का सीधा असर दिमाग की कार्यक्षमता पर पड़ता है। अगर ध्यान लगाने में परेशानी हो रही है, चीजें याद रखने में दिक्कत आ रही है या छोटे फैसले लेने में भी ज्यादा समय लग रहा है, तो यह शरीर का संकेत हो सकता है कि उसे पर्याप्त आराम नहीं मिल रहा। अच्छी नींद दिमाग को नई जानकारी समझने, याद रखने और सही निर्णय लेने में मदद करती है। लगातार कम सोने से सोचने की गति और काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
अगर आपको बार-बार सर्दी, जुकाम या संक्रमण जैसी समस्याएं होने लगी हैं, तो इसका संबंध कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता से हो सकता है। शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत बनाए रखने में नींद की अहम भूमिका होती है। जब व्यक्ति लगातार कम सोता है तो शरीर की सुरक्षा प्रणाली प्रभावित हो सकती है। इससे सामान्य संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम हो सकती है और व्यक्ति जल्दी बीमार महसूस कर सकता है।
हालांकि ये सभी संकेत नींद पूरी न होने की ओर संकेत कर सकते हैं लेकिन हर बार इसकी वजह सिर्फ नींद ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। तनाव, चिंता, मानसिक दबाव, थायरॉयड की समस्या, पोषण की कमी, ब्लड शुगर से जुड़ी परेशानी या कुछ दवाओं के असर से भी ऐसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
--आईएएनएस
पीके/पीएम
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