Nepal Flash Flood Tragedy: नेपाल में Bhotekoshi-Trishuli नदी के किनारे मची है भयंकर तबाही!
नेपाल के विनाशकारी बाढ़ ने नदियों को बेलगाम किया. त्रिशुली और भोटेखो कोशी नदियों ने अपने ऊपर बने तमाम ब्रिज तहस-नहस कर डाले. त्रिशुली नदी की दूसरी तरफ कई 100 लोग फंस गए थे. ऐसे में 9 दिन बाद त्रिशूली नदी पर रोपवे तैयार किया गया. इसके जरिए फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है. फ्लैश फ्लड से कैलाश मानसरोवर यात्रा रूट पर मौजूद कई सड़क और ब्रिज भी तबाह हो गए. नवाकोट से चीन बॉर्डर तक मौजूद ज्यादातर ब्रिज अब सफर के लायक नहीं बचे हैं. त्रिशुली में जहां पहुंचना मुश्किल है, वहां ग्राउंड जीरो पर बड़ी मशक्कत के बाद न्यूज़ नेशन की टीम पहुंची.
फ्रेंडशिप ब्रिज को भी भारी नुकसान
नीचे हुंकार भरती हाहाकारी बाढ़ ऊपर थरथराता पुल. शुरुआत बिजली पुल अवरुद्धा नेपाल में 26 अगस्त अगस्त को आए फ्लैश फ्लड ने दर्जनों ब्रिज, पुल और बेली ब्रिज को निगल लिया. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 26 अगस्त के फ्लैश फ्लड में नेपाल में 19 ब्रिज या तो बह गए या क्षतिग्रस्त हो गए. सैलाब ने नेपाल चीन सीमा को जोड़ने वाले फ्रेंडशिप ब्रिज को भी भारी नुकसान पहुंचाया है.
पुलों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ
त्रिशुली नदी पर बने पुलों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. नेपाल त्रासदी के 9 दिन गुजरने के बाद त्रिशुली नदी पर जिप लाइन तैयार कर ऑपरेशनल कर दी गई है. ब्रिज टूटने से सैकड़ों लोग नदी की दूसरी तरफ फंसकर रह गए थे. विदुर में नेपाली सेना ने करीब 250 मीटर अस्थाई केबल क्रॉसिंग जिप लाइन लगाई है. इसके सहारे बाढ़ प्रभावित लोग तेज बहाव वाली नदी को पार कर रहे हैं. इस रोपवे में एक पिंजरा बनाया गया है जिसमें दो से तीन लोग बैठकर एक बार में नदी पार करते हैं.
रोपवे तैयार किया गया
इस समय हम इंद्रानी घाट पे मौजूद हैं. जहां से एक तरफ से दूसरी तरफ लोगों को रोपवे के जरिए भेजा जा रहा है. क्योंकि सारे पुल खत्म हो चुके हैं. एक रोपवे तैयार किया गया है जिसमें तमाम जो लोग हैं उनको रोपवे के जरिए एक जगह से दूसरी जगह यानी कि अह जिस जगह पर हम मौजूद हैं यहां से दूसरी तरफ आप देखेंगे वो त्रिशुली की तरफ ये सामने आपको पहले हम दिखाएं कि ये त्रिशुली की जो नदी है यहां से भेजा जा रहा है.
"मेरा भाई, मेरा दामाद कहाँ है?" - नेपाल बाढ़ के बीच अपनों की आस लगाए बैठे परिजनों की हृदयविदारक कहानियां
नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड को 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन तबाही के इस मंजर के बीच सबसे बड़ा दर्द अपनों के लापता होने का है. काठमांडू के टीचिंग हॉस्पिटल में इन दिनों दिल को झकझोर देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं, जहाँ दूर-दूर से पहुंचे लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में भटक रहे हैं. अस्पताल की दीवारों पर लापता लोगों के नाम, उनकी तस्वीरें और आखिरी लोकेशन चस्पा की जा रही हैं, ताकि किसी को कोई सुराग मिल सके. आपदा प्रभावित क्षेत्रों में हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। नेपाल में इस प्रलयकारी आपदा के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर लगभग 1,252 से अधिक हो चुकी है, जबकि 5,000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं. कई पहाड़ी इलाकों में अब भी बारिश की आशंका और कृत्रिम झीलों के खतरे ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. भारी मात्रा में मलबे के ढेर और वाश आउट हो चुके बॉर्डर इलाकों के कारण राहत और बचाव कार्यों में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. पहचान सुनिश्चित करने के लिए डीएनए टेस्ट का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन वक्त बीतने के साथ परिवारों की बेचैनी और चिंता लगातार बढ़ती जा रही है.
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