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Explainer: DM की सैलरी से कटेगा 5 लाख! क्यों अफसरों से वसूली कर रहा कोर्ट, जानें नियम

Noida DM Salary: पिछले 10 सालों में कई ऐसे मौके आए जब किसी न किसी वजह से देश की अदालतों ने अफसरों को अपनी जेब से जुर्माना भरने का निर्देश दिया. ताजा मामला नोएडा का है, जहां एक स्टूडेंट को जेल भेजने वाले अफसर को अब अपनी तनख्वाह से जुर्माना भरना पड़ेगा. दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह आदेश इन दिनों सुर्खियों में है और इसकी वजह जानकर हर कोई हैरान है.

पूरा मामला क्या है?

नोएडा में मजदूरों का एक प्रदर्शन अप्रैल 2026 में हिंसक हो गया था. पत्थरबाजी और गाड़ियों में आगजनी की घटनाएं सामने आईं. इस मामले में पुलिस ने सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया. इस दौरान दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में ग्रेजुएट 25 साल की सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी को भी अरेस्ट किया गया. आरोप था कि उन्होंने मजदूरों को भड़काकर हिंसा कराई. आकृति पर NSA लगाया गया. 

आकृति पर NSA क्यों लगाई गई?

गिरफ्तारी के करीब एक महीने बाद 13 मई को यूपी पुलिस ने आकृति और एक पत्रकार सत्यम वर्मा पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगा दिया. बता दें यह कानून बिना ट्रायल के किसी को एक साल तक हिरासत में रखने की छूट देता है. पुलिस का दावा था कि उनके पास "मजबूत इलेक्ट्रॉनिक और वीडियो सबूत" मौजूद हैं. आकृति के घर से मिली एक किताब को भी उनकी सोच से जोड़कर पेश किया गया.

पांच महीने जेल में रहने के बाद क्या मोड़ आया?

आकृति करीब पांच महीने से जेल में थीं. सुप्रीम कोर्ट ने सीधे राहत न देकर उन्हें हाईकोर्ट जाने को कहा था. इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका दाखिल की. जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच के सामने राज्य सरकार अपने दावों को साबित नहीं कर पाई. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बार-बार पूछा कि आकृति को हिंसा भड़काने से जोड़ने वाला ठोस सबूत कहां है.

कोर्ट ने राज्य सरकार की कहानी को झूठा क्यों बताया?

कोर्ट ने पाया कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में ही गड़बड़ी थी. नियम के मुताबिक पहले धारा 126 के तहत नोटिस दिया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. सीधे धारा 130 के तहत नोटिस थमा दिया गया. जज ने यह भी पूछा कि जब चार्जशीट दाखिल हो चुकी थी तो अफसरों ने यह क्यों नहीं देखा कि गवाहों के बयान में आकृति का नाम कहीं आता भी है या नहीं. राज्य सरकार इसका सही जवाब नहीं दे सकी. बेंच ने साफ कहा कि पूरा मामला मनगढ़ंत कहानी पर टिका है. इसी आधार पर बुधवार को NSA हिरासत रद्द कर दी गई. यहां बता दें कि आकृति अभी भी जेल से बाहर नहीं आ पाई हैं, क्योंकि उन पर 11 अलग-अलग FIR दर्ज हैं और अभी तक सिर्फ चार मामलों में जमानत मिली है.

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DM की सैलरी से पैसा क्यों कटेगा?

कोर्ट ने सिर्फ रिहाई का आदेश देकर बात खत्म नहीं की. बेंच ने आकृति को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी सुनाया और यह रकम सीधे गौतम बुद्ध नगर की डीएम की तनख्वाह से वसूलने को कहा है. कोर्ट का तर्क सीधा था जिस अफसर के दस्तखत से गलत हिरासत का आदेश जारी हुआ गलती की जिम्मेदारी भी उसी की बनती है. सरकारी खजाने से भरपाई करने पर अफसरों की जवाबदेही कमजोर पड़ जाती है, इसलिए निजी जेब से भरपाई का रास्ता चुना गया.

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यह कोई अकेला मामला नहीं है. बीते एक दशक में कई अदालतों ने अफसरों को निजी तौर पर सजा या जुर्माना भुगतने के आदेश दिए हैं.

गुजरात हाईकोर्ट, वडोदरा जेल मामला: एक कैदी को सजा पूरी होने के बाद भी दो महीने से ज्यादा जेल में रखा गया. कोर्ट ने जेल सुपरिटेंडेंट को अपनी जेब से 50 हजार रुपये मुआवजा भरने का आदेश दिया.

मद्रास हाईकोर्ट, IAS अफसर का मामला: कोर्ट के पुराने आदेश को न मानने पर एक IAS अफसर को एक महीने जेल की सजा सुनाई गई. साथ ही 25 हजार रुपये का मुआवजा उसकी निजी सैलरी से काटने को कहा गया.

इलाहाबाद हाईकोर्ट, बंदी प्रत्यक्षीकरण गाइडलाइन: इसी साल कोर्ट ने आदेश दिया कि 24 घंटे से ज्यादा गैरकानूनी हिरासत पर हर दिन के हिसाब से 25 हजार रुपये मुआवजा मिलेगा और यह रकम जिम्मेदार मजिस्ट्रेट या पुलिस अफसर की सैलरी से वसूली जाएगी.

केरल हाईकोर्ट, NRI गलत गिरफ्तारी मामला: चेन स्नैचिंग के झूठे केस में 54 दिन जेल में रहे एक प्रवासी भारतीय को कोर्ट ने 10 लाख रुपये मुआवजा दिलवाया साथ ही परिवार को अतिरिक्त राशि भी दी गई.

क्या हाईकोर्ट ऐसा आदेश देने का अधिकार रखता है?

हां, और यह पहली बार नहीं है. संविधान का अनुच्छेद 226 हाईकोर्ट को यह ताकत देता है कि वह मौलिक अधिकारों के हनन पर सीधे मुआवजे का आदेश दे सके. गलत हिरासत जीने के अधिकार (अनुच्छेद 21) का सीधा उल्लंघन मानी जाती है. पिछले कुछ दशकों में सुप्रीम कोर्ट और अलग-अलग हाईकोर्ट कई बार यह साफ कर चुके हैं कि सरकारी अफसर की लापरवाही या मनमानी साबित होने पर अदालत उससे निजी तौर पर वसूली का आदेश दे सकती है. इसे कानूनी भाषा में "पब्लिक लॉ कंपनसेशन" कहा जाता है.

आगे क्या होगा, क्या कहता है नियम?

फिलहाल पूरा विस्तृत आदेश आना बाकी है. आकृति की रिहाई की राह अभी और मुकदमों से होकर गुजरेगी लेकिन इस फैसले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सुरक्षा कानूनों का इस्तेमाल असहमति दबाने के लिए हो रहा है.

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Krishna Janmashtami 2026: देश के 10 प्रसिद्ध कृष्ण मंदिर, कहीं भगवान बनें व्यापारी तो कहीं ब्रह्मांड के नाथ, जानें

Krishna Janmashtami 2026: इस वर्ष 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है. जन्माष्टमी का त्योहार भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव है. भगवान कृष्ण का इस साल 5253 वां जन्मदिवस मनाया जाएगा. धार्मिक कथाओं के अनुसार, कृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार है. उन्होंने द्वापर युग में माता देवकी के गर्भ से जन्म लिया था. भगवान कृष्ण का जन्म जगत में धर्म का नाश करने के लिए हुआ था. उन्होंने धरती पर मनुष्य रूप से अवतरण लिया था और कंस का अंत किया था और पांडवों तथा कौरवों के बीच हुए महाभारत युद्ध में भी अहम भूमिका निभाई थी. कृष्ण जन्माष्टमी की धूम पूरे देश में देखने को मिलती है. इस दिन अलग-अलग शहरों में मंदिरों को खूब सजाया जाता है. ऐसे में चलिए आपको बताते हैं देश में मौजूद कृष्ण जी के प्रसिद्ध मंदिर.

देश के प्रसिद्ध 10 कृष्ण मंदिर

1.जगन्नाथ मंदिर, पुरी

ओडिशा में पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर में भगवान कृष्ण का कलियुग में अवतरण हुआ है. भगवान कृष्ण यहां इस मंदिर में पूरे ब्रह्मांड के नाथ के रूप में विराजमान है. पुरी के मंदिर को धरती पर वैकुंठ धाम कहा जाता है. यह मंदिर भारत में चार धामों में से एक है. इस मंदिर का इतिहास करीब 800 वर्ष पुराना है. मंदिर के शिखर पर लगा झंडा प्रतिदिन बदला जाता है. यह ध्वज हमेशा हवा के विपरीत दिशा में ही लहराता है. यह मंदिर देश के प्रसिद्ध और पौराणिक कृष्ण मंदिरों में से एक है.

2.प्रेम मंदिर, वृंदावन

वृंदावन में स्थित प्रेम मंदिर अत्यंत भव्य और मनमोहक कृष्ण मंदिरों में से एक है. रात के समय इस मंदिर का नजारा और भी ज्यादा खूबसूरत हो जाता है. इस मंदिर को भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का केंद्र माना जाता है. मंदिर परिसर के अंदर आपको रंग-बिरंगी रोशनी की चमक दिखाई देगी. मंदिर में आपको भगवान कृष्ण की अलग-अलग लीलाओं की झांकियां भी देखने को मिल जाएंगी. जन्माष्टमी पर इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ होती है.

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3.खाटू श्याम जी, सीकर 

राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गांव में स्थित खाटू श्याम जी एक प्रसिद्ध मंदिर है. यह मंदिर महाभारत के वीर बर्बरीक को समर्पित है. भगवान कृष्ण ने इन्हें कलियुग में अपने नाम यानी श्याम के नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था. हारे का सहारा नाम से मशहूर खाटू श्याम मंदिर जन्माष्टमी पर विशेष रूप से सजाया जाता है. 

4.सांवरिया सेठ, चित्तौड़गढ़

सांवरिया सेठ भगवान श्रीकृष्ण का ही स्वरूप माना जाता है. इनका मुख्य मंदिर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित है. यहां भगवान व्यापारियों के भगवान के रूप में विराजमान है. इस स्वरूप में उन्हें व्यापारी, किसान और भक्त अपने कारोबार और जीवन का सेठ बताया जाता है. मान्यता है कि भक्त इस मंदिर में मुनाफे का एक हिस्सा या साझेदारी भी भगवान को भेंट करते हैं. इस मंदिर में स्थित मूर्तियों का संबंध मीराबाई की भक्ति और उनके द्वारा पूजे जाने वाले 'गिरधर गोपाल' से भी जोड़ा जाता है.

5.द्वारकाधीश, गुजरात

यह जगत मंदिर और त्रिलोक सुंदर के नाम से जाना जाता है. द्वारकाधीश मंदिर में मुक्ति का द्वार माना जाता है. इस मंदिर को भी जगन्नाथ मंदिर की ही तरह बेहद खास माना जाता है. यह चार धामों में से एक मंदिर है. यह मंदिर गोमती नदी और अरब सागर के संगम के पास स्थित है. द्वारकाधीश मंदिर में भगवान कृष्ण श्याम रंग की सुंदर चतुर्भुजमूर्ति के रूप में विराजमान हैं और वह यहां के राजा माने जाते हैं.

6.गुरुवयूर मंदिर, गुरुवयूर, केरल

दक्षिण भारत के मंदिरों में से सर्वश्रेष्ठ मंदिर गुरुवायूर मंदिर को तीर्थयात्रियों में काफी प्रसिद्ध माना जाता है. इस मंदिर को दक्षिण का द्वारका कहा जाता है. इस मंदिर का निर्माण 1638 ईस्वी में हुआ था. यहां मंदिर के मुख्य गर्भगृह में भगवान कृष्ण की चार भुजाओं वाली प्रतिमा है. उन पर तुलसी की माला और मोतियों का हार सजाया हुआ है. कृष्ण जन्माष्टमी के पर्व पर इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. 

7. श्री श्री राधा मदन मोहन मंदिर, वृंदावन

वृंदावन के इस मंदिर की विशेषता भी बहुत खास मानी जाती है. यह मंदिर 50 फुट ऊंची द्वादशादित्य टीला की चोटी पर स्थित है. कहा जाता है कि यह मंदिर वृंदावन में निर्मित होने वाला प्रथम मंदिर था. इस मंदिर में भगवान कृष्ण राधा रानी के साथ ललिता सखी के साथ विराजमान हैं. मान्यता है कि मंदिर की मुख्य मूर्ति मदन-मोहन द्वारा वृंदावन में एक पुराने बरगद के पेड़ के नीचे मिली थी. 

8.श्रीनाथ जी मंदिर, नाथद्वार

राजस्थान के नाथद्वार में स्थित श्रीनाथ जी मंदिर अपनी मूर्तियों के लिए जाना जाता है. माना जाता है कि इस मंदिर में भगवान कृष्ण राजा के स्वरूप में विराजमान है. ये मंदिर 12वीं शताब्दी में बनाया गया था. कहते हैं कि मेवाड़ के राजा इस मंदिर में मौजूद मूर्तियों को गोवर्धन की पहाड़ियों से औरंगजेब से बचाकर लाया गया था. 

9.अनंत वासुदेव मंदिर, भुवनेश्वर

भुवनेश्वर में स्थित अनंत वासुदेव मंदिर बिंदु सरोवर और लिंगराज मंदिर के पास है. इस मंदिर में भगवान कृष्ण, बलराम और सुभद्रा की पूजा की जाती है. इस मंदिर में ही जगन्नाथ मंदिर का महाप्रसाद बनाया जाता है. अनंत वासुदेव मंदिर का निर्माण पूर्वी गंगा वंश की रानी चंद्रिका देवी ने 13वीं शताब्दी में करवाया गया था. इस मंदिर में जन्माष्टमी का उत्साह बड़े धूमधाम से मनाया जाता है.

10.इस्कॉन मंदिर, मायापुर, पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में मायापुर के इस्कॉन मंदिर को गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय का पवित्र केंद्र माना जाता है. कहा जाता है कि 15वीं शताब्दी में चैतन्य महाप्रभु ने यहीं से संक्रीतन आंदोलन की शुरुआत की थी. आज के समय में मायापुर का इस्कॉन मंदिर दुनिया का सबसे बड़ा वैदिक मंदिर है. इस विशाल मंदिर का निर्माण का सपना श्रील प्रभुपाद का था. 

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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