Responsive Scrollable Menu

Explainer: जौहर और साका में क्या होता है अंतर? कहानी ढाई साका की, जब 1550 में राजपूतों ने खुद अपनी-अपनी पत्नियों का कर दिया था वध

Explainer: देश भर में जौहर एक बार फिर से बहस का मुद्दा बन गया है. खबरों से लेकर सोशल मीडिया तक हर तरफ सिर्फ जौहर पर ही बात हो रही है. दरअसल, हाल में दिल्ली में एक आयोजित एक इवेंट में बॉलिवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत के जौहर सीन पर सवाल उठाए थे. सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि स्वरा ने रानी पद्मावती और जौहर करने वाली महिलाओं को कायर कहा है. उन्हें सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया गया, जिसके बाद मंगलवार को स्वरा ने इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी करके सफाई दी. स्वरा ने कहा कि उन्होंने रानी पद्मावती को कायर नहीं कहा, बल्कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है।

जानें स्वरा भास्कर ने क्या कहा था. 

इवेंट में स्वरा ने फिल्म के जौहर सीन का जिक्र करते हुए कहा की इससे रेप सर्वाइवर्स तक गलत संदेश जा सकता है। उन्होंने कहा कि क्या हम सर्वाइवर्स को यही बताना चाहते हैं कि वे जीने के लायक नहीं हैं, कि अगर आप सच में इज्जतदार और बहादुर महिला होतीं, तो आपने खुद को मार लिया होता? क्या हम यह कह रहे हैं कि रेप किसी महिला की जिंदगी का अंत है? उन्होंने कहा, "एक सीन में गर्भवती महिला का पेट दिखाया गया है जो जौहर करने जा रही है. यह देखकर मुझे बहुत गुस्सा आया था और मैंने थियेटर में ही छी कह दिया था. 5 दिन विचार करने के बाद मैंने डायरेक्टर संजय लीला भंसाली को ओपन लेटर लिखा था।"

ऐसे में सवाल आता है कि आखिर जौहर क्या होता है? और साका इससे कितना अलग होता है? आइये जानते है, डेढ़ साका की कहानी, जब 1550 में राजपूतों ने खुद अपनी-अपनी पत्नियों का कर दिया था वध…..

जौहर क्या होता है?

जौहर मध्यकालीन राजपूत युद्ध परंपरा से जुड़ा हुआ है. जौहर उस वक्त किया जाता था, जब किसी राजा की हार लगभग तय मानी जाती थी या फिर महिलाओं के दुश्मन के कब्जे में जाने का खतरा होता था. ऐसे वक्त पर महिलाएं सामूहिक रूप से आत्मदाह करती थीं. उस वक्त की महिलाएं ऐसा करके अपने सम्मान की रक्षा करती थीं और शत्रुओं की गिरफ्त में आने से बचा करती थीं. अब कई लोग 

फिर साका क्या था?

ऐसे में अब एक सवाल आता है कि आखिर जौहर क्या था. इसका जवाब है कि साका मुख्य रूप से पुरुष योद्धाओं के अंतिम युद्ध से जुड़ा होता था, जब किले की रक्षा की संभावना खत्म हो जाती थी तो सबसे पहले महिलाएं जौहर करती थीं और फिर पुरुष सर पर केसरियां कपड़ा बांधते थे और मुंह में तुलसी का पत्ता रखकर शत्रुओं पर टूट पड़ते थे. राजपूत युद्ध साका की स्थिति में युद्ध में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने के लिए कूदते थे. महिलाओं के जौहर और पुरुष योद्धाओं के केसरिया को मिलाकर साका कहा जाता था. 

क्या होता है ‘अर्ध-साका’?

इतिहास में जौहर और साका के साथ-साथ अर्ध साका का जिक्र भी मिलता है. अर्ध साका 1550 ईस्वी की एक हृदय विदारक घटना है. दरअसल, जैसलमेर के इतिहास में तीन साका हुए हैं और तीसरे साका को ही अर्ध साका या फिर आधा साका कहा जाता था. 

विभिन्न इतिहासकारों के अनुसार, 1550 ईस्वी में रावल लूणकरण जैसलमेर के शासक हुआ करते थे. उस वक्त कंधार से जुड़े अमीर अली ने जैसलमेर में शरण ली. जैसे ही राज्य में अली रहने लगा, वैसे ही उसने विश्वासघात कर दिया और जैसलमेर के किले फर हमला कर दिया. हमले की स्थिति अचानक बनी, जिस वजह से महिलाओं को जौहर की तैयारियों का वक्त नहीं मिला. इस वजह से पुरुषों ने पहले अपनी-अपनी पत्नियों का गला काटा और केसरिया करके दुशमनों पर टूट पड़े. 

जानें जैसलमेर में कब-कब हुए थे तीनों साका?

पहला साका (वर्ष 1299/1313 के करीब): दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के दौरान भाटी शासक महारावल मूलराज और कुंवर रतन सिंह के नेतृत्व में राजपूत वीरों ने केसरिया बाना पहनकर युद्ध लड़ा और वीरगति पाई. वहीं, महल की हजारों वीरांगनाओं ने जौहर की अग्नि में आत्मोत्सर्ग किया.

दूसरा साका (वर्ष 1352 के करीब): ये आक्रमण फिरोज शाह तुगलक की सेना द्वारा किया गया था. इस दौरान रावल दुर्जनसाल (दूदा) और उनके भाई तिलोकसी के नेतृत्व में योद्धाओं ने शत्रुओं से लोहा लेते हुए प्राण न्यौछावर किए. इधर, महिलाओं ने जौहर किया.

तीसरा साका या 'अर्ध साका' (वर्ष 1550): काबुल-कंधार के अमीर अली पठान ने विश्वासघात कर जैसलमेर के राव लूणकरण पर हमला कर दिया था. जौहर का समय न मिल पाने की वजह से पुरुषों ने पहले अपनी पत्नियों का वध किया और बाद में केसरिया के लिए मैदान में कूद पड़े. हालांकि, कुछ इतिहासकारों का कहना है कि इस युद्ध में राजपूतों को विजय प्राप्त हुई थी. 

मेवाड़ में कब-कब जौहर और साका हुआ था

फिल्म पद्मावत में दिखाई गई कहानी मेवाड़ राजघराने की है. मेवाड़ में तीन बार जौहर और साका हुए हैं. आइये जानते हैं तीनों साका के बारे में…

पहला साका (1303 ईस्वी): दिल्‍ली सल्‍तनत के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के वक्त रानी पद्मिनी के नेतृत्व में लगभग 16,000 महिलाओं ने जौहर किया था. राजा रावल रतन सिंह के नेतृत्व में सैनिकों ने केसरिया (साका) किया था.

दूसरा साका (1535 ईस्वी): गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह के आक्रमण के दौरान यह घटना हुई. इसमें राजमाता रानी कर्मावती (कर्णावती) के नेतृत्व में 13,000 महिलाओं ने जौहर की अग्नि को गले लगाया. रावत बाघ सिंह के नेतृत्व में योद्धाओं ने वीरगति प्राप्त की.

तीसरा साका (1568 ईस्वी): मुगल बादशाह अकबर द्वारा चित्तौड़ दुर्ग की घेराबंदी के समय अंतिम साका हुआ था. इसमें जयमल राठौड़ और पत्ता सिसोदिया की वीरता के बीच वीर ललनाओं ने जौहर किया. 

जौहर और साका को लेकर आज विवाद क्यों?

जौहर को लेकर दो पक्ष हैं और दोनों ही अपने-अपने तर्क पेश करता है. एक पक्ष का कहना है कि जौहर को सिर्फ गौरव और बलिदान की कहानी के रूप में देखने की बजाए उस वक्त की महिलाओं की भयावह स्थिति को देखना चाहिए. वहीं, दूसरे पक्ष का कहना है कि मध्यकालीन युद्धों में महिलाओं और पुरुषों द्वारा किए गए बलिदान को आज के परिपेक्ष्य में देखकर उनके ऐतिहासिक संदर्भों को नकारना नहीं चाहिए.

DISCLAIMER: यह खबर इंटरनेट पर उपलब्ध विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर है. न्यूजनेशन इस दावे की पुष्टि नहीं करता है. बता दें, इतिहास में एक घटना को विभिन्न इतिहासकारों ने अपने-अपने बुद्धि-विवेक से लिखा है. इसलिए खबर में वर्णित घटना के अन्य पहलु भी हो सकते हैं. हमारी खबर को ही अंतिम सत्य नहीं समझना चाहिए.

 

Continue reading on the app

‘मिर्जापुर द मूवी’ का रिलीज से पहले दिखा भौकाल, 1.72 लाख टिकट बिके, ओपनिंग डे पर टूट सकता है इस बड़ी फिल्म का रिकॉर्ड?

Mirzapur The Movie Advance Booking: ‘मिर्जापुर द मूवी’ (Mirzapur The Movie) कल यानी 4 सिंतबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. इसी के साथ फिल्म को लेकर फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज भी बढ़ता जा रहा है. मिर्जापुर वेब सीरीज में कालीन भैया, गुड्डू पंडित और मुन्ना भैया को देखने के बाद बाद अब फैंस इन्हें बड़े पर्दे पर देखने के लिए तैयार हैं. इसी के साथ फिल्म की रिलीज से पहले ही इसकी एडवांस बुकिंग ने माहौल बना दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'मिर्जापुर द मूवी' के गुरुवार शाम 4 बजे तक पहले दिन के लिए 1 लाख 72 हजार से ज्यादा टिकट बिक चुके हैं. खास बात यह है कि फिल्म को जन्माष्टमी के दिन रिलीज किया जा रहा है, जिसका फायदा फिल्म को मिल सकता है. ऐसे में सवाल है कि क्या ‘मिर्जापुर द मूवी’ पहले दिन ‘कबीर सिंह’ का रिकॉर्ड तोड़ पाएगी? आइए जानते हैं.

एडवांस बुकिंग में बिके 1.72 लाख से ज्यादा टिकट

‘मिर्जापुर द मूवी’ की एडवांस बुकिंग के ताजा आंकड़े काफी शानदार नजर आ रहे हैं. Sacnilk के रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म के हिंदी और तेलुगु वर्जन के लिए अब तक कुल 8,922 शोज में 1,72,231 टिकट बिक चुके हैं. जिससे 4.84 करोड़ रुपये की ग्रॉस कमाई हो चुकी है. हिंदी 2D वर्जन में ही 1,71,053 टिकट बिक गए हैं, जिससे करीब 4.82 करोड़ रुपये की ग्रॉस कमाई हुई है. वहीं तेलुगु में 1,178 टिकट बिके हैं और करीब 1.48 लाख रुपये की ग्रॉस कमाई हुई है. आपको बता दें कि ये कमाई बिना ब्लॉक सीट के है. अगर ब्लॉक सीट को जोड़े तो इसकी कमाई 7.6 करोड़ रुपये की होती है. इसी के साथ आपको यह भी बता दें कि अभी एडवांस बुकिंग के लिए काफी टाइम बचा हुआ है ऐसे में टिकट बिक्री के आंकड़े बढ़ सकते हैं. 

‘मिर्जापुर द मूवी’ को जन्माष्टमी का मिल सकता फायदा

‘मिर्जापुर द मूवी’ के लिए 4 सितंबर का दिन काफी खास है, क्योंकि इस दिन जन्माष्टमी भी है. इसलिए त्योहार की छुट्टी का फायदा फिल्म को मिल सकता है. गुरमीत सिंह के डायरेक्शन में बनी मिर्जापुर द फिल्म की कहानी की दुनिया वही है जिसे लोग वेब सीरीज के जरिए पहले से जानते हैं. वेब सीरीज में पंकज त्रिपाठी कालीन भैया, अली फजल गुड्डू पंडित और दिव्येंदु शर्मा मुन्ना भैया के किरदार में नजर आए थे, इन कैरेक्टर को चाहने वालों की संख्या काफी बड़ी है. यही वजह है कि फिल्म को एक ऐसी ऑडियंस पहले से मिल गई है, जिन्हें स्टोरी और किरदारों से किसी तरह का इंट्रोडक्शन कराने की जरूरत नहीं है.

‘टॉक्सिक’ की कम होती कमाई का भी मिल सकता है फायदा

बॉक्स ऑफिस पर ‘मिर्जापुर द मूवी’ के लिए माहौल इसलिए भी अच्छा माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही रिलीज हुई यश की ‘टॉक्सिक’ उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई. ऐसे में ऑडियंस नई फिल्म देखने की तलाश में है. ‘मिर्जापुर’ की पहले से बनी पॉपुलैरिटी फिल्म के लिए सबसे बड़ा प्लस पॉइंट बन सकती है. हालांकि, फिल्म को सेंसर बोर्ड से ‘A’ रेटिंग मिली है और इसमें 10 से ज्यादा कट्स किए गए हैं. इसका मतलब है नाबालिग के लिए नहीं है. लेकिन ‘मिर्जापुर’ की ऑडियंस ज्यादातर युवा वर्ग हैं. इसलिए एडल्ट रेटिंग के बावजूद फिल्म को अच्छी शुरुआत मिलने की उम्मीद की जा रही है.

पहले दिन कमा सकती है 20 करोड़ से ज्यादा

एडवांस बुकिंग के आंकड़ों को देखते हुए ट्रेड एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि ‘मिर्जापुर द मूवी’ पहले दिन अच्छी कमाई कर सकती है. फिल्म की ऑनसाइट यानी रिलीज वाले दिन होने वाली टिकट बिक्री भी इसमें अहम भूमिका निभाएगी. इसके साथ ही उम्मीद जताई जा रही है कि फिल्म इंडिया में पहले दिन करीब 15 से 20 करोड़ रुपये की नेट कमाई कर सकती है. इसके साथ ही अगर फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स मिल गया और दोपहर के बाद शोज में ऑक्यूपेंसी बढ़ी, तो कमाई 20 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर सकती है. वहीं, इस फिल्म की टक्कर एडल्ट रेटिंग वाली फिल्म कबीर सिंह से मानी जा रही है, जिसने पहले दिन 20.21 करोड़ का कलेक्शन किया था. अब देखना होगा कि इसका ओपनिंग रिकॉर्ड टूट पाता है या नहीं.

ये भी पढ़ें: मुस्लिम शख्स थिएटर में देखने पहुंचा हनुमान अंश, श्रद्धा में उतार दीं चप्पलें, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

 

Continue reading on the app

  Sports

Video: हैरतअंगेज तरीके से रन आउट हुआ ये बल्लेबाज, प्रैक्टिस करना पड़ा भारी

नूरवीर सिंह के साथ शेर ए पंजाब टी20 टूर्नामेंट मैच के दौरान कुछ ऐसा हुआ जिसपर यकीन कर पाना मुश्किल है. ये खिलाड़ी शैडो प्रैक्टिस करते हुए रन आउट हो गया. Thu, 03 Sep 2026 17:52:10 +0530

  Videos
See all

'क्या राहुल गांधी कह सकते हैं कुरान गलत है' ? #shorts #rahulgandhi #aniruddhacharyaji #ytshorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-03T12:45:20+00:00

Laxmi Narayan Singh: ‘देश में 30-32 लाख मीट्रिक टन चीनी की खपत’ #panchayat #aajtak #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-03T12:45:25+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers