हर्षिता गौर का दिल टूटा, दो साल बाद संभलीं:बोलीं- उस रिश्ते ने खुद से प्यार करना सिखाया, पेरेंट्स अब शादी के लिए दबाव नहीं डालते
हर्षिता गौर ने एक्टिंग की शुरुआत टीवी से की और ‘मिर्जापुर’ से उन्हें अलग पहचान मिली। इंटरव्यू में उन्होंने पहली कमाई, माता-पिता के सपोर्ट और आने वाले प्रोजेक्ट्स समेत कई बातें साझा कीं। उनकी मां डॉक्टर होने के साथ 9 साल तक थिएटर भी कर चुकी हैं। बचपन में हर्षिता ने एक्टर बनने का सपना देखा था, लेकिन माता-पिता को उम्मीद थी कि यह सपना कुछ समय बाद खत्म हो जाएगा। उन्होंने मुंबई में अपने 12 साल पुराने घर को खरीदने की कोशिश का भी जिक्र किया। इसके अलावा उन्होंने सपनों के राजकुमार, दिल टूटने और खुद को प्यार करना सीखने पर भी बात की। बचपन में एक्टिंग करने का ख्याल कैसे आया? मैं करीब 7-8 साल की रही होंगी, जब मैंने मां से कहा था कि मुझे टीवी पर आना है। बचपन में ज्यादा फिल्में नहीं देखती थी, लेकिन 4 साल की उम्र से कथक सीख रही थी और स्टेज पर परफॉर्म करती थी। जब लोग मेरी तारीफ करते थे और मिलने आते थे, तो शायद वहीं से एक्टर बनने का ख्याल आया। आपकी मां भी थिएटर करती थीं? हां, मेरी मां डॉक्टर हैं, लेकिन उन्होंने पंजाब में करीब 9 साल तक थिएटर भी किया था। बचपन में मुझे पता नहीं था कि वह थिएटर एक्टर रही हैं। जब मैं थोड़ी बड़ी हुई, तब उन्होंने बताया। मुझे लगता है कि एक्टिंग का कीड़ा शायद उन्हीं से आया है। जब आपने माता-पिता को बताया कि एक्टर बनना है, तो उनकी क्या प्रतिक्रिया थी? शुरुआत में उन्हें लगा कि मैं कुछ समय बाद भूल जाऊंगी। लेकिन यह सपना कभी खत्म नहीं हुआ। 10वीं के बाद मेडिकल या नॉन-मेडिकल चुनना था, तब मैंने पापा से कहा कि मुझसे डॉक्टर नहीं बना जाएगा, मुझे एक्टर बनना है। उन्होंने फिर भी कहा कि नॉन-मेडिकल या इंजीनियरिंग कर लो। फिर इंजीनियरिंग करने का फैसला कैसे हुआ? मुझे एक्टिंग ही करनी थी। उस समय NSD और FTII में ग्रेजुएशन के कोर्स नहीं थे, इसलिए ग्रेजुएशन करनी ही थी। मैंने सोचा कि जब करनी ही है तो कुछ भी कर लेते हैं, इसलिए इंजीनियरिंग कर ली। मैं मजाक में कहती हूं कि मैं इंजीनियरिंग से एक्टिंग में नहीं आई, बल्कि इंजीनियरिंग एक्टिंग के रास्ते में आई थी। आपके पापा ने एक्टिंग के लिए मुंबई आने से नहीं रोका? मेरे पापा ने कभी मुझे कोशिश करने से नहीं रोका। वह खुद गांव से आकर डॉक्टर बने थे, इसलिए शायद समझते थे कि अपने रास्ते पर कोशिश करना जरूरी है। कॉलेज के दौरान मैं दिल्ली में छोटे-मोटे शूट करती थी। एक बार सिर्फ ऑडिशन देने के लिए चार दिन की छुट्टी में मुंबई आई थी। पापा ने कहा था कि पहले जाकर खुद को टेस्ट करो, क्या पता वहां तुम्हें रिजेक्ट कर दें। आपकी पहली कमाई कितनी थी और उससे क्या किया था? मेरी पहली कमाई ₹1000 थी। एक ऐड के लिए करीब 12 घंटे शूट किया था और मुझे ₹1000 मिले थे। मुझे नहीं लगता कि मैंने उससे कुछ खास किया था। बस घर जाकर बताया था कि ये तो शुरुआत है। टीवी शो के बाद कमाई कितनी बढ़ी? शुरुआत में ज्यादा पैसे नहीं मिलते थे, क्योंकि आप नए होते हैं। लेकिन जैसे-जैसे शो चलता गया और हिट हुआ, कमाई धीरे-धीरे बढ़ती गई। मैंने तीन साल शो किया और बाद में मेरी फीस भी बढ़ी। हालांकि, टीवी में लोग जितना कमाते हैं, उसके मुकाबले मैंने बहुत ज्यादा नहीं कमाया। मुंबई आए आपको काफी साल हो गए, क्या आप अभी भी उसी घर में रहती हैं? हां, जब से मुंबई आई हूं, तब से इसी घर में रह रही हूं। करीब 12 साल हो गए हैं। लोगों को यह बड़ी बात लगती है कि मुंबई जैसे शहर में कोई इतने साल एक ही घर में रह रहा है। क्या कभी अपना घर खरीदने का सोचा? बिल्कुल सोचा है। मैंने इसी घर को खरीदने की कोशिश की थी, लेकिन मेरे लैंडलॉर्ड अंकल-आंटी इसे बेचना नहीं चाहते थे। मुंबई में घर खरीदना आसान नहीं है। अगर आपके पास कम से कम 70-80 प्रतिशत डाउन पेमेंट नहीं है, तो लोन लेकर घर खरीदना महंगा पड़ सकता है। रेंट में कम से कम फ्लेक्सिबिलिटी बनी रहती है। माता-पिता अब शादी को लेकर सवाल करते हैं? अब तो उन्होंने बोलना ही छोड़ दिया है। शुरुआत में उन्होंने काफी कोशिश की थी, क्योंकि हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा सेटल हो जाए। लेकिन अब उन्हें लगता है कि किसी को फोर्स करके शादी नहीं कराई जा सकती। इसलिए उनकी दुआएं और प्रार्थनाएं चलती रहती हैं कि मुझे अच्छा पार्टनर मिल जाए। आपके सपनों का राजकुमार कैसा होना चाहिए? मेरे लिए सबसे जरूरी है कि वह इमोशनली अवेयर हो। उसे अपने पैटर्न, गलतियां और स्ट्रेंथ समझ में आती हो। कम्युनिकेशन अच्छा होना चाहिए, ताकि वह अपनी फीलिंग्स खुलकर बता सके। उसके आसपास रहने वाला हर इंसान खुद को रिस्पेक्टेड महसूस करे, यह मेरे लिए बहुत जरूरी है। क्या आपको अब तक अपना सपनों का राजकुमार मिला? रिश्ते रहे हैं, लेकिन उस समय हम दोनों शायद साथ में सही नहीं थे। हर इंसान अपनी जर्नी पर होता है और उसी हिसाब से सीखता है। मेरे पुराने रिश्तों में रहे लोग व्यक्तिगत तौर पर बहुत अच्छे हैं और आज भी मेरे दोस्त हैं। कभी आपका दिल भी टूटा? हां, बिल्कुल। मैंने भी शायद किसी का दिल दुखाया है, लेकिन मेरा भी टूटा है। इससे बाहर आने में मुझे करीब डेढ़ से दो साल लग गए। जब मैं उससे बाहर निकली, तो लगा कि शायद वह रिश्ता मेरी जिंदगी में इसलिए आया था, ताकि मैं खुद से प्यार करना सीख सकूं। उस रिश्ते से सबसे बड़ी सीख क्या मिली? उस रिश्ते ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। मेरी भी गलतियां रही होंगी और सामने वाले इंसान में कोई बुराई नहीं थी। लेकिन उस अनुभव के बाद मैं अलग इंसान बनी। आज पीछे मुड़कर देखती हूं तो लगता है कि अच्छा हुआ वह दौर मेरी जिंदगी में आया, क्योंकि उससे मैंने खुद को समझना और प्यार करना सीखा। अभी आपके कौन-कौन से प्रोजेक्ट पाइपलाइन में हैं? मिर्जापुर’ फिल्म के अलावा दो और प्रोजेक्ट हैं। एक हॉरर प्रोजेक्ट है, जिसे निखिल आडवाणी की कंपनी ने बनाया है। इसमें परमब्रता चक्रवर्ती, गुलशन देवैया, प्रीति पानिग्राही और सुमेध जैसे कलाकार हैं। यह अमेजन के लिए है। इसके अलावा दिव्येंदु, भुवन अरोड़ा और विजय मौर्या के साथ एक शो किया है। सवाल: दूसरे शो के बारे में कुछ बताइए? इसे समीर विद्वांस ने डायरेक्ट किया है, जिन्होंने ‘सत्यप्रेम की कथा’ और ‘आनंदी गोपाल’ जैसी फिल्में बनाई हैं। वह नेशनल अवॉर्ड विनर हैं। यह शो भी अमेजन के लिए है। दोनों शो अनाउंस हो चुके हैं। रिलीज होने पर दर्शक देख पाएंगे।
शक्ति कपूर ने भागकर की थी शादी:लता मंगेशकर के परिवार से थीं पत्नी, शादी के बाद अखबार में छपा- 3 महीने में तलाक हो जाएगा
कई सुपरहिट फिल्मों में विलेन और कॉमेडियन का रोल प्ले करने वाले शक्ति कपूर आज 74 साल के हो गए। तकरीबन 700 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके शक्ति का एक्टिंग करियर बेहद सफल रहा। उनकी पर्सनल लाइफ की लव स्टोरी भी काफी दिलचस्प है। शक्ति ने शिवांगी कोल्हापुरे से शादी की थी। दोनों की मुलाकात फिल्म ‘किस्मत’ के दौरान हुई थी। कपिल शर्मा के शो में शक्ति कपूर ने बताया था कि शिवांगी को देखकर उन्हें वह पहली नजर में ही बेहद खूबसूरत लगी थीं। उन्होंने शिवांगी से हल्की-सी लाइन भी मारी और मन ही मन तय कर लिया था कि शादी करेंगे तो इसी मराठिन से करेंगे। फिर दोनों की मुलाकात के बाद दोनों में दोस्ती हुई और फिर यह दोस्ती प्यार में बदल गई। परिवार रिश्ते के खिलाफ था जब दोनों की मुलाकात हुई थी, तब शक्ति कपूर करीब 30 वर्ष के थे और शिवांगी महज 18 साल की थीं। इसके अलावा, शक्ति कपूर फिल्मों में अक्सर विलेन के रोल निभाते थे। इसी वजह से शिवांगी के माता-पिता इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे। जब दोनों ने शादी की बात की, तो शिवांगी के परिवार ने उन्हें कमरे में बंद कर दिया था। परिवार को मनाने के सारे रास्ते बंद होने के बाद शिवांगी ने घर से भागकर शक्ति कपूर के साथ शादी करने का फैसला किया। 1982 में की कोर्ट मैरिज साल 1982 में दोनों ने भागकर कोर्ट मैरिज कर ली। शुरुआत में शक्ति कपूर का परिवार भी थोड़ा हिचकिचा रहा था, लेकिन जब उन्हें पता चला कि शिवांगी मशहूर गायिका लता मंगेशकर के परिवार से ताल्लुक रखती हैं, तो वे मान गए। शादी के बाद शिवांगी के माता-पिता कई सालों तक उनसे नाराज रहे। हालांकि, बड़े बेटे सिद्धांत कपूर और बाद में बेटी श्रद्धा कपूर के जन्म के बाद दोनों परिवारों के बीच की कड़वाहट खत्म हो गई। शिवांगी के माता-पिता ने भी इस रिश्ते को पूरी तरह से स्वीकार कर लिया। अखबार में लिखा गया- 3 महीने में तलाक हो जाएगा कपिल शर्मा के शो में शक्ति कपूर ने बताया था कि उनकी शादी के बाद अखबार में आया था कि 3 महीने में उनका तलाक हो जाएगा। हालांकि, ऐसा कुछ नहीं हुआ। वहीं, शक्ति के ससुर ने उनसे आकर बोला कि तुम्हारे जैसा जमाई मैंने कहीं नहीं देखा, मुझे तुम पर बहुत गर्व है। शक्ति कपूर की पत्नी शिवांगी कोल्हापुरे (अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे की बड़ी बहन) दिग्गज गायिका लता मंगेशकर की रिश्तेदार (भतीजी) हैं। बता दें कि शिवांगी कोल्हापुरे के पिता पंडित पंधारीनाथ कोल्हापुरे की मां, लता मंगेशकर के पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर की सौतेली बहन थीं। इस नाते शिवांगी के पिता पंधारीनाथ जी, लता मंगेशकर और आशा भोसले के चचेरे भाई लगते थे। एक नजर शक्ति कपूर के करियर पर शक्ति कपूर ने 1977 में फिल्म ‘खेल खिलाड़ी का’ से बॉलीवुड डेब्यू किया था। शुरुआती दौर में उन्हें कई छोटी भूमिकाएं मिलीं, लेकिन ‘कुर्बानी’ और ‘रॉकी’ में विलेन के किरदारों ने उन्हें पहचान दिलाई। इसके बाद ‘हिम्मतवाला’ और ‘हीरो’ जैसी फिल्मों में भी उन्होंने नेगेटिव रोल निभाया। 1990 के दशक में शक्ति कपूर ने अपनी एक्टिंग का दायरा बढ़ाया और कॉमेडी में भी खास पहचान बनाई। ‘राजा बाबू’ में नंदू का किरदार उनके सबसे यादगार रोल्स में शामिल है। इस भूमिका के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट कॉमेडियन अवॉर्ड मिला। ‘अंदाज अपना अपना’ में क्राइम मास्टर गोगो, ‘चालबाज’, ‘इंसाफ’, ‘बाप नंबरी बेटा दस नंबरी’ और ‘बोल राधा बोल’ जैसी फिल्मों में उनके किरदार भी खूब चर्चित रहे। बाद में उन्होंने ‘हंगामा’, ‘हलचल’, ‘चुप चुप के’ और ‘मालामाल वीकली’ जैसी फिल्मों में भी काम किया। ………….. यह खबर भी पढ़ें… एक्ट्रेस साधना ने 1 रुपए से शुरू की थीं फिल्में:‘साधना कट’ से देशभर में छाईं, आखिरी दिनों में आर्थिक तंगी से जूझीं हिंदी सिनेमा के 60 और 70 के दशक में एक ऐसी अभिनेत्री आईं, जिन्होंने अपनी खूबसूरती, अभिनय और स्टाइल से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। नाम था साधना शिवदासानी। कभी उनकी फिल्में हिट होती थीं और उनका हेयरस्टाइल पूरे देश में ट्रेंड करता था, लेकिन जिंदगी के आखिरी दौर में उन्हें बीमारी, आर्थिक तंगी और अकेलेपन का सामना करना पड़ा। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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