BMW 7 Series Facelift हुई और भी लग्जरी, नए डिजाइन से हाईटेक फीचर्स तक जानें क्या बदला
BMW 7 Series Facelift: भारतीय बाजार में BMW अपनी फेसलिफ्टेड 7 सीरीज और i7 को लॉन्च करने के लिए पूरी तरह तैयार है. लग्जरी कारों के शौकीनों के लिए एक शानदार खबर है. बीएमडब्ल्यू इंडिया 11 सितंबर को अपनी फ्लैगशिप सेडान 7 सीरीज और इसके इलेक्ट्रिक अवतार i7 का फेसलिफ्ट मॉडल लॉन्च करने जा रही है. इन दोनों मॉडल्स का ग्लोबल डेब्यू इस साल की शुरुआत में ही हो गया था, जिसके बाद कंपनी ने 1 अगस्त से भारत में इनकी बुकिंग भी शुरू कर दी है. इस नए मिड-लाइफ अपडेट में कारों के एक्सटीरियर, इंटीरियर और पावरट्रेन में कई बड़े और आकर्षक बदलाव किए गए हैं.
BMW के लुक को बनाया गया और भी ज्यादा प्रीमियर
नई फेसलिफ्ट 7 सीरीज और i7 के मूल ढांचे को बरकरार रखते हुए इसके लुक को और भी ज्यादा प्रीमियम बनाया गया है. कार के फ्रंट में अब नई इल्यूमिनेटेड किडनी ग्रिल, स्प्लिट एलईडी हेडलाइट्स और पूरी तरह से नया बंपर देखने को मिलेगा. साइड प्रोफाइल की बात करें तो कंपनी ने फ्लश-फिटिंग डोर हैंडल्स को ज्यों का त्यों रखते हुए नए डिजाइन वाले अलॉय व्हील्स को शामिल किया है. कार के पिछले हिस्से को भी नया रूप दिया गया है, जिसमें स्मोक्ड लेंस और क्रोम डिटेलिंग के साथ बेहद पतले टेल-लैंप्स, नया टेलगेट और अपडेटेड रियर बंपर दिया गया है.
BMW में मिलेंगे ये नए फिचर्स
सबसे बड़े और अहम बदलाव कार के इंटीरियर में किए गए हैं. केबिन में अब बीएमडब्ल्यू का नया पैनोरमिक आईड्राइव लेआउट दिया गया है. पुराने डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर को हटाकर अब विंडस्क्रीन के बेस पर पूरी चौड़ाई वाला प्रोजेक्शन डिस्प्ले लगाया गया है. इसके साथ ही 17.9 इंच की मुख्य टचस्क्रीन और 14.6 इंच का फ्रंट पैसेंजर डिस्प्ले भी मौजूद है. यह इंफोटेनमेंट सिस्टम बीएमडब्ल्यू ऑपरेटिंग सिस्टम एक्स पर काम करता है और इसमें ओवर-द-एयर (OTA) अपडेट्स, वायरलेस एप्पल कारप्ले, एंड्रॉइड ऑटो के साथ-साथ पहले से कहीं बेहतर वॉयस कंट्रोल की सुविधा मिलती है.
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यात्रियों के आराम के लिए दी गई सुविधा
यात्रियों के आराम को ध्यान में रखते हुए सीटों में हीटिंग, वेंटिलेशन, मसाज और इलेक्ट्रिक एडजस्टमेंट के साथ लंबर सपोर्ट दिया गया है. पीछे बैठने वाले यात्रियों के लिए एक्स्ट्रा लेगरूम बनाने के लिए आगे वाली यात्री सीट को पूरी तरह से मोड़ा जा सकता है. मनोरंजन के लिए पीछे 31.3 इंच की 8K थिएटर स्क्रीन और दरवाजों पर नए कंट्रोल पैनल मिलते हैं. इसके अलावा, बोवर्स एंड विल्किंस का शानदार सराउंड साउंड सिस्टम, एंबिएंट लाइटिंग और अपडेटेड ऑटोमैटिक डोर बटन इस कार के केबिन को एक लाउंज जैसा फील देते हैं.
बीएमडब्ल्यू ने अभी तक भारतीय बाजार के लिए वेरिएंट्स की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन ग्लोबल मार्केट के आधार पर इनमें शानदार मैकेनिकल बदलाव हुए हैं. पेट्रोल वेरिएंट 740i में 3.0 लीटर का इनलाइन-सिक्स पेट्रोल माइल्ड-हाइब्रिड इंजन मिलेगा, जो अब पहले से ज्यादा ताकतवर होकर 400 हॉर्सपावर की ताकत और 580 एनएम का पीक टॉर्क जनरेट करेगा. वहीं, डीजल मॉडल 740d xDrive की पावर भी बढ़कर 313 हॉर्सपावर और 670 एनएम टॉर्क हो गई है.
i7 में भी किए गए बड़े सुधार
इलेक्ट्रिक लाइनअप i7 में भी बड़े सुधार किए गए हैं. पुराने एंट्री-लेवल मॉडल को हटाकर अब i7 xDrive50 को लाया गया है, जिसमें ऑल-व्हील ड्राइव का सपोर्ट मिलता है. इसमें पहले के मुकाबले बड़ी 112 kWh की बैटरी दी गई है, जिससे इसकी पावर 455 हॉर्सपावर और टॉर्क 660 एनएम तक पहुंच गया है. इसके टॉप-एंड i7 M70 xDrive मॉडल में भी इस बड़ी बैटरी का इस्तेमाल किया गया है, जिसकी बदौलत यह कार अब 680 हॉर्सपावर की जबर्दस्त पावर और 1,100 एनएम का पीक टॉर्क पैदा करने में सक्षम है.
उत्तराखंड में अवैध मदरसों पर धामी सरकार सख्त, दस्तावेज नहीं दिखा पाने पर चार सील
Uttarakhand Government: उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले में बिना जरूरी मान्यता और दस्तावेजों के संचालित मदरसों पर प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। बाजपुर परगना क्षेत्र में प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए चार मदरसों को सील कर दिया।
यह कार्रवाई जिला प्रशासन के निर्देश पर की गई। एसडीएम बाजपुर ऋचा सिंह और कोतवाली निरीक्षक नरेश चौहान के नेतृत्व में पुलिस बल के साथ टीम मौके पर पहुंची और चारों मदरसों को सील किया। प्रशासन के मुताबिक, निरीक्षण के दौरान मदरसा संचालकों से संस्थान से जुड़े जरूरी दस्तावेज और मान्यता संबंधी कागजात मांगे गए थे। हालांकि, संचालक आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद नियमों के तहत चारों संस्थानों के खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई की गई।
प्रशासन की इस कार्रवाई को मदरसा शिक्षा व्यवस्था में लागू नई व्यवस्था के तहत नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बिना जरूरी मान्यता और दस्तावेजों के संचालित संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
ये मदरसे हुए सील
प्रशासन द्वारा सील किए गए मदरसों में मदरसा जामिया हनफिया रजाउत उलूम, बाजपुर; मदरसा गुलशने इस्लाम, कनोरा; मदरसा जामिया फातिमा, बाजपुर; तथा मदरसा मोइनुल उलूम, मोहल्ला गांधीनगर, केलाखेड़ा-बाजपुर शामिल हैं। एसडीएम ऋचा सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर क्षेत्र में संचालित मदरसों का निरीक्षण किया जा रहा है। जिन संस्थानों के पास निर्धारित मान्यता अथवा आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अन्य मदरसों की भी जांच-पड़ताल जारी है।
नई व्यवस्था को लेकर हाई कोर्ट में याचिका
वहीं, राज्य में लागू नई मदरसा शिक्षा व्यवस्था और मान्यता संबंधी प्रावधानों के खिलाफ कुछ मदरसा संचालकों की ओर से नैनीताल हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण तथा शिक्षा बोर्ड से मान्यता की अनिवार्यता के चलते कई मदरसों के सामने संचालन संबंधी कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को प्रस्तावित है।
डीएम ने कहा- मान्यता के मानकों का पालन अनिवार्य
ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारी नितिन भदौरिया ने कहा कि शासन के निर्देशों के तहत जिले में मदरसों का निरीक्षण अभियान जारी है। जिन संस्थानों ने निर्धारित प्राधिकरण से मान्यता नहीं ली है अथवा आवश्यक मानकों और नियमों का पालन नहीं किया है, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर सरकार का जोर
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा कि नई व्यवस्था की मूल भावना बच्चों को उनकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जोड़े रखते हुए उन्हें आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों के बच्चों को समान अवसर उपलब्ध कराना और शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता, पारदर्शिता तथा आधुनिक पाठ्यक्रम को सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत मदरसों को भी निर्धारित शैक्षणिक मानकों और नियमों का पालन करना होगा। जो संस्थान निर्धारित मानकों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपना पक्ष मजबूती से रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री धामी ने भी स्पष्ट की सरकार की नीति
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि प्रदेश में ऐसी शिक्षा व्यवस्था को प्रोत्साहित नहीं किया जाएगा, जो बच्चों को आधुनिक एवं मुख्यधारा की शिक्षा से दूर रखे। उन्होंने कहा है कि राज्य के सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी उद्देश्य से उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड को समाप्त कर उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की नई व्यवस्था लागू की गई है। सरकार के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत बच्चों को उनकी सांस्कृतिक एवं धार्मिक जड़ों से जुड़े रहने के साथ-साथ विज्ञान, गणित, कंप्यूटर, कौशल विकास और अन्य आधुनिक विषयों की शिक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि प्रदेश में संचालित होने वाले सभी शिक्षण संस्थानों को निर्धारित नियमों और कानूनों का पालन करना होगा। सरकार का स्पष्ट मत है कि जो संस्थान नियमों के अनुरूप संचालित होंगे, उन्हें व्यवस्था के तहत कार्य करने का अवसर मिलेगा, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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