चाइना मास्टर्स: लक्ष्य सेन का निराशाजनक प्रदर्शन, पहले ही दौर में हुए बाहर; किदांबी श्रीकांत ने दर्ज की शानदार जीत
Lakshya Sen: भारतीय शटलर लक्ष्य सेन का खराब फॉर्म चाइना मास्टर्स (शेंजेन) में भी जारी रहा। बुधवार को खेले गए मुकाबले में 2021 विश्व चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता लक्ष्य सेन को कनाडाई खिलाड़ी विक्टर लाई के हाथों शुरुआती दौर में ही शिकस्त का सामना करना पड़ा। महज 38 मिनट तक चले इस मुकाबले में लक्ष्य सेन को सीधे गेमों में 14-21, 7-21 से हार मिली। विश्व रैंकिंग में नौवें स्थान पर काबिज विक्टर लाई ने मैच के अधिकांश समय अपना दबदबा बनाए रखा और भारतीय खिलाड़ी की गलतियों का पूरा फायदा उठाकर आसानी से मुकाबला अपने नाम कर लिया।
शुरुआत अच्छी रही लेकिन लय बरकरार नहीं रख सके सेन
मैच की शुरुआत में लक्ष्य सेन ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए 4-0 की बढ़त हासिल की थी, लेकिन इसके बाद विक्टर लाई ने शानदार वापसी करते हुए अपनी लय पकड़ ली। कनाडाई खिलाड़ी की मजबूत डिफेंस ने भारतीय शटलर को काफी परेशान किया, जिससे लक्ष्य रैलियों को अपने पक्ष में मोड़ने में असफल रहे और अंक हासिल करने के लिए ज्यादा जोखिम उठाने लगे। बैकहैंड साइडलाइन पर लगातार शॉट बाहर मारने के कारण उन पर दबाव बढ़ता गया और लाई ने इसका फायदा उठाकर पहला गेम 21-14 से अपने नाम कर लिया।
दूसरे गेम में भी नहीं कर पाए वापसी
पहला गेम हारने के बाद लक्ष्य सेन मैच में वापसी करने में पूरी तरह नाकाम रहे। गेम के बीच में अंतराल (इंटरवल) के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। विक्टर लाई लगातार लंबी रैलियां खींचकर भारतीय खिलाड़ी के हमलों को नाकाम करते रहे, जबकि सेन की निराशा साफ झलकने लगी। भारतीय खिलाड़ी 4-11 से पिछड़ने के बाद फासला पाटने में असमर्थ रहे। मैच में वापसी के लिए किए गए प्रयासों के दौरान उनसे कई अनफर्स्ड एरर (बेवजह की गलतियां) हुए, जिसका फायदा उठाकर लाई ने दूसरा गेम 21-7 से जीतकर लक्ष्य के सफर का अंत कर दिया। इस हार के साथ ही हेड-टू-हेड रिकॉर्ड में भी विक्टर लाई की स्थिति मजबूत हो गई है, जिन्होंने अब तक दोनों खिलाड़ियों के बीच हुए चार मुकाबलों में तीन बार जीत दर्ज की है।
किदांबी श्रीकांत और मिक्स्ड डबल्स में मिली सफलता
दूसरी ओर, किदांबी श्रीकांत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत की एकल चुनौती को मजबूती दी है। 2021 विश्व चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता श्रीकांत ने अपने पहले दौर के मुकाबले में चीनी ताइपे के ची यू जेन को सीधे गेमों में 21-16, 21-15 से हराकर दूसरे दौर में प्रवेश कर लिया। श्रीकांत ने दोनों ही गेमों में नियंत्रण बनाए रखा और बिना कोई गेम गंवाए मैच अपने नाम किया।
इसके अलावा, मिक्स्ड डबल्स वर्ग में भी भारत को सफलता मिली, जहां ध्रुव कपिला और तनीषा क्रास्टो की जोड़ी ने थाईलैंड के तन्नाकोर्न सेहेन्ग और तन्निचा सेहेन्ग को 21-8, 21-9 से मात दी। बुधवार को बाद के सत्र में सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी मेंस डबल्स में, जबकि तन्वी शर्मा और देविका सिहाग विमेंस सिंगल्स में अपनी चुनौती पेश करने उतरने वाली थीं।
electricity rules: झारखंड में बिजली सप्लाई को लेकर नया नियम लागू, तय सीमा से चूकने पर लगेगा एक्स्ट्रा चार्ज और पेनल्टी
Jharkhand electricity rules: झारखंड में पावर सेक्टर के भीतर बिजली उत्पादन, खपत और वाणिज्यिक जवाबदेही को अधिक अनुशासनबद्ध बनाने के लिए एक नया नियम सामने आया है। झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (JSERC) ने 'झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (इंट्रा-स्टेट डेविएशन सेटलमेंट मैकेनिज्म एंड रिलेटेड मैटर्स) रेगुलेशन्स, 2026' का ड्राफ्ट आधिकारिक रूप से जारी कर दिया है।
इस नई व्यवस्था के तहत तय किए गए शेड्यूल और वास्तविक बिजली उत्पादन या खपत के बीच अंतर आने पर 'डेविएशन चार्ज' (विचलन शुल्क) वसूले जाने का कड़ा प्रावधान किया गया है। आयोग ने इस महत्वपूर्ण ड्राफ्ट पर बिजली क्षेत्र के तमाम स्टेकहोल्डर्स और आम नागरिकों से आपत्तियां व सुझाव आमंत्रित किए हैं।
शेड्यूल और वास्तविक खपत के अंतर का होगा वित्तीय निपटारा
प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, यदि किसी पावर जनरेटर को तय समय में 100 मेगावाट बिजली ग्रिड को सप्लाई करनी है, लेकिन वह इसके बजाय 110 मेगावाट बिजली दे देता है, तो जो 10 मेगावाट का अंतर आएगा, उसे डेविएशन माना जाएगा। ठीक इसी तरह, तय मात्रा से कम या ज्यादा बिजली की खपत करना भी इसी दायरे में आएगा। इस अंतर का पूरा वित्तीय निपटारा बाजार आधारित कीमतों और तय संदर्भ दरों के आधार पर सुनिश्चित किया जाएगा।
ग्रिड की स्थिरता और संतुलन बनाए रखना मुख्य मकसद
नियामक आयोग का स्पष्ट मानना है कि पावर ग्रिड की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए बिजली के उत्पादन और उसकी खपत के बीच संतुलन का होना बेहद आवश्यक है। अगर शेड्यूल और वास्तविक बिजली प्रवाह के बीच बड़ा अंतर पैदा होता है, तो इससे ग्रिड की फ्रीक्वेंसी पर बुरा असर पड़ सकता है।
राज्य में बढ़ती बिजली की मांग, ओपन एक्सेस कारोबार में तेजी और ग्रिड के साथ नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) के बढ़ते एकीकरण को देखते हुए इस तरह के कड़े नियामकीय ढांचे की जरूरत महसूस की गई है। इस पूरी व्यवस्था को केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) के साल 2024 के नियमों की तर्ज पर ही तैयार किया गया है।
साप्ताहिक ऊर्जा खाते और पेनल्टी का प्रावधान
इस प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से साप्ताहिक आधार पर ऊर्जा और डेविएशन खातों को तैयार कर प्रकाशित किया जाएगा। यदि तय समयसीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है, तो उपभोक्ताओं या इकाइयों पर डिलेड पेमेंट सरचार्ज (DPS) लगाया जाएगा। आपसी विवादों के त्वरित समाधान के लिए राज्य पावर कमेटी के जरिए एक संस्थागत व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि घरेलू बिजली उपभोक्ताओं पर इसका सीधा डेविएशन चार्ज लागू नहीं होगा, लेकिन इससे ओवरऑल ग्रिड संचालन और बिजली आपूर्ति में सुधार की पूरी उम्मीद है।
इन इकाइयों पर मुख्य रूप से लागू होंगे नए नियम
यह नया डेविएशन सेटलमेंट मैकेनिज्म पारंपरिक थर्मल पावर प्लांट, हाइड्रो पावर स्टेशन, डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसधारी, ओपन एक्सेस उपभोक्ता, कैप्टिव पावर प्लांट, एनर्जी स्टोरेज सिस्टम और राज्य ग्रिड से जुड़े तमाम अन्य बिजली खरीदारों व विक्रेताओं पर सख्ती से लागू होगा।
हालांकि, पवन, सौर और हाइब्रिड रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं को फिलहाल इस सामान्य व्यवस्था से बाहर रखा गया है, क्योंकि मौसम और पूर्वानुमान की अनिश्चितता को देखते हुए इनके लिए अलग से रूपरेखा बाद में लाई जा सकती है। इसके अलावा, जानबूझकर नियम तोड़ने या अनुचित आर्थिक लाभ कमाने वालों से अतिरिक्त व्यावसायिक पेनल्टी और रिकवरी की जाएगी।
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