Responsive Scrollable Menu

Stock Market Today: शेयर बाजार की गिरावट के साथ शुरुआत, सेंसेक्स 700 अंक टूटा, निफ्टी 24,000 के नीचे फिसला

Stock Market Today: कमजोर वैश्विक संकेतों से भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत मंगलवार को गिरावट के साथ हुई. इस दौरान सेंसेक्स 472.96 अंक या 0.61 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 76,471.32 और निफ्टी 197.80 अंक या 0.82 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,858.00 पर था. बाजार में बिकवाली व्यापक आधार पर देखी गई. करीब सभी सूचकांक लाल निशान में थे. 

इन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट

निफ्टी ऑटो, निफ्टी आईटी, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज सबसे ज्यादा गिरने वाले सूचकांकों में शामिल थे. लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बड़ी बिकवाली देखी गई. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 725.80 अंक या 1.15 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 62,608.70 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 199.85 अंक या 1.00 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 19,686.40 पर था.

गिरावट के बीच इन शेयरों में दिखी तेजी

सेंसेक्स पैक में सन फार्मा और अदाणी पोर्ट्स गेनर्स थे. इन्फोसिस, एचसीएल टेक, टीसीएस, इंडिगो, एमएंडएम, एचडीएफसी बैंक, एनटीपीसी, टेक महिंद्रा, बीईएल, एचडीएफसी बैंक, एशियन पेंट्स, इटरनल, आईटीसी, टाटा स्टील, मारुति सुजुकी, बजाज फिनसर्व, टाटा स्टील और टाइटन लाल निशान में थे. ज्यादातर एशियाई बाजारों में गिरावट के साथ कारोबार हो रहा है. टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, सोल और बैंकॉक लाल निशान में थे. अमेरिकी बाजार भी मंगलवार को लाल निशान में बंद हुए थे, जिसमें डाओ जोन्स 0.79 प्रतिशत की गिरावट के साथ और नैस्डैक 1.03 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ.

अमेरिका-ईरान युद्ध का दिख रहा बाजार पर असर

भारत के साथ वैश्विक बाजारों के गिरने की वजह अमेरिका और ईरान के बीच फिर से युद्ध शुरू होना है. विदेशी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसने मंगलवार को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के ठिकानों पर कई हमले किए. इन ठिकानों में एयर डिफेंस साइट्स, रडार सिस्टम, समुद्री संपत्तियां और सुविधाएं, माइन बिछाने की क्षमताएं और कम्युनिकेशन साइट्स शामिल थीं.

इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन और इराक में अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया. इससे कच्चे तेल में बड़ा उछाल देखने को मिला है. बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का दाम 4 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 95 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड का दाम 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है.

स्रोत- आईएएनएस

Continue reading on the app

Explainer: हिमालय में जलवायु संकट को दूर करेगा भारत? नेपाली सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने की ये खास मांग

Himalayas Climate Crisis: नेपाल एक बार फिर हिमालय से आई तबाही का शिकार हुआ है. देश में 1100 के करीब लोगों की मौत हो चुकी है. करीब 4000 लोग अभी भी लापता हैं. भारत समेत 4 देश नेपाल में रेस्क्यू अभियान में सहयोग दे रहे हैं. इसी बीच हिमालय में जलवायु संकट का मुद्दा जोर पकड़ता जा रहा है. नेपाल इसके लिए भारत के तरफ उम्मीद की नजर से देख रहा है. 

नेपाल में 26 अगस्त को रसुवा, नुवाकोट और दूसरे जिलों में भोटेकोशी और त्रिशुली नदी में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई. लगातार सामने आ रही रिपोर्टों से पता चलता है कि नेपाल में किसी एक नदी बेसिन में आई बाढ़ से पहले कभी इतनी बड़ी तबाही नहीं हुई थी. वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले के शुरुआती अनुमान के मुताबिक, इस आपदा से करीब 5 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है.

द काठमांडू न्यूजपेपर में नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश आनंदा मोहन भट्टराई का लेख प्रकाशित हुआ है. इसमें आनंदा मोहन ने लिखा कि भूवैज्ञानिकों और जलवायु वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह घटना बर्फ और चट्टानों के खिसकने के साथ आई हिमनदी बाढ़ से जुड़ी है. कुछ विशेषज्ञ इसे 'हिमालयी सुनामी' भी कह रहे हैं.  भारत के साथ ही आनंदा ने चीन का भी जिक्र किया.

यह भी पढ़ें: Explainer: पर्यावरण नहीं बल्कि अब आर्थिक संकट बनने लगी है हिमालय क्षेत्र में होने वाली आपदाएं

 

क्या भारत को बड़ी भूमिका निभानी चाहिए?

आनंदा मोहन ने मांग करते हुए लिखा कि अब सवाल उठता है कि क्या भारत और चीन को सिर्फ आपदा के समय मदद करने तक सीमित रहना चाहिए? क्या उन्हें हिमालय में बढ़ते जलवायु संकट से निपटने में नेतृत्व नहीं करना चाहिए? दुनिया के दूसरे पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यावरण और लोगों की सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय समझौते मौजूद हैं. आल्प्स, एंडीज और कार्पेथियन पर्वतमाला के देशों ने मिलकर ऐसे समझौते किए हैं. इसी तरह हिमालय को बचाने के लिए भी भारत, चीन, नेपाल और दूसरे संबंधित देशों के बीच एक क्षेत्रीय कानूनी समझौता किया जा सकता है.

भारत में भी होता है असर

लिखा कि नेपाल के साथ-साथ भारत, पाकिस्तान और चीन में भी पिछले कुछ वर्षों में बढ़ते तापमान, बर्फ और ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और हिमनदी झीलों के फटने यानी GLOF जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं. लेकिन भोटेकोशी-त्रिशुली की बाढ़ की सबसे बड़ी खासियत इसका बड़े इलाके में फैला असर और नुकसान का विशाल स्तर है. इस संकट के बीच पूरी दुनिया नेपाल के साथ खड़ी दिखाई दे रही है. देश के अंदर भी लोग राहत और बचाव के लिए एकजुट हैं. हर कोई चाहता है कि ऐसी तबाही दोबारा न हो. लेकिन हिमालय में लगातार बढ़ रहे तापमान और बदलते पर्यावरण को देखते हुए यह खतरा आगे भी बना रह सकता है.

हिमालय में तेजी से बढ़ रहा खतरा

आनंदा मोहन ने जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र की वैज्ञानिक रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि पर्वतीय इलाके जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में शामिल हैं. हिंदू कुश हिमालय यानी HKH क्षेत्र में तापमान बढ़ने की रफ्तार वैश्विक औसत से करीब दो से पांच गुना ज्यादा बताई गई है.

इस क्षेत्र में तापमान बढ़ रहा है, मौसम का पैटर्न बदल रहा है, बर्फ कम हो रही है, ग्लेशियरों का आकार और द्रव्यमान घट रहा है और पर्माफ्रॉस्ट यानी जमीन में जमी बर्फ तेजी से पिघल रही है. साथ ही हिमनदी झीलों की संख्या भी बढ़ रही है. ICIMOD के मुताबिक, हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में 1,444 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली 25,614 हिमनदी झीलों का दस्तावेजीकरण किया गया है. यह स्थिति भविष्य में बड़ी आपदाओं का खतरा बढ़ाती है. कहा कि हिमालय एक अरब से ज्यादा लोगों के लिए पानी, ऊर्जा और रोजगार का बड़ा स्रोत है. इसलिए इसका नुकसान सिर्फ पहाड़ी इलाकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है.

देशों की जिम्मेदारी क्या है?

रिपोर्ट के अनसुार, जलवायु संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून में देशों की दो बड़ी जिम्मेदारियां मानी जाती हैं. पहली, दूसरे देशों के पर्यावरण को गंभीर नुकसान से बचाना और दूसरी, पर्यावरण की सुरक्षा के लिए एक-दूसरे के साथ सहयोग करना. अंतरराष्ट्रीय न्यायालय यानी ICJ ने भी अपने 23 जुलाई 2025 के सलाहकारी मत में राज्यों की जिम्मेदारी पर जोर दिया है. इसके तहत देशों को उपलब्ध संसाधनों के जरिए संभावित नुकसान को रोकने की कोशिश करनी चाहिए. इसमें जोखिम का आकलन करना, दूसरे देशों को जानकारी देना और उनके साथ बातचीत करना भी शामिल है. इसलिए हिमालय को बचाने के लिए सिर्फ आपदा आने के बाद राहत पहुंचाना पर्याप्त नहीं है. आपदा से पहले तैयारी, जोखिम कम करने और जलवायु परिवर्तन के असर को रोकने पर भी काम करना जरूरी है.

यह भी पढ़ें: Explainer: होर्मुज में ईरान की नई चाल से डरा अमेरिका? रॉकेट से समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने का दावा कितना सच

 

क्षेत्रीय संधि की जरूरत पर दिया जोर

पूर्व जज मोहन ने लिखा कि हिमालयी देशों के बीच एक क्षेत्रीय समझौता कई स्तरों पर काम कर सकता है. इसमें जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान को कम करने, ग्लेशियरों और जैव विविधता को बचाने और प्रभावित लोगों की मदद करने के प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं. इस समझौते में वित्तीय मदद, नई तकनीक, वैज्ञानिक जानकारी का आदान-प्रदान, संयुक्त जोखिम आकलन, वास्तविक समय में डेटा साझा करना, निगरानी और क्षमता बढ़ाने जैसे प्रावधान भी हो सकते हैं. इसके अलावा, जलवायु आपदा से प्रभावित लोगों के लिए मुआवजे और आर्थिक सहायता की व्यवस्था भी की जा सकती है.

भारत और चीन के लिए भी जरूरी है सहयोग

भारत और चीन पहले ही जलवायु परिवर्तन को लेकर सहयोग की कोशिश कर चुके हैं. 2009 में दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन पर नीतिगत समन्वय और व्यावहारिक सहयोग के लिए एक संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति जताई थी.

इसी तरह 2019 में चीन और नेपाल के बीच आपदा जोखिम कम करने और आपात स्थिति में मदद को लेकर समझौता हुआ था। इन पहलों को आगे बढ़ाकर हिमालय के पर्यावरण और जलवायु की सुरक्षा के लिए एक बड़े क्षेत्रीय समझौते की नींव रखी जा सकती है.

इस तरह की संधि वैज्ञानिक तथ्यों और उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित होनी चाहिए। इसमें जलवायु परिवर्तन को रोकने, उसके असर को कम करने और बदलती परिस्थितियों के मुताबिक खुद को तैयार करने के साथ-साथ मानवाधिकारों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

अब सिर्फ चेतावनी नहीं, कार्रवाई की जरूरत

हिमालय में बढ़ता तापमान, तेजी से पिघलते ग्लेशियर, बढ़ती हिमनदी झीलें और लगातार सामने आ रही बाढ़ की घटनाएं साफ संकेत दे रही हैं कि खतरा बढ़ रहा है. आनंदा मोहन ने कहा कि ऐसे में सवाल यह नहीं होना चाहिए कि भारत, चीन और दूसरे हिमालयी देश मिलकर जलवायु संकट पर कार्रवाई करें या नहीं. सवाल यह है कि वे कितनी जल्दी और कितने बड़े स्तर पर ऐसा करते हैं.

हिमालय को बचाने के लिए क्षेत्रीय सहयोग और एक मजबूत कानूनी व्यवस्था अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गया है. यह लाखों-करोड़ों लोगों के जीवन, पानी, आजीविका और भविष्य की सुरक्षा का सवाल बन चुका है.

यह भी पढ़ें: EXPLAINER: विराट कोहली के शरीर पर बने हैं 12 टैटू, हर एक के पीछे है अलग कहानी, यहां जानिए सभी की पूरी डीटेल

 

 

 

Continue reading on the app

  Sports

India vs Hong Kong LIVE Score: हांकांग ने टॉस जीतकर भारत को पहले बल्लेबाजी के लिए बुलाया

IND W vs HKC W Live Score Updates: भारत और हांगकांग के बीच महिला एशिया कप का सातवां मुकाबला दुबई में खेला जा रहा है. भारतीय टीम टॉस हारकर पहले बैटिंग कर रही है. भारत ने अपने प्लेइंग इलेवन में कोई बदलाव नहीं किया है. थाईलैंड के खिलाफ जो प्लेइंग इलेवन भारत ने उतारा था उसी के साथ इस मुकाबले में भी उतरने का फैसला लिया है. Thu, 3 Sep 2026 19:42:12 +0530

  Videos
See all

Ram Mandir New CEO: ‘ऑपरेशन सिंदूर का सच छिपा रहे?’ राम मंदिर CEO पर कांग्रेस के आरोप, BJP का पलटवार #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-03T14:14:38+00:00

कॉकरोच जनता पार्टी में दो फाड़ | देखिये पूछता है भारत में Aishwarya Ka Agenda| Dipke Vs Manish | AAP #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-03T14:15:29+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers