Explainer: हिमालय में जलवायु संकट को दूर करेगा भारत? नेपाली सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने की ये खास मांग
Himalayas Climate Crisis: नेपाल एक बार फिर हिमालय से आई तबाही का शिकार हुआ है. देश में 1100 के करीब लोगों की मौत हो चुकी है. करीब 4000 लोग अभी भी लापता हैं. भारत समेत 4 देश नेपाल में रेस्क्यू अभियान में सहयोग दे रहे हैं. इसी बीच हिमालय में जलवायु संकट का मुद्दा जोर पकड़ता जा रहा है. नेपाल इसके लिए भारत के तरफ उम्मीद की नजर से देख रहा है.
नेपाल में 26 अगस्त को रसुवा, नुवाकोट और दूसरे जिलों में भोटेकोशी और त्रिशुली नदी में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई. लगातार सामने आ रही रिपोर्टों से पता चलता है कि नेपाल में किसी एक नदी बेसिन में आई बाढ़ से पहले कभी इतनी बड़ी तबाही नहीं हुई थी. वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले के शुरुआती अनुमान के मुताबिक, इस आपदा से करीब 5 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है.
द काठमांडू न्यूजपेपर में नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश आनंदा मोहन भट्टराई का लेख प्रकाशित हुआ है. इसमें आनंदा मोहन ने लिखा कि भूवैज्ञानिकों और जलवायु वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह घटना बर्फ और चट्टानों के खिसकने के साथ आई हिमनदी बाढ़ से जुड़ी है. कुछ विशेषज्ञ इसे 'हिमालयी सुनामी' भी कह रहे हैं. भारत के साथ ही आनंदा ने चीन का भी जिक्र किया.
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क्या भारत को बड़ी भूमिका निभानी चाहिए?
आनंदा मोहन ने मांग करते हुए लिखा कि अब सवाल उठता है कि क्या भारत और चीन को सिर्फ आपदा के समय मदद करने तक सीमित रहना चाहिए? क्या उन्हें हिमालय में बढ़ते जलवायु संकट से निपटने में नेतृत्व नहीं करना चाहिए? दुनिया के दूसरे पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यावरण और लोगों की सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय समझौते मौजूद हैं. आल्प्स, एंडीज और कार्पेथियन पर्वतमाला के देशों ने मिलकर ऐसे समझौते किए हैं. इसी तरह हिमालय को बचाने के लिए भी भारत, चीन, नेपाल और दूसरे संबंधित देशों के बीच एक क्षेत्रीय कानूनी समझौता किया जा सकता है.
भारत में भी होता है असर
लिखा कि नेपाल के साथ-साथ भारत, पाकिस्तान और चीन में भी पिछले कुछ वर्षों में बढ़ते तापमान, बर्फ और ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और हिमनदी झीलों के फटने यानी GLOF जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं. लेकिन भोटेकोशी-त्रिशुली की बाढ़ की सबसे बड़ी खासियत इसका बड़े इलाके में फैला असर और नुकसान का विशाल स्तर है. इस संकट के बीच पूरी दुनिया नेपाल के साथ खड़ी दिखाई दे रही है. देश के अंदर भी लोग राहत और बचाव के लिए एकजुट हैं. हर कोई चाहता है कि ऐसी तबाही दोबारा न हो. लेकिन हिमालय में लगातार बढ़ रहे तापमान और बदलते पर्यावरण को देखते हुए यह खतरा आगे भी बना रह सकता है.
हिमालय में तेजी से बढ़ रहा खतरा
आनंदा मोहन ने जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र की वैज्ञानिक रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि पर्वतीय इलाके जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में शामिल हैं. हिंदू कुश हिमालय यानी HKH क्षेत्र में तापमान बढ़ने की रफ्तार वैश्विक औसत से करीब दो से पांच गुना ज्यादा बताई गई है.
इस क्षेत्र में तापमान बढ़ रहा है, मौसम का पैटर्न बदल रहा है, बर्फ कम हो रही है, ग्लेशियरों का आकार और द्रव्यमान घट रहा है और पर्माफ्रॉस्ट यानी जमीन में जमी बर्फ तेजी से पिघल रही है. साथ ही हिमनदी झीलों की संख्या भी बढ़ रही है. ICIMOD के मुताबिक, हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में 1,444 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली 25,614 हिमनदी झीलों का दस्तावेजीकरण किया गया है. यह स्थिति भविष्य में बड़ी आपदाओं का खतरा बढ़ाती है. कहा कि हिमालय एक अरब से ज्यादा लोगों के लिए पानी, ऊर्जा और रोजगार का बड़ा स्रोत है. इसलिए इसका नुकसान सिर्फ पहाड़ी इलाकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है.
देशों की जिम्मेदारी क्या है?
रिपोर्ट के अनसुार, जलवायु संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून में देशों की दो बड़ी जिम्मेदारियां मानी जाती हैं. पहली, दूसरे देशों के पर्यावरण को गंभीर नुकसान से बचाना और दूसरी, पर्यावरण की सुरक्षा के लिए एक-दूसरे के साथ सहयोग करना. अंतरराष्ट्रीय न्यायालय यानी ICJ ने भी अपने 23 जुलाई 2025 के सलाहकारी मत में राज्यों की जिम्मेदारी पर जोर दिया है. इसके तहत देशों को उपलब्ध संसाधनों के जरिए संभावित नुकसान को रोकने की कोशिश करनी चाहिए. इसमें जोखिम का आकलन करना, दूसरे देशों को जानकारी देना और उनके साथ बातचीत करना भी शामिल है. इसलिए हिमालय को बचाने के लिए सिर्फ आपदा आने के बाद राहत पहुंचाना पर्याप्त नहीं है. आपदा से पहले तैयारी, जोखिम कम करने और जलवायु परिवर्तन के असर को रोकने पर भी काम करना जरूरी है.
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क्षेत्रीय संधि की जरूरत पर दिया जोर
पूर्व जज मोहन ने लिखा कि हिमालयी देशों के बीच एक क्षेत्रीय समझौता कई स्तरों पर काम कर सकता है. इसमें जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान को कम करने, ग्लेशियरों और जैव विविधता को बचाने और प्रभावित लोगों की मदद करने के प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं. इस समझौते में वित्तीय मदद, नई तकनीक, वैज्ञानिक जानकारी का आदान-प्रदान, संयुक्त जोखिम आकलन, वास्तविक समय में डेटा साझा करना, निगरानी और क्षमता बढ़ाने जैसे प्रावधान भी हो सकते हैं. इसके अलावा, जलवायु आपदा से प्रभावित लोगों के लिए मुआवजे और आर्थिक सहायता की व्यवस्था भी की जा सकती है.
भारत और चीन के लिए भी जरूरी है सहयोग
भारत और चीन पहले ही जलवायु परिवर्तन को लेकर सहयोग की कोशिश कर चुके हैं. 2009 में दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन पर नीतिगत समन्वय और व्यावहारिक सहयोग के लिए एक संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति जताई थी.
इसी तरह 2019 में चीन और नेपाल के बीच आपदा जोखिम कम करने और आपात स्थिति में मदद को लेकर समझौता हुआ था। इन पहलों को आगे बढ़ाकर हिमालय के पर्यावरण और जलवायु की सुरक्षा के लिए एक बड़े क्षेत्रीय समझौते की नींव रखी जा सकती है.
इस तरह की संधि वैज्ञानिक तथ्यों और उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित होनी चाहिए। इसमें जलवायु परिवर्तन को रोकने, उसके असर को कम करने और बदलती परिस्थितियों के मुताबिक खुद को तैयार करने के साथ-साथ मानवाधिकारों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
अब सिर्फ चेतावनी नहीं, कार्रवाई की जरूरत
हिमालय में बढ़ता तापमान, तेजी से पिघलते ग्लेशियर, बढ़ती हिमनदी झीलें और लगातार सामने आ रही बाढ़ की घटनाएं साफ संकेत दे रही हैं कि खतरा बढ़ रहा है. आनंदा मोहन ने कहा कि ऐसे में सवाल यह नहीं होना चाहिए कि भारत, चीन और दूसरे हिमालयी देश मिलकर जलवायु संकट पर कार्रवाई करें या नहीं. सवाल यह है कि वे कितनी जल्दी और कितने बड़े स्तर पर ऐसा करते हैं.
हिमालय को बचाने के लिए क्षेत्रीय सहयोग और एक मजबूत कानूनी व्यवस्था अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गया है. यह लाखों-करोड़ों लोगों के जीवन, पानी, आजीविका और भविष्य की सुरक्षा का सवाल बन चुका है.
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IND VS AFG: 13 सितंबर से एक्शन में लौटेगी टीम इंडिया, नोट कर लीजिए भारत-अफगानिस्तान सीरीज का शेड्यूल और टाइम
IND VS AFG: सितंबर महीना शुरू हो चुका है और अब टीम इंडिया भी एक्शन में वापसी के लिए पूरी तरह तैयार है. भारत को 13 सितंबर से अफगानिस्तान के साथ 3 मैचों की टी-20 सीरीज खेलनी है, जिसका हर किसी को बेसब्री से इंतजार है. इस सीरीज की मेजबानी अफगानिस्तान करेगी और मुकाबले अरुण जेटली स्टेडियम में खेले जाएंगे. इस सीरीज के लिए अफगानिस्तान तो पहले ही अपने स्क्वाड का ऐलान कर चुका था और अब मंगलवार को बीसीसीआई ने भी स्क्वाड का ऐलान कर दिया. तो आइए इस आर्टिकल में आपको भारत-अफगानिस्तान के बीच खेली जाने वाली टी-20 सीरीज के बारे में विस्तार से बताते हैं.
अफगानिस्तान करेगी सीरीज की मेजबानी
अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (ACB) भारत के खिलाफ आगामी सीरीज की मेजबानी कर रहा है क्योंकि आईसीसी (ICC) के फ्यूचर टूर प्रोग्राम (FTP) के तहत यह अफगानिस्तान का निर्धारित 'घरेलू' मुकाबला है, लेकिन सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण वे अपने मैच अपने देश में नहीं खेल सकते हैं.
India’s squad for Afghanistan T20I series announced. #TeamIndia will play three T20Is against Afghanistan at New Delhi, beginning September 13.#AFGvIND pic.twitter.com/UqTUeZyHz8
— BCCI (@BCCI) September 1, 2026
कितने बजे शुरू होंगे मैच?
अफगानिस्तान और भारत के बीच खेले जाने वाले तीनों ही मुकाबले अरुण जेटली स्टेडियम में खेले जाने वाले हैं. ये मैच भारतीय समयानुसार, शाम 7 बजे शुरू होंगे. इसका मतलब है कि टॉस के लिए दोनों टीमों के कप्तान 6.30 बजे मैदान पर उतरेंगे.
भारत बनाम अफगानिस्तान (T20 सीरीज)
THE SQUAD IS SET!????
— Star Sports (@StarSportsIndia) September 1, 2026
Team India’s T20I squad for the Afghanistan series is here!
Led by Shreyas Iyer, the Men in Blue are ready for the challenge. ????#AFGvsIND pic.twitter.com/yn5VXvwpji
भारतीय क्रिकेट टीम और अफगानिस्तान क्रिकेट टीम के बीच 13 सितंबर से 3 मैचों की टी-20 सीरीज खेली जाने वाली है. इस सीरीज का पहला मैच 13 सितंबर को, दूसरा टी-20 15 सितंबर और तीसरा टी-20 मैच 17 सितंबर को खेला जाएगा. तीनों ही मुकाबले अरुण जेटली स्टेडियम, दिल्ली में खेले जाएंगे.
| मैच | तारीख | दिन | मुकाबला | समय (IST) | वेन्यू |
|---|---|---|---|---|---|
| पहला T20I | 13 सितंबर 2026 | रविवार | अफगानिस्तान VS भारत | शाम 7:00 बजे | अरुण जेटली स्टेडियम, दिल्ली |
| दूसरा T20I | 15 सितंबर 2026 | मंगलवार | अफगानिस्तान VS भारत | शाम 7:00 बजे | अरुण जेटली स्टेडियम, दिल्ली |
| तीसरा T20I | 17 सितंबर 2026 | गुरुवार | अफगानिस्तान VS भारत | शाम 7:00 बजे | अरुण जेटली स्टेडियम, दिल्ली |
T20I सीरीज के लिए भारत और अफगानिस्तान का स्क्वाड
अफगानिस्तान क्रिकेट टीम: श्रेयस अय्यर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, संजू सैमसन, ईशान किशन, तिलक वर्मा (उपकप्तान), शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, वरुण चक्रवर्ती, रवि बिश्नोई, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा.
टीम इंडिया : इब्राहिम जादरान (कप्तान), रहमानुल्लाह गुरबाज (विकेटकीपर), नूर रहमान (विकेटकीपर), सेदिकुल्लाह अटल, दरवेश रसूली, अजमतुल्लाह उमरजई, गुलबदीन नायब, मोहम्मद नबी, राशिद खान, नंग्याल खारोटी, नूर अहमद, मुजीब उर रहमान, फजलहक फारूकी, अब्दुल्ला अहमदजई, नवीन-उल-हक.
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