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Uttarakhand Election 2027: नैनीताल की 6 सीटों पर सियासी गहमागहमी....
Uttarakhand Election 2027: उत्तराखंड की सियासत में कुमाऊं मंडल का दिल कहा जाने वाला नैनीताल जिला राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और रणनीतिक महत्व रखने वाला क्षेत्र है. 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर यहां भी सियासी बिसात बिछने लगी है और हलचल तेज हो गई है. अपनी खूबसूरत झीलों, नैना देवी मंदिर और मनमोहक वादियों के लिए दुनिया भर में मशहूर नैनीताल की राजनीति में पहाड़ी और मैदानी वोटरों के साथ-साथ पर्यटन से जुड़े मुद्दों की भूमिका बेहद अहम रहती है. राजनीतिक जानकारों की मानें तो जिले की सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच पारंपरिक और सीधा मुकाबला रहा है, जबकि निर्दलीय और अन्य क्षेत्रीय दल भी समय-समय पर समीकरण बिगाड़ते रहे हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जिले की अधिकांश सीटों पर अपना परचम लहराकर मजबूत बढ़त बनाई थी, वहीं कांग्रेस अपनी खोई जमीन वापस पाने की पुरजोर कोशिश में है. ऐसे में 2027 में भाजपा के सामने अपने इस प्रदर्शन को दोहराने और विपक्ष के लिए इस सियासी किले को भेदने की बड़ी परीक्षा होगी.
‘कुर्सी का काउंटडाउन’ की इस सीरीज में आज बात नैनीताल की…
नैनीताल जिला, जिसकी पहचान सिर्फ नैनी झील और ठंडी वादियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका राजनीतिक और ऐतिहासिक इतिहास भी बेहद समृद्ध रहा है. यह वही नैनीताल है, जिसे ब्रिटिश काल में 'समर कैपिटल' (ग्रीष्मकालीन राजधानी) का दर्जा हासिल था. अंग्रेजों ने अपनी प्रशासनिक सहूलियत के लिए इस खूबसूरत शहर को बसाया, जहां आज भी राजभवन जैसी औपनिवेशिक विरासतें मौजूद हैं. आजादी के आंदोलन से लेकर पृथक उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन तक, नैनीताल की जनता ने हर मोड़ पर अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई है.
नैनीताल जिला आज पर्यटन, सेब के बागानों, उच्च शिक्षा संस्थानों (जैसे कुमाऊं विश्वविद्यालय) और विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट नेशनल पार्क के प्रवेश द्वार (रामनगर) के रूप में दुनियाभर में प्रसिद्ध है. लेकिन इन सब के बीच, हल्द्वानी के मैदानी हलचल से लेकर नैनीताल की पहाड़ियों तक यहां की सियासत का अपना एक अलग मिज़ाज है. आखिर नैनीताल जिले की विधानसभा सीटों का राजनीतिक इतिहास क्या कहता है? किस सीट पर किस पार्टी का दबदबा रहा है? कौन-से चेहरे यहां बाजी मारते आए हैं और 2027 में किसका सिक्का चल सकता है? आइये सिलसिलेवार ढंग से जानते हैं…
नजरें सबसे पहले कुछ आंकड़ों पर
अब हर एक सीट के बारे में विस्तार से जानें
नैनीताल (SC) विधानसभा सीट (संख्या-58): यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है और प्रसिद्ध पर्यटन स्थल नैनीताल क्षेत्र इसके अंतर्गत आता है. वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की मती सरिता आर्या यहाँ से विधायक हैं.
हल्द्वानी विधानसभा सीट (संख्या-59): हल्द्वानी को कुमाऊं का प्रवेश द्वार माना जाता है और यह इस क्षेत्र का एक प्रमुख व्यापारिक और शैक्षिक केंद्र है. वर्तमान में यहाँ से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के सुमित हृदयेश विधायक हैं.
लालकुआँ विधानसभा सीट (संख्या-56): यह क्षेत्र अपने बड़े रेलवे जंक्शन और प्रमुख उद्योगों (जैसे पेपर मिल) के लिए जाना जाता है. वर्तमान में यहाँ का प्रतिनिधित्व भाजपा (BJP) के डॉ. मोहन सिंह बिष्ट कर रहे हैं.
भीमताल विधानसभा सीट (संख्या-57): सुंदर झीलों और पहाड़ी वादियों से घिरा यह क्षेत्र पर्यटन और कृषि के लिए बेहद प्रसिद्ध है. यहाँ से वर्तमान विधायक भाजपा (BJP) के राम सिंह कैड़ा हैं.
कालाढूंगी विधानसभा सीट (संख्या-60): यह निर्वाचन क्षेत्र मैदानी और पहाड़ी दोनों भौगोलिक क्षेत्रों को आपस में जोड़ता है और प्रसिद्ध शिकारी जिम कॉर्बेट का घर भी यहीं स्थित है. यहाँ से वरिष्ठ भाजपा नेता बंशीधर भगत विधायक हैं.
रामनगर विधानसभा सीट (संख्या-61): यह क्षेत्र विश्व प्रसिद्ध 'जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क' का मुख्य प्रवेश द्वार होने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन का बड़ा केंद्र है. यहाँ से वर्तमान में भाजपा (BJP) के दीवान सिंह बिष्ट विधायक हैं.
अब आगे क्या होगा?
नैनीताल एक ऐसा जिला, जहां 2022 में भाजपा का दबदबा था, नैनीताल की 6 विधानसभा सीटों में से 5 पर अभी भाजपा का कब्जा है. वहीं एक सीट पर कांग्रेस का विधायक है. अब सवाल 2027 का है कि क्या कांग्रेस यहां BJP को चुनौती दे पाएगा या फिर BJP फिर से यहां झंडा गाड़ने वाली है? पिछले चुनावों में आप नैनीताल की कुछ सीटों पर तीसरे नंबर पर रही तो एक सवाल यह भी है क्या इस बार आप कांग्रेस को पीछे करके मुख्य विपक्ष की भूमिका निभा सकती है? सवाल तो बहुत सारे हैं, जिसका जवाब तो अब 2027 के विधानसभा चुनाव परिणाम सामने आने के बाद ही क्लीयर हो पाएंगे.
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