शेख हसीना का हिसाब करो....Bangladesh की भारत को गीदड़ भभकी, फिर विदेश मंत्रालय ने जो किया, युनूस भी सन्न
भारत के विदेश मंत्रालय ने ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए बांग्लादेश के उच्चायुक्त एम रियाज़ हामिदुल्लाह को तलब किया। यह तलब बांग्लादेश में अस्थिरता की स्थिति में सात बहनों को अलग-थलग करने और पूर्वोत्तर के अलगाववादियों को शरण देने की धमकी देने वाले राष्ट्रीय नागरिक दल (एनसीपी) के नेता हसनत अब्दुल्ला के भारत विरोधी बयानों के बाद जारी की गई है। अब्दुल्ला अपने कड़े भारत विरोधी रुख के लिए जाने जाते हैं।
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इससे पहले, भारत के दिल्ली स्थित बांग्लादेश दूतावास में सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ बांग्लादेश विजय दिवस मनाया गया। उच्चायुक्त एम रियाज़ हामिदुल्लाह ने बांग्लादेश की अपने लोगों, विशेषकर युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं को पूरा करने की प्रतिबद्धता पर जोर दिया और देश की युवा आबादी को उजागर किया।
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हमीदुल्लाह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि बांग्लादेश और भारत के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध हैं, जिनका केंद्र बिंदु समृद्धि, शांति और क्षेत्रीय सुरक्षा है। उन्होंने दोनों देशों की परस्पर निर्भरता का उल्लेख करते हुए उनकी साझेदारी के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पूरा बांग्लादेश, और हम सभी, अपने लोगों, विशेषकर युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारी जनसंख्या में युवा आबादी बहुत अधिक है... हमारा मानना है कि भारत के साथ हमारा संबंध हमारे साझा हित में है। हमारी परस्पर निर्भरता है... हम क्षेत्र में समृद्धि, शांति और सुरक्षा पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में बांग्लादेश की समृद्ध संस्कृति और विरासत का प्रदर्शन किया गया और उसकी मुक्ति एवं स्वतंत्रता का जश्न मनाया गया। उच्चायुक्त के संबोधन में बांग्लादेश की अपने लोगों के हितों को आगे बढ़ाने और भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता झलकती है।
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इस बीच, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बांग्लादेश को अपनी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने एक पोस्ट में कहा कि विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन, अंतरिम सरकार और बांग्लादेश की जनता को विजय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। बांग्लादेश स्थित भारतीय उच्चायोग ने बताया कि मुक्ति युद्ध की 54वीं वर्षगांठ के अवसर पर, आठ वीर मुक्तिजोद्धा और बांग्लादेश सशस्त्र बलों के दो सेवारत अधिकारी 14 दिसंबर 2025 को कोलकाता में विजय दिवस समारोह में भाग लेने के लिए भारत पहुंचे। इसी प्रकार, आठ भारतीय युद्ध अनुभवी और भारतीय सशस्त्र बलों के दो सेवारत अधिकारी 15 दिसंबर 2025 को बांग्लादेश के विजय दिवस समारोह में भाग लेने के लिए ढाका पहुंचे।
7 साल पीछे चलने वाले देश में अचानक गूंजा वंदे मातरम, दोनों हाथ उठाकर ताली बजाने लगे मोदी, Video वायरल
पूरी दुनिया एक ही तरह से समय के हिसाब से चलती है। लेकिन इथोपिया ने अपने पुराने कैलेंडर को आज भी थामे रखा है। सात साल पीछे चलने वाला समय और 13 महीने चलने वाला साल व हजारों सालों की परंपरा यही इस देश की सबसे बड़ी पहचान है। 15 सालों में पहली बार भारत के प्रधानमंत्री का इथोपिया का दौरा हुआ। इथोपिया की संसद में पीएम मोदी ने अपना संबोधन भी दिया। यह दुनिया की 18वीं संसद है जहां प्रधानमंत्री मोदी ने भाषण दिया।
वंदे मातरम की प्रस्तुति मुस्कुराए मोदी
इथियोपिया की राजधानी अदीस अबबाबा भव्य डिनर हॉल स्टेज पर खड़े इथियोपियाई कलाकार और जैसे ही गूंजते हैं शब्द वंदे मातरम कैमरा कट करता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर मोदी मुस्कुराते हैं दोनों हाथ उठाते हैं तालियों की गूंज से पूरा हॉल भर जाता है। यह सिर्फ एक गाना नहीं था। यह था भारत के सम्मान का वह पल जिसने पूरी दुनिया का दिल जीत लिया। दरअसल इथियोपिया सरकार की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में एक भव्य राजकीय भोज आयोजित किया गया। इस डिनर की मेजबानी खुद इथियोपिया के प्रधानमंत्री अभी अहमद अली ने की। इस डिनर को ऐतिहासिक बना दिया वंदे मातरम की प्रस्तुति ने। जैसे ही मंच पर इथियोपियाई सिंगर्स आए उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की मधुर प्रस्तुति की। उच्चारण साफ था। सुरों में सम्मान था और भाव में भारत के लिए प्रेम था। ऐसे में पूरा हॉल मंत्र मुग्ध हो गया और फिर कैमरा गया। सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर मोदी मुस्कुराए, हाथ उठाया, तालियों से शुरुआत की। फिर दोनों हाथ ऊपर उठाकर कलाकारों की हौसला अपजाई की। यह पल इतना भावुक था वहां मौजूद हर भारतीय की आंखें नम हो गई।
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उपनिवेशवाद के दौर में भी आजाद मुल्क इथोपिया
आपको बता दें कि इथोपिया केवल एक देश नहीं है बल्कि अफ्रीका के इतिहास की एक बड़ी पहचान है। कहा जाता है कि इथोपिया की स्थापना 980 बीसी यानी आज से करीब तीन हजार साल पहले हुई। इस देश की सबसे बड़ी बात ये रही कि जब दुनिया के कई हिस्सों में साम्राज्य बन रहे थे और टूट रहे थे। जब उपनिवेशवाद ने एशिया और अफ्रीका को जकड़ लिया। तब भी इथोपिया अपने आजादी के साथ खड़ा रहा।
समय और कैलेंडर की अनोखी परंपरा
इथियोपिया की सबसे अजीब और हैरान करने वाली बात उसका कैलेंडर है। इथियोपिया आज की दुनिया से लगभग सात साल पीछे चलता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जब रोमन चर्च ने 525 ईस्वी में अपने पुराने कैलेंडर में बदलाव किए, तो इथियोपिया ने अपना प्राचीन कैलेंडर नहीं बदला। इसलिए, वे आज भी ग्रेगोरियन कैलेंडर से पीछे चल रहे हैं। एक दिलचस्प कहानी यह भी है कि इथियोपिया में साल भी 13 महीनों का होता है. आमतौर पर 12 महीने 30 दिनों के होते हैं और जो 13वां महीना होता है, वह सामान्य साल में 5 दिन का और लीप साल में 6 दिन का होता है।
When Vande Mataram echoes far from home in Eithopia PM Modi's warm and effervescent response marks a powerful moment of National Pride in Eithopia. pic.twitter.com/EqDrFSr05u
— Naina ???????? (@NaIna0806) December 17, 2025
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