प्रकृति का वरदान है लामज्जक, जोड़ों के दर्द और त्वचा रोगों में देता है आराम
नई दिल्ली, 1 सितंबर (आईएएनएस)। हमारे आसपास कई ऐसे पौधे पाए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल सदियों से आयुर्वेद और लोक चिकित्सा में अलग-अलग तरह से किया जाता रहा है। लामज्जक भी ऐसा ही एक औषधीय पौधा है। इसे पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में बुखार, गठिया, शरीर के दर्द और त्वचा से जुड़ी कुछ समस्याओं के लिए उपयोगी माना गया है।
आयुष मंत्रालय ने नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर बताया कि लामज्जक एक बहुवर्षीय जड़ी-बूटी है। इसका मतलब है कि यह एक बार उगने के बाद लंबे समय तक जीवित रह सकता है और अनुकूल परिस्थितियों में साल-दर-साल बढ़ता रहता है।
आयुर्वेद और लोक चिकित्सा में लामज्जक का पारंपरिक उपयोग बुखार में किया जाता रहा है। इसे शरीर में बढ़ी गर्मी को संतुलित करने में सहायक माना जाता है। हालांकि, तेज या लगातार बुखार कई गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकता है, इसलिए केवल किसी जड़ी-बूटी पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
लामज्जक का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से गाउट (गठिया के एक प्रकार) और रूमेटिज्म जैसी स्थितियों में भी बताया जाता है। शरीर में दर्द या जोड़ों की तकलीफ के दौरान इसे लोक चिकित्सा में उपयोग किया जाता रहा है। लेकिन दर्द का कारण जानना जरूरी है, क्योंकि अलग-अलग समस्याओं का उपचार भी अलग होता है।
लोक चिकित्सा में लामज्जक का उपयोग विभिन्न त्वचा संबंधी स्थितियों में भी किया जाता है। हालांकि त्वचा पर किसी भी पौधे या उसके लेप का इस्तेमाल सीधे करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में प्राकृतिक चीजें भी एलर्जी या जलन पैदा कर सकती हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार लामज्जक की रोपाई का समय जून से जुलाई के बीच बताया गया है। हालांकि मौसम, मिट्टी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता है, इसलिए खेती के लिए स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा।
बता दें कि लामज्जक घास कुल से संबंधित पौधा है। इसकी पहचान और सही उपयोग के लिए जानकार व्यक्ति या विशेषज्ञ की मदद लेना बेहतर होता है, क्योंकि औषधीय पौधों की सही पहचान बहुत जरूरी है।
--आईएएनएस
पीआईएम/एएस
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दिल्ली में वीजा नियमों का उल्लंघन करने वाले दो बांग्लादेशी नागरिक पकड़े गए
दिल्ली पुलिस ने विदेशी नागरिकों के वीजा स्टेटस और दस्तावेजों की जांच के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन विस्टा 1.0’ के तहत बड़ी कार्रवाई की है. सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की स्पेशल स्टाफ टीम ने वीजा की शर्तों का उल्लंघन कर भारत में तय अवधि से अधिक समय तक रहने वाले दो बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा है. पकड़े गए विदेशी नागरिकों की पहचान जमीर हुसैन (25) और मकसूदा अख्तर (39) के तौर पर हुई है. पुलिस के मुताबिक दोनों बांग्लादेश के रहने वाले हैं. दोनों भारत में डबल-एंट्री वीजा पर आए थे, जिसमें प्रत्येक यात्रा के दौरान अधिकतम 15 दिनों तक भारत में रहने की अनुमति थी.
होटल और गेस्ट हाउस में चला वेरिफिकेशन ड्राइव
स्पेशल स्टाफ की फॉरेनर सेल ने सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के अलग-अलग होटल और गेस्ट हाउस में विशेष वेरिफिकेशन ड्राइव चलाया. इस दौरान विदेशी नागरिकों के पासपोर्ट, वीजा और दूसरे यात्रा दस्तावेजों की जांच की गई. इसी दौरान पुलिस टीम को अराकाशन रोड, नबी करीम स्थित एक होटल में जमीर हुसैन के ठहरने की जानकारी मिली.
वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी नहीं लौटे बांग्लादेश
जांच में सामने आया कि वह 9 जुलाई 2026 को भारत आया था और वीजा में निर्धारित 15 दिनों की अवधि से अधिक समय तक यहां रह रहा था. इसके बाद पुलिस टीम ने चांदी वालान मेन बाजार, पहाड़गंज स्थित एक अन्य होटल में मकसूदा अख्तर को पकड़ा. वह 27 जुलाई 2026 को भारत आई थी. दस्तावेजों की जांच में उसके भी निर्धारित अवधि से अधिक समय तक भारत में रहने की पुष्टि हुई.
FRRO ने जारी किए प्रतिबंध संबंधी आदेश
पुलिस ने दोनों विदेशी नागरिकों के पासपोर्ट, वीजा और अन्य यात्रा दस्तावेजों की जांच की. पूछताछ और दस्तावेजों के वेरिफिकेशन के बाद दोनों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) के सामने पेश किया गया. FRRO की ओर से दोनों के खिलाफ प्रतिबंध संबंधी आदेश जारी किए गए. इसके बाद दोनों को सेवा धाम डिटेंशन सेंटर, शाहजादा बाग, सराय रोहिल्ला, दिल्ली में भेज दिया गया. दोनों विदेशी नागरिकों को डिपोर्टेशन की आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक डिटेंशन सेंटर में रखा गया है. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, ऑपरेशन विस्टा 1.0 के तहत विदेशी नागरिकों के वीजा और दस्तावेजों की जांच का अभियान आगे भी जारी रहेगा.
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