योगी सरकार की किसानों को सौगात, इन जिलों में लगेंगे CBG प्लांट; पराली जलाने की समस्या से मिलेगी निजात
UP News: योगी सरकार अब धान के किसानों को राहत देने जा रही है. जिसके लिए यूपी सरकार राज्य के 8 जिलों में सीबीजी प्लांट लगाने जा रही है. जिससे धान के किसानों को फसल करने के बाद पराली जलाने की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा. बता दें कि हर साल धान के सीजन में दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या बढ़ जाती है. इसी समस्या से निजात दिलाने के लिए योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. जिसके तहत उत्तर प्रदेश कृषि विभाग सीबीजी यानी कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट लगाने जा रहा है. विभाग की मानें तो इससे न सिर्फ प्रदूषण में कमी आएगी बल्कि किसानों की आय भी बढ़ेगी.
यूपी का 8 जिलों में लगाए जाएंगे सीबीजी प्लांट
कृषि विभाग के उप निदेशक बलराम वर्मा का कहना है कि राष्ट्रीय राजधानी के आठ जिलों में सीबीजी प्लांट की मशीनें वितरित करने का लक्ष्य है. जिससे दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर लगाम लगाई जा सके. उन्होंने कहा कि इस पहल से एक ओर हरित गैस का उत्पादन होगा तो वहीं दूसरी ओर जैविक खाद तैयार की जाएगी.
जिससे खेतों में मिट्टी को उपजाऊ बनाने में मदद मिलेगी. उन्होंने बताया कि इन प्लांट्स के जरिए किसानों से पराली और पुआल की खरीद की जाएगी. जिसकी अनुमानित कीमत 20 रुपये प्रति किलो हो सकती है. उन्होंने बताया कि पराली से कितनी मात्रा में हरित गैस बनेगी और किसानों को इससे कितना फायदा होगा इस बारे में अभी अध्ययन किया जा रहा है.
धान किसानों की खत्म होगी पराली जलाने की समस्या
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के मौसम में प्रदूषण की गंभीर समस्या पैदा हो जाती है. उसी दौरान पराली न जलाने से किसानों को भी परेशानी होती है. यही नहीं लगातार पराली जलाने से खेत की उर्वरा शक्ति भी कम हो जाती है. ऐसे में सीबीजी प्लांट से किसानों की आय भी बढ़ेगी और उनकी उपजाऊ जमीन की उर्वरा शक्ति भी बनी रहेगी, साथ ही इससे पर्यावरण संरक्षण भी होगा. उप निदेशक बलराम वर्मा ने बताया कि आधिकारिक तौर पर यह योजना राज्य के 75 जिलों में लागू की जाएगी, जिसमें यंत्रों पर 65 प्रतिशत तक सब्सिडी दिए जाने का प्रावधान हो सकता है.
पराली से बनेगी हरित गैस और जैविक खाद
कृषि विभाग के उप निदेशक बलराम वर्मा के अनुसार, एक सीबीजी प्लांट स्थापित करने में करीब एक करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. इस परियोजना पर विभाग की ओर से अधिकतम 65 प्रतिशत तक आर्थिक सहायता दी जाएगी. योजना के तहत किसानों के खेतों से ही पराली और पुआल की खरीद की जाएगी. कृषि अवशेषों को एकत्र कर सीबीजी संयंत्रों तक पहुंचाया जाएगा, जहां इनसे ग्रीन गैस के साथ जैविक खाद भी तैयार की जाएगी.
कृषि यंत्रीकरण में 826 किसानों का चयन
वित्तीय वर्ष 2026-27 में कृषि यंत्रीकरण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के लिए चयन प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है. विभाग ने प्रत्येक विकासखंड में कृषि यंत्र केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए ई-लॉटरी के माध्यम से 826 किसानों का चयन किया गया है. इस योजना के तहत अधिकतम 10 लाख रुपये की परियोजना में एक ट्रैक्टर के साथ तीन बड़े कृषि यंत्र लेना जरूरी होगा. पात्र किसानों को परियोजना लागत का 40 प्रतिशत तक अनुदान विभाग की ओर से दिया जाएगा.
150 एफपीओ को मिलेगा लाभ
फार्म मशीनरी बैंक स्थापित करने के लिए निर्धारित 150 के लक्ष्य के मुकाबले 150 फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों (एफपीओ) का चयन किया गया है. प्रत्येक परियोजना की अधिकतम लागत 10 लाख रुपये रखी गई है और इसमें राज्य सरकार की ओर से 80 प्रतिशत तक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.
एकल कृषि यंत्र खरीदने पर भी अनुदान
एकल यंत्र योजना के तहत विभाग ने 6,826 कृषि यंत्र उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया था. इसके सापेक्ष 6,228 किसानों का चयन किया गया है. योजना में महिला किसानों तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों को 50 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा. वहीं, अन्य श्रेणी के किसानों के लिए अनुदान की दर 40 प्रतिशत निर्धारित की गई है.
फसल अवशेष जलाने पर रोक लगाने की तैयारी
पराली जलाने की घटनाओं को कम करने के लिए क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट योजना के तहत 218 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे. इनके लिए 218 किसानों का चयन किया गया है. प्रत्येक परियोजना की लागत करीब 30 लाख रुपये है, जिस पर किसानों को 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा.
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प्रदेश में तैयार होंगे 15 सीबीजी एग्रीगेटर
कृषि अवशेषों को प्लांट तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करने के लिए प्रदेश में 15 सीबीजी एग्रीगेटर भी तैयार किए जाएंगे. एक एग्रीगेटर परियोजना की लागत करीब एक करोड़ रुपये तय की गई है. इसके तहत 60 हॉर्स पावर से अधिक क्षमता वाला एक ट्रैक्टर, दो अतिरिक्त ट्रैक्टर-ट्रॉली, बेलर, स्ट्रॉ रेक समेत अन्य जरूरी कृषि मशीनरी खरीदनी होगी. इस परियोजना पर भी सरकार की ओर से 65 प्रतिशत तक अनुदान दिए जाने का प्रावधान है.
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Neeraj Chopra: भारत को लगा बड़ा झटका, चोट के कारण एशियन गेम्स और डायमंड लीग फाइनल से बाहर हुए नीरज चोपड़ा
Neeraj Chopra: दो बार के ओलंपिक पदक विजेता और भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा चोट के कारण 2026 सीजन के बाकी सभी मुकाबलों से बाहर हो गए हैं. नीरज ने खुद इसकी पुष्टि की है. इसका मतलब है कि वह जापान में होने वाले एशियन गेम्स 2026 और डायमंड लीग फाइनल में भी हिस्सा नहीं ले पाएंगे.
ट्रेनिंग के दौरान लगी चोट
आपको बता दें कि नीरज चोपड़ा को लुसाने में डायमंड लीग प्रतियोगिता के बाद ट्रेनिंग के दौरान टखने में चोट लगी. उनके टखने के लिगामेंट में टियर हुआ है. डॉक्टर और अपनी टीम से बातचीत के बाद नीरज ने इस सीजन में आगे कोई मुकाबला नहीं खेलने का फैसला किया. नीरज ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर अपनी चोट की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि लुसाने में सीजन का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करने के बाद उन्हें लग रहा था कि वह धीरे-धीरे अपनी पुरानी लय हासिल कर रहे हैं. लेकिन इसके कुछ समय बाद ही ट्रेनिंग के दौरान टखने में लिगामेंट टियर हो गया. नीरज ने कहा कि यह उनके लिए निराशाजनक है, खासकर इसलिए क्योंकि उन्हें लग रहा था कि वह अच्छी लय में लौट रहे हैं. हालांकि, अब उनका पूरा ध्यान चोट से अच्छी तरह उबरने और पहले से ज्यादा मजबूती के साथ वापसी करने पर है.
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