Responsive Scrollable Menu

Explainer: आखिर कब पटरी पर लौटेगा नेपाल? अर्थव्यवस्था पर बाढ़ की बड़ी मार, पुनर्निर्माण में इकोनॉमी के 10वें हिस्से जितना खर्च

Nepal Floods: ग्लेशियर टूटने के बाद नेपाल में आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े इलाके में भारी तबाही मचाई है. नेपाल में लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है. अब भारत समेत 4 देशों को नेपाल में रेस्क्यू ऑपरेशन और शवों की पहचान के लिए बुलाया गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि नेपाल में हालात कब सामान्य होंगे और बाढ़ से हुए नुकसान को कवर में कितना खर्चा आएगा. 

नेपाल में गत 26 अगस्त की सुबह एक भीषण और विनाशकारी अचानक आई बाढ़ (Flash Flood) ने भारी तबाही मचाई है. इस आपदा में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में पानी का स्तर अचानक कई मीटर ऊपर उठ गया, जिससे रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जैसे कई जिले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.  इस आपदा में अब तक 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,400 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं. सबसे ज्यादा असर नेपाल-चीन सीमा के आसपास के इलाकों में हुआ है. लापता लोगों में 178 भारतीय नागरिकों समेत कई विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं.

कई सड़कें और पुल बहे

बाढ़ के तेज बहाव में कई सड़कें और पुल बह गए हैं. कई स्कूलों को भी नुकसान पहुंचा है. रसुवा को काठमांडू से जोड़ने वाला एक प्रमुख पुल टूट जाने से राजधानी से संपर्क भी प्रभावित हुआ है. इससे राहत और बचाव टीमों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है. बड़ी संख्या में शव मिलने के बाद अस्पतालों और मुर्दाघरों पर भी दबाव बढ़ गया है. भरतपुर अस्पताल समेत कई जगहों पर शव रखने की जगह कम पड़ने की स्थिति बन गई है. फिलहाल राहत और बचाव टीमें लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं. प्रभावित इलाकों में सड़क और पुल संपर्क बहाल करना भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है.

यह भी पढ़ें: Ground Report: नेपाल जल-प्रलय: 2013 के केदारनाथ और 2021 के चमोली हादसे से क्या है नेपाल त्रासदी का कनेक्शन?

पुनर्निर्माण में लगेंगे 4-5 अरब डॉलर

नेपाल में इस सप्ताह आई भयंकर बाढ़ ने देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अब सरकार का शुरुआती अनुमान है कि सड़कों, पुलों, बिजली परियोजनाओं और दूसरे बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने में 4 से 5 अरब डॉलर खर्च हो सकते हैं. यह रकम नेपाल की पूरी अर्थव्यवस्था के करीब 10 फीसदी के बराबर है. नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने बताया कि यह अभी शुरुआती अनुमान है. नुकसान और आर्थिक प्रभाव का पूरा आकलन अभी किया जा रहा है. 

बुधवार को ग्लेशियर टूटने के बाद पहाड़ी नदियों में अचानक भारी मात्रा में पानी, पत्थर, बर्फ और मलबा आ गया. इससे नेपाल के साथ-साथ चीन के तिब्बत के कुछ इलाकों में भी भारी तबाही हुई. 600 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जबकि 2,000 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं.

बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान

बाढ़ से सीमावर्ती इलाकों के कई कस्बे प्रभावित हुए हैं. बड़ी संख्या में सड़कें और पुल बह गए हैं, जिससे कई इलाकों का संपर्क टूट गया है. इसके अलावा कई बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है. यह नुकसान नेपाल के लिए इसलिए भी गंभीर है क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था में पर्यटन, रेमिटेंस और जलविद्युत की बड़ी भूमिका है. बाढ़ से प्रभावित बिजली परियोजनाएं देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता के 12 फीसदी से ज्यादा हिस्से से जुड़ी हैं.

2015 के भूकंप से कम होगा खर्च

सरकार का अनुमान है कि इस बार पुनर्निर्माण पर 4-5 अरब डॉलर खर्च हो सकते हैं. यह रकम 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद हुए करीब 9 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण खर्च से कम है. साल 2015 के 7.8 तीव्रता वाले भूकंप में करीब 9,000 लोगों की मौत हुई थी और 5 लाख से ज्यादा घर तबाह हो गए थे. उस आपदा से नेपाल की अर्थव्यवस्था का करीब एक-तिहाई हिस्सा प्रभावित हुआ था.

हालांकि, इस बार नुकसान का पूरा आंकड़ा सामने आने में अभी समय लगेगा. सरकार अलग-अलग इलाकों में हुए नुकसान का आकलन कर रही है. इसके बाद ही यह साफ होगा कि नेपाल को पुनर्निर्माण के लिए वास्तव में कितनी रकम की जरूरत पड़ेगी. फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने के साथ-साथ पर्यटन, बिजली और दूसरे आर्थिक क्षेत्रों को जल्द से जल्द पटरी पर लाना है.

यह भी पढ़ें: 'सब कुछ खत्म हो गया, अब मेरा इंतजार करने वाला कोई नहीं बचा', रसुवा से रेस्क्यू किए गए शख्स ने बयां किया दर्द

 

कब तक पटरी पर लौटेगी जीवन?

जनजीवन की बात करें तो कुछ ही हफ्तों में मलबा साफ होने के बाद जनजीवन सामान्य हो सकता है लेकिन नुकसान की भरपाई नेपाल के लिए आसान नहीं होगी. नेपाल में हालिया बाढ़ और भूस्खलन ने सड़क, पुल, संचार और जलविद्युत जैसी जरूरी सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है. शुरुआती राहत और जरूरी सेवाओं को बहाल करने में हफ्ते या कुछ महीने लग सकते हैं. हालांकि, जिन इलाकों में सबसे ज्यादा तबाही हुई है, वहां पूरी तरह से पुनर्निर्माण और सामान्य स्थिति लौटने में कई साल लग सकते हैं. कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक, बेहद प्रभावित पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों को दोबारा व्यवस्थित करने में 20 से 25 साल तक का समय लग सकता है.

2015 की आपदा से उभरने में थे 5 साल

इतिहास की बात करें तो साल 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद नेपाल को पूरी तरह संभलने में कई साल लगे थे. देश की अर्थव्यवस्था को सामान्य स्थिति में आने में करीब 3 साल लगे, जबकि ज्यादातर पुनर्निर्माण कार्य लगभग 5 साल तक चले. करीब 4 साल में 90% लोग अपने घरों में लौट आए थे. वहीं सड़क, सरकारी भवन और दूसरे बुनियादी ढांचे की मरम्मत और पुनर्निर्माण में करीब 5 साल लगे. हालांकि, भूकंप के 10 साल बाद भी कुछ दूरदराज और संवेदनशील इलाकों में उसके असर बने रहे. ऐसे में मौजूदा बाढ़ के बाद नेपाल के सामने एक बार फिर लंबे पुनर्निर्माण की चुनौती खड़ी हो गई है.

यह भी पढ़ें: Ground Report: नेपाल में बाढ़-भूस्खलन ने मचाई तबाही, बाजार और पुल मलबे में तब्दील; हजारों लोग लापता

 

 

 

 

 

 

 

Continue reading on the app

Ground Report: नेपाल में भीषण तबाही से मचा हाहाकार, मौत का आंकड़ा 600 के करीब; हजारों लोग अब भी लापता

Ground Report: नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास आई इस प्राकृतिक आपदा में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है. ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, नेपाल में 579 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी पांच लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है. इस तरह कुल मृतकों का आंकड़ा 584 तक पहुंच गया है और इसके 600 के पार जाने की आशंका जताई जा रही है. यह आपदा नेपाल के भोटेकोशी नदी क्षेत्र में आई, जहां अचानक भारी मात्रा में पानी, बर्फ, मलबा और चट्टानें नीचे की ओर बहने लगीं. देखते ही देखते कई इलाकों में सड़कें, पुल, मकान और दूसरी जरूरी सुविधाएं तबाह हो गईं. रासुवा और आसपास के क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नुकसान की खबर है. शुरुआती तौर पर इसे भूकंप से जोड़कर देखा गया था, लेकिन बाद की जांच में ग्लेशियर के टूटने और उसके बाद आए मलबे के तेज बहाव को इस त्रासदी की प्रमुख वजह माना गया.

Continue reading on the app

  Sports

वनडे और वर्ल्ड कप डेब्यू पर शतक ठोकने का अनोखा रिकॉर्ड, दुनिया का इकलौता बल्लेबाज जिसने किया ये कारनामा

andy flower debut century record: जिम्बाब्वे के दिग्गज विकेटकीपर बल्लेबाज एंडी फ्लावर के नाम यह अनोखा कीर्तिमान दर्ज है. उन्होंने 1992 के वनडे वर्ल्ड कप में श्रीलंका के खिलाफ यह दुर्लभ उपलब्धि नाम की. दरअसल, यह मुकाबला उन्होंने वनडे और वर्ल्ड कप, दोनों में ही डेब्यू मैच था, जिसे एंडी फ्लावर ने शतक जड़कर हमेशा के लिए यादगार बना दिया. Sat, 29 Aug 2026 18:10:17 +0530

  Videos
See all

40 सेकंड में 17 थप्पड़! क्लासरूम का VIDEO वायरल #shorts #viralvideo #viralnews #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-29T13:15:14+00:00

राहुल गांधी के बयान पर आर-पार की जंग! | Jhooth Ki Goonj | BJP vs Congress | Gen-Z | PM Modi | CJP #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-29T13:15:44+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers