Ground Report: नेपाल में भीषण तबाही से मचा हाहाकार, मौत का आंकड़ा 600 के करीब; हजारों लोग अब भी लापता
Ground Report: नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास आई इस प्राकृतिक आपदा में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है. ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, नेपाल में 579 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी पांच लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है. इस तरह कुल मृतकों का आंकड़ा 584 तक पहुंच गया है और इसके 600 के पार जाने की आशंका जताई जा रही है. यह आपदा नेपाल के भोटेकोशी नदी क्षेत्र में आई, जहां अचानक भारी मात्रा में पानी, बर्फ, मलबा और चट्टानें नीचे की ओर बहने लगीं. देखते ही देखते कई इलाकों में सड़कें, पुल, मकान और दूसरी जरूरी सुविधाएं तबाह हो गईं. रासुवा और आसपास के क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नुकसान की खबर है. शुरुआती तौर पर इसे भूकंप से जोड़कर देखा गया था, लेकिन बाद की जांच में ग्लेशियर के टूटने और उसके बाद आए मलबे के तेज बहाव को इस त्रासदी की प्रमुख वजह माना गया.
बंगाल बेसिन में ओएनजीसी की पहली व्यावसायिक खोज उत्पादन के करीब पहुंची: हरदीप पुरी
नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि पश्चिम बंगाल के अशोकनगर क्षेत्र में ओएनजीसी की पहली व्यावसायिक हाइड्रोकार्बन खोज अब उत्पादन और व्यावसायिक दोहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण चरण तक पहुंच गई है। उन्होंने इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन बढ़ाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किए गए पोस्ट में केंद्रीय मंत्री पुरी ने कहा कि 30 मई 2026 को विकास कुएं एएस-1जेड की ड्रिलिंग शुरू होने के तीन महीने से भी कम समय में ओएनजीसी ने इस क्षेत्र से हल्के और उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे तेल के प्रवाह की क्षमता सफलतापूर्वक स्थापित कर दी है।
उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और घरेलू हाइड्रोकार्बन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में चल रही अभूतपूर्व यात्रा के तहत बंगाल बेसिन के अशोकनगर में ओएनजीसी की पहली व्यावसायिक हाइड्रोकार्बन खोज अब व्यावसायीकरण के एक निर्णायक चरण के करीब पहुंच गई है।
पुरी ने बताया कि अशोकनगर क्षेत्र से निकाले गए कच्चे तेल की पहली खेप को इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की हल्दिया रिफाइनरी भेजे जाने के लिए रवाना किया गया। इस अवसर पर अशोकनगर के विधायक डॉ. सुमय हीरा और ओएनजीसी के अन्वेषण निदेशक भी मौजूद रहे।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, यह उपलब्धि लंबे समय से चल रहे अन्वेषण कार्यों और निरंतर प्रयासों को वास्तविक उत्पादन क्षमता में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है। इससे पश्चिम बंगाल का नाम भारत के हाइड्रोकार्बन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से दर्ज होगा।
उन्होंने कहा कि अशोकनगर की यह खोज न केवल पश्चिम बंगाल के ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे पूरे बंगाल बेसिन में तेल और गैस की खोज तथा उत्पादन गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
भारत वर्तमान में अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल और गैस से पूरा करता है। ऐसे में अशोकनगर जैसी घरेलू खोजें देश की आयात निर्भरता कम करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
पुरी ने यह भी कहा कि यह उपलब्धि पश्चिम बंगाल में ऊर्जा क्षेत्र की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाती है। उन्होंने राज्य में हाइड्रोकार्बन संसाधनों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में और निवेश तथा अन्वेषण गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी
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