पहाड़ों की रफ्तार बदलेगी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल, 2 घंटे में पूरा होगा 7 घंटे का सफर
Rishikesh Karnaprayag Rail: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में जल्द ही सफर का तरीका बदलने वाला है. करीब 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अब अंतिम चरण में पहुंच रही है. इस रेल लाइन के शुरू होने के बाद पहाड़ों में यात्रा आसान होने के साथ पर्यटन, रोजगार और स्थानीय कारोबार को भी नई गति मिलने की उम्मीद है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परियोजना की प्रगति को उत्तराखंड के लिए महत्वपूर्ण बताया है. उनका कहना है कि रेल सेवा शुरू होने से पर्वतीय क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार व कारोबार के नए अवसर तैयार होंगे. फिलहाल ऋषिकेश से कर्णप्रयाग जाने में सड़क मार्ग से करीब 6 से 7 घंटे लगते हैं. रेल सेवा शुरू होने के बाद यही सफर लगभग 2 से 2.5 घंटे में पूरा होने की उम्मीद है.
इससे खासतौर पर बरसात के दौरान फायदा होगा. पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन के कारण सड़कें बंद होने पर यात्रियों को काफी परेशानी होती है। रेल कनेक्टिविटी एक वैकल्पिक और अपेक्षाकृत सुरक्षित यात्रा सुविधा उपलब्ध करा सकती है.
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चारधाम यात्रा को मिलेगा फायदा
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन से चारधाम यात्रा और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. श्रीनगर, देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसे इलाकों तक पहुंच आसान होने से इन क्षेत्रों में होटल, होम-स्टे, गाइड और स्थानीय परिवहन से जुड़े कारोबार को फायदा मिल सकता है. रेल कनेक्टिविटी से पहाड़ों के पर्यटन स्थलों तक ज्यादा पर्यटकों के पहुंचने की संभावना भी बढ़ेगी.
स्थानीय कारोबार और रोजगार को मिलेगी रफ्तार
परियोजना का फायदा सिर्फ पर्यटन तक सीमित नहीं रहेगा. बेहतर कनेक्टिविटी से पहाड़ों के स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाना आसान हो सकता है. मडुआ, सेब, जड़ी-बूटियों और दूसरे पहाड़ी उत्पादों के कारोबार को इससे नई संभावनाएं मिलने की उम्मीद है. स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार बढ़ने से युवाओं के लिए अपने क्षेत्र में ही काम के अवसर तैयार हो सकते हैं. इससे पहाड़ों से होने वाले पलायन को रोकने में भी मदद मिल सकती है.
इंजीनियरिंग के लिहाज से भी खास
करीब 125 किलोमीटर लंबी इस रेल परियोजना का बड़ा हिस्सा सुरंगों से होकर गुजर रहा है. परियोजना में 12 नए रेलवे स्टेशन बनाए जा रहे हैं। पहाड़ों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच इस रेल लाइन का निर्माण अपने आप में बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती है.रेल सेवा शुरू होने के बाद उत्तराखंड के कई पर्वतीय क्षेत्रों को तेज और बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी. इससे यात्रा आसान होने के साथ राज्य में पर्यटन, व्यापार और रोजगार की गतिविधियों को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है.
दुर्गम पहाड़ी इलाकों के लिए महत्वपूर्ण
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी इलाकों को देश के रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है. इसका मकसद पहाड़ों में बेहतर और सुरक्षित कनेक्टिविटी तैयार करना है, साथ ही पर्यावरण को भी कम से कम नुकसान पहुंचाना है.
परियोजना में सुरंगों की खुदाई के लिए टनल बोरिंग मशीन (TBM) जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. सुरंगों के अंदर आधुनिक सुविधाएं भी तैयार की जा रही हैं. इनमें रेल संचालन के लिए पर्याप्त जगह, बेहतर जल निकासी, वेंटिलेशन और आपात स्थिति में बाहर निकलने के रास्ते शामिल हैं.
जून 2028 में होगा पहला ट्रायल
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना के उप महाप्रबंधक ओपी मालगुडी के मुताबिक, परियोजना का करीब 75 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा हो चुका है. इसे वर्ष 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य है, जबकि पहली ट्रायल ट्रेन जून 2028 में चलाने की योजना है. इस परियोजना में करीब 16 सुरंगें बनाई जा रही हैं. इनकी लंबाई 200 मीटर से लेकर 14.58 किलोमीटर तक है. सबसे लंबी सुरंग देवप्रयाग और जनासु के बीच बनाई जा रही है.
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रिपोर्ट-आज चुनाव हुए तो NDA को 326 सीटों का अनुमान:लेकिन सरकार की लोकप्रियता में कमी के संकेत; 2024 में मिली थीं 293 सीटें
अगर आज लोकसभा चुनाव होते हैं, तो BJP के नेतृत्व वाले NDA को लोकसभा में 543 में से 326 सीटें मिल सकती हैं। इंडिया टुडे के 'मूड ऑफ द नेशन' (MOTN) सर्वे के मुताबिक, NDA अभी भी मजबूत स्थिति में है। हालांकि, उसकी लोकप्रियता में कमी के संकेत भी दिख रहे हैं। अभी चुनाव हुए थो भाजपा को 261 सीटें मिल सकती हैं। साल 2024 के लोकसभा चुनावों में NDA ने 293 सीटें जीती थीं। खुद BJP की सीटें 303 से घटकर 240 हो गई थीं। जनवरी के सर्वे से 26 सीटें कम NDA अब अपने 12वें साल में है। जनवरी में हुए पिछले MOTN सर्वे में NDA को 352 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था। इस बार का अनुमान पिछले सर्वे से 26 सीटें कम है। जनवरी के सर्वे की तुलना में इंडिया ब्लॉक की सीटों में कोई खास बढ़ोतरी होने की संभावना नहीं है। इस सर्वे में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को 185 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है, वहीं जनवरी में 182 सीटों का अनुमान लगाया गया था। इंडिया टुडे ग्रुप लगभग दो दशकों से यह सर्वे करवा रहा है। यह साल में दो बार (जनवरी और अगस्त) होता है। अगस्त 2026 का सर्वेक्षण C-VOTER द्वारा किया गया है। वोट शेयर के मामले में, एनडीए को जनवरी के MOTN (47%) से मामूली गिरावट (45.1%) देखने की संभावना है। यह अगस्त 2025 के सर्वे के बाद से सबसे कम है, जिसमें 46.7% वोट शेयर का अनुमान लगाया गया था। एनडीए को 2024 के चुनावों में 44% वोट मिले थे। 2027 में 7 राज्यों में चुनाव, 22% वोटर जेन-जी अगले साल 7 राज्यों- उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर और गोवा में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों में जेन-जी यानी 18 से 29 साल के मतदाता अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसके पीछे दो बड़ी वजहें हैं। पहली, जुलाई में दिल्ली में हुआ जेन-जी आंदोलन, जिसने युवाओं के राजनीतिक रुझान को लेकर नई बहस छेड़ी। दूसरी, बिहार के बांकीपुर और मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव के चौंकाने वाले नतीजे, जिनसे युवाओं की चुनावी भूमिका पर चर्चा तेज हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, चुनावी समीकरण में महिला, पिछड़ा, किसान और दलित जैसे वर्गों के साथ अब जेन-जी भी एक अहम वोटर ग्रुप बनता जा रहा है। इन 7 चुनावी राज्यों में करीब 22% मतदाता 18 से 29 साल की उम्र के हैं। ऐसे में युवा वोट किसी भी पार्टी के चुनावी समीकरण को बदल सकता है। खबर अपडेट हो रही है…
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