Property Buying Tips: अपने पार्टनर के साथ मिलकर प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
पति-पत्नी का मिलकर घर खरीदना आज आम बात है। खासकर जब दोनों कमाते हों और घर खरीदने में दोनों का पैसा लग रहा हो। जॉइंट होम लोन से दोनों की आय को लोन की पात्रता में शामिल किया जा सकता है, जिससे अधिक लोन मिलने की संभावना बन सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि उपलब्ध अधिकतम लोन ले लेना समझदारी है। ज्यादा लोन का मतलब लंबे समय तक ज्यादा ईएमआई और बड़ा वित्तीय बोझ भी हो सकता है।
टैक्स बचत के लिए सिर्फ नाम जोड़ना सही नहीं
संयुक्त रूप से प्रॉपर्टी खरीदने पर टैक्स से जुड़ा फायदा मिल सकता है, लेकिन केवल घर के कागजों में पति-पत्नी दोनों का नाम होने से टैक्स लाभ अपने आप नहीं मिलता। पुराने टैक्स रिजीम में पात्र व्यक्ति होम लोन के ब्याज और मूलधन के भुगतान पर लागू नियमों के अनुसार कटौती का दावा कर सकते हैं। इसके लिए घर में हिस्सेदारी, लोन की जिम्मेदारी और भुगतान में वास्तविक योगदान जैसे पहलू महत्वपूर्ण हैं।
इनकम टैक्स रिटर्न में को-ओनर को प्रॉपर्टी में अपनी हिस्सेदारी का प्रतिशत भी बताना होता है। इसलिए रजिस्ट्रेशन से पहले यह साफ होना चाहिए कि दोनों की हिस्सेदारी कितनी है और लोन की जिम्मेदारी किस अनुपात में होगी।
नए टैक्स रिजीम में नियम अलग
सिर्फ टैक्स बचाने के लिए पति या पत्नी को को-ओनर बनाना सही फैसला नहीं हो सकता। मौजूदा नियमों के अनुसार नए टैक्स रिजीम में सेल्फ-ऑक्यूपाइड घर पर सामान्य तौर पर सेक्शन 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज की कटौती उपलब्ध नहीं है। हालांकि, किराये पर दी गई प्रॉपर्टी के लिए टैक्स का इलाज अलग हो सकता है। इसलिए प्रॉपर्टी खरीदने से पहले अपने टैक्स रिजीम और दोनों की पात्रता को समझना जरूरी है।
EMI की जिम्मेदारी दोनों की
जॉइंट लोन का मतलब केवल EMI बांटना नहीं है। अगर किसी एक की नौकरी चली जाती है या वह भुगतान नहीं कर पाता, तब भी बैंक दोनों उधारकर्ताओं से लोन की किस्त चुकाने की उम्मीद कर सकता है। इसलिए लोन लेने से पहले यह भी तय करें कि एक आय कुछ समय के लिए बंद हो जाए तो EMI कैसे चुकाई जाएगी।
हिस्सेदारी पहले तय करें
अगर दोनों बराबर पैसा लगा रहे हैं तो 50:50 हिस्सेदारी उपयुक्त हो सकती है। लेकिन योगदान अलग-अलग है तो प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी भी सोच-समझकर तय करनी चाहिए। शादी, अलगाव, मृत्यु, विरासत या परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने पर प्रॉपर्टी से जुड़े विवाद पैदा हो सकते हैं। इसलिए मालिकाना कागज, लोन दस्तावेज, नॉमिनेशन और वसीयत को समय-समय पर अपडेट रखना बेहतर है।
आखिरकार, पति-पत्नी के नाम पर संयुक्त प्रॉपर्टी खरीदना तभी बेहतर फैसला है जब मालिकाना हक, भुगतान और लोन की जिम्मेदारी दोनों की वास्तविक वित्तीय व्यवस्था के अनुरूप हो।
(प्रियंका कुमारी)
Gold Silver Price Today: 19 अगस्त को सोने-चांदी के दाम धड़ाम, 24K गोल्ड ₹1,278 और सिल्वर ₹6,330 हुई सस्ती
Gold Silver Price Today (19 August 2026): आज, 19 अगस्त को सोने और चांदी के भाव में गिरावट देखने को मिली है। IBJA के मुताबिक, आज 24 कैरेट सोने का भाव 1,52,884 रुपए है, जबकि एक दिन पहले (18 अगस्त) यह 1,54,162 रुपए था। यानी एक दिन में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,278 रुपए की बड़ी गिरावट देखी गई है। वहीं, 22 कैरेट सोने (Gold 916) का आज का भाव 1,40,042 रुपए है। अगर आप सोना-चांदी खरीदने का मन बना रहे हैं, तो यहां लेटेस्ट प्राइज जान लीजिए।
चांदी के दाम में ₹6,330 की बड़ी गिरावट
बुधवार को सोने के साथ चांदी की कीमत में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। आज सिल्वर का भाव 2,27,392 रुपए प्रति किलोग्राम है। जबकि, कल 18 अगस्त को चांदी 2,33,722 रुपए प्रति किलोग्राम पर थी। इस तरह चांदी की कीमत में 6,330 रुपए की तेज गिरावट दर्ज की गई है।
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प्रमुख शहरों में प्रति 10 ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत (सोर्स- Goodreturns)
| शहर | कीमत |
| दिल्ली | 1,42,200 |
| मुंबई | 1,42,050 |
| कोलकाता | 1,42,050 |
| चेन्नई | 1,42,050 |
| अहमदाबाद | 1,42,100 |
| भोपाल | 1,42,100 |
| जयपुर | 1,42,200 |
| लखनऊ | 1,42,200 |
| रायपुर | 1,42,050 |
ध्यान दें: IBJA के रेट 24K शुद्ध सोने (बुलियन) के मानक भाव होते हैं, जबकि शहरवार 22 कैरेट ज्वेलरी रेट स्थानीय टैक्स, मेकिंग चार्ज और बाजार की स्थिति के अनुसार अलग हो सकते हैं।
सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें खास ध्यान
1. सिर्फ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें
हमेशा BIS (Bureau of Indian Standards) हॉलमार्क वाला सोना ही खरीदें। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता और कैरेट की जानकारी मिलती है, जैसे अल्फान्यूमेरिक कोड (AZ4524)।
2. कीमत जरूर क्रॉस चेक करें
खरीदने से पहले सोने का भाव अलग-अलग स्रोतों जैसे IBJA (India Bullion and Jewellers Association) से जरूर जांचें। सोने की कीमत 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होती है।
असली चांदी की पहचान कैसे करें? जानें 4 आसान तरीके
1. मैग्नेट से जांच करें: शुद्ध चांदी चुंबक की ओर आकर्षित नहीं होती। अगर कोई चांदी की वस्तु तेज़ी से चुंबक से चिपकती है, तो उसमें दूसरी धातु होने की संभावना हो सकती है। हालांकि, केवल इस टेस्ट से चांदी की शुद्धता तय नहीं की जा सकती।
2. बर्फ से करें जांच: चांदी गर्मी को तेजी से ट्रांसफर करती है। इसलिए चांदी की सतह पर रखी बर्फ सामान्य धातुओं की तुलना में तेजी से पिघल सकती है। यह एक आसान घरेलू संकेत है, लेकिन इसे अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
3. गंध पर ध्यान दें: शुद्ध चांदी में आमतौर पर कोई खास धातु जैसी गंध नहीं होती। अगर वस्तु से तेज या असामान्य धातु की गंध आती है, तो उसमें दूसरी धातु मिली होने की संभावना हो सकती है।
4. सफेद कपड़े से रगड़कर देखें: चांदी को साफ सफेद कपड़े से रगड़ने पर कभी-कभी कपड़े पर काला या गहरा निशान दिखाई दे सकता है। ऐसा चांदी की सतह पर होने वाली ऑक्सीकरण प्रक्रिया के कारण हो सकता है। हालांकि, यह टेस्ट भी अकेले चांदी के असली या नकली होने की पक्की पुष्टि नहीं करता।
ध्यान रखें: घरेलू टेस्ट केवल शुरुआती अंदाजा लगाने में मदद करते हैं। चांदी की शुद्धता की सही पुष्टि के लिए हॉलमार्क, 925 स्टैम्प या प्रोफेशनल प्योरिटी टेस्ट कराना ज्यादा भरोसेमंद तरीका है।
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