दुनिया में पहली बार 13,000 फीट ऊपर बनी बिजली:चीन ने आसमान में उड़ाया बोइंग 747 जितना बड़ा क्राफ्ट; जानें कैसे काम करती है यह तकनीक
चीन ने 13 हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद तेज हवाओं से बिजली पैदा करने में सफलता हासिल की है। चीनी सरकारी मीडिया CCTV के मुताबिक, यह दुनिया में पहली बार हुआ है जब इतनी ऊंचाई पर किसी एयरबोर्न विंड एनर्जी सिस्टम को उड़ाकर बिजली बनाई गई हो। इस प्रोटोटाइप क्राफ्ट का नाम 'S4000' रखा गया है। उत्तर-पश्चिमी चीन में हुए टेस्ट के दौरान इसने ऊपर जाने, हवा में स्थिर रहने, बिजली पैदा करने और सुरक्षित वापस लौटने का पूरा वर्क साइकल सफलतापूर्वक पूरा किया। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह प्रयोग हाई-ऑल्टीट्यूड विंड पावर तकनीक को कॉमर्शियल तौर पर इस्तेमाल करने की दिशा में बड़ा कदम है। बोइंग 747 जितना बड़ा है क्राफ्ट, हीलियम गैस से उड़ता है यह क्राफ्ट आकार में बोइंग 747 प्लेन जितना बड़ा है और दिखने में किसी एयरशिप जैसा लगता है। इसमें हीलियम गैस है, जिसकी मदद से यह बिना ईंधन के आसमान में तैरता रहता है। आपदा वाले इलाकों में आसानी से होगी बिजली सप्लाई इस क्राफ्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे एक जगह से दूसरी जगह आसानी से ले जाया जा सकता है। जहां पावर ग्रिड या पारंपरिक बिजली के खंभे नहीं पहुंच सकते, वहां यह सिस्टम काफी मददगार होगा। इसका इस्तेमाल दूरदराज के रेगिस्तान, पहाड़ी इलाकों, द्वीपों और प्राकृतिक आपदा के बाद प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत बिजली सप्लाई देने के लिए किया जा सकता है। बीजिंग स्टार्टअप और सिंघुआ यूनिवर्सिटी का जॉइंट प्रोजेक्ट S4000 क्राफ्ट को बीजिंग के स्टार्टअप 'सॉवेस एनर्जी टेक्नोलॉजी' ने सिंघुआ यूनिवर्सिटी और एयरोस्पेस इंफॉर्मेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर तैयार किया है। 2023 में बने इस स्टार्टअप ने अपने क्राफ्ट्स का नाम उनकी उड़ने की क्षमता के हिसाब से रखा है। कंपनी को मार्च तक अपने पिछले मॉडल्स के लिए करीब ₹700 करोड़ के ऑर्डर्स मिले हैं। डेवलपर्स का दावा है कि 3 हजार मीटर की ऊंचाई पर बिजली बनाने का खर्च जमीन पर लगने वाले विंड टर्बाइन्स के लगभग बराबर आएगा। वहीं अगर क्राफ्ट को 9 हजार मीटर की ऊंचाई पर हो, तो यह साल में 8,000 घंटे से ज्यादा समय तक काम कर सकता है। इस ऊंचाई पर बिजली उत्पादन की लागत महज लगभग 35 से 40 पैसे प्रति किलोवाट-आवर आएगी। चीन के 15वें फाइव ईयर प्लान का हिस्सा है यह प्रोजेक्ट पूरी तरह हवा में तैरने वाले सिस्टम के अलावा, चीनी डेवलपर्स ऊंची हवाओं से बिजली बनाने का एक दूसरा तरीका भी अपना रहे हैं। इसमें जमीन पर चलने वाले जनरेटर के साथ उड़ने वाले डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है। पिछले साल सितंबर में बीजिंग से 5,000 वर्ग मीटर फैलाव वाला एक विशाल पैराशूट भेजा था, जो ऊंची हवाओं को ट्रैप करके जनरेटर घुमाता है। जमीन के मुकाबले आसमान में टर्बाइन लगाना क्यों फायदेमंद?
नर्सरी की छात्रा का रोते हुए वीडियो वायरल:स्कूल वैन में पानी भरने से कई घंटों डर से बैठे रहे नर्सरी के छात्र, गुरुग्राम सेक्टर-14 की घटना
दिल्ली-NCR में बीते 2-3 दिनों से भारी बारिश हो रही है, जिसकी वजह से गुरुग्राम की सड़कों पर भारी जलभराव हो गया है। इन जलभराव की तस्वीरों में एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में नर्सरी क्लास के कुछ बच्चे स्कूल यूनिफॉर्म में बैठे हैं और उनके चारों तरफ पानी भरा हुआ है। ये बच्चे डरे हुए हैं और उनमें एक बच्ची चारों तरफ भरे पानी को देखकर जोर-जोर से रो रही है और मम्मी- मम्मी पुकार रही है। स्कूल वैन में पानी भरा, ड्राइवर को रुकना पड़ा गुरुग्राम में सेक्टर-14 के केंद्रीय विद्यालय का वैन चालक करीब डेढ़ बजे बच्चों को लेकर स्कूल से निकला था, लेकिन सड़क पर भरे पानी के बीच वैन बंद हो गई। ये वैन भारी बारिश के बीच शीतला माता मंदिर के पास पानी में फंस गई। जिसमें नर्सरी के छोटे बच्चे सवार थे। ड्राइवर ने बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें वैन से उतारकर एक दुकान में बैठा दिया और इसके बाद ड्राइवर ने बच्चों के पेरेंट्स को सूचना दी। हालांकि उस दुकान में भी चारों तरफ पानी भरा था, जिससे बच्चे डर गए और रोने लगे। बच्चों को 3 घंटे से ज्यादा इंतजार करना पड़ा जलभराव और ट्रैफिक के कारण बच्चों के पेरेंट्स को उन तक पहुंचने में 3 से ज्यादा घंटे लग गए। इस घटना से शहर के ड्रेनेज सिस्टम, जलनिकासी व्यवस्था और आपातकालीन शहरी प्रबंधन की कमियों को फिर सामने ला दिया है। सेक्टर 45 में भी क्लास 2 के स्टूडेंट्स कई घंटों फंसे रहे सुभाष चौक के आसपास भी भारी व्यवधान की सूचना मिली, जहां सेक्टर 45 स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल के छात्रों को ले जा रही बसें भारी बारिश और यातायात जाम में कई घंटों तक फंसी रहीं। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ जगहों पर पानी लगभग चार फीट तक भर गया था, जिसके कारण बसें फंस गईं। सेक्टर 45 से सेक्टर सेक्टर 48 तक पहुंचने में कुछ ही मिनट लगते हैं लेकिन भारी जल भराव के चलते स्टूडेंट्स को पांच से छह घंटे लगे। दो दिन में हुई भारी बारिश के बाद कम से कम 12 स्कूल बसें एक इलाके में फंसीं और कई बच्चों को घंटों इंतजार करना पड़ा। गुरुग्राम में अब 85-90 मिमी बारिश हुई गुरुग्राम के कई इलाकों में लगभग डेढ़ घंटे के दौरान करीब 85-90 मिमी बारिश हुई, जिससे सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ और शहर की जल निकासी व्यवस्था तथा मॉनसून की तैयारियों में कमियां उजागर हुईं। हालांकि, जब मौसम विभाग ने भारी बारिश की चेतावनी दी थी, तो स्कूलों और प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षित वापसी के लिए क्या तैयारी की इस पर भी सवाल उठ रहे हैं। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें.. राजस्थान के प्राइमरी स्कूल की छत गिरी:तेज आवाज सुनकर बच्चे कक्षा से बाहर निकले, मची अफरा-तफरी, दूसरी कक्षा भी जर्जर राजस्थान के डूंगरपुर जिले के दोवड़ा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सत्तु देवकी स्थित अपर प्राइमरी स्कूल में एक कक्षा की छत गिर गई। उस समय स्कूल में 120 बच्चे मौजूद थे पूरी खबर पढ़ें..
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