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ध्रुव जुरेल ने खोला शतक के बाद 'टैटू सेलिब्रेशन' का राज, बताया हाथ पर क्यों लिखवाया 'जय जवान, जय किसान'?

IND vs SL: भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ध्रुव जुरेल ने श्रीलंका के खिलाफ खेले जा रहे कोलंबो टेस्ट में शानदार शतक लगाया. इस शतक के साथ उन्होंने एक बड़ा कीर्तिमान भी अपने नाम कर लिया है. बता दें कि जुरेल अब श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट में शतक लगाने वाले सिर्फ दूसरे भारतीय विकेटकीपर बन गए हैं, जबकि श्रीलंका की धरती पर शतक लगाने वाले वह पहले भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं. वहीं, शतक लगाने के बाद ध्रुव जुरेल एक खास अंदाज में सेलिब्रेट करते नजर आए. दरअसल, उन्होंने अपने हाथ पर बना एक टैटू दिखाया, जिसपर 'जय जवान, जय किसान' लिखा था. अब दूसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद ध्रुव जुरेल ने इस अनोखे सेलिब्रेशन और टैटू के पीछे की एक बेहद इमोशनल वजह का खुलासा किया है.

ध्रुव जुरेल ने 'टैटू सेलिब्रेशन' के पीछे की वजह का किया खुलासा

कोलंबो टेस्ट के दूसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद ध्रुव जुरेल प्रेस कॉन्फ्रेंस में आए, जहां पत्रकारों ने उनसे उनके 'टैटू सेलिब्रेशन' के बारे में पूछा, जिसपर 'जय जवान, जय किसान' लिखा था. इस पर जुरेल ने कहा, 'मेरे दादाजी किसान थे और मेरे पिताजी सैनिक थे. ये मेरी जड़ें हैं, जहां से मैं आया हूं, और मैं इन्हें भूलना नहीं चाहता. इसलिए वह सेलिब्रेशन मेरे पिता और दादाजी के लिए था.'

ध्रुव जुरेल और ऋषभ पंत के बीच हुई 112 रनों की शानदार साझेदारी

श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब (SSC) में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के दूसरे दिन टीम इंडिया ने पहली पारी में 296 रन के स्कोर पर 5 विकेट गंवा दिए थे, जिसके बाद ध्रुव जुरेल नंबर-7 पर बल्लेबाजी करने उतरे. इसके बाद सारांश जैन 6 रन बनाकर आउट हो गए. फिर पहले दिन चोट की वजह से रिटायर्ड हर्ट हुए ऋषभ पंत दोबारा बल्लेबाजी के लिए उतरे. इसके बाद दोनों भारतीय विकेटकीपरों के बीच 7वें विकेट के लिए 112 रनों की शानदार साझेदारी हुई.

ध्रुव जुरेल ने खेली नाबाद 115 रनों की पारी

हालांकि, इसके बाद ऋषभ पंत 63 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन जुरेल ने टीम इंडिया की पारी को संभाले रखा और स्कोर को 500 के पार पहुंचाया, जिसके बाद 9 विकेट पर 503 रन के स्कोर पर टीम इंडिया ने अपनी पहली पारी घोषित कर दी. इस दौरान ध्रुव जुरेल ने शानदार शतक लगाया. उन्होंने 171 गेंदों पर अपना शतक पूरा किया. जुरेल ने 177 गेंदों पर 115 रनों की नाबाद पारी खेली, जिसमें 9 चौके और 2 छक्के शामिल रहे.

ध्रुव जुरेल ने श्रीलंका के खिलाफ शतक जड़ बनाया बड़ा रिकॉर्ड

ध्रुव जुरेल ने शतक लगाकर कई कीर्तिमान भी बनाए. जुरेल अब श्रीलंका में भारत की ओर से नंबर-7 या उससे नीचे बल्लेबाजी करते हुए टेस्ट शतक लगाने वाले सिर्फ दूसरे बल्लेबाज बन गए हैं, उनसे पहले हार्दिक पांड्या (2017 में पालेकेले टेस्ट में 108 रन) ने यह कारनामा किया था. इसके अलावा, वह श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट शतक लगाने वाले एमएस धोनी के बाद सिर्फ दूसरे भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं, जबकि श्रीलंका की धरती पर टेस्ट में शतक लगाने वाले वह पहले भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज बन गए हैं.

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दम घुटने से हुई नवजातों की मौत, ऑक्सीजन सप्लाई और वेंटिलेशन की कमी बनी वजह : डॉ. तुषार पालवे

मुंबई, 24 अगस्त (आईएएनएस)। अमरावती के महिला जिला अस्पताल के एनआईसीयू वार्ड में आग लगने से तीन नवजातों की मौत के बाद मुंबई के कामा अस्पताल में भी मरीजों की सुरक्षा को लेकर आपातकालीन बैठक बुलाई गई। कामा अस्पताल के डीन डॉ. तुषार पालवे ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए सुरक्षा उपायों की जानकारी दी।

डॉ. पालवे ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, अमरावती की घटना में वेंटिलेटर में धमाका होने की बात सामने आई है। हमने सुना कि वेंटिलेटर में धमाका हुआ था, उसके बाद गैस बनी। पूरे एनआईसीयू में आग लग गई और तीन मासूम बच्चों की मौत हो गई। मेरा मानना है कि वेंटिलेटर में एक कंप्रेसर होता है। कभी-कभी गर्मी की वजह से उसमें धमाका हो जाता है और आग लग जाती है।

उन्होंने बताया, एनआईसीयू में ऑक्सीजन लाइन होने से आग तेजी से बढ़ सकती है। एनआईसीयू में ऑक्सीजन की सप्लाई ज्यादा रहती है, जिससे आग बढ़ सकती है। अगर एनआईसीयू में वेंटिलेशन नहीं रहेगा तो धुएं के निकलने के लिए जगह नहीं मिलती है। उसमें खिड़की रहती है, जो बंद रहती है।

डॉ. पालवे ने कहा, जो तीन मौतें हुई हैं, मुझे लगता है कि वह जलने की वजह से नहीं, बल्कि दम घुटने की वजह से हुई होगी। जो गैसें बनती हैं, जिसमें कार्बन मोनोऑक्साइड या कार्बन डाइऑक्साइड होता है, वह ज्यादा होने की वजह से नवजातों की मौत हुई। वे उस समय ज्यादा कमजोर होते हैं, लेकिन अधिकतम बच्चों को बचाया भी गया है। शुरुआती खबरों से लगता है कि थोड़ी वेंटिलेशन की कमी रही होगी, जिसकी वजह से बच्चों की मौत हो गई।

कामा अस्पताल में सुरक्षा इंतजामों पर डॉ. पालवे ने बताया, हमारे यहां पर फायरवर्क पूरा हो चुका है। यहां पर एनआईसीयू कंबाइंड नहीं है। अलग-अलग 16 केबिन बनाए गए हैं, जिसमें प्रत्येक में 1 या 2 बच्चे रखे गए हैं, एक साथ कहीं पर भी ज्यादा बच्चे नहीं रखे। ऐसे में अगर एक केबिन में आग लगती है तो वह दूसरी जगह पर नहीं फैलती।

उन्होंने कहा कि इस हादसे से यह सीख मिलती है कि एनआईसीयू में मौजूद इलेक्ट्रिकल उपकरणों और लगातार चलने वाली मशीनों जैसे वेंटिलेटर का नियमित मेंटेनेंस बेहद जरूरी है।

डॉ. पालवे ने दोहराया कि शुरुआती रिपोर्ट से ऐसा लगता है कि अमरावती अस्पताल में हवा आने-जाने का सही इंतजाम नहीं था। इसी वजह से बच्चों की दम घुटने से मौत हुई।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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  Sports

Indian bowlers हुए बेअसर, Dinusha के शतक ने 2-0 का सपना तोड़ा, फिर भी Series भारत के नाम

कोलंबो में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में सोनल दिनुशा भारत और श्रीलंका के बीच निर्णायक साबित हुए। उन्होंने 264 गेंदों पर नाबाद 133 रन की पारी खेलकर अपनी टीम को कड़े मुकाबले के बाद ड्रॉ दिलाने में मदद की। पहली पारी में 213 रनों की बड़ी बढ़त हासिल करने के बाद, भारत को उम्मीद थी कि वे आखिरी दिन 2-0 से सीरीज़ जीत लेंगे। लेकिन दिनुशा ने एक बार फिर शानदार और दृढ़ खेल दिखाते हुए मेजबान टीम को रोके रखा। उन्होंने श्रीलंका की कुल बढ़त को 216 तक पहुँचाया, जिसके बाद मेजबान टीम ने पारी घोषित कर दी और दोनों टीमों ने हाथ मिलाए।
 

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जब दोनों टीमें पॉइंट्स बांटने पर सहमत हुईं, तब श्रीलंका का स्कोर 429/9 था। भारत ने पिछले हफ़्ते गाले में खेले गए पहले टेस्ट में शानदार जीत के साथ दो मैचों की सीरीज़ 1-0 से अपने नाम कर ली थी। दिनुशा का यह शतक सीरीज़ में उनका तीसरा शतक था। उन्होंने इस टेस्ट की पहली पारी में 103 रन बनाए थे और गाले में खेले गए सीरीज़ के पहले मैच में अपना पहला शतक लगाया था। 229/6 के स्कोर से आगे खेलते हुए, दिनुशा और केशरा नुवान्था ने पांचवें दिन की पिच पर भारतीय गेंदबाज़ों को परेशान किया। इस जोड़ी ने सातवें विकेट के लिए 112 रन जोड़े, जिसमें नुवान्था ने 46 रन का योगदान दिया। चौथे दिन फ़ॉलो-ऑन के लिए मजबूर होने के बाद श्रीलंका ने इस तरह से संघर्ष किया।

भारत के मानव सुथार सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ रहे; उन्होंने 41 ओवर में 121 रन देकर 3 विकेट लिए, जबकि रवींद्र जडेजा ने 38.3 ओवर में 94 रन देकर 3 विकेट हासिल किए। पहली पारी के बाद भारत की मज़बूत स्थिति के बावजूद, श्रीलंका ने दूसरी पारी में डटकर मुकाबला किया, जिससे दूसरा टेस्ट ड्रॉ पर खत्म हुआ और सीरीज़ बराबरी पर छूटी। श्रीलंका ने दिन की शुरुआत छह विकेट पर 229 रन और महज 16 रन की बढ़त के साथ की थी। भारतीय टीम को उम्मीद थी कि वे श्रीलंका के बाकी बल्लेबाजों को जल्द समेट देंगे लेकिन दिनुशा और नुवांता मेहमान टीम की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। दोनों ने सुबह के सत्र में 100 रन जोड़े और भारतीय गेंदबाजों को सफलता से महरूम रखा।

भारतीय गेंदबाजों को एक बार फिर निचले क्रम के बल्लेबाजों के खिलाफ विकेट चटकाने के लिए जूझना पड़ा। तेज गेंदबाजों ने शॉर्ट गेंद और लेग साइड पर गेंदबाजी की रणनीति अपनाने की कोशिश की लेकिन वे पूरे सत्र में बेअसर ही नजर आए। स्पिनरों मानव सुथार, सारांश जैन और रविंद्र जडेजा को कुछ मौकों पर टर्न और उछाल मिला लेकिन वे श्रीलंका की पारी को समेटने में नाकाम रहे। श्रीलंका की पहली पारी में 290 रन के दौरान भी उसके अंतिम तीन विकेटों ने मिलकर 45 ओवर बल्लेबाजी की थी और 117 रन जोड़े थे। पहली पारी में 103 रन बनाने वाले दिनुशा मौजूदा श्रृंखला में भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द साबित हुए। उन्होंने चार पारियों में तीन शतक और एक अर्धशतक जड़कर भारतीय गेंदबाजों को काफी परेशान किया। उन्होंने पहले टेस्ट में भी 100 और 84 रन बनाए थे। पच्चीस वर्षीय दिनुशा ने जडेजा की गेंद पर एक रन के साथ 99 गेंद में अर्धशतक पूरा किया। 
 

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हालांकि लंच के बाद सत्र की शुरुआत में सुथार ने नुवांता का विकेट निकालकर यह साझेदारी तोड़ी। सुथार की गेंद ने नुवांता के बल्ले का किनारा लिया और स्लिप में ध्रुव जुरेल ने कैच लपक लिया। जडेजा ने इसके बाद प्रभात जयसूर्या (02) को भी स्लिप में जुरेल के हाथों कैच कराया। लेकिन इसके बाद भारतीय टीम को लाहिरू कुमारा के रूप में एक और जुझारू श्रीलंकाई बल्लेबाज का सामना करना पड़ा। दिनुशा और कुमारा ने 28 से अधिक ओवरों तक भारतीय गेंदबाजों को सफलता हासिल नहीं करने दी। जडेजा ने अंतत: कुमारा को शॉर्ट लेग पर यशस्वी जायसवाल के हाथों कैच कराके इस साझेदारी को तोड़ा। दिनुशा ने इससे पहले अंतिम सत्र की मोहम्मद सिराज की पहली ही गेंद को मिडविकेट पर दो रन के लिए खेलकर 196 गेंद में मौजूदा श्रृंखला का अपना तीसरा शतक पूरा किया। कप्तान गिल ने अंतिम विकेट की तलाश में स्वयं गेंदबाजी करने के अलावा जायसवाल और जुरेल को भी गेंद सौंपी लेकिन सफलता नहीं मिली।
 
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Thu, 27 Aug 2026 18:35:00 +0530

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