ध्रुव जुरेल ने खोला शतक के बाद 'टैटू सेलिब्रेशन' का राज, बताया हाथ पर क्यों लिखवाया 'जय जवान, जय किसान'?
IND vs SL: भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ध्रुव जुरेल ने श्रीलंका के खिलाफ खेले जा रहे कोलंबो टेस्ट में शानदार शतक लगाया. इस शतक के साथ उन्होंने एक बड़ा कीर्तिमान भी अपने नाम कर लिया है. बता दें कि जुरेल अब श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट में शतक लगाने वाले सिर्फ दूसरे भारतीय विकेटकीपर बन गए हैं, जबकि श्रीलंका की धरती पर शतक लगाने वाले वह पहले भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं. वहीं, शतक लगाने के बाद ध्रुव जुरेल एक खास अंदाज में सेलिब्रेट करते नजर आए. दरअसल, उन्होंने अपने हाथ पर बना एक टैटू दिखाया, जिसपर 'जय जवान, जय किसान' लिखा था. अब दूसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद ध्रुव जुरेल ने इस अनोखे सेलिब्रेशन और टैटू के पीछे की एक बेहद इमोशनल वजह का खुलासा किया है.
ध्रुव जुरेल ने 'टैटू सेलिब्रेशन' के पीछे की वजह का किया खुलासा
कोलंबो टेस्ट के दूसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद ध्रुव जुरेल प्रेस कॉन्फ्रेंस में आए, जहां पत्रकारों ने उनसे उनके 'टैटू सेलिब्रेशन' के बारे में पूछा, जिसपर 'जय जवान, जय किसान' लिखा था. इस पर जुरेल ने कहा, 'मेरे दादाजी किसान थे और मेरे पिताजी सैनिक थे. ये मेरी जड़ें हैं, जहां से मैं आया हूं, और मैं इन्हें भूलना नहीं चाहता. इसलिए वह सेलिब्रेशन मेरे पिता और दादाजी के लिए था.'
"जय जवान, जय किसान"
— BCCI (@BCCI) August 24, 2026
????️ My grandfather was a farmer and my father, a soldier.????
Dhruv Jurel reveals the reason behind the special celebration and the tattoo on his arm after reaching his ???? ????#TeamIndia | #SLvIND | @dhruvjurel21 pic.twitter.com/pQlM1r84hN
ध्रुव जुरेल और ऋषभ पंत के बीच हुई 112 रनों की शानदार साझेदारी
श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब (SSC) में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के दूसरे दिन टीम इंडिया ने पहली पारी में 296 रन के स्कोर पर 5 विकेट गंवा दिए थे, जिसके बाद ध्रुव जुरेल नंबर-7 पर बल्लेबाजी करने उतरे. इसके बाद सारांश जैन 6 रन बनाकर आउट हो गए. फिर पहले दिन चोट की वजह से रिटायर्ड हर्ट हुए ऋषभ पंत दोबारा बल्लेबाजी के लिए उतरे. इसके बाद दोनों भारतीय विकेटकीपरों के बीच 7वें विकेट के लिए 112 रनों की शानदार साझेदारी हुई.
ध्रुव जुरेल ने खेली नाबाद 115 रनों की पारी
हालांकि, इसके बाद ऋषभ पंत 63 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन जुरेल ने टीम इंडिया की पारी को संभाले रखा और स्कोर को 500 के पार पहुंचाया, जिसके बाद 9 विकेट पर 503 रन के स्कोर पर टीम इंडिया ने अपनी पहली पारी घोषित कर दी. इस दौरान ध्रुव जुरेल ने शानदार शतक लगाया. उन्होंने 171 गेंदों पर अपना शतक पूरा किया. जुरेल ने 177 गेंदों पर 115 रनों की नाबाद पारी खेली, जिसमें 9 चौके और 2 छक्के शामिल रहे.
DID YOU KNOW? ????
— Cricbuzz (@cricbuzz) August 24, 2026
Dhruv Jurel is the second batter to register a Test hundred from No.7 or lower for India in Sri Lanka, after Hardik Pandya (108 in Pallekele in 2017).
The last Test hundred from No.7 or lower for India in Tests was Nitish Kumar Reddy's 114 at the MCG in… pic.twitter.com/3MP83u5oCs
ध्रुव जुरेल ने श्रीलंका के खिलाफ शतक जड़ बनाया बड़ा रिकॉर्ड
ध्रुव जुरेल ने शतक लगाकर कई कीर्तिमान भी बनाए. जुरेल अब श्रीलंका में भारत की ओर से नंबर-7 या उससे नीचे बल्लेबाजी करते हुए टेस्ट शतक लगाने वाले सिर्फ दूसरे बल्लेबाज बन गए हैं, उनसे पहले हार्दिक पांड्या (2017 में पालेकेले टेस्ट में 108 रन) ने यह कारनामा किया था. इसके अलावा, वह श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट शतक लगाने वाले एमएस धोनी के बाद सिर्फ दूसरे भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं, जबकि श्रीलंका की धरती पर टेस्ट में शतक लगाने वाले वह पहले भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज बन गए हैं.
दम घुटने से हुई नवजातों की मौत, ऑक्सीजन सप्लाई और वेंटिलेशन की कमी बनी वजह : डॉ. तुषार पालवे
मुंबई, 24 अगस्त (आईएएनएस)। अमरावती के महिला जिला अस्पताल के एनआईसीयू वार्ड में आग लगने से तीन नवजातों की मौत के बाद मुंबई के कामा अस्पताल में भी मरीजों की सुरक्षा को लेकर आपातकालीन बैठक बुलाई गई। कामा अस्पताल के डीन डॉ. तुषार पालवे ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए सुरक्षा उपायों की जानकारी दी।
डॉ. पालवे ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, अमरावती की घटना में वेंटिलेटर में धमाका होने की बात सामने आई है। हमने सुना कि वेंटिलेटर में धमाका हुआ था, उसके बाद गैस बनी। पूरे एनआईसीयू में आग लग गई और तीन मासूम बच्चों की मौत हो गई। मेरा मानना है कि वेंटिलेटर में एक कंप्रेसर होता है। कभी-कभी गर्मी की वजह से उसमें धमाका हो जाता है और आग लग जाती है।
उन्होंने बताया, एनआईसीयू में ऑक्सीजन लाइन होने से आग तेजी से बढ़ सकती है। एनआईसीयू में ऑक्सीजन की सप्लाई ज्यादा रहती है, जिससे आग बढ़ सकती है। अगर एनआईसीयू में वेंटिलेशन नहीं रहेगा तो धुएं के निकलने के लिए जगह नहीं मिलती है। उसमें खिड़की रहती है, जो बंद रहती है।
डॉ. पालवे ने कहा, जो तीन मौतें हुई हैं, मुझे लगता है कि वह जलने की वजह से नहीं, बल्कि दम घुटने की वजह से हुई होगी। जो गैसें बनती हैं, जिसमें कार्बन मोनोऑक्साइड या कार्बन डाइऑक्साइड होता है, वह ज्यादा होने की वजह से नवजातों की मौत हुई। वे उस समय ज्यादा कमजोर होते हैं, लेकिन अधिकतम बच्चों को बचाया भी गया है। शुरुआती खबरों से लगता है कि थोड़ी वेंटिलेशन की कमी रही होगी, जिसकी वजह से बच्चों की मौत हो गई।
कामा अस्पताल में सुरक्षा इंतजामों पर डॉ. पालवे ने बताया, हमारे यहां पर फायरवर्क पूरा हो चुका है। यहां पर एनआईसीयू कंबाइंड नहीं है। अलग-अलग 16 केबिन बनाए गए हैं, जिसमें प्रत्येक में 1 या 2 बच्चे रखे गए हैं, एक साथ कहीं पर भी ज्यादा बच्चे नहीं रखे। ऐसे में अगर एक केबिन में आग लगती है तो वह दूसरी जगह पर नहीं फैलती।
उन्होंने कहा कि इस हादसे से यह सीख मिलती है कि एनआईसीयू में मौजूद इलेक्ट्रिकल उपकरणों और लगातार चलने वाली मशीनों जैसे वेंटिलेटर का नियमित मेंटेनेंस बेहद जरूरी है।
डॉ. पालवे ने दोहराया कि शुरुआती रिपोर्ट से ऐसा लगता है कि अमरावती अस्पताल में हवा आने-जाने का सही इंतजाम नहीं था। इसी वजह से बच्चों की दम घुटने से मौत हुई।
--आईएएनएस
एससीएच/डीकेपी
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