दम घुटने से हुई नवजातों की मौत, ऑक्सीजन सप्लाई और वेंटिलेशन की कमी बनी वजह : डॉ. तुषार पालवे
मुंबई, 24 अगस्त (आईएएनएस)। अमरावती के महिला जिला अस्पताल के एनआईसीयू वार्ड में आग लगने से तीन नवजातों की मौत के बाद मुंबई के कामा अस्पताल में भी मरीजों की सुरक्षा को लेकर आपातकालीन बैठक बुलाई गई। कामा अस्पताल के डीन डॉ. तुषार पालवे ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए सुरक्षा उपायों की जानकारी दी।
डॉ. पालवे ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, अमरावती की घटना में वेंटिलेटर में धमाका होने की बात सामने आई है। हमने सुना कि वेंटिलेटर में धमाका हुआ था, उसके बाद गैस बनी। पूरे एनआईसीयू में आग लग गई और तीन मासूम बच्चों की मौत हो गई। मेरा मानना है कि वेंटिलेटर में एक कंप्रेसर होता है। कभी-कभी गर्मी की वजह से उसमें धमाका हो जाता है और आग लग जाती है।
उन्होंने बताया, एनआईसीयू में ऑक्सीजन लाइन होने से आग तेजी से बढ़ सकती है। एनआईसीयू में ऑक्सीजन की सप्लाई ज्यादा रहती है, जिससे आग बढ़ सकती है। अगर एनआईसीयू में वेंटिलेशन नहीं रहेगा तो धुएं के निकलने के लिए जगह नहीं मिलती है। उसमें खिड़की रहती है, जो बंद रहती है।
डॉ. पालवे ने कहा, जो तीन मौतें हुई हैं, मुझे लगता है कि वह जलने की वजह से नहीं, बल्कि दम घुटने की वजह से हुई होगी। जो गैसें बनती हैं, जिसमें कार्बन मोनोऑक्साइड या कार्बन डाइऑक्साइड होता है, वह ज्यादा होने की वजह से नवजातों की मौत हुई। वे उस समय ज्यादा कमजोर होते हैं, लेकिन अधिकतम बच्चों को बचाया भी गया है। शुरुआती खबरों से लगता है कि थोड़ी वेंटिलेशन की कमी रही होगी, जिसकी वजह से बच्चों की मौत हो गई।
कामा अस्पताल में सुरक्षा इंतजामों पर डॉ. पालवे ने बताया, हमारे यहां पर फायरवर्क पूरा हो चुका है। यहां पर एनआईसीयू कंबाइंड नहीं है। अलग-अलग 16 केबिन बनाए गए हैं, जिसमें प्रत्येक में 1 या 2 बच्चे रखे गए हैं, एक साथ कहीं पर भी ज्यादा बच्चे नहीं रखे। ऐसे में अगर एक केबिन में आग लगती है तो वह दूसरी जगह पर नहीं फैलती।
उन्होंने कहा कि इस हादसे से यह सीख मिलती है कि एनआईसीयू में मौजूद इलेक्ट्रिकल उपकरणों और लगातार चलने वाली मशीनों जैसे वेंटिलेटर का नियमित मेंटेनेंस बेहद जरूरी है।
डॉ. पालवे ने दोहराया कि शुरुआती रिपोर्ट से ऐसा लगता है कि अमरावती अस्पताल में हवा आने-जाने का सही इंतजाम नहीं था। इसी वजह से बच्चों की दम घुटने से मौत हुई।
--आईएएनएस
एससीएच/डीकेपी
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धामी सरकार की बागेश्वर को बड़ी सौगात, पहाड़ की पहचान से सजेगा राज्य अतिथि गृह
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों पर राज्य में सरकारी परिसंपत्तियों के विकास और निर्माण कार्यों को गुणवत्ता एवं उपयोगिता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है. इसी क्रम में सोमवार को सचिव राज्य संपत्ति एवं आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने बागेश्वर में प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह के निर्माण कार्य की समीक्षा की. सचिव की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में विभागीय व्यय वित्त समिति की बैठक आयोजित हुई. बैठक में राज्य अतिथि गृह निर्माण कार्य योजना के 1930.11 लाख रुपये के संस्तुत विस्तृत आगणन पर विस्तार से चर्चा की गई.
स्थानीय पहाड़ी वास्तुशैली में बनेगा भवन
बैठक में कार्यदायी संस्था प्रान्तीय खंड, लोक निर्माण विभाग, बागेश्वर की ओर से प्रस्तावित कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया. प्रस्तुतीकरण के बाद सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह का भवन आकर्षक स्थानीय पहाड़ी वास्तुशैली पर आधारित होना चाहिए, ताकि भवन अपनी उपयोगिता के साथ बागेश्वर की स्थानीय पहचान और वास्तुकला को भी प्रदर्शित करे. सचिव ने भवन के प्रवेश द्वार और मुख्य भवन पर राज्य अतिथि गृह का लोगो एवं साइनेज आकर्षक, स्पष्ट और प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए. उनका कहना था कि सरकारी भवनों के निर्माण में आधुनिक सुविधाओं के साथ स्थानीय परिवेश और वास्तुशैली का भी विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए.
डोरमेट्री में 20 लोगों की क्षमता
बैठक में अतिथि गृह में प्रस्तावित डोरमेट्री कक्ष की क्षमता को लेकर भी निर्देश दिए गए. सचिव ने डोरमेट्री कक्ष को 20 व्यक्तियों के अनुरूप विकसित करने को कहा. साथ ही उपलब्ध अतिरिक्त क्षेत्रफल का बेहतर उपयोग करते हुए उसमें एक स्टोर कक्ष प्रस्तावित करने के निर्देश दिए गए. इससे भवन की उपयोगिता और व्यवस्थाओं को और बेहतर किया जा सकेगा. सचिव ने कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए कि बैठक में दिए गए सभी सुझावों और आवश्यक संशोधनों को कार्ययोजना में शामिल किया जाए. संशोधित प्रस्ताव तैयार कर शासन के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया, ताकि निर्माण कार्य को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जा सके. बैठक में अपर सचिव एवं राज्य संपत्ति अधिकारी अभिषेक रुहेला, संयुक्त सचिव राज्य संपत्ति विभाग सुरेंद्र सिंह रावत, नियोजन विभाग के प्रतिनिधि अयाज अहमद तथा कार्यदायी संस्था की ओर से अधिशासी अभियंता ऋषिराज वर्मा उपस्थित रहे. अधिकारियों ने प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह से संबंधित विभिन्न तकनीकी एवं उपयोगिता पक्षों पर चर्चा की.
गुणवत्ता के साथ स्थानीय पहचान को भी दर्शाएगा राज्य अतिथि डॉ. आर. राजेश कुमार
डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुरूप राज्य में सरकारी परिसंपत्तियों के निर्माण में गुणवत्ता, उपयोगिता और स्थानीय परिस्थितियों को प्राथमिकता दी जा रही है. बागेश्वर में प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह का भवन केवल एक सरकारी आवासीय सुविधा तक सीमित न रहे, बल्कि क्षेत्र की स्थानीय पहचान और पहाड़ी वास्तुशैली को भी प्रदर्शित करे, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि भवन में आने वाले अतिथियों के लिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के साथ उपलब्ध भूमि और क्षेत्रफल का बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए. डोरमेट्री की क्षमता 20 व्यक्तियों के अनुरूप रखने और अतिरिक्त क्षेत्र में स्टोर की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं. बैठक में दिए गए सभी सुझावों को कार्ययोजना में शामिल कर संशोधित रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करने के निर्देश कार्यदायी संस्था को दिए गए हैं.
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