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Supreme Court ने Kerala Govt से मांगा जवाब, Death Row Convict को Assam जेल भेजने पर टिकी निगाहें

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केरल सरकार से मौत की सज़ा पाए कैदी मुहम्मद अमीर-उल-इस्लाम की याचिका पर जवाब मांगा। उसने केरल की विय्युर सेंट्रल जेल से असम की जेल में ट्रांसफर करने की मांग की थी, जहाँ उसकी पत्नी और बुज़ुर्ग माता-पिता रहते हैं। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने केरल से याचिकाकर्ता को असम की जेल में ट्रांसफर करने के मामले में अपना जवाब दाखिल करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट, केरल के पेरुम्बावूर में 2016 में एक दलित लॉ स्टूडेंट के रेप और मर्डर के मामले में अमीर-उल-इस्लाम की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। वह इस मामले में दोषी ठहराया गया और मौत की सज़ा पाने वाला एकमात्र आरोपी है। अमीर-उल-इस्लाम की ओर से पेश हुईं सीनियर वकील रेबेका जॉन ने कहा कि आम तौर पर, मौत की सज़ा पाए कैदी को तब तक दूसरी जगह नहीं भेजा जा सकता जब तक अपील का समय खत्म न हो जाए या अपील पर फ़ैसला न हो जाए, और इस मामले में वह चरण पहले ही पार हो चुका था।

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उन्होंने कहा कि केरल हाई कोर्ट ने मौत की सज़ा पर पहले ही मुहर लगा दी थी और अपील से जुड़ी कार्यवाही पूरी हो चुकी थी। हालांकि, बेंच ने सवाल किया कि क्या असम सरकार अमीर-उल-इस्लाम को लेने के लिए सहमत हुई है।

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जॉन ने जवाब दिया कि असम ने अभी तक कोई फ़ैसला नहीं लिया है क्योंकि राज्य, प्रस्तावित ट्रांसफर के लिए केरल की मंज़ूरी का इंतज़ार कर रहा है। असम की ओर से पेश वकील ने भी सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अगर केरल ट्रांसफर की इजाज़त देता है तो राज्य इस अनुरोध पर विचार करेगा। असम के रहने वाले और प्रवासी मज़दूर अमीर-उल-इस्लाम को दिसंबर 2017 में 28 अप्रैल 2016 को पेरुम्बावूर में दलित लॉ स्टूडेंट के रेप और मर्डर का दोषी ठहराया गया था। ट्रायल कोर्ट ने उसे मौत की सज़ा सुनाने से पहले मुख्य रूप से DNA सबूतों और गवाहों के बयानों पर भरोसा किया था। बाद में केरल हाई कोर्ट ने सज़ा पर मुहर लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2024 में उसकी फांसी पर रोक लगा दी।

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Kishtwar नाबालिग दुष्कर्म केस: NCST से SC ST Act और मुआवजे की मांग

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) का रुख करते हुए एक आदिवासी अधिकार संगठन ने यौन उत्पीड़न के बाद गर्भपात के दौरान एक नाबालिग गुज्जर लड़की की मौत के मामले में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) अधिनियम लागू करने, जांच की निगरानी करने और उसके परिवार को मुआवजा देने का अनुरोध किया है। किश्तवाड़ जिले की 15 वर्षीय लड़की के साथ उसके शिक्षक ने कथित तौर पर कई महीनों तक बलात्कार किया, जिसके कारण वह गर्भवती हो गई और गर्भपात कराने की कोशिश के दौरान उसकी मौत हो गई। ट्राइबल गुज्जर बकरवाल वेलफेयर फाउंडेशन (टीजीबीडब्ल्यूएफ) ने अपने सदस्य ट्रस्टी कबीर अहमद के माध्यम से दायर शिकायत में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) से मामले का तत्काल संज्ञान लेने और जांच पूरी होने तक अधिकारियों से समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट मांगने का आग्रह किया।

अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने शुक्रवार को आरोपी एवं एक सरकारी मिडिल स्कूल में ग्रेड-2 शिक्षक और प्रभारी प्रधानाध्यापक खालिद अहमद शेख और उसके भाई को गिरफ्तार किया। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश), 65(1) (16 वर्ष से कम उम्र की लड़की से बलात्कार), 90 (गर्भपात कराने के इरादे से किए गए कृत्य से मौत), 91 (बच्चे को जीवित पैदा होने से रोकने या जन्म के बाद उसकी मौत का कारण बनने के इरादे से किया गया कृत्य) और 92 (ऐसे कृत्य से अजन्मे बच्चे की मौत, जो गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में आता है) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा, छत्रू थाने में दर्ज प्राथमिकी में पॉक्सो अधिनियम की धारा 4, 6, 8, 10 और 17 भी लगाई गई हैं।

टीजीबीडब्ल्यूएफ ने अपनी शिकायत में कहा कि मृतक लड़की अधिसूचित अनुसूचित जनजाति से थी और आरोपी किसी अनुसूचित समुदाय से नहीं है, इसके बावजूद मामले में एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम लागू नहीं किया गया है। संगठन ने एनसीएसटी से पुलिस को इस विशेष कानून की धाराएं लगाने का निर्देश देने का आग्रह किया। फाउंडेशन ने गर्भावस्था का पता चलने के बाद मामले को दबाने और रफा दफा करने के लिए कथित तौर पर धमकी, पैसे का लालच और सामुदायिक स्तर पर पंचायत किए जाने के आरोपों की भी जांच की मांग की।

उसने कहा कि गर्भावस्था को कथित रूप से समाप्त कराने से जुड़े चिकित्सकों, बिचौलियों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए। टीजीबीडब्ल्यूएफ ने इलेक्ट्रॉनिक संचार, कॉल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन, स्कूल और चिकित्सा रिकॉर्ड, पर्चे तथा दवा दुकानों के रिकॉर्ड समेत सभी प्रासंगिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और उनकी जांच करने का भी अनुरोध किया। संगठन ने यह भी जांच करने की मांग की कि क्या कथित अपराधों की पूर्व जानकारी रखने वाले किसी व्यक्ति ने पॉक्सो अधिनियम के तहत अनिवार्य रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी का पालन नहीं किया।

टीजीबीडब्ल्यूएफ ने परिवार की आर्थिक और सामाजिक कमजोर स्थिति का हवाला देते हुए मृतका के माता-पिता, भाई-बहनों और महत्वपूर्ण गवाहों को धमकी और दबाव से सुरक्षा देने की भी मांग की। उसने कानून के तहत उन्हें मिलने वाले वैधानिक मुआवजे और पुनर्वास लाभ दिए जाने का भी अनुरोध किया। फाउंडेशन ने एनसीएसटी से जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और अन्य संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई रिपोर्ट मंगाने का आग्रह किया।

उसने अधिकारियों, मीडिया संगठनों और आम लोगों से मृत नाबालिग लड़की तथा उसके परिवार की पहचान और गरिमा की रक्षा करने की भी अपील की। सूत्रों के अनुसार, नाबालिग लड़की की बृहस्पतिवार देर शाम गर्भपात के दौरान मृत बच्चे को जन्म देने के बाद मौत हो गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि लड़की कई महीनों से गर्भवती थी।

करीब एक पखवाड़ा पहले उसने पेट में दर्द की शिकायत की और उसे स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सकीय जांच में उसके गर्भवती होने का पता चला। इसके बाद लड़की ने अपने माता-पिता को बताया कि शिक्षक ने पिछले कुछ महीनों से उसका बार-बार यौन उत्पीड़न किया था। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने लड़की के परिवार के सदस्यों को पैसे देने की पेशकश की और पुलिस के पास जाने पर उन्हें धमकी दी।

सूत्रों ने बताया कि बुधवार को आरोपी और उसका भाई लड़की को उसके पिता और चाचा के साथ गर्भपात के लिए किश्तवाड़ के एक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। वहां चिकित्सकीय जांच के बाद उसे दूसरे केंद्र भेजा गया, जहां सर्जरी के जरिए प्रसव कराने की कोशिश की गई। सूत्रों के अनुसार, प्रक्रिया के दौरान लड़की ने मृत बच्चे को जन्म दिया।

बाद में उसकी हालत बिगड़ गई और उसकी भी मौत हो गई। इस घटना के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। शुक्रवार को छत्रू क्षेत्र में पूर्ण बंद रहा।

शुक्रवार की नमाज के बाद किश्तवाड़ के कई हिस्सों में भी प्रदर्शन हुए।

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  Sports

MS Dhoni और CSK के 16 साल के रिश्तों में दरार? IPL में भविष्य पर गहराया संकट

भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी 2008 में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के पहले सीज़न से ही चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) से जुड़े हुए हैं। वह इस लीग में CSK के लिए सबसे ज़्यादा मैच खेलने वाले खिलाड़ी हैं और 'मेन इन येलो' (CSK टीम) के लिए सबसे ज़्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम है। अपने खेल करियर के आखिरी दौर में चल रहे धोनी, CSK में हिस्सेदारी खरीदकर चेन्नई की इस फ़्रैंचाइज़ी के साथ अपने रिश्ते को और मज़बूत करना चाहते थे। हालांकि, एक रिपोर्ट के मुताबिक, CSK मैनेजमेंट के उनकी शर्तों पर सहमत न होने के कारण यह डील नहीं हो पाई।
 

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क्रिकब्लॉगर (CricBlogger) के अनुसार, रांची के रहने वाले 45 वर्षीय क्रिकेटर ने CSK में हिस्सेदारी खरीदने में दिलचस्पी दिखाई थी, लेकिन मैनेजमेंट उनकी बताई शर्तों पर सहमत नहीं हुआ। मिली जानकारी के अनुसार, धोनी शुरू में फ़्रैंचाइज़ी में 25% हिस्सेदारी खरीदना चाहते थे, लेकिन CSK के मालिक उन्हें 3% हिस्सेदारी देने को तैयार थे। इसके बाद धोनी ने अपनी मांग घटाकर 20% कर दी, लेकिन मैनेजमेंट का ऑफ़र सिर्फ़ 4% तक ही बढ़ा। बातचीत के एक और दौर के बाद, ख़बरों के मुताबिक धोनी ने 18% हिस्सेदारी पर डील करने का प्रस्ताव दिया, लेकिन CSK मैनेजमेंट का आखिरी ऑफ़र 5.5% था।
 

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क्रिकब्लॉगर की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक सूत्र ने कहा कि धोनी हिस्सेदारी खरीदना चाहते थे। वह इसे मुफ़्त में नहीं मांग रहे थे, लेकिन CSK मैनेजमेंट की सोच अलग थी। सूत्रों के मुताबिक, धोनी और CSK मैनेजमेंट के बीच ज़्यादातर बातचीत ज़ुबानी हुई और दोनों पक्षों के बीच कोई औपचारिक लिखित प्रस्ताव या समझौता नहीं हुआ। ऐसी भी खबरें हैं कि हिस्सेदारी को लेकर हुए मतभेद ने CSK और धोनी के रिश्तों में खटास पैदा कर दी है, और इस बात पर कोई पक्का भरोसा नहीं है कि CSK के पूर्व कप्तान पांच बार की IPL चैंपियन टीम के लिए दोबारा खेलेंगे या नहीं। IPL 2025 के मेगा ऑक्शन से पहले CSK ने धोनी को 4 करोड़ रुपये में रिटेन किया था। हालांकि, चोट के कारण वह इस लीग के 2026 सीज़न में 'मेन इन येलो' के लिए एक भी मैच नहीं खेल पाए।
 
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Tue, 25 Aug 2026 12:13:00 +0530

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