'अगर एक भी फोटो मिला तो दे दूंगा इस्तीफा', मछली भोज विवाद पर अजय राय का दावा
अयोध्या में उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के स्वागत में आयोजित मछली भोज को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है. सावन के महीने में आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए इसे सनातन परंपराओं का अपमान बताया है.
यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो राम-राम चिल्लाते हैं वो अंदर मछली भोज उड़ाते हैं. सीएम योगी के बयान के बाद कांग्रेस की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है. खास तौर पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इस पर बड़ा दावा किया है.
#WATCH लखनऊ: उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने अपने अयोध्या दौरे से जुड़े 'मछली भोज' विवाद पर कहा, "कल निषाद समाज ने मुझे बुलाया था। मैं जब भी अयोध्या जाता हूं पहले हनुमानगढ़ी और भगवान राम के दर्शन करता हूं और फिर कार्यक्रम में जाता हूं...निषाद समाज के कार्यक्रम… pic.twitter.com/mQlHZ8NUaX
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 24, 2026
अजय राय का बड़ा दावा
अजय राय ने दावा किया है कि मछली भोजन की बात बिलकुल गलत है. यही नहीं उन्होंने ये भी कहा है कि अगर एक फोटे या वीडियो मछली भोज से जुड़ा कोई दिखा दे तो मैं तुरंत इस्तीफा दे दूंगा. कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश करार दिया है. विवाद के बीच अजय राय ने बीजेपी को सीधे चुनौती देते हुए अपने ऊपर लगे आरोपों का सबूत मांग लिया है.
सावन में मछली भोज पर BJP का हमला
बीजेपी नेताओं का आरोप है कि सावन जैसे धार्मिक महीने में अयोध्या में मछली भोज का आयोजन हिंदू भावनाओं और सनातन परंपराओं के खिलाफ है. बीजेपी इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर लगातार हमलावर है और सवाल उठा रही है कि धार्मिक आस्था की बात करने वाली पार्टी ऐसे कार्यक्रम का हिस्सा कैसे बन सकती है.
मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ लिया है क्योंकि कार्यक्रम अयोध्या में हुआ, जिसे हिंदू आस्था के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है.
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मिजोरम विवाह और संपत्ति कानून पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा रुख, गुवाहाटी हाईकोर्ट जाने की दी छूट
Supreme Court News: मिजोरम में शादी, तलाक और संपत्ति से जुड़े कानून में किए गए बदलाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कानून में हुए बदलाव से मिजोरम की महिलाओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और उनके साथ भेदभाव की स्थिति बन रही है. मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने की.
मिजो महिलाओं के अधिकारों का मुद्दा
याचिका में खास तौर पर मिजो महिलाओं के अधिकारों का मुद्दा उठाया गया. इसमें कहा गया कि कानून में किए गए बदलाव का असर अंतर-समुदाय विवाह करने वाली महिलाओं और संपत्ति से जुड़े उनके अधिकारों पर भी पड़ सकता है. याचिकाकर्ताओं ने इस मामले में सीधे सुप्रीम कोर्ट से दखल देने की मांग की थी.
CJI सूर्यकांत ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि पहली नजर में कानून में किए गए बदलाव कुछ ऐसे दिखाई देते हैं, जिन पर गौर करने की जरूरत हो सकती है. हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि वे पहले हाईकोर्ट क्यों नहीं गए. CJI ने कहा कि हाईकोर्ट इसी तरह के मामलों की सुनवाई के लिए बनाए गए हैं और इस मामले को पहले वहां ले जाना ज्यादा उचित रहेगा. चीफ जस्टिस ने इस बात पर भी जोर दिया कि मामले की पैरवी के लिए संबंधित महिला को बार-बार दिल्ली आने की जरूरत नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि महिला को अपने मामले के लिए इतनी दूर आने से बचाया जाना चाहिए और उसे संबंधित हाईकोर्ट का रास्ता अपनाना चाहिए.
मिजोरम में विरोध की आशंका का हवाला
याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट को बताया कि मिजोरम में इस मामले को लेकर विरोध या किसी तरह की प्रतिक्रिया का डर है. इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले को उचित तरीके से हाईकोर्ट के सामने रखा जा सकता है. कोर्ट ने साफ किया कि मिजोरम विधानसभा ने **Mizo Marriage, Divorce and Inheritance of Property Act** में बदलाव किए हैं. ऐसे में इस कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर पहले संबंधित हाईकोर्ट सुनवाई कर सकता है.
गुवाहाटी हाईकोर्ट जाने की मिली छूट
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को गुवाहाटी हाईकोर्ट की प्रिंसिपल बेंच जाने की छूट दी. कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ताओं को यह चिंता है कि मामला उचित बेंच के सामने नहीं सुना जाएगा, तो वे गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध कर सकते हैं कि मामले को प्रिंसिपल बेंच के सामने रखा जाए.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर कानून में किए गए बदलाव सही हैं या गलत, इस पर कोई अंतिम राय नहीं दी. कोर्ट ने साफ किया कि उसने मामले के असली मुद्दे पर कोई फैसला नहीं किया है.
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अब हाईकोर्ट में उठेगा असली सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट जाने की आजादी दे दी है. अब इस मामले में आगे की सुनवाई गुवाहाटी हाईकोर्ट की प्रिंसिपल बेंच में हो सकती है. यानी फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले को खारिज करने के बजाय याचिकाकर्ताओं को सही न्यायिक मंच पर जाने का रास्ता दिया है. असली सवाल अब हाईकोर्ट के सामने उठेगा कि मिजोरम के विवाह, तलाक और संपत्ति कानून में किए गए बदलाव महिलाओं के अधिकारों को प्रभावित करते हैं या नहीं.
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