Bangladesh में 2024 के जनविद्रोह केस में 3 Journalists को ट्रायल तक जेल में रखने का आदेश
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक विशेष न्यायाधिकरण ने सोमवार को अधिकारियों को तीन पत्रकारों को 2024 में हुए उस जनविद्रोह से जुड़े मामले में मुकदमा चलने तक जेल में रखने का आदेश दिया, जिसके चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटना पड़ा था। वकीलों ने यह जानकारी दी। छात्रों के नेतृत्व में हुए इस जनविद्रोह के दौरान सैकड़ों लोग मारे गए थे।
बाद में हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध के आरोपों में मौत की सजा सुनाई गई। वह दो साल पहले भारत चली गई थीं और उनकी गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाया गया। न्यायाधिकरण ने निजी टीवी चैनल ‘एकात्तर टेलीविजन’ के प्रधान संपादक मोजम्मेल बाबू, उसकी प्रधान संवाददाता फरजाना रूपा और दैनिक ‘भोरेर कागोज’ के संपादक एवं ढाका नेशनल प्रेस क्लब के पूर्व महासचिव श्यामल दत्ता को जेल में रखने का आदेश दिया।
तीनों पत्रकार सोमवार को न्यायाधिकरण के समक्ष पेश हुए। न्यायाधीश ने अगली सुनवाई के लिए 25 अक्टूबर की तारीख तय की और जांचकर्ताओं को पत्रकारों के खिलाफ अपनी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। वैश्विक मानवाधिकार संगठनों ने पत्रकारों को जेल में रखे जाने और उन्हें जमानत नहीं दिए जाने की आलोचना की है।
उन्होंने सरकार से उनके खिलाफ आरोप वापस लेने और समाचार रिपोर्टिंग को अपराध की श्रेणी में डालने से रोकने का आग्रह किया है। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि जनविद्रोह के दौरान तीनों पत्रकारों ने छात्र प्रदर्शनकारियों के दमन के लिए उकसाया था। अभियोजन के अनुसार, 14 जुलाई, 2024 को एक संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों ने हसीना से उकसाने वाले सवाल पूछे थे, जिसके बाद उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणियां कीं और बाद में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ खूनी कार्रवाई शुरू हुई, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए।
हसीना के सत्ता से हटने के बाद से तीनों पत्रकार हिरासत में हैं। उन पर जुलाई-अगस्त 2024 के जनविद्रोह से जुड़े हत्या समेत विभिन्न आरोप हैं। उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान गिरफ्तार किया गया था।
यूनुस ने फरवरी में सत्ता एक नई सरकार को सौंप दी थी। पत्रकारों के परिवारों ने आरोप लगाया है कि उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। पत्रकारों की सुरक्षा के लिए काम करने वाली समिति (सीपीजे) के एशिया-प्रशांत कार्यक्रम समन्वयक कुणाल मजूमदार ने इस महीने की शुरुआत में एक बयान में कहा था कि केवल एक संवाददाता सम्मेलन में सवाल पूछने के लिए श्यामल दत्ता, मोजम्मेल बाबू और फरजाना रूपा के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध का मामला चलाना ‘‘आक्रोशजनक और बेहद चिंताजनक’’ है।
हसीना पांच अगस्त, 2024 से भारत में हैं, हालांकि उन्होंने हाल में कहा था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी।
Indonesia Forest Fire बुझाने के लिए 10,700 से अधिक दमकलकर्मी तैनात
इंडोनेशिया ने सोमवार को देश के मध्य और पश्चिमी हिस्सों में जंगलों में लगी भीषण आग से निपटने के लिए जमीनी और हवाई अभियान तेज कर दिया। आग से हजारों हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है, घना धुआं शहरों पर छा गया है तथा पड़ोसी देशों तक पहुंच गया है। इंडोनेशिया की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी (बीएनपीबी) के अनुसार, अल नीनो के मजबूत होने और लंबे समय से जारी शुष्क मौसम के कारण लगी आग से घना धुआं पैदा हुआ है, जो मलेशिया और ब्रुनेई तक पहुंच गया है।
बीएनपीबी ने सोमवार को कहा कि कई क्षेत्रों में आग अब भी सक्रिय है। बोर्नियो द्वीप के पश्चिम, मध्य और दक्षिण कालीमंतन तथा सुमात्रा द्वीप के रियाउ, दक्षिण सुमात्रा और जाम्बी जैसे आग प्रभावित प्रांतों में बड़े पैमाने पर आग बुझाने का अभियान जारी है। इस साल इंडोनेशिया में जंगलों में आग लगने की घटनाओं में व्यापक वृद्धि देखी गई है।
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने शनिवार को मध्य कालीमंतन में आग से तबाह इलाकों का दौरा किया। इसके बाद वह सुमात्रा द्वीप के आग प्रभावित रियाउ प्रांत पहुंचे, जहां 11,500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र जल चुका है। उन्होंने अधिकारियों से धुएं के गुबार को नियंत्रित करने के प्रयास तेज करने का आग्रह किया।
प्रबोवो ने कहा कि सरकार आग बुझाने के अभियान में सहयोग जारी रखेगी। इसके तहत अतिरिक्त पानी बरसाने वाले हेलीकॉप्टर और दमकलकर्मियों के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति भी की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से आग बुझाने वाली टीमों द्वारा किए जा रहे काम का ‘‘पूरी तरह दस्तावेजीकरण कर सीधे उन्हें रिपोर्ट करने’’ का आग्रह किया।
वानिकी मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अकेले जुलाई में करीब 94,000 हेक्टेयर क्षेत्र आग की चपेट में आया। बीएनपीबी ने सोमवार को एक बयान में कहा कि सूखे, तेज हवाओं और सूखी वनस्पतियों के कारण आग पर काबू पाने के प्रयास मुश्किल हो रहे हैं। रविवार तक 10,700 से अधिक दमकलकर्मियों को जमीनी अभियान में लगाया गया था, लेकिन कुछ स्थान अब भी उनकी पहुंच से बाहर हैं।
इसके चलते स्थानीय अधिकारियों ने अतिरिक्त पानी बरसाने वाले विमानों और दमकल वाहनों की मांग की है। इस बीच, मलेशिया भी आग से उठने वाले घने धुएं से प्रभावित हुआ है। मलेशिया के पूर्वी राज्य सारावाक में स्थिति सबसे गंभीर रही, जहां राज्य सरकार के अनुसार करीब 600 स्कूल बंद करने पड़े और लगभग दो लाख विद्यार्थी प्रभावित हुए हैं।
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