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Trump की धमकी के बीच अचानक रूस पहुंचे जयशंकर का धमाका, पुतिन को दिया मोदी का सीक्रेट मैसेज!

विदेश मंत्री (EAM) एस जयशंकर ने मॉस्को में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। उन्होंने रूसी नेता तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाएं और एक निजी संदेश पहुंचाया। रूस की दो दिन की यात्रा पर रविवार को मॉस्को पहुंचे जयशंकर ने राष्ट्रपति पुतिन के साथ द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी चर्चा की। यह मुलाकात 12-13 सितंबर को ब्रिक्स (BRICS) नेताओं के शिखर सम्मेलन के लिए पुतिन की नई दिल्ली यात्रा से पहले हुई है। यह बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत और रूस कई क्षेत्रों में अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

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PM मोदी SCO समिट में पुतिन से मिलने के लिए उत्सुक हैं

बैठक के दौरान, जयशंकर ने कहा कि भारत और रूस के बीच सहयोग का एक मजबूत आधार है। उन्होंने व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु सहयोग और अन्य क्षेत्रों में बढ़ते आर्थिक संबंधों पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा मुझे लगता है कि हमारे आर्थिक सहयोग, व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु और अन्य पहलुओं पर विस्तार से बात करके मुझे खुशी होगी। कुल मिलाकर, मुझे लगता है कि हमारे आर्थिक सहयोग में काफी वृद्धि हुई है। जयशंकर ने यह भी कहा कि दोनों पक्षों ने अंतर-सरकारी आयोग की बैठक की है और वे पुतिन को इसके नतीजों के बारे में जानकारी देंगे। उन्होंने यह भी बताया कि PM मोदी SCO समिट में पुतिन से मिलने और BRICS समिट के लिए भारत में उनका स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी SCO समिट में आपसे मिलने, फिर BRICS समिट के लिए भारत में आपका स्वागत करने और समय आने पर, आपकी आपसी सुविधा के अनुसार, वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित करने के लिए उत्सुक हैं, ताकि हम सहयोग की एक बहुत मजबूत तस्वीर पेश कर सकें।

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जयशंकर और रूस के डिप्टी PM ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों पर चर्चा की

इससे पहले, जयशंकर ने रूस के पहले डिप्टी प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव के साथ द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को और बढ़ाने के तरीकों पर बातचीत की। इस दौरान दोनों पक्षों ने भारत-रूस साझेदारी की समीक्षा की। मॉस्को पहुंचे जयशंकर रूस के दो दिवसीय दौरे पर हैं। मंतुरोव के साथ संयुक्त रूप से आयोजित एक कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा भारत-रूस साझेदारी ने लगातार मजबूती और परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता दिखाई है। उन्होंने कहा जटिल अंतरराष्ट्रीय हालात के बावजूद, हमारा जुड़ाव गहरा होता गया है। यह हमारे आपसी हितों और भरोसे को दर्शाता है, जो हमारी द्विपक्षीय साझेदारी की पहचान हैं। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान में कहा कि अपनी यात्रा के दौरान जयशंकर क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भी मुलाकात करेंगे।

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Bangladesh में 2024 के जनविद्रोह केस में 3 Journalists को ट्रायल तक जेल में रखने का आदेश

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक विशेष न्यायाधिकरण ने सोमवार को अधिकारियों को तीन पत्रकारों को 2024 में हुए उस जनविद्रोह से जुड़े मामले में मुकदमा चलने तक जेल में रखने का आदेश दिया, जिसके चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटना पड़ा था। वकीलों ने यह जानकारी दी। छात्रों के नेतृत्व में हुए इस जनविद्रोह के दौरान सैकड़ों लोग मारे गए थे।

बाद में हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध के आरोपों में मौत की सजा सुनाई गई। वह दो साल पहले भारत चली गई थीं और उनकी गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाया गया। न्यायाधिकरण ने निजी टीवी चैनल ‘एकात्तर टेलीविजन’ के प्रधान संपादक मोजम्मेल बाबू, उसकी प्रधान संवाददाता फरजाना रूपा और दैनिक ‘भोरेर कागोज’ के संपादक एवं ढाका नेशनल प्रेस क्लब के पूर्व महासचिव श्यामल दत्ता को जेल में रखने का आदेश दिया।

तीनों पत्रकार सोमवार को न्यायाधिकरण के समक्ष पेश हुए। न्यायाधीश ने अगली सुनवाई के लिए 25 अक्टूबर की तारीख तय की और जांचकर्ताओं को पत्रकारों के खिलाफ अपनी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। वैश्विक मानवाधिकार संगठनों ने पत्रकारों को जेल में रखे जाने और उन्हें जमानत नहीं दिए जाने की आलोचना की है।

उन्होंने सरकार से उनके खिलाफ आरोप वापस लेने और समाचार रिपोर्टिंग को अपराध की श्रेणी में डालने से रोकने का आग्रह किया है। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि जनविद्रोह के दौरान तीनों पत्रकारों ने छात्र प्रदर्शनकारियों के दमन के लिए उकसाया था। अभियोजन के अनुसार, 14 जुलाई, 2024 को एक संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों ने हसीना से उकसाने वाले सवाल पूछे थे, जिसके बाद उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणियां कीं और बाद में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ खूनी कार्रवाई शुरू हुई, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए।

हसीना के सत्ता से हटने के बाद से तीनों पत्रकार हिरासत में हैं। उन पर जुलाई-अगस्त 2024 के जनविद्रोह से जुड़े हत्या समेत विभिन्न आरोप हैं। उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान गिरफ्तार किया गया था।

यूनुस ने फरवरी में सत्ता एक नई सरकार को सौंप दी थी। पत्रकारों के परिवारों ने आरोप लगाया है कि उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। पत्रकारों की सुरक्षा के लिए काम करने वाली समिति (सीपीजे) के एशिया-प्रशांत कार्यक्रम समन्वयक कुणाल मजूमदार ने इस महीने की शुरुआत में एक बयान में कहा था कि केवल एक संवाददाता सम्मेलन में सवाल पूछने के लिए श्यामल दत्ता, मोजम्मेल बाबू और फरजाना रूपा के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध का मामला चलाना ‘‘आक्रोशजनक और बेहद चिंताजनक’’ है।

हसीना पांच अगस्त, 2024 से भारत में हैं, हालांकि उन्होंने हाल में कहा था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी।

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  Sports

Dhruv Jurel: ध्रुव जुरेल के बाएं हाथ के डोले पर क्या लिखा है? शतक लगाते ही किया फ्लॉन्ट

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