केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को हरिद्वार में साधु-संतों से अपील की कि वे देश के विकास के लिए 'एक देश, एक चुनाव' (ONOE) की ज़रूरत के बारे में जागरूकता फैलाएं। 'एक देश, एक चुनाव' पर साधु-संतों और धार्मिक नेताओं की एक सभा में शामिल होते हुए, चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संकल्प किसी राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित से जुड़ा है।
चौहान ने साधु-संतों से आग्रह किया कि वे राजनीतिक सोच से ऊपर उठें और अपने प्रवचनों और सामाजिक प्रभाव के ज़रिए चुनाव में प्रस्तावित इस सुधार को आम लोगों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले चुनाव देश के विकास की रफ़्तार को धीमा कर देते हैं, क्योंकि ऐसे समय में प्रशासनिक मशीनरी, शिक्षक, पुलिस और सुरक्षा बल चुनावी कामों में व्यस्त हो जाते हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने से समय, पैसे और प्रशासनिक संसाधनों की बचत होगी, जिससे सरकार और प्रशासन विकास कार्यों पर ज़्यादा ध्यान दे पाएंगे।
देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के तौर पर 'वंदे मातरम' के महत्व को बताते हुए, उन्होंने साधु-संतों से इसके पूरे संस्करण के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि देश को किसी भी तरह के बंटवारे की ओर नहीं बढ़ने दिया जाना चाहिए और राष्ट्रीय एकता सबसे ज़रूरी है। इस कार्यक्रम में बोलते हुए, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ज़ोर दिया कि एक साथ चुनाव कराने से जनता का पैसा बचेगा और उन्होंने साधु-संतों से इस मुद्दे पर समाज का मार्गदर्शन करने का आग्रह किया।
इस मौके पर योग गुरु रामदेव ने कहा कि देश में साल भर कहीं न कहीं चुनाव होते रहते हैं, और चुनाव की प्रक्रिया का असर न सिर्फ़ विकास योजनाओं पर, बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ता है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रमुख श्री महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि आज़ादी के शुरुआती दशकों में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होते थे; हालाँकि, समय के साथ अलग-अलग वजहों से राज्य विधानसभाओं के कार्यकाल और चुनाव के कार्यक्रम अलग-अलग हो गए। उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद और साधु-संतों का समुदाय राष्ट्रीय हित के इस मुद्दे पर सरकार के साथ खड़ा है।
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जम्मू-कश्मीर भाजपा ने रविवार को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और संगठनात्मक संदेश देते हुए पहली बार अपने पदाधिकारियों की बैठक श्रीनगर में आयोजित की। मुस्लिम बहुल कश्मीर घाटी में हुई इस बैठक को भाजपा के बढ़ते संगठनात्मक विस्तार और बदले सुरक्षा माहौल के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हम आपको बता दें कि अब तक पार्टी की ऐसी प्रमुख संगठनात्मक बैठकें मुख्य रूप से जम्मू स्थित मुख्यालय में आयोजित होती रही हैं।
श्रीनगर के नौगाम स्थित होटल कंट्रीसाइड में आयोजित दिनभर चली समीक्षा बैठक की अध्यक्षता जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष और सांसद सत शर्मा ने की। बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा, संगठन महासचिव अशोक कौल, सांसद जुगल किशोर शर्मा, सांसद गुलाम अली खटाना और पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक में जम्मू-कश्मीर में पार्टी संगठन को और मजबूत करने, जमीनी स्तर पर जनसंपर्क बढ़ाने तथा आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक कार्यक्रमों के लिए कार्यकर्ताओं को तैयार करने पर विस्तृत चर्चा हुई। सत शर्मा ने कार्यकर्ताओं से वैचारिक प्रतिबद्धता बनाए रखने और बूथ स्तर तक पार्टी की मौजूदगी मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने बूथ और शक्ति केंद्र से लेकर मंडल, जिला और प्रदेश स्तर तक नियमित बैठकों पर जोर दिया, ताकि संगठन और जनता के बीच बेहतर समन्वय बना रहे।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर में विकास, शांति और सामान्य स्थिति के माहौल में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दशकों के कठिन दौर को देखने के बाद अब कश्मीर का युवा अधिक महत्वाकांक्षी और भविष्य को लेकर आशावान है। वहीं, नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने जम्मू-कश्मीर में भाजपा कार्यकर्ताओं के संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए कहा कि पार्टी की जमीनी मजबूती कार्यकर्ताओं की वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है। साथ ही पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह ने पदाधिकारियों को संगठन और जनता के बीच मजबूत कड़ी के रूप में काम करने तथा कार्यकर्ताओं और आम लोगों से लगातार संवाद बढ़ाने की सलाह दी।
बैठक में सत्तारुढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार के खिलाफ भी राजनीतिक रणनीति पर चर्चा हुई। भाजपा ने उमर सरकार पर कथित भ्रष्टाचार और अन्य मुद्दों को लेकर अगले महीने विधानसभा का घेराव करने की योजना का भी ऐलान किया है। देखा जाये तो श्रीनगर में पहली बार हुई भाजपा की यह पदाधिकारी बैठक केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे घाटी में पार्टी की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता और जमीनी विस्तार के बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। भाजपा नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं से एकजुट, अनुशासित और जनता से निरंतर जुड़े रहने का आह्वान करते हुए हर स्तर पर संगठन को और मजबूत करने का लक्ष्य तय किया है।
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