जम्मू-कश्मीर भाजपा ने रविवार को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और संगठनात्मक संदेश देते हुए पहली बार अपने पदाधिकारियों की बैठक श्रीनगर में आयोजित की। मुस्लिम बहुल कश्मीर घाटी में हुई इस बैठक को भाजपा के बढ़ते संगठनात्मक विस्तार और बदले सुरक्षा माहौल के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हम आपको बता दें कि अब तक पार्टी की ऐसी प्रमुख संगठनात्मक बैठकें मुख्य रूप से जम्मू स्थित मुख्यालय में आयोजित होती रही हैं।
श्रीनगर के नौगाम स्थित होटल कंट्रीसाइड में आयोजित दिनभर चली समीक्षा बैठक की अध्यक्षता जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष और सांसद सत शर्मा ने की। बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा, संगठन महासचिव अशोक कौल, सांसद जुगल किशोर शर्मा, सांसद गुलाम अली खटाना और पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक में जम्मू-कश्मीर में पार्टी संगठन को और मजबूत करने, जमीनी स्तर पर जनसंपर्क बढ़ाने तथा आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक कार्यक्रमों के लिए कार्यकर्ताओं को तैयार करने पर विस्तृत चर्चा हुई। सत शर्मा ने कार्यकर्ताओं से वैचारिक प्रतिबद्धता बनाए रखने और बूथ स्तर तक पार्टी की मौजूदगी मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने बूथ और शक्ति केंद्र से लेकर मंडल, जिला और प्रदेश स्तर तक नियमित बैठकों पर जोर दिया, ताकि संगठन और जनता के बीच बेहतर समन्वय बना रहे।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर में विकास, शांति और सामान्य स्थिति के माहौल में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दशकों के कठिन दौर को देखने के बाद अब कश्मीर का युवा अधिक महत्वाकांक्षी और भविष्य को लेकर आशावान है। वहीं, नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने जम्मू-कश्मीर में भाजपा कार्यकर्ताओं के संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए कहा कि पार्टी की जमीनी मजबूती कार्यकर्ताओं की वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है। साथ ही पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह ने पदाधिकारियों को संगठन और जनता के बीच मजबूत कड़ी के रूप में काम करने तथा कार्यकर्ताओं और आम लोगों से लगातार संवाद बढ़ाने की सलाह दी।
बैठक में सत्तारुढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार के खिलाफ भी राजनीतिक रणनीति पर चर्चा हुई। भाजपा ने उमर सरकार पर कथित भ्रष्टाचार और अन्य मुद्दों को लेकर अगले महीने विधानसभा का घेराव करने की योजना का भी ऐलान किया है। देखा जाये तो श्रीनगर में पहली बार हुई भाजपा की यह पदाधिकारी बैठक केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे घाटी में पार्टी की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता और जमीनी विस्तार के बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। भाजपा नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं से एकजुट, अनुशासित और जनता से निरंतर जुड़े रहने का आह्वान करते हुए हर स्तर पर संगठन को और मजबूत करने का लक्ष्य तय किया है।
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शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने सोमवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तीखा हमला किया। फडणवीस ने महिला आरक्षण बिल के समर्थन को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर टिप्पणी की थी। राउत ने कहा कि यह कानून 2023 में ही पास हो चुका है और अगर कोई पाखंड कर रहा है, तो वह BJP है। मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राउत ने कहा कि महिलाओं के आरक्षण या महिला नीतियों को लेकर कौन पाखंड कर रहा है? देवेंद्र फडणवीस को खुद से यह सवाल पूछना चाहिए। उन्हें थोड़ा और अध्ययन करने की ज़रूरत है; ऐसा लगता है कि आजकल उनकी जानकारी कम पड़ रही है।
राउत ने बताया कि फडणवीस ने पहले 2023 में संसद में आरक्षण कानून पारित होने की तारीफ़ की थी। उन्होंने कहा कि यही देवेंद्र फडणवीस थे जिन्होंने ऐसा किया था! अगर आरक्षण या महिला सशक्तिकरण का बिल 2023 में ही पारित हो गया था, तो उसी बिल को दोबारा लाकर आप किसे बेवकूफ़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं? राउत ने दावा किया कि महिला आरक्षण बिल को लागू करने के साथ परिसीमन बिल (डिलिमिटेशन बिल) को जोड़ना संवैधानिक नियमों और संसदीय नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक ही बिल को इस तरह से दोबारा कैसे पेश किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि किसी ने भी कभी महिला आरक्षण बिल का विरोध नहीं किया है। अगर कोई महिला आरक्षण को लेकर पाखंड, नाटक और झूठ का सहारा ले रहा है, तो वह भारतीय जनता पार्टी, नरेंद्र मोदी और अमित शाह हैं। राउत ने कहा कि महिला आरक्षण बिल 2023 में पास हो गया था, और हम बस यही कह रहे हैं कि उस बिल को लागू किया जाए। लेकिन अब, उन्होंने इसमें 'परिसीमन' (डिलिमिटेशन) का क्लॉज़ जोड़ दिया है। यह संविधान और संसदीय नियमों के खिलाफ है। एक ही बिल दो बार कैसे पास किया जा सकता है?
फडणवीस ने रविवार को दावा किया कि कांग्रेस नेता सिर्फ़ महिला सशक्तिकरण की बातें करते हैं, लेकिन जब असल में समर्थन करने की बारी आती है, तो महिला आरक्षण बिल जैसे अहम कानूनों का विरोध करते हैं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में फडणवीस ने कहा कि राहुल गांधी की बात करें तो, मंच से तो उन्होंने महिला सशक्तिकरण की बात की, लेकिन महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में सबसे क्रांतिकारी कदम महिला आरक्षण बिल है—एक ऐसा बिल जिसका राहुल गांधी विरोध करते हैं और जिसके खिलाफ उन्होंने वोट भी दिया है। वह नहीं चाहते कि महिलाओं को उनके अधिकार मिलें।
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