Breaking News Today Live Updates: सुबह-सुबह कांपी अफगानिस्तान की धरती, 4.2 तीव्रता का आया भूकंप
Breaking News Today Live Updates: आज 22 अगस्त 2026 और दिन शनिवार है. उत्तर भारत समेत देश के कई राज्यों में जमकर बारिश हो रही है. दिल्ली-एनसीआर में भी आज सुबह बारिश का दौर जारी है. इस बीच मौसम विभाग ने कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी आज पुणे में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान छात्राओं से संवाद करेंगे. इस दौरान वे छात्राओं की समस्याओं के समाधान पर बात करेंगे.
उधर झारखंड में एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग आज से दो दिन का विशेष शिविर लगाएगा. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल के दौरे पर हैं. आज वे सिलीगुड़ी में सीमा सुरक्षा से संबंधित एक बैठक की अध्यक्षता करेंगे. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम के एलान के बाद आज पार्टी मुख्यालय में 3 बैठकों का आयोजन होगा. जिसमें पार्टी संगठन और आगामी कार्यक्रमों को लेकर मंथन किया जाएगा.
पहली बैठक सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक चलेगी, जबकि दूसरी बैठक मोदी @25 कार्यक्रम को लेकर होगी. वहीं तीसरी बैठक का आयोजन शाम 6 बजे किया जाएगा. उधर जाति जनगणना पर कांग्रेस आज से यूपी में अभियान शुरू करेगी. जिसके तहत जातिगत जनगणना और भागीदारी न्याय सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा.ऐसी ही तमाम खबरों के लिए जुड़े रहें न्यूज नेशन के साथ… हमें फॉलो कीजिए हमारे X हैंडल @NewsNationTV इंस्टाग्राम- @newsnationtv फेसबुक- @NewsNationChannel यूट्यूब- @NewsNationTV
Explainer: 1 महीने में 16% बढ़ी चीनी की कीमत, दुनिया के सबसे बड़े एक्सपोर्टर भारत में किल्लत! क्या एथेनॉल है इसकी वजह?
Explainer: रसोई में इस्तेमाल होने वाली चीनी इन दिनों अचानक महंगी हो गई है. जुलाई से लेकर अगस्त तक चीनी की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 20 जुलाई को चीनी की कीमत लगभग 48.18 रुपये प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गई है. आसान भाषा में कहें तो चीनी की कीमतों में एक महीने में ही 16 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हुआ है. कई शहरों की फुटकर दुकानों पर तो चीनी 65 से 70 रुपए किलो तक भी बिक रही है. चीनी की मांग को देखते हुए सरकार ने 10 लाख टन चीनी विदेशों से मंगाने का फैसला किया है.
लोगों के मन में सवाल है कि आखिर चीनी की कीमतों में इतना इजाफा कैसे हो गया? आखिर इस इजाफे की वजह क्या है? क्या सरकार द्वारा जारी किए गए 10 लाख टन चीनी के इंपोर्ट वाले आदेश से कोई फायदा होगा? आज के एक्सप्लेनर में आइये जानते हैं, ऐसे ही सभी सवालों के जवाब…
चीनी के भाव बढ़ने के कई कारण हैं, जिसमें कम उत्पादन, गन्ने की फसल पर मौसम की मार, त्योहारी सीजन में बढ़ती मांग, स्टॉक और जमाखोरी, कम उत्पादन के बावजूद चीनी का एक्सपोर्ट और एथेनॉल से जुड़ी पॉलिसीज आदि. हालांकि, 21 अगस्त को सरकार ने कहा था कि चीनी के भाव में कमी आने की मुख्य वजह एथेनॉल पॉलिसीज नहीं है. सरकार का कहना है कि चीनी की कीमतें बढ़ने की वजह मौसम की मार, कम घरेलू उत्पादन, जमाखोरी और बढ़ती मांग है.
बता दें, चीनी की डिमांड हर साल अगस्त से लेकर नवंबर के बीच बढ़ती है, क्योंकि त्योहार के सीजन में मिठाईयां, प्रोसेस्ड फूड की खपत अधिक होती है. हर साल की तरह ही डिमांड इस बार भी बढ़ी लेकिन स्टॉक की कमी की वजह से कीमतें भी बढ़ गईं.
सरकार द्वारा चीनी की कीमत बढ़ने की वजह
1. चीनी का उत्पादन उम्मीद से कम: घरेलू चीनी के उत्पादन में इस साल दबाव पड़ा है. मौसम की मार की वजह से गन्ने की फसल प्रभावित हुई है.
2. त्योहारी सीजन में बढ़ती मांग: अगस्त से नवंबर के बीच भारत में त्योहारों की धूम होती है, जिसमें गणेश चतुर्थी, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, दशहरा और दिवाली आदि. त्योहारों के दौरान, मिठाईयों, बेकरी उत्पाद सहित मीठी चीजों की डिमांड हाई रहती है.
3. स्टॉक और जमाखोरी का मुद्दा: स्टॉक और जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने स्टॉक सीमा लागू कर दी है. साथ ही सरकार ने बड़े थोक उपभोक्ताओं के लिए भी स्टॉक रखने की सीमा को सख्त किया. सितंबर से नवंबर के बीच 10 टन से अधिक मासिक खपत वाले बड़े उपभोक्ताओं को अधिकतम 15 दिनों की जरूरत के बराबर स्टॉक रखने की अनुमति होगी.
E20 पेट्रोल और एथेनॉल का कनेक्शन क्या है?
देश में एक धड़ा ऐसा भी है, जो E20 को चीनी की कीमत बढ़ने की वजह मानता है. भारत ने पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति को बढ़ावा दिया है, जिस वजह से एथेनॉल का उत्पादन गन्ने से निकलने वाले विभिन्न उत्पादों के साथ-साथ अन्य फीडस्टॉक से भी किया जाता है. ICRA के मुताबिक, 2025-26 में चीनी के टोटल प्रोडक्शन का अनुमान लगभग 3.1 करोड़ टन था, लेकिन चीनी का नेट प्रोडक्शन 2.8 करोड़ टन ही हो पाया. जबकि देश में चीनी की अनुमानित खपत 2.83 करोड़ टन है. ऐसा इसलिए क्योंकि करीब 31 लाख टन चीनी के बराबर गन्ने का शीरा एथेनॉल बनाने में खप गया. कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स, CAIT के अधिकारी शंकर ठक्कर का कहना है कि 3 साल से हमारा कहना था कि गन्ने का एथेनॉल में इस्तेमाल मुश्किलें खड़ी करेगा. अब वही समय आ गया है.
चीनी के एक्सपोर्ट की वजह से भी घटी डिमांड
केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में 15 लाख टन और फरवरी 2026 में अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी के निर्यात (एक्सपोर्ट) की अनुमति दी थी. हालांकि, कीमतें बढ़ते देख मई 2026 में इसके निर्यात पर रोक लगा दी गई, लेकिन तब तक 8 लाख टन चीनी देश से बाहर भेजी जा चुकी थी. नतीजतन, चीनी का स्टॉक 47 लाख टन से घटकर महज 39 लाख टन रह गया, जिससे घरेलू बाजार में चीनी की किल्लत पैदा हो गई.
चीनी उद्योग से जुड़े एक विशेषज्ञ के अनुसार, "मिलों से सप्लाई का संकट मार्च 2026 में ही गहराने लगा था, लेकिन सरकार ने निर्यात पर रोक लगाने में दो महीने की देरी कर दी. इससे साफ जाहिर होता है कि सिस्टम को यह गलत जानकारी दी जा रही थी कि चीनी का स्टॉक पर्याप्त है, जबकि हकीकत में कुल उत्पादन घरेलू खपत को पूरा करने के लिए भी काफी नहीं था."
सरकार ने चीनी आयात का रास्ता क्यों खोला?
बढ़ती कीमतों में तेजी को कंट्रोल करने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है. यह कदम करीब एक दशक बाद भारत के चीनी आयात बाजार में बड़ी वापसी के तौर पर देखा जा रहा है. आयात की अनुमति 31 अक्टूबर 2026 तक है. सरकार की उम्मीद है कि विदेशी चीनी आने से घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम होगा. इसके अलावा पोर्ट आधारित रिफाइनरियों के जरिए लगभग 3 लाख टन रिफाइंड चीनी घरेलू बाजार में उपलब्ध कराने की संभावना भी जताई गई है.
क्या चीनी की कीमत और बढ़ सकती है?
यह कई बातों पर निर्भर करेगा. जैसे-
- घरेलू चीनी उत्पादन कितना रहता है
- त्योहारी सीजन में मांग कितनी बढ़ती है
- आयातित चीनी बाजार में कब पहुंचती है
- जमाखोरी और सट्टेबाजी पर सरकार की कार्रवाई कितनी प्रभावी रहती है
- वैश्विक चीनी बाजार में सप्लाई कैसी रहती है
- चीनी मिलों की बिक्री और स्टॉक की स्थिति क्या रहती है
अगर आयात और सरकारी नियंत्रण से बाजार में सप्लाई बढ़ती है तो कीमतों में राहत आ सकती है. दूसरी ओर, अगर मांग लगातार बढ़ती रही और घरेलू उत्पादन कमजोर रहा तो कीमतों पर दबाव बना रह सकता है.
आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
चीनी की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ चाय या मिठाई तक सीमित नहीं रहता. इसका प्रभाव कई खाद्य उत्पादों पर पड़ सकता है. संभावित असर...
- मिठाई और कन्फेक्शनरी महंगी हो सकती है.
- बिस्किट और बेकरी उत्पादों की लागत बढ़ सकती है.
- आइसक्रीम और मीठे पेय पदार्थों की लागत प्रभावित हो सकती है.
- होटल और रेस्टोरेंट की लागत बढ़ सकती है.
- त्योहारों के दौरान मिठाइयों के दाम बढ़ सकते हैं.
- बड़े खाद्य निर्माताओं की उत्पादन लागत पर दबाव आ सकता है.
हालांकि, हर उत्पाद की कीमत में चीनी का हिस्सा अलग होता है, इसलिए चीनी की कीमत बढ़ने का पूरा बोझ सीधे ग्राहक पर पड़े, यह जरूरी नहीं है.
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