Odisha IPS Transfer: Himanshu Lal बने STF और EOW के नए आईजी, कई अफसरों के तबादले
ओडिशा सरकार ने शुक्रवार को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का फेरबदल करते हुए हिमांशु कुमार लाल को आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) और विशेष कार्य बल (एसटीएफ) का महानिरीक्षक (आईजी) नियुक्त किया गया है। लाल इससे पहले उत्तरी रेंज (संबलपुर) के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) के पद पर तैनात थे। राज्य के गृह विभाग की ओर से जारी एक अधिसूचना के अनुसार, आईपीएस अधिकारी चरण सिंह मीणा को लाल की जगह उत्तरी रेंज का डीआईजी बनाया गया है।
गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, उत्तर-मध्य रेंज (तालचेर) के महानिरीक्षक सत्यव्रत भोई का तबादला खुफिया विभाग में किया गया है। केंद्र में प्रतिनियुक्ति से लौटे आशीष कुमार सिंह ने भोई का स्थान लिया है। सिंह को पुलिस पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (अंगुल) के प्रधानाचार्य का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था।
सरकार ने नितिन शेखर को पुलिस मुख्यालय में पुलिस महानिरीक्षक (प्रोविजनिंग) नियुक्त किया है। अधिसूचना के अनुसार, खुफिया विभाग के आईजी जय नारायण पंकज को दक्षिणी रेंज, ब्रह्मपुर में तैनात किया गया है।
Uttarakhand Congress ने CEO से की मुलाकात, Voter List से गलत तरीके से नाम हटाने का आरोप
कांग्रेस ने शुक्रवार को उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) बीवीआरसी पुरुषोत्तम से मुलाकात कर प्रदेश में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित रूप से फर्जी आपत्तियों से वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया। इस मौके पर पूर्व विधायक मनोज रावत के नेतृत्व में गए पार्टी के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें एक ज्ञापन भी सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि कुछ अज्ञात एवं बाहरी ताकतों द्वारा थोक फर्जी फॉर्म-सात जमा कराकर मूल निवासियों, वैध मतदाताओं और यहां तक कि वर्तमान विधायकों के नाम भी मतदाता सूची से गायब कराए जा रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि पार्टी की जमीनी जांच में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए आपत्तियां उन लोगों के नाम से दर्ज की गईं, जिन्होंने कोई शिकायत ही नहीं दी थी। रावत ने यह भी आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार एक व्यक्ति द्वारा अधिकतम पांच आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं, लेकिन एक ही नाम या पहचान पत्र से बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज कराए जाने के मामले भी सामने आए हैं। कांग्रेस ने ऐसे मामलों की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की।
इसके अलावा, प्रतिनिधिमंडल ने ऊधमसिंह नगर जिले में ‘डेमोग्राफिकली/फोटो सिमिलर एंट्रीज’ (डीएसई/पीएसई) के नाम पर करीब 1.02 लाख मतदाताओं को संदिग्ध बताए जाने का मुद्दा भी उठाया। पार्टी ने आरोप लगाया कि इन मतदाताओं के संबंध में राजनीतिक दलों को पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई और नाम हटाए जाने की आशंका बनी हुई है। प्रतिनिधिमंडल ने सीईओ से मांग की कि जब तक कथित फर्जी आपत्तियों की निष्पक्ष जांच और सत्यापन पूरा नहीं हो जाता, तब तक फॉर्म-सात के आधार पर नाम हटाने की कार्रवाई को रोका जाए।
इसके अलावा, कांग्रेस ने नाम हटाने और फर्जी आपत्तियों की स्वतंत्र उच्चस्तरीय एजेंसी से जांच एवं ऑडिट कराने की मांग भी की। कांग्रेस ने कहा कि 15 सितंबर को मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन से पहले सभी फर्जी आपत्तियों को निरस्त किया जाए और यदि किसी वैध मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया है तो उसे तत्काल बहाल किया जाए। प्रतिनिधिमंडल ने आगाह किया कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो कांग्रेस सड़क पर उतरने से लेकर अदालत तक का रुख करेगी।
सीईओ ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि एसआईआर प्रक्रिया पूर्णरूप से नियमानुसार की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जिन जिलों में दावे एवं आपत्तियां अधिक संख्या में प्राप्त हुई हैं, वहां नौ वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की पर्यवेक्षक के तौर पर अतिरिक्त तैनाती की गयी है। पुरुषोत्तम ने बताया कि गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों के आयुक्तों को भी मतदाता सूची के पर्यवेक्षक के रूप में कार्य सौंपा गया है।
उन्होंने बताया कि सभी जिलों को राजनीतिक दलों से नियमित बैठक करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
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