पेटीएम ने ईएसओपी फ्रेमवर्क में किया बदलाव, फ्यूचर वेस्टिंग को प्रदर्शन से अधिक निकटता से जोड़ा; स्टॉक ऑप्शन पूल में कोई बदलाव नहीं
नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। मोबाइल पेमेंट ब्रांड पेटीएम का संचालन करने वाली कंपनी वन 97 कम्युनिकेशंस के बोर्ड ने कर्मचारी स्टॉक विकल्प (ईएसओपी) फ्रेमवर्क में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत भविष्य में ईएसओपी वेस्टिंग को कर्मचारी के प्रदर्शन से अधिक मजबूती से जोड़ा जाएगा, जबकि कुल स्टॉक ऑप्शन पूल में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इससे प्रदर्शन आधारित कर्मचारी प्रोत्साहन पर अधिक जोर दिया जाएगा।
वन 97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड की 26वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) के अनुसार, वन 97 एम्पलाइज स्टॉक ऑप्शन स्कीम 2019 में प्रस्तावित संशोधनों के तहत फुल वेस्टिंग के लिए प्रदर्शन का उच्च स्तर हासिल करना होगा। कितने स्टॉक ऑप्शन वेस्टिंग होंगे, यह प्रदर्शन के आधार पर अलग-अलग स्तरों में तय किया जाएगा। इन बदलावों के लिए शेयरधारकों की विशेष प्रस्ताव के जरिए मंजूरी जरूरी होगी।
मौजूदा व्यवस्था के तहत, जिन कर्मचारियों को उम्मीदों के अनुरूप या उससे बेहतर परफॉर्मेंस रेटिंग मिली थी, वे किसी खास तारीख को वेस्टिंग के लिए तय सभी ऑप्शन (100 प्रतिशत) पाने के हकदार थे। इससे कम रेटिंग वाले कर्मचारी वेस्टिंग के लिए पात्र नहीं थे।
संशोधित व्यवस्था में अब अधिक व्यापक मूल्यांकन किया जाएगा। एजीएम नोटिस के अनुसार, ईएसओपी वेस्टिंग एक समग्र समीक्षा पर निर्भर होगी, जिसमें कर्मचारी की भूमिका से जुड़े केआरए, कारोबार का प्रदर्शन, कंपनी का प्रदर्शन और कर्मचारी की भविष्य की क्षमता समेत अन्य मानकों को शामिल किया जाएगा।
इस समीक्षा के आधार पर कर्मचारियों को एक ईएसओपी रेटिंग दी जाएगी, जो यह तय करेगी कि उन्हें मिलने वाले ग्रांट का कितना हिस्सा असल में वेस्टिंग होगा। केवल मीट्स एक्सपेक्टेशन या उससे ऊपर की ईएसओपी रेटिंग वाले कर्मचारी ही पात्र होंगे और वेस्टिंग 10 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक हो सकती है। ईएसओपी रेटिंग को सीईओ की मंजूरी मिलेगी।
एजीएम नोटिस में कहा गया है कि संशोधित नीति इस व्यवस्था को अधिक सख्त और प्रदर्शन के आधार पर अलग-अलग बनाती है। पूरी वेस्टिंग अब उच्च स्तर के प्रदर्शन पर निर्भर होगी और प्रदर्शन के परिणामों के अनुसार वेस्टिंग का अधिकार तय किया जाएगा।
यह बदलाव केवल भविष्य में दिए जाने वाले ईएसओपी पर लागू होगा। ईएसओपी स्कीम 2019 के तहत पहले से दिए जा चुके विकल्प अपनी मौजूदा शर्तों के अनुसार ही जारी रहेंगे। मौजूदा विकल्प धारकों के अधिकारों और दायित्वों में कोई बदलाव नहीं होगा।
पेटीएम इस बदलाव के तहत अपने ईएसओपी पूल का विस्तार नहीं कर रही है। एजीएम नोटिस के मुताबिक, संशोधन से कोई अतिरिक्त डिल्यूशन या ईएसओपी स्कीम 2019 के तहत दिए जा सकने वाले अधिकतम विकल्पों की संख्या में वृद्धि नहीं होगी।
एजीएम नोटिस की तारीख तक इस योजना के तहत 2.67 करोड़ ऑप्शंस दिए जाना बाकी थे। इसमें वे विकल्प भी शामिल हैं जो समाप्त होने, सरेंडर किए जाने या अन्य कारणों से वापस ईएसओपी पूल में आ सकते हैं। ये विकल्प 1 रुपए अंकित मूल्य वाले बराबर संख्या के इक्विटी शेयरों में बदले जा सकते हैं।
वेस्टिंग की मूल अवधि में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। भविष्य में दिए जाने वाले विकल्प ग्रांट की तारीख से न्यूनतम एक वर्ष और अधिकतम पांच वर्ष के भीतर वेस्ट हो सकते हैं। इसकी अवधि नॉमिनेशन और रेम्यूनरेशन कमिटी तय करेगी। वेस्टिंग के लिए कर्मचारी का कंपनी में लगातार कार्यरत रहना भी जरूरी रहेगा।
पेटीएम ने कहा कि ये संशोधन सेबी के शेयर-आधारित कर्मचारी लाभ और लिस्टिंग नियमों के अनुरूप भी हैं। इनका उद्देश्य कर्मचारी स्टॉक विकल्प, व्यक्तिगत प्रदर्शन और लंबे समय में शेयरधारकों के लिए मूल्य निर्माण के बीच संबंध को और मजबूत करना है।
--आईएएनएस
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झारखंड में अब शव हटाने की वजह से लेट नहीं होगी ट्रेन, खास सिस्टम हुआ लागू
रांची रेल मंडल में रेलवे ट्रैक पर रनओवर के बाद शव हटाने में होने वाली देरी को कम करने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है. कई मामलों में शव तीन से चार घंटे या उससे अधिक समय तक ट्रैक पर पड़े रहने के कारण यात्री और मालगाड़ियों का परिचालन प्रभावित होता था. अब ऐसी स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए रेलवे ने संयुक्त प्रक्रिया आदेश जारी किया है.
नई व्यवस्था के अनुसार, ट्रैक पर शव मिलने की सूचना सबसे पहले स्टेशन मास्टर को दी जाएगी. इसके बाद स्टेशन मास्टर ऑपरेटिंग कंट्रोल, आरपीएफ और संबंधित जीआरपी या स्थानीय पुलिस को जानकारी देगा. आरपीएफ की टीम मौके पर पहुंचकर पुलिस के साथ समन्वय करेगी.
रेलकर्मी शव को ट्रैक के सुरक्षित किनारे करेंगे
यदि पुलिस या जीआरपी के पहुंचने में देरी होती है और शव के कारण रेल परिचालन बाधित हो रहा है, तो आरपीएफ की मौजूदगी में रेलकर्मी शव को ट्रैक के सुरक्षित किनारे कर सकेंगे. शव को केवल उतना ही हटाया जाएगा, जितना ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही के लिए जरूरी हो. ब्लॉक सेक्शन में भी इसी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा.
स्टेशन मास्टर तत्काल घायल को अस्पताल पहुंचाने का काम करेगा
रेलवे ने साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए हैं. आरपीएफ घटनास्थल की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करेगी. शव और आसपास की स्थिति को दर्ज किया जाएगा तथा उसे कम से कम हिलाने-डुलाने की कोशिश की जाएगी. पुलिस के पहुंचने तक शव की निगरानी करेगी. यदि व्यक्ति घायल अवस्था में मिलता है, तो शव हटाने के बजाय जान बचाना पहली प्राथमिकता होगी. स्टेशन मास्टर तत्काल एंबुलेंस की व्यवस्था कर घायल को अस्पताल पहुंचाने की कार्रवाई करेगा.
रेल परिचालन सामान्य होने की उम्मीद
रेलवे जरूरत पड़ने पर स्थानीय लोगों की सहायता भी ले सकेगा. हालांकि, आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस प्रक्रिया में रेलकर्मियों या स्थानीय लोगों पर कोई दबाव नहीं बनाया जाएगा. नई व्यवस्था से रनओवर की घटनाओं के बाद ट्रैक जल्द खाली होने और रेल परिचालन सामान्य होने की उम्मीद है. इसका सीधा लाभ यात्रियों को मिलेगा और ट्रेनों को लंबे समय तक रोकने से होने वाली देरी कम होगी.
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