अहमदाबाद नगर निगम ने मच्छररोधी अभियान के तहत जारी किए 108 नोटिस, दो जगहों को किया सील
अहमदाबाद, 21 अगस्त (आईएएनएस)। अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) ने मच्छर से फैलने वाली बीमारियों को रोकने के उपायों के तहत शहर भर में निरीक्षण के दौरान दो जगहों को सील कर दिया और 108 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए।
सील की गई जगहों में साउथ जोन के लम्भा वार्ड में आशीर्वाद लेवाइस और साउथ-वेस्ट जोन के सरखेज वार्ड में रेन बसेरा (नाइट शेल्टर) की निर्माण साइट शामिल हैं।
यह कार्रवाई एएमसी की वेक्टर-जनित रोग नियंत्रण शाखा की टीमों द्वारा कमर्शियल प्रतिष्ठानों, निर्माण साइटों और अन्य इकाइयों के निरीक्षण के दौरान की गई।
नगर निकाय ने बताया कि अभियान के दौरान कुल 612 प्रतिष्ठानों की जांच की गई। नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों से कुल 2,53,800 रुपये का प्रशासनिक शुल्क वसूला गया, जबकि 108 इकाइयों को नोटिस जारी किए गए।
निरीक्षण अलग-अलग वार्डों में अधिकारियों द्वारा किए गए, जिनमें डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर, असिस्टेंट म्युनिसिपल कमिश्नर, हेल्थ ऑफिसर, डिप्टी हेल्थ ऑफिसर, असिस्टेंट एंटोमोलॉजिस्ट, जूनियर असिस्टेंट एंटोमोलॉजिस्ट और स्वास्थ्य विभाग व अन्य नागरिक विभागों के कर्मचारी शामिल थे।
यह अभियान एएमसी की विश्व मच्छर दिवस गतिविधियों का हिस्सा था, जो हर साल 20 अगस्त को मच्छर से फैलने वाली बीमारियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है।
अधिकारियों ने कहा, जागरूकता गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य निवासियों को मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जीका और फाइलेरिया जैसी मच्छर से फैलने वाली बीमारियों के कारणों और उनसे बचाव के बारे में शिक्षित करना था।
अधिकारियों ने एएमसी की विभिन्न जगहों का निरीक्षण किया, जिनमें सरदार पटेल भवन, पंडित दीनदयाल ऑडिटोरियम, फायर स्टेशन, मस्टर स्टेशन, अर्बन हेल्थ सेंटर, पानी वितरण केंद्र, एयूडीए मार्केट और निर्माण साइटें शामिल थीं। इसके अलावा, भारती सोसाइटी, शिव शक्ति नगर और बंसी नी चाल जैसे रिहायशी इलाकों का भी निरीक्षण किया गया।
314 रिहायशी इलाकों में सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियां चलाई गईं और 7,213 लोगों तक पहुंच बनाई गई। ऐसी सबसे ज्यादा गतिविधियां ईस्ट जोन में (69) दर्ज की गईं, इसके बाद वेस्ट जोन (57) और साउथ जोन (49) का स्थान रहा।
पूरे शहर में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी वाले कुल 7,213 पर्चे बांटे गए। मलेरिया विभाग ने सार्वजनिक जगहों पर मच्छर के लार्वा को दिखाने वाले 112 कैंप भी लगाए।
नगर पार्षदों की देखरेख में सभी 48 वार्डों के रिहायशी इलाकों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए, जिनमें मच्छरों के काटने से बचने और उनके पनपने की जगहों को कम करने पर जोर दिया गया।
नगर निकाय ने लोगों से नगर निगम की सेवाओं का इस्तेमाल करने और बुखार होने पर तुरंत मेडिकल जांच करवाने की अपील की। साथ ही, डॉक्टर की बताई दवा का पूरा कोर्स करने को कहा, खासकर मलेरिया का शक होने पर।
बचाव के उपायों के तहत, लोगों को सलाह दी गई कि वे अपने घरों के आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर, पक्षियों के पानी के बर्तन, पुराने टायर, गमले और खुले बर्तनों को नियमित रूप से साफ और सूखा रखें। सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें, घर से बाहर निकलते समय पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें और मच्छर भगाने वाली दवा या सुझाए गए प्राकृतिक उपाय अपनाएं।
एएमसी ने लोगों को सलाह दी कि वे हफ्ते में एक दिन ड्राई डे (सूखा दिन) मनाएं और पानी के सभी बर्तनों को खाली करके साफ करें।
अधिकारियों ने कहा, सरकारी और निजी जगहों पर भी मच्छरों को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर गतिविधियां चलाई जा रही हैं। लोगों और संस्थानों को अपनी जगहों पर मच्छरों के पनपने की जगहों की नियमित रूप से जांच करनी चाहिए।
--आईएएनएस
एएसएच/पीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
सुरक्षाबलों के खिलाफ झूठे प्रचार और सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर मंथन
नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। पूर्वोत्तर के राज्यों में सोशल मीडिया पर झूठे नैरेटिव कैसे सुरक्षा के लिए नई चुनौती बनते जा रहे हैं, इस पर एक महत्वपूर्ण मंथन किया गया है। दरअसल यह देखा गया है कि कई बार सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर सुरक्षा बलों के खिलाफ दुष्प्रचार किया जाता है। इसके जरिए लोगों की धारणा प्रभावित करने व अविश्वास पैदा करने का कुप्रयास किया जाता है।
असम राइफल्स ने इस गंभीर चुनौती पर नई दिल्ली में आयोजित मेजर बॉब खाथिंग स्मृति व्याख्यान में बात की। यहां विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया के ‘हथियारीकरण’ से निपटने और पूर्वोत्तर में जनविश्वास मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। ‘सोशल मीडिया का हथियारीकरण’ व्याख्यान का मुख्य विषय रहा। कार्यक्रम में डीजी मिलिटरी ऑपरेशंस लेफ्टिनेंट जनरल अभिजीत एस. पेंढारकर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि मेजर बॉब खाथिंग के जीवन का अध्ययन यह याद दिलाता है कि पूर्वोत्तर में नेतृत्व के लिए केवल सुरक्षा के दृष्टिकोण को समझना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज को समझना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लोगों के बीच विश्वास का निर्माण करके ही राष्ट्रीय एकीकरण को और मजबूत किया जा सकता है।
वहीं, असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेड़ा ने सोशल मीडिया पर चलाए जाने वाले भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण प्रचार अभियानों के प्रभाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर तैयार किए गए झूठे आख्यान समाज में अस्थिरता पैदा करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने युवाओं से ऐसे अभियानों के प्रति अधिक सतर्क और जागरूक रहने का आह्वान किया।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली सूचनाओं को बिना सत्यापन के स्वीकार करने के बजाय उनकी विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है।
असम राइफल्स ने यूनाइटेड सर्विस इंस्टीटूशन के सहयोग से शुक्रवार को वार्षिक मेजर बॉब खाथिंग स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया। कार्यक्रम में पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा, सामाजिक स्थिरता, राष्ट्रीय एकीकरण और सोशल मीडिया के माध्यम से फैलाए जा रहे झूठे प्रचार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। यह स्मृति व्याख्यान हर वर्ष महान सैन्य अधिकारी मेजर बॉब खाथिंग के योगदान और उनकी विरासत को याद करने के लिए आयोजित किया जाता है।
मेजर बॉब खाथिंग का जीवन पूर्वोत्तर क्षेत्र और राष्ट्रीय एकीकरण के प्रयासों से गहराई से जुड़ा रहा था। भारतीय संयुक्त सेवा संस्थान के महानिदेशक एवं सेवानिवृत्त वाइस एडमिरल संजय जे. सिंह ने यहां मेजर बॉब खाथिंग की समृद्ध विरासत को रेखांकित किया। व्याख्यान के दौरान गलत सूचनाओं, समन्वित प्रचार अभियानों और भ्रामक आख्यानों से उत्पन्न होने वाली नई चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। साथ ही, ऐसे अभियानों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए व्यावहारिक उपायों और रणनीतियों पर विचार किया गया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, पूर्व सैन्य अधिकारी, सामरिक मामलों के विशेषज्ञ, शिक्षाविद, मीडिया पेशेवर और शोधकर्ता शामिल हुए। इस दौरान पूर्वोत्तर के बदलते सूचना वातावरण और राष्ट्रीय सुरक्षा पर उसके प्रभाव को लेकर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
--आईएएनएस
जीसीबी/एसके
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