सुरक्षाबलों के खिलाफ झूठे प्रचार और सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर मंथन
नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। पूर्वोत्तर के राज्यों में सोशल मीडिया पर झूठे नैरेटिव कैसे सुरक्षा के लिए नई चुनौती बनते जा रहे हैं, इस पर एक महत्वपूर्ण मंथन किया गया है। दरअसल यह देखा गया है कि कई बार सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर सुरक्षा बलों के खिलाफ दुष्प्रचार किया जाता है। इसके जरिए लोगों की धारणा प्रभावित करने व अविश्वास पैदा करने का कुप्रयास किया जाता है।
असम राइफल्स ने इस गंभीर चुनौती पर नई दिल्ली में आयोजित मेजर बॉब खाथिंग स्मृति व्याख्यान में बात की। यहां विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया के ‘हथियारीकरण’ से निपटने और पूर्वोत्तर में जनविश्वास मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। ‘सोशल मीडिया का हथियारीकरण’ व्याख्यान का मुख्य विषय रहा। कार्यक्रम में डीजी मिलिटरी ऑपरेशंस लेफ्टिनेंट जनरल अभिजीत एस. पेंढारकर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि मेजर बॉब खाथिंग के जीवन का अध्ययन यह याद दिलाता है कि पूर्वोत्तर में नेतृत्व के लिए केवल सुरक्षा के दृष्टिकोण को समझना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज को समझना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लोगों के बीच विश्वास का निर्माण करके ही राष्ट्रीय एकीकरण को और मजबूत किया जा सकता है।
वहीं, असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेड़ा ने सोशल मीडिया पर चलाए जाने वाले भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण प्रचार अभियानों के प्रभाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर तैयार किए गए झूठे आख्यान समाज में अस्थिरता पैदा करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने युवाओं से ऐसे अभियानों के प्रति अधिक सतर्क और जागरूक रहने का आह्वान किया।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली सूचनाओं को बिना सत्यापन के स्वीकार करने के बजाय उनकी विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है।
असम राइफल्स ने यूनाइटेड सर्विस इंस्टीटूशन के सहयोग से शुक्रवार को वार्षिक मेजर बॉब खाथिंग स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया। कार्यक्रम में पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा, सामाजिक स्थिरता, राष्ट्रीय एकीकरण और सोशल मीडिया के माध्यम से फैलाए जा रहे झूठे प्रचार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। यह स्मृति व्याख्यान हर वर्ष महान सैन्य अधिकारी मेजर बॉब खाथिंग के योगदान और उनकी विरासत को याद करने के लिए आयोजित किया जाता है।
मेजर बॉब खाथिंग का जीवन पूर्वोत्तर क्षेत्र और राष्ट्रीय एकीकरण के प्रयासों से गहराई से जुड़ा रहा था। भारतीय संयुक्त सेवा संस्थान के महानिदेशक एवं सेवानिवृत्त वाइस एडमिरल संजय जे. सिंह ने यहां मेजर बॉब खाथिंग की समृद्ध विरासत को रेखांकित किया। व्याख्यान के दौरान गलत सूचनाओं, समन्वित प्रचार अभियानों और भ्रामक आख्यानों से उत्पन्न होने वाली नई चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। साथ ही, ऐसे अभियानों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए व्यावहारिक उपायों और रणनीतियों पर विचार किया गया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, पूर्व सैन्य अधिकारी, सामरिक मामलों के विशेषज्ञ, शिक्षाविद, मीडिया पेशेवर और शोधकर्ता शामिल हुए। इस दौरान पूर्वोत्तर के बदलते सूचना वातावरण और राष्ट्रीय सुरक्षा पर उसके प्रभाव को लेकर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
--आईएएनएस
जीसीबी/एसके
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रिवर्स पलायन के लिए विभागीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें: CM धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग की बैठक आयोजित की गई. बैठक में राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन की स्थिति, रिवर्स पलायन को प्रोत्साहित करने, स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने तथा स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने से संबंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई.
रिवर्स पलायन को गति
बैठक में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग द्वारा विभिन्न जनपदों में आयोजित की जा रही प्रवासी पंचायतों, पलायन निवारण एवं स्वरोजगार जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी मुख्यमंत्री के समक्ष रखी गई. आयोग के सदस्यों ने पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने तथा रिवर्स पलायन को गति देने के संबंध में विभिन्न महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए.
अधिक लोगों तक पहुंचाना सुनिश्चित किया
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बैठक में प्राप्त सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार करते हुए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए. उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में रिवर्स पलायन को प्रोत्साहित करने के लिए सभी विभाग अपनी-अपनी विभागीय गतिविधियों और योजनाओं के माध्यम से समन्वित रूप से कार्य करें. विभागीय योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए.
बैंकों के चक्कर न लगाने पड़े
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को स्वरोजगार एवं आजीविका से जुड़ी योजनाओं की जानकारी सरल और प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराई जाए. योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों अथवा बैंकों के चक्कर न लगाने पड़े, इसके लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा योजनाओं की जानकारी गांव स्तर तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जाए.
बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं. स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और कौशल को रोजगार से जोड़ते हुए युवाओं को अपने गांव में ही आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएं. उन्होंने स्थानीय उत्पादों को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने, उनकी गुणवत्ता एवं ब्रांडिंग पर ध्यान देने तथा बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए.
मुख्यमंत्री ने कहा कि रिवर्स पलायन केवल रोजगार उपलब्ध कराने से नहीं, बल्कि गांवों में बेहतर आजीविका, सुविधाएं और संभावनाएं विकसित करने से संभव होगा. इसके लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ परिणामोन्मुखी कार्य करना होगा.
बैठक में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष एस.एस. नेगी, सदस्य अनिल सिंह शाही, दिनेश रावत, सुरेश सुयाल, श्री राम प्रकाश पैन्यूली एवं श्रीमती रंजना रावत, सचिव धीराज गर्ब्याल, डॉ॰ श्रीधर बाबू अद्दांकी, सी. रविशंकर, अहमद इकबाल,अपर सचिव सौरभ गहरवार, श्रीमती अनुराधा पाल, संतोष बडोनी उपस्थित रहे.
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