Responsive Scrollable Menu

BJP और JDS विधायकों ने Vidhana Soudha तक निकाला मार्च, मंत्री नागेंद्र का मांगा इस्तीफा

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (सेक्युलर) के विधायकों ने राज्य संचालित निगम में करोड़ों रुपये के कथित गबन के मामले में आरोपी मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार को यहां विधान सौध तक मार्च निकाला। विधायकों ने विधानसभा में प्रवेश करने की भी कोशिश की और वे मार्शलों के अवरोध को तोड़कर सदन में घुस गए। इन विधायकों ने काले रंग की टी-शर्ट पहनी हुई थी और उन्हें रोक रहे मार्शलों ने कहा कि सदन के अंदर काले रंग की टी-शर्ट पहनना प्रतिबंधित है।

विपक्ष के नेता आर. अशोक और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा के सामने विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा और जद (एस) पिछले कई दिनों से नागेंद्र के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, इससे पहले भी उन्होंने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए, ‘‘मंत्री नागेंद्र को हटाया जाए, उन्हें बर्खास्त किया जाए।’’ विधानसभा के प्रवेश द्वार पर काले रंग की टी-शर्ट पहने भाजपा और जद(एस) के विधायकों को मार्शलों ने रोक दिया।

मार्शलों द्वारा रोके जाने पर विधायकों ने आपत्ति जताई और उनकी मार्शलों से तीखी बहस हुई। आर. अशोक ने नागेंद्र को लगातार समर्थन देने को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ‘‘सबूत होने के बावजूद, क्या सिर्फ एक व्यक्ति (नागेंद्र) को बचाने के लिए कांग्रेस द्वारा पूरे विधानसभा सत्र को बाधित किया जाना उचित है?

क्या यह न्यायसंगत है? कांग्रेस नेताओं को मुझे जवाब देना चाहिए।’’ उन्होंने नागेंद्र को निर्दोष बताने संबंधी उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि नागेंद्र के खिलाफ 31 आपराधिक मामले दर्ज हैं। उन्होंने कहा, मैंने सीबीआई के आरोपपत्र सहित कई दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं।

क्या आपको अब भी इस पर कोई संदेह है? उन्हें (नागेंद्र को) तुरंत बर्खास्त करें और विधानसभा की कार्यवाही होने दें। पत्रकारों को संबोधित करते हुए विजयेन्द्र ने कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टों की, भ्रष्टों द्वारा और भ्रष्टों के लिए सरकार होने का आरोप लगाया।

उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के धन को कांग्रेस के लाभ और 2024 के लोकसभा चुनाव में उसके प्रचार के लिए अवैध रूप से स्थानांतरित किया गया था। विपक्षी दल भाजपा ने नागेंद्र को हटाने की मांग को लेकर कर्नाटक विधानमंडल के दोनों सदनों की कार्यवाही को कई दिनों तक बाधित किया है। कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि एसटी विकास निगम से धन के गबन के आरोपों के बाद सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली पिछली कैबिनेट से इस्तीफा देने वाले नागेंद्र को तीन अगस्त को शिवकुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था।

वह वर्तमान में योजना और सांख्यिकी मंत्री हैं।

Continue reading on the app

Vishwakhabram: 60 घंटे तक लगातार Pakistan को हथियारों से लैस करते रहे China-Turkey के Military Aircraft, भारत की तैयारी भी तेज

भारत के साथ पिछले सैन्य टकराव और ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की सैन्य तैयारियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसी बीच चीन और तुर्किये के भारी सैन्य परिवहन विमानों की पाकिस्तान में करीब 60 घंटे तक असामान्य आवाजाही ने नई चिंता पैदा कर दी है। सवाल यह है कि आखिर ये विमान पाकिस्तान में क्या लेकर पहुंचे? क्या चीन और तुर्किये पाकिस्तान के हथियारों और सैन्य संसाधनों को फिर से मजबूत करने में जुट गए हैं? अगर ऐसा है, तो भारत के लिए इसके सामरिक और रणनीतिक मायने बेहद गंभीर हो सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा सूत्रों ने लगभग 60 घंटे के दौरान चीन और तुर्किये के भारी सैन्य परिवहन विमानों की पाकिस्तान में लगातार आवाजाही को असामान्य बताया है। चीनी सैन्य परिवहन विमान रावलपिंडी के पास स्थित नूर खान एयरबेस और कराची के मसरूर एयरबेस पर उतरते देखे गए। रिपोर्ट में तुर्किये के एक सैन्य परिवहन विमान TUAF526 का भी उल्लेख है। सूत्रों का दावा है कि इन विमानों के जरिए ड्रोन और अन्य सैन्य साजो-सामान पाकिस्तान पहुंचाया गया। हालांकि विमानों में मौजूद वास्तविक कार्गो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। लेकिन जिस पैमाने, एकाग्रता और समयबद्ध तरीके से भारी सैन्य परिवहन विमानों की आवाजाही हुई, उसने इसे सामान्य सैन्य गतिविधि मानने की गुंजाइश कम कर दी है। यह किसी समन्वित लॉजिस्टिक ऑपरेशन का संकेत हो सकता है।

इसे भी पढ़ें: Modi ने पिछले साल China जाने से पहले चली थी तगड़ी चाल, अब Xi Jinping के India आने से पहले खेल दिया बड़ा दाँव

पाकिस्तान के पीछे खड़े हैं चीन और तुर्किये?


भारत के लिए इस घटनाक्रम का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि पाकिस्तान की सैन्य मशीन पहले से ही चीन पर भारी निर्भर है। लड़ाकू विमान हों, एयर डिफेंस सिस्टम हों या मानव रहित युद्ध प्रणाली हो, इस्लामाबाद की रक्षा क्षमता में चीन की भूमिका लगातार बढ़ी है। खासतौर पर भारत-पाकिस्तान के पिछले सैन्य संघर्ष के बाद यह साझेदारी और खुलकर सामने आई। चीन ने स्वयं स्वीकार किया था कि उसके विमानन उद्योग से जुड़े कर्मियों ने पाकिस्तान को तकनीकी सहायता दी थी। हम आपको याद दिला दें कि भारतीय सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने पिछले साल एक सेमिनार में साफ कहा था कि मई 7 से 10 के बीच हुए संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को चीन और तुर्किये दोनों का समर्थन मिला था। उन्होंने कहा था कि भारत को एक सीमा पर नहीं, बल्कि वास्तव में “दो, बल्कि तीन विरोधियों” की चुनौती का सामना करना पड़ा था। सामने पाकिस्तान था और पीछे से चीन हर संभव मदद दे रहा था। उन्होंने पाकिस्तान को मिलने वाले लगभग 81 प्रतिशत सैन्य उपकरणों के चीनी मूल का होने की ओर भी इशारा किया था।

भारतीय आकलन के मुताबिक पाकिस्तान ने पिछले साल सैन्य संघर्ष के दौरान चीन निर्मित J-10 लड़ाकू विमान, PL-15 एयर-टू-एयर मिसाइल और HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम जैसे प्लेटफॉर्म इस्तेमाल किए। राहुल सिंह ने यह भी चेतावनी दी थी कि वास्तविक संघर्ष चीन के लिए अपने हथियारों की क्षमता को परखने का अवसर बन सकता है यानी भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसी स्थिति चीन के लिए एक तरह की “लाइव लैब” भी बन सकती है।

ड्रोन से KAAN तक: तुर्किये-पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य धुरी


उधर, तुर्किये अब केवल पाकिस्तान का राजनीतिक समर्थक नहीं, बल्कि तेजी से उसका प्रमुख रक्षा साझेदार बनता जा रहा है। दोनों देशों के बीच ड्रोन, नौसैनिक प्लेटफॉर्म, एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी और उभरती सैन्य प्रणालियों पर सहयोग बढ़ रहा है। पिछले वर्ष मई में पाकिस्तान के एयर चीफ ने तुर्किये में उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान रक्षा सहयोग, एयरोस्पेस इनोवेशन, मानव रहित प्रणालियों और नई तकनीकों पर चर्चा की थी। इसके बाद दोनों देशों ने लड़ाकू विमान विकास में भी सहयोग बढ़ाने के संकेत दिए। तुर्किये ने इसी महीने कहा था कि उसके KAAN पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में लगभग 200 पाकिस्तानी इंजीनियर और अधिकारी पहले से जुड़े हुए हैं। पाकिस्तान को औपचारिक रूप से इस परियोजना में शामिल करने पर भी चर्चा शुरू होने की बात कही गई है।

यानी एक तरफ पाकिस्तान चीन से तैयार सैन्य प्लेटफॉर्म और तकनीक हासिल कर रहा है, दूसरी तरफ तुर्किये के साथ भविष्य के फाइटर जेट और उन्नत एयरोस्पेस कार्यक्रमों में अपनी जगह बना रहा है। ऐसे में तुर्की सैन्य परिवहन विमानों की यह नई गतिविधि महज एक अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि पाकिस्तान की तेजी से बनती बहुस्तरीय रक्षा आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा हो सकती है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद ड्रोन युद्ध की नई तैयारी?


ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान द्वारा तुर्किये निर्मित ड्रोन के इस्तेमाल ने भारत के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत दिया था। भारतीय आकलन के अनुसार पाकिस्तान ने Baykar Yiha III कामिकाजे ड्रोन और Asisguard Songar जैसे तुर्की मूल के सिस्टम का इस्तेमाल किया। देखा जाये तो यदि अब चीन और तुर्किये से पाकिस्तान की ओर कथित रूप से ड्रोन और अन्य सैन्य सामग्री की नई खेप पहुंच रही है, तो इसके रणनीतिक निहितार्थ बेहद गंभीर हैं। आधुनिक युद्ध में ड्रोन केवल निगरानी का साधन नहीं रह गए हैं। वे सस्ते लेकिन घातक हमले, झुंड आधारित आक्रमण, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, सीमा पार निगरानी और संवेदनशील सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता रखते हैं।

भारत के लिए चुनौती यह है कि पाकिस्तान की संभावित पुनःपूर्ति केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं हो सकती। चीन की तकनीक और तुर्किये के ड्रोन अनुभव का संयोजन पाकिस्तान को कम लागत वाले लेकिन बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जा सकने वाले मानव रहित हथियारों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा सकता है।

मक्का समझौता और नया क्षेत्रीय समीकरण


देखा जाये तो इस पूरी गतिविधि का समय भी बेहद महत्वपूर्ण है। 7 अगस्त को पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब ने मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते के अनुसार तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला तीनों के खिलाफ हमला माना जाएगा। आधिकारिक तौर पर इसे रक्षात्मक समझौता बताया गया है और कहा गया है कि यह किसी विशेष देश के खिलाफ नहीं है। लेकिन रणनीति केवल दस्तावेजों में लिखे शब्दों से नहीं समझी जाती। पाकिस्तान और तुर्किये पहले ही सऊदी समर्थित समुद्री सुरक्षा सहयोग के प्रति समर्थन जता चुके हैं, जिसका उद्देश्य समुद्री मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति लाइनों की सुरक्षा है। ऐसे में चीन से सैन्य प्लेटफॉर्म, तुर्किये से ड्रोन और एयरोस्पेस सहयोग, तथा सऊदी अरब के साथ गहराता सुरक्षा ढांचा, ये सभी अलग-अलग घटनाएं नहीं, बल्कि पाकिस्तान के आसपास बन रहे एक बड़े रणनीतिक नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं।

पाकिस्तान सिर्फ खरीदार नहीं, चीन का ‘शोकेस’ भी


दूसरी ओर, इस पूरे समीकरण का एक और महत्वपूर्ण पहलू है। पाकिस्तान केवल चीन से हथियार खरीदने वाला ग्राहक नहीं रह गया है। वह चीन के रक्षा उद्योग का साझेदार और संभावित प्रदर्शन मंच भी बन रहा है। दोनों देश संयुक्त रूप से JF-17 लड़ाकू विमान बनाते हैं और पाकिस्तान पहले से HQ-9 तथा विभिन्न चीनी मानव रहित प्रणालियों का उपयोग कर रहा है। वास्तविक संघर्ष में इन हथियारों का इस्तेमाल चीन के लिए तकनीकी परीक्षण और अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है। इसलिए पाकिस्तान की सैन्य क्षमता में निवेश को केवल भारत-पाकिस्तान संबंधों के संकुचित दायरे में देखना भूल होगी। इसके पीछे चीन की रक्षा-औद्योगिक महत्वाकांक्षाएं और दक्षिण एशिया में उसकी दीर्घकालिक रणनीतिक उपस्थिति भी जुड़ी हुई है।

भारत के लिए चेतावनी साफ है


उधर, करीब 60 घंटे के भीतर भारी सैन्य परिवहन विमानों की असामान्य गतिविधि, नूर खान और मसरूर जैसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर चीनी विमानों की लैंडिंग, तुर्किये के परिवहन विमान की मौजूदगी, ड्रोन और रक्षा सामग्री पहुंचने के दावे, इन सबकी स्वतंत्र पुष्टि भले अभी बाकी हो, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना रणनीतिक भूल होगी। असल चुनौती केवल यह नहीं है कि पाकिस्तान को कितने ड्रोन या कौन से हथियार मिले। चुनौती यह है कि भारत के सामने एक ऐसा विरोधी खड़ा है, जिसकी सैन्य क्षमता को चीन तकनीकी और औद्योगिक समर्थन दे सकता है, तुर्किये ड्रोन और एयरोस्पेस सहयोग से मजबूत कर सकता है और व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा समझौते पाकिस्तान को नई कूटनीतिक तथा सामरिक गहराई दे सकते हैं।

ऑपरेशन सिंदूर ने भारत को यह दिखा दिया कि भविष्य का युद्ध केवल टैंक, लड़ाकू विमान और मिसाइलों से तय नहीं होगा। अगली लड़ाई अंतरिक्ष से मिलने वाली जानकारी, ड्रोन स्वार्म, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, एयर डिफेंस नेटवर्क, लंबी दूरी की मिसाइलों और रियल-टाइम सैन्य डेटा की होगी। और यही कारण है कि चीन और तुर्किये से पाकिस्तान की ओर कथित सैन्य एयरलिफ्ट को केवल “कुछ विमानों की आवाजाही” मानकर खारिज नहीं किया जा सकता। यदि इन उड़ानों के पीछे वास्तव में समन्वित सैन्य पुनःपूर्ति अभियान है, तो संदेश स्पष्ट है कि पाकिस्तान अपनी सैन्य क्षमता को फिर से भरने में जुटा है, और उसके पीछे खड़े सहयोगियों का नेटवर्क पहले से कहीं ज्यादा सक्रिय दिखाई दे रहा है। बहरहाल, भारत के लिए यह समय सिर्फ निगरानी का नहीं, बल्कि तैयारियों को और तेज करने का है।

-नीरज कुमार दुबे

Continue reading on the app

  Sports

Cricket : रवि बिश्नोई ने सुमेरपुर में खोली क्रिकेट एकेडमी, छोटे शहर के खिलाड़ियों को मिलेंगी इंटरनेशनल लेवल की सुविधाएं

Ravi Bishnoi Cricket Academy : रवि बिश्नोई ने सुमेरपुर में 'स्पार्टन क्रिकेट एकेडमी' का भव्य शुभारंभ किया. इससे स्थानीय युवा क्रिकेटरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग और सुविधाएं मिलेंगी. Fri, 21 Aug 2026 22:41:31 +0530

  Videos
See all

रियासी उधमपुर में अलर्ट, सुरक्षा बलों का बड़ा सर्च ऑपरेशन! | #shorts #viralnews #viralvideo #army #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-21T17:44:23+00:00

Satya Aur Tathya: स्वराज पर राहुल की थ्योरी कितनी सही? | Rahul Gandhi | Swaraj | Amish Devgan #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-21T17:45:06+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers