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अंतर‍िक्ष में दबदबा बनाए रखने की तैयारी में ट्रंप, हर साल एक हजार से ज्यादा लॉन्च-रीएंट्री का लक्ष्य

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2030 तक अमेरिका की धरती से हर साल एक हजार से ज्यादा स्पेस लॉन्च और री-एंट्री कराने का अभियान शुरू किया है। इसका मकसद अमेरिका की कमर्शियल स्पेस अर्थव्यवस्था को बढ़ाना और अंतरिक्ष में उसकी बढ़त को चुनौती देने वाले देशों का मुकाबला करना है।

ट्रंप ने एक नेशनल सिक्योरिटी प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत व्हाइट हाउस के अनुसार पुरानी हो चुकी अंतरिक्ष परिवहन नीति को बदलकर एक 'अमेरिका फर्स्ट' नीति लागू की गई है। इसका फोकस अंतरिक्ष तक भरोसेमंद, किफायती और आधुनिक पहुंच सुनिश्चित करना है।

ज्यादा प्रतिस्पर्धी और मजबूत बनाना लक्ष्य

नई नीति का लक्ष्य अमेरिका के अंतरिक्ष परिवहन उद्योग को ज्यादा प्रतिस्पर्धी और मजबूत बनाना है। इसके तहत सरकारी एजेंसियां और निजी कंपनियां मिलकर लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करेंगी और नए अंतरिक्ष सिस्टम लॉन्च करने की लागत कम करने पर काम करेंगी। संघीय एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे निजी क्षेत्र के साथ मिलकर अंतरिक्ष परिवहन से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करें। साथ ही परमिट जारी करने और पर्यावरणीय समीक्षा की प्रक्रियाओं को भी तेज किया जाएगा।

नए स्थानों की पहचान

परिवहन और आंतरिक मामलों के सचिव, युद्ध सचिव और नासा एडमिनिस्ट्रेटर के साथ मिलकर ऐसे स्थानों की पहचान करेंगे जहां नए अंतरिक्ष परिवहन ढांचे विकसित किए जा सकें। इनमें नए लॉन्च और रीएंट्री केंद्र भी शामिल हो सकते हैं। मेमोरेंडम में कहा गया है कि महत्वपूर्ण लॉन्च मार्गों के लिए विशेष एयरस्पेस निर्धारित किया जाए। अंतरिक्ष परिवहन गतिविधियों को अमेरिकी एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम के आधुनिकीकरण की व्यापक योजना में भी शामिल किया जाएगा।

सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर रणनीति तैयार

व्हाइट हाउस के विज्ञान और प्रौद्योगिकी सलाहकार विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर अंतरिक्ष परिवहन उद्योग के लिए एक संयुक्त रणनीति तैयार करेंगे। इसमें खरीद प्रक्रिया, अंतरिक्ष सुरक्षा नीतियां और इस उद्योग के लिए आवश्यक कार्यबल से जुड़े मुद्दे शामिल होंगे। विदेश और वाणिज्य सचिवों को निर्देश दिया गया है कि वे अमेरिकी अंतरिक्ष परिवहन कंपनियों के लिए विदेशी बाजारों में पहुंच बढ़ाने का काम करें और अमेरिकी तकनीक व मानकों को अपनाने के लिए दूसरे देशों को प्रोत्साहित करें।

व्यावसायिक परिवहन सेवाओं को बढ़ावा

नासा को चंद्रमा तक आने-जाने के लिए व्यावसायिक परिवहन सेवाओं को बढ़ावा देने का निर्देश दिया गया है। साथ ही वह मंगल ग्रह तक रोबोटिक मिशनों के लिए निजी कंपनियों की मदद करेगा और इंसानों को मंगल तक ले जाने और वापस लाने के लिए निजी विकल्पों की भी जांच करेगा। मेमोरेंडम के अनुसार युद्ध सचिव को मौजूदा और संभावित मिशनों के लिए अंतरिक्ष के भीतर परिवहन सेवाओं के उपयोग को बढ़ाने और विस्तार देने का काम सौंपा गया है।

विस्तार इसलिए जरूरी

व्हाइट हाउस का कहना है कि यह विस्तार इसलिए जरूरी है, क्योंकि अमेरिका के प्रतिद्वंद्वी देश अंतरिक्ष में उसकी बढ़त को चुनौती दे रहे हैं। प्रशासन के मुताबिक महत्वपूर्ण अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा, सैन्य तैयारी और देश की आर्थिक मजबूती दोनों के लिए जरूरी है। सरकार का कहना है कि कमर्शियल स्पेस सेक्टर का विस्तार उच्च वेतन वाली एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग नौकरियां पैदा कर सकता है और अंतरिक्ष प्रणालियों के विकास तथा तैनाती की लागत को कम कर सकता है।

हर साल एक हजार से अधिक लॉन्च और रीएंट्री का लक्ष्य अमेरिकी अंतरिक्ष गतिविधियों में बहुत बड़ी बढ़ोतरी को दर्शाता है। प्रशासन का कहना है कि इसे हासिल करने के लिए नए इंफ्रास्ट्रक्चर, तेज नियामकीय फैसले, अधिक लॉन्च क्षमता और सरकार व निजी कंपनियों के बीच गहरा सहयोग जरूरी होगा।

ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान यूएस स्पेस फोर्स की स्थापना की थी। यह अमेरिकी सशस्त्र बलों की पहली नई शाखा थी, जो वायु सेना के गठन के 70 साल से भी अधिक समय बाद बनाई गई। उन्होंने आर्टेमिस चंद्र मिशन, कमर्शियल नियमन और अंतरिक्ष साइबर सुरक्षा सिद्धांतों से जुड़ी सात अंतरिक्ष नीति निर्देशिकाएं भी जारी की थीं।

 (DISCLAIMER: खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)

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Flood in MP: मध्यप्रदेश के सतना जिला समेत कई जिलों में भयंकर बारिश से बाढ़ और जलभराव, खतरे में आबादी

Flood in Madhya Pradesh: मानसून की एंट्री होते ही अगस्त के महीने में भारी बारिश लोगों का बड़ा संकट बन गया है. देश के पहाड़ी राज्यों समेत मैदानी इलाकों में भी भयंकर बरसात हो रही है, जिस कारण नदियां उफान पर है. इलाकों में बाढ़ का संकट बढ़ गया है. पहाड़ों में बादल फट रहे हैं. वहीं, यूपी और एमपी में भी अगस्त में भारी बारिश हुई है. पहाड़ी राज्यों की बात करें तो यहां बादल फटने से नदियों में उफान आ रहा है. जम्मू का राजौरी सेक्टर खतरे में हैं. वहीं, हिमाचल प्रदेश में भी हालात बदत्तर है. यहां सड़क धंस गई है और ट्रक नाले में गिरने से बाल-बाल बच गया है. हिमाचल में इस मानसून सीजन में भारी बारिश के असर की बात करें तो हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान बारिश, लैंडस्लाइड और सड़क हादसों से जुड़ी कुल मौतों का आंकड़ा 200 से ज्यादा हो गया है.

मध्यप्रदेश का बुरा हाल

मध्य प्रदेश के मौसम की बात करे तो मौसम विभाग ने कई जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी जी है. सतना जिले के नागौद इलाके का हाल सबसे खराब है. पुल पूरी तरह से जलमग्न हो गया है, जो गांव से एकमात्र आवागमन का मार्ग था. भारी बारिश से रीवा की भी ऐसी ही स्थिति हैं. यहां बरसात के बाद से रीवा प्रयागराज मार्ग बंद हो गया है. क्यूटी वॉटरफॉल ने रौद्र रूप ले लिया है. 

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