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Jairam Ramesh ने Great Nicobar project को रोकने की मांग की, केंद्र पर साधा निशाना

कांग्रेस ने ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर शुक्रवार को मोदी सरकार पर एक बार फिर से निशाना साधा और कहा कि वहां ‘‘गंभीर पारिस्थितिक मूर्खता’’ का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है और स्थानीय तथा राष्ट्रीय हितों की मांग है कि इस परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जाए। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि ग्रेट निकोबार को बचाने की सार्वजनिक लड़ाई जारी है, हालांकि मोदी सरकार अब इसे आगे बढ़ाने के लिए नए कारण ‘‘गढ़’’ रही है। रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ग्रेट निकोबार में गंभीर पारिस्थितिक भूल का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।’’ उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना है, जिसमें पारगमन बंदरगाह, हवाई अड्डा और बड़े पर्यटन परिसर शामिल हैं।

उनके अनुसार, पर्यावरण और वन मंजूरियां सभी नियमों, प्रक्रियाओं और दिशानिर्देशों का खुला उल्लंघन करते हुए ‘‘जबरन’’ दी गई हैं। पूर्व पर्यावरण मंत्री रमेश ने कहा कि कलकत्ता उच्च न्यायालय इस परियोजना के खिलाफ दायर पांच अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, लेकिन मोदी सरकार ‘‘बेहद बेपरवाह, उदासीन और अडिग’’ बनी हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘दूसरा, खबर आई कि 10 अगस्त, 2026 को स्थानीय प्रशासन ने लिटिल अंडमान और ग्रेट निकोबार के आसपास अधिसूचित क्षेत्रों में बिजली की भारी खपत करने वाले बड़े डेटा केंद्र स्थापित करने की योजना की घोषणा की थी।’’ रमेश ने कहा कि ‘‘रहस्यमय तरीके से’’ एक पखवाड़े के भीतर इन योजनाओं को ‘‘प्रशासनिक कारणों’’ का हवाला देते हुए वापस ले लिया गया।

उन्होंने उम्मीद जताई कि यह वापसी स्थायी होगी। रमेश ने कहा कि वास्तविक स्थानीय और राष्ट्रीय हित यही मांग करते हैं कि इस परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जाए।

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Supreme Court ने Judicial Service परीक्षा के लिए अनिवार्य अनुभव घटाकर 1 साल किया

उच्चतम न्यायालय ने मई 2025 के अपने फैसले में संशोधन करते हुए न्यायिक सेवा की प्रवेश स्तरीय परीक्षा में शामिल होने के लिए वकालत के अनिवार्य अनुभव को तीन साल से घटाकर शुक्रवार को एक साल कर दिया। भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति ए जी मसीह एवं न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने इस मामले में सुनाए फैसले में कहा कि हालांकि चयनित उम्मीदवारों को न्यायिक अकादमी में प्रशिक्षण लेना होगा और इसके बाद एक वर्ष का अतिरिक्त न्यायिक प्रशिक्षण (क्लर्कशिप) लेना होगा। पीठ ने कहा कि 25 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच अधिसूचित न्यायिक परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थी पूर्व अनुभव की शर्त के बिना पात्र होंगे।

उसने कहा कि ऐसे उम्मीदवारों को चयन के बाद एक वर्ष के लिए केवल प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाएगा और इसके बाद उन्हें एक वर्ष का निर्धारित न्यायिक प्रशिक्षण लेना होगा। उच्चतम न्यायालय ने हाल में विधि की पढ़ाई पूरी करने वाले स्नातकों के प्रवेश स्तर की न्यायिक सेवा परीक्षा में शामिल होने पर पिछले साल 20 मई को रोक लगाते हुए कम से कम तीन वर्ष की वकालत के अनुभव की शर्त तय की थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि तीन साल की वकालत की शर्त को अचानक बहाल करने और बीच की अवधि के लिए कोई व्यवस्था न किए जाने से युवा वकीलों और विधि स्नातकों को कठिनाई हुई है, इसलिए सीमित हस्तक्षेप जरूरी है।

उसने कहा कि एक अप्रैल 2027 के बाद अधिसूचित होने वाली परीक्षाओं के अभ्यर्थियों पर नयी व्यवस्था लागू होगी। उच्चतम न्यायालय ने मई 2025 के अपने उस फैसले को चुनौती देने वाली पुनरीक्षण याचिकाओं पर यह निर्णय सुनाया, जिसमें सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) के पद पर सीधी भर्ती के जरिये न्यायिक सेवा में प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए तीन साल की वकालत अनिवार्य की गई थी। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने बहुमत का फैसला सुनाते हुए कहा कि पीठ को पहले के फैसले के इस मूल आधार में हस्तक्षेप का कोई कारण नजर नहीं आता कि न्यायपालिका में शामिल होने से पहले अभ्यर्थी को कानूनी पेशे का कुछ अनुभव होना चाहिए।

हालांकि, पीठ ने कहा कि पूर्व अनुभव की शर्त का उचित आधार होना चाहिए और इससे युवा अधिवक्ताओं को कठिनाई नहीं होनी चाहिए। उसने स्पष्ट किया कि पूर्व अनुभव की अनिवार्यता के संबंध में पहले के फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में दायर पुनरीक्षण याचिकाओं और रिट याचिकाओं पर 28 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

शीर्ष अदालत ने 13 मार्च को सभी उच्च न्यायालयों से सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) के पदों के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 30 अप्रैल तक बढ़ाने को कहा था। उसने न्यायिक सेवा की प्रवेश स्तर की परीक्षा में शामिल होने के लिए तीन साल के अनुभव की शर्त पर सभी उच्च न्यायालयों, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों और अन्य विधि शिक्षण संस्थानों की राय मांगी थी।

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  Sports

4 भारतीय बल्लेबाज, जिन्होंने एक कैलेंडर ईयर में ठोक दिए सबसे ज्यादा शतक

5 Indian Batsman most Hundred in Calendar Year: इंटरनेशनल क्रिकेट में एक कैलेंडर ईयर में शतकों का अंबार लगाना बल्लेबाजों की असाधारण फॉर्म को दर्शाता है. भारतीय क्रिकेट में यह ऐतिहासिक कीर्तिमान सचिन तेंदुलकर के नाम है, जिन्होंने साल 1998 में यह महारिकॉर्ड अपने नाम किया था. इसके बेहद करीब विराट कोहली पहुंचे, जिन्होंने 2017 और 2018 में लगातार ढेरों शतक ठोके. इसके अलावा राहुल द्रविड़ ने 1999 में और रोहित शर्मा ने 2019 में 10-10 शतक जड़कर क्रिकेट इतिहास में अपनी खास जगह बनाई. Fri, 21 Aug 2026 17:55:07 +0530

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