सिख कैदियों की रिहाई के लिए बंद का आह्वान, पंजाब के कई हिस्सों में दिखा असर
Punjab Bandh: सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर कौमी इंसाफ मोर्चा द्वारा बुलाए गए 'बंद' का असर शुक्रवार को पंजाब के कुछ हिस्सों में देखने को मिला, जहां कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रमुख शहरों में पुलिस तैनात की गई थी. मोहाली में, बंद के कुछ समर्थकों ने फेज 7 में शहर के एक चौराहे पर यातायात के प्रवाह को अवरुद्ध करने का प्रयास किया और कई वाहनों को आगे बढ़ने से रोक दिया. अमृतसर में पुलिस बल तैनात किया गया है क्योंकि कौमी इंसाफ मोर्चा ने पंजाब भर में सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक बंद का आह्वान किया है. इस बंद को विभिन्न सिख संगठनों का समर्थन प्राप्त है.
अमृतसर में चप्पे-चप्पे पर तैनात पुलिस
एडीसीपी हरपाल सिंह ने कहा, "यहां के सभी बाजार बंद हैं. अमृतसर के सभी इलाकों में पुलिस तैनात है. शहर में स्थिति शांतिपूर्ण है. सभी जत्थेबंदियों ने इस बंद का समर्थन किया है." मोगा में, सिटी 1 के एसएचओ इंस्पेक्टर गुरविंदर सिंह भुल्लर ने कहा कि पुलिस ने सुबह से ही व्यापक इंतजाम कर रखे थे. उन्होंने बताया, "आज सुबह से ही हमारे एसएसपी के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए मोगा पुलिस ने यहां भारी पुलिस बल तैनात किया है. मैं जनता को आश्वस्त करना चाहता हूं कि किसी को भी कानून व्यवस्था भंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन करना चाहिए।" भुल्लर ने कहा कि आवश्यक सेवाएं और आपातकालीन अभियान सुचारू रूप से चल रहे हैं. "जैसा कि आप देख सकते हैं, लोग इधर-उधर घूम रहे हैं और काम पर जा रहे हैं.
बारिश के चलते नहीं पहुंचा कोई भी प्रदर्शनकारी
विरोध प्रदर्शन सुबह 7:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक चलना था. हालांकि, जैसा कि आप देख सकते हैं, भारी बारिश हो रही है, इसलिए अभी तक कोई भी प्रदर्शनकारी यहां नहीं पहुंचा है. "अधिकारी ने नागरिकों से घबराहट न करने की अपील की. भुल्लर ने कहा, "डरने की कोई जरूरत नहीं है; जरूरी काम वाले लोग अपना काम कर सकते हैं, क्योंकि पुलिस बल पूरी तरह से तैनात है. हम किसी भी उपद्रवी तत्व को सिर उठाने नहीं देंगे."
15 अगस्त के दिन चंडीगढ़ में हुआ था बवाल
इससे पहले, 15 अगस्त को, कौमी इंसाफ मोर्चा से जुड़े प्रदर्शनकारियों को चंडीगढ़ में पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल करके तितर-बितर कर दिया था. उस दैरान वे पंजाब के राज्यपाल के आवास की ओर मार्च करने का प्रयास कर रहे थे और सिख कैदियों की रिहाई की मांग कर रहे थे , जिनमें जगतर सिंह हावारा भी शामिल थे, जो 1995 में तत्कालीन पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं. कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड और कांटेदार तार हटाने का प्रयास किया, और कुछ अन्य ने चंडीगढ़ में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया के आवास की ओर बढ़ने के प्रयास में ट्रैक्टर का उपयोग करके उन्हें गिराने की कोशिश की.
विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बारे में बात करते हुए, जगतार सिंह हावारा के पिता बापू गुरचरण सिंह ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र में एक मौलिक अधिकार है और आरोप लगाया कि सरकार उनके प्रदर्शन को बाधित कर रही है. "लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हमारा मौलिक अधिकार है. हम तीन साल से अधिक समय से यहां शांतिपूर्वक बैठे हैं, लेकिन सरकार हमें न्याय देने को तैयार नहीं है.इसीलिए स्वतंत्रता दिवस पर हमने काले झंडे लेकर शांतिपूर्ण मार्च और विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया. हमारा उद्देश्य पूरी तरह से शांतिपूर्ण है, लेकिन हमें लगता है कि सरकार इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में बाधा डाल रही है। हमने कभी भी बैरिकेड नहीं तोड़े हैं,".
टाटा की कार खरीदने वालों को झटका! सितंबर से बढ़ेंगे दाम, जानें कितनी होगी बढ़ोतरी
Tata Motors Price Hike: देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड ने अपनी यात्री वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है. कंपनी ने शुक्रवार को कहा कि वह 1 सितंबर 2026 से अपने पूरे यात्री वाहन पोर्टफोलियो, जिसमें पेट्रोल-डीजल मॉडल और इलेक्ट्रिक वाहन दोनों शामिल हैं, की कीमतों में 25,000 रुपए तक की वृद्धि करेगी.
कंपनी के अनुसार, कीमतों में बढ़ोतरी का स्तर सभी मॉडलों और वेरिएंट्स के लिए अलग-अलग होगा. टाटा मोटर्स ने कहा कि यह निर्णय बढ़ती इनपुट लागत और लगातार बने हुए मुद्रास्फीति के दबावों के प्रभाव को आंशिक रूप से संतुलित करने के लिए लिया गया है. टाटा मोटर्स ने यह भी स्पष्ट किया कि वह लागत में आई बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा पहले से खुद वहन कर रही है, लेकिन लगातार बढ़ते खर्चों के कारण अब कीमतों में संशोधन करना आवश्यक हो गया है. यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब अन्य प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां भी अपने वाहनों की कीमतें बढ़ा चुकी हैं. हाल ही में हुंडई मोटर इंडिया ने बढ़ती कच्चे माल की लागत, ऊंचे परिचालन खर्च और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का हवाला देते हुए अपने वाहन पोर्टफोलियो की कीमतों में 1 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की घोषणा की थी.
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वहीं, मारुति सुजुकी ने भी अगस्त से अपने एरिना और नेक्सा मॉडल्स की कीमतों में वृद्धि की थी. कंपनी ने विभिन्न मॉडलों और वेरिएंट्स के अनुसार 2,500 रुपए से 30,000 रुपए तक कीमतें बढ़ाई थीं. कीमतों में लगातार हो रहे ये बदलाव ऑटोमोबाइल उद्योग पर पड़ रहे निरंतर लागत दबाव के बीच आए हैं, जिसमें कंपनियां कच्चे माल, पुर्जों, लॉजिस्टिक्स और परिचालन खर्चों में बढ़ोतरी के कारण लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालने के लिए मजबूर हो रही हैं. हालांकि वाहन निर्माता लागत अनुकूलन के जरिए ग्राहकों पर पड़ने वाले असर को सीमित रखने की कोशिश भी कर रहे हैं. वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स का शुद्ध लाभ घटकर 859 करोड़ रुपए रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में 4,003 करोड़ रुपए था. यह सालाना आधार पर करीब 79 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। तिमाही आधार पर भी कंपनी का लाभ 85 प्रतिशत कम हुआ है.
इस बीच, घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार के शुरुआती कारोबार के दौरान टाटा मोटर्स के शेयर 0.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 319.70 रुपए पर कारोबार करता दिखाई दिए. पिछले 6 महीने में स्टॉक 15.87 प्रतिशत तक टूटा है, वहीं पिछले एक साल में करीब 23 प्रतिशत गिरा है, जबकि इस साल अब तक कंपनी के शेयर 13 प्रतिशत से ज्यादा गिरे हैं. एनएसई के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 52 सप्ताह में शेयर ने 419 रुपए का उच्चतम और 294.30 रुपए का न्यूनतम स्तर छुआ है.
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