सागर कुलकर्णी
वाशिंगटन, 21 अगस्त अमेरिकी परमाणु उद्योग उस ‘शांति अधिनियम’ को लागू करने के लिए तैयार किए गए मसौदा नियमों और विनियमों पर भारत को विस्तृत सुझाव देगा जिसने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोल दिया है। परमाणु ऊर्जा विभाग ने ‘भारत में बदलाव के लिए परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन और विकास (शांति) अधिनियम’ के मसौदा नियम एवं विनियम पिछले सप्ताह जारी किए थे तथा उन पर चार सितंबर तक सुझाव देने का अनुरोध किया गया है। अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच (यूएसआईएसपीएफ) ने भारत के कानूनी विशेषज्ञों और वाशिंगटन स्थित परमाणु ऊर्जा संस्थान के साथ इस मुद्दे पर बृहस्पतिवार को चर्चा की।
यूएसआईएसपीएफ ने असैन्य परमाणु क्षेत्र में अवसरों का पता लगाने के लिए अमेरिकी परमाणु उद्योग के प्रतिनिधियों के एक शिष्टमंडल का इस साल की शुरुआत में भारत में नेतृत्व किया था। सोशल मीडिया पर यूएसआईएसपीएफ ने एक पोस्ट में कहा, ‘‘यूएसआईएसपीएफ चार सितंबर की समयसीमा तक भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) को उद्योग की ओर से एक विस्तृत सुझाव-पत्र सौंपने के लिए समन्वय कर रहा है।’’
यूएसआईएसपीएफ ने शांति अधिनियम के हाल में जारी मसौदा नियमों और विनियमों पर अपनी परमाणु उद्योग समिति के लिए एक ऑनलाइन बैठक भी आयोजित की। यूएसआईएसपीएफ ने कहा, ‘‘ऑनलाइन बैठक में विभिन्न परमाणु क्षेत्रों के वरिष्ठ उद्योग प्रतिनिधि शामिल हुए।
इसमें मसौदा शांति नियमों और विनियमों के प्रमुख प्रावधानों तथा उद्योग के लिए उनके मायने, निजी क्षेत्र के प्रवेश, लाइसेंस, दायित्व और परियोजनाओं की संरचना पर इनके प्रभाव तथा उन क्षेत्रों पर चर्चा की गई जिन पर उद्योग को ध्यान देने और सरकार को संभावित सुझाव देने की जरूरत है।’’
उसने बताया कि दिल्ली स्थित पीएलआर चैंबर्स के सुहान मुखर्जी और परमाणु ऊर्जा संस्थान में राष्ट्रीय सुरक्षा एवं अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के वरिष्ठ निदेशक टेड जोन्स ने ऑनलाइन बैठक को संबोधित किया। ये मसौदा नियम परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने की दिशा में भारत की ओर से उठाए गए पहले विस्तृत कदम हैं। इनमें लाइसेंस, बीमा और मंजूरी से जुड़ी प्रक्रियाएं तय की गई हैं लेकिन संवेदनशील गतिविधियों पर सरकार का नियंत्रण बरकरार रखा गया है।
शांति अधिनियम भारत के असैन्य परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों और संयुक्त उपक्रमों के लिए खोलता है। इसके तहत उन्हें परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण, स्वामित्व और संचालन करने, उन्हें बंद करने की प्रक्रिया पूरी करने तथा परमाणु अनुसंधान एवं विकास कार्य करने की अनुमति होगी। भारत ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
इसके अलावा 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) स्थापित करने का लक्ष्य है।
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पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को असीम शक्तियां मिल रही हैं। पाकिस्तान की सरकार ने उनके हाथ में अब परमाणु की कमान दे दी है और इन सबके बीच जब यह गतिविधि पाकिस्तान में जारी है। पाकिस्तान में दूसरी तरफ हंगामा है और खबरें हैं। खबरें हैं पुष्टि नहीं करते हैं कि कुछ कार्गो मिलिट्री विमान जो तुर्किए और चीन के हैं, वह पाकिस्तान पहुंच रहे हैं। उनमें क्या ऐसा संदिग्ध सामान है? यह अपने आप में सवाल है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ भी बने हुए हैं और तो और वह अपना प्रमोशन एक बार और करवा रहे हैं। अब उन्हें पाकिस्तान की फेडरल कमेटी ने नए डिफेंस फोर्सेस एक्ट 2026 के मुताबिक जो है नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट 2010 में संशोधन को हरी झंडी दी और बताया यह जा रहा है कि सैन्य कमांड स्ट्रक्चर पर बड़ा असर पड़ेगा। इसका जो बदलाव है आसिम मुनीर के पाकिस्तान में परमाणु कमांड पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा और इसमें सीडीएफ की भूमिका बढ़ जाएगी। पाकिस्तान के परमाणु बटन की चाबी आसिम मुनीर के हाथ आ जाएगी। जो प्रस्तावित बदलाव आया सामने उसमें यह है कि जो चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ फोर्सेस है सीडीएफ उसके पद और उसके मुख्यालय को वैधानिक आधार दिया जाएगा। इसके तहत सीडीएफ हेड क्वार्टर की संरचना, अधिकार, प्रशासनिक व्यवस्था, स्टाफिंग, संयुक्त सैन्य योजना तीनों सेनाओं के बीच समन्वय से जुड़े और तय किए जाएंगे। यानी कि पाकिस्तान के न्यूक्लियर एसेट्स का कंट्रोल सीडीएफ के पास होगा।
बटन किसके पास होगा
आसिम मुनीर के हाथ में परमाणु स्टोरेज की चाबी आ जाएगी। पाकिस्तान अगर किसी संकट में फंस गया और उसे ऐसा लगता है जैसा कि वो तो बात-ब बात पर कहता है कि परमाणु चला देंगे परमाणु है हमारे पास। इससे उसकी जिम्मेदारी आप समझ सकते हैं कि कितना गैर जिम्मेदार है वो। लेकिन उसके बावजूद भी वो फंसता है और फैसला होता है कि किसी के खिलाफ उसे परमाणु हथियार इस्तेमाल करना है। तो इसका इकलौता फैसला जो है वो सैन्य अधिकारी के पास नहीं होगा। ऐसा बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि सबसे ऊपर जो है वो नेशनल कमांड अथॉरिटी होगी इस चेन में जिसकी अध्यक्षता वहां पीएम करते हैं। परमाणु नीति और हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े अंतिम फैसले का अधिकार इसी शीर्ष संस्था के पास रहता है। इसके बाद सैन्य स्तर पर चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस यानी मौजूदा स्थिति में आसिम मुनीर की भूमिका हो जाती है। नए ढांचे में सीडीएफ को तीनों सेनाओं के संयुक्त सैन्य कमांड रणनीतिक बलों की निगरानी से जोड़ा गया है। उनके नीचे कमांडर नेशनल स्ट्रेटेजिक कमांड सेनाओं के ऑपरेशनल कमांड की जिम्मेदारी जो है वह संभालता है और सीएनएस सी की नियुक्ति जो है वो प्रधानमंत्री जो है और सीडीएफ की सिफारिश पर की जाती है। इसी तरह से सीडीएफ यानी कि जिस पद को अभी आसिम मुनीर के पास है वो बहुत अहम हो जाता है। यानी कि चाबी जो है वो रहेगा आसिम मुनीर के पास और बटन जो रहेगा वो आपके पीएम के पास रहेगा। यानी कि परमाणु पावर में जो बंटवारा लगना था वो दोनों ने आपस में लगा लिया है। और इस बदलाव को अगर हम समझे तो सै जो उनका सतवा संवैधानिक संशोधन है पाकिस्तान में सीडीएफ का जो पद बनाया गया और सीजीसीएससी को खत्म किया गया।
चीन और तुर्की के सैन्य विमान पाकिस्तान पहुंचे?
इन सब के बीच जो फ्लाइट ट्रैकिंग डाटा है और कुछ मीडिया हाउसेस हैं जिसकी हम स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सकते हैं। वो एक अटकल लगा रहे हैं। अटकल यह है कि बीते 60 घंटों के भीतर चीन और तुर्की के सैन्य विमान जो हैं वह पाकिस्तान पहुंचे हैं जिसमें संभावित हथियार सैन्य उपकरण की आपूर्ति को लेकर अटकलें हैं। ओपन सोर्स फ्लाइट ट्रैकिंग डाटा की पड़ताल में तस्वीर थोड़ी अलग है। ज्यादा सावधानी से जो है वह अगर हम उसे पेश करें तो जांच जो है फ्लाइट ट्रैकिंग डाटा की उसके मुताबिक तुर्की के एक सैन्य परिवहन विमान को लेकर तो जानकारी आई है कि टर्किश एयरफोर्स का एयरबस A400 एम एल्टास विमान जिसका रजिस्ट्रेशन जो है और वो तमाम चीजें मौजूद हैं। पाकिस्तान से जुड़ी उड़ान में ट्रैक किया गया है। ओपन सोर्स मिलिट्री एिएशन ट्रैकिंग के मुताबिक यह विमान 18 अगस्त के आसपास पाकिस्तान में था और वहां से बाद में वो वापस लौट आया।
मसरूर और नूर खान एयरबेस पर लैंडिंग
तुर्की का सैन्य विमान जो है जो मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि 60 घंटे से ट्रांसपोर्ट हुआ है 60 घंटे तक चाइना और टर्की से तो उसमें कम से कम एक टर्की का ये विमान तो एस्टैब्लिश देखिए सैन्य परिवहन विमान इस दौरान पाकिस्तान पहुंचता है ये एस्टैब्लिश होता है। टर्किश एयरफोर्स का एक और A400 एम विमान जो है वो भी सक्रिय पाया गया। लेकिन वो एग्जैक्टली कैसे वहां पहुंचा नहीं पहुंचा इसको पुष्टि नहीं कर पाएंगे क्योंकि कई बार अब ये जो बदमाशी ये कर रहे हैं कि ट्रांसफॉर्डर बंद कर देते हैं अपना अपना डाटा छिपा लेते हैं और डार्क मोड में उड़ान भरते हैं। तो ये भी एक बड़ा खेल है ताकि कोई दुनिया उसको पकड़ नहीं पाए। इसके अलावा चाइना के वाई20 सैन्य परिवहन विमान को लेकर भी रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि नूर खान और पाकिस्तान के एयरफोर्स के मसरूर एयरबेस पर ये पहुंचे हैं। लेकिन सार्वजनिक रूप से इसकी हम स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सकते हैं।
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