Ladakh में High Court पीठ की होगी स्थापना, अमित शाह बोले- दूर-दराज तक पहुंचेगा न्याय
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को कहा कि लद्दाख में जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय की एक पीठ स्थापित करने के केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले से इस केंद्र-शासित प्रदेश के दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए न्याय तक पहुंच काफी बेहतर होगी। शाह ने लद्दाख का सर्वांगीण विकास और संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की केंद्र की प्रतिबद्धता भी दोहराई। लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस “ऐतिहासिक फैसले” का स्वागत किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा गृह मंत्री शाह का आभार जताया।
शाह ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लद्दाख में जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय की एक पीठ स्थापित करने के केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लद्दाख में जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय की एक पीठ स्थापित करने का फैसला लिया है। इससे लद्दाख के दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए न्याय तक पहुंच काफी बेहतर होगी, क्योंकि उन्हें कानूनी सेवाएं हासिल करने में लगने वाला समय घट जाएगा।” शाह ने कहा, “सरकार लद्दाख का सर्वांगीण विकास और संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।” अधिकारियों ने कहा कि उच्च न्यायालय की पीठ की स्थापना से लद्दाख के लोगों की उच्च न्यायपालिका तक आसान और त्वरित पहुंच उपलब्ध कराने की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होने की उम्मीद है।
उपराज्यपाल सक्सेना ने कहा कि उच्च न्यायालय की पीठ की स्थापना से न केवल तीव्र न्याय सुनिश्चित होगा, बल्कि लद्दाख के सर्वांगीण विकास के प्रति सरकार की “अटूट प्रतिबद्धता” की भी पुष्टि होगी। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “इस ऐतिहासिक फैसले के लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का बहुत-बहुत धन्यवाद! लद्दाख में उच्च न्यायालय की पीठ स्थापित करने से न केवल तेजी से न्याय मिलना सुनिश्चित होगा, बल्कि इससे लद्दाख के सर्वांगीण विकास और वहां के लोगों की लंबे समय से चली आ रही सामूहिक आकांक्षाओं को पूरा करने की सरकार की अटूट प्रतिबद्धता भी फिर से साबित हुई है।
Delhi Master Plan 2047 में जल निकायों में फ्लोटिंग कैफे और लाइब्रेरी को मंजूरी
‘मास्टर प्लान दिल्ली (एमपीडी) 2047’ में संबंधित अधिकारियों की अनुमति के अधीन जल निकायों में नौकायन, फ्लोटिंग कैफे व फ्लोटिंग लाइब्रेरी जैसी जल आधारित मनोरंजक गतिविधियों की अनुमति देने का प्रावधान किया गया है। बृहस्पतिवार को यह योजना अधिसूचित की गयी। इस पहल का उद्देश्य जल निकायों को मनोरंजन के लिए अधिक सुलभ बनाना है, साथ ही इनके विकास के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करना है।
योजना के अनुसार, एक हेक्टेयर से बड़े जल निकायों के किनारे नई परियोजनाओं में, जहां संभव हो, कम से कम 10 मीटर का अनिवार्य बफर क्षेत्र बनाए रखना होगा। मास्टर प्लान में सभी भूमि उपयोग क्षेत्रों में मनोरंजन संबंधी गतिविधियों की अनुमति दी गई है। रणनीतिक महत्व वाले पार्कों और खेल केंद्रों के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) प्रत्येक मामले के आधार पर विशेष विकास नियंत्रण मानदंड तय कर सकता है।
योजना के मुताबिक, मनोरंजन क्षेत्रों में स्थायी और अस्थायी ढांचे दिव्यांगजनों के लिए भी सुलभ होने चाहिए। वहीं, पार्किंग और इमारतों की ऊंचाई से जुड़े नियम संबंधित अधिकारियों द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार लागू होंगे।
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