Mandi स्थित Hanogi Tunnel में ट्रकों की टक्कर से 4 लोगों की मौत, 6 घायल
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में बृहस्पतिवार को हणोगी सुरंग के भीतर दो ट्रकों की आमने-सामने की टक्कर में चार लोगों की मौत हो गई और छह अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। मंडी के पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, तीन लोगों की मौत मौके पर ही हो गई थी, जबकि एक अन्य व्यक्ति की बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त ट्रकों में से एक ट्रक मंडी से कुल्लू की ओर जा रहा था, जबकि दूसरा विपरीत दिशा से आ रहा था। मृतकों की पहचान उत्तर प्रदेश के निवासी शकील (20), विशाल (21) और रवि कुमार (22) के रूप में हुई है जबकि चौथे मृतक की पहचान बिहार के रहने वाले मेघनाथ शर्मा (39) के रूप में की गई है।
पुलिस ने बताया कि घायलों में दीपक, ऐजात, दीपक, शहजाद, भागीरथ और मुकेश कुमार शामिल हैं। घायलों को नेरचौक कस्बा स्थित श्री लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल तथा कुल्लू अस्पताल भेज दिया गया है। दुर्घटना के बाद सुरंग के भीतर वाहनों की आवाजाही कुछ समय के लिए बाधित रही।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। एक अन्य हादसे में, जब्लू से घुमारवीं जा रही एक सरकारी बस की भगेड-पनाओल मार्ग पर एक निजी बस से टक्कर हो गई। अधिकारियों ने बताया कि लगभग 40 यात्रियों को ले जा रही यह सरकारी बस सड़क किनारे बने सुरक्षा दीवार से टकराकर रुक गई, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
बस में सवार यात्रियों को मामूली चोट आई हैं और किसी के गंभीर रूप से घायल होने की खबर नहीं है।
Maharashtra RTO ने मराठी न बोलने पर 1268 ऑटोरिक्शा व टैक्सी चालकों को दिया नोटिस
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बताया कि बृहस्पतिवार को राज्यव्यापी जांच के पहले दिन मराठी का पर्याप्त ज्ञान न होने के कारण 1,268 व्यावसायिक यात्री वाहन चालकों - मुख्य रूप से ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों - को नोटिस जारी किए गए। मंत्री ने बताया कि राज्य भर के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) द्वारा ये नोटिस जारी किए गए हैं। इन चालकों को राज्य की प्राथमिक का आवश्यक कार्यसाधक ज्ञान हासिल करने के लिए एक महीने का समय दिया गया है; ऐसा न करने पर उनके परमिट तीन महीने के लिए निलंबित कर दिए जाएंगे।
सरनाईक ने एक बयान में बताया कि बृहस्पतिवार शाम तक कुल 8,217 चालकों का परीक्षण किया गया, जिनमें मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) के 3,995 चालक शामिल हैं। एमएमआर में 604 चालक ऐसे पाए गए, जिन्हें मराठी का कार्यसाधक ज्ञान नहीं था। मंत्री ने बताया कि राज्य के शेष हिस्सों में 4,222 चालकों का परीक्षण किया गया, जिनमें से 664 को नोटिस जारी किए गए।
उन्होंने बताया कि यह जांच अभियान 30 सितंबर तक जारी रहेगा। मंत्री ने कहा, मराठी का कामकाजी ज्ञान होना केवल नियमों का पालन करने का मामला नहीं है, बल्कि यह यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा से भी जुड़ा है। मई में मराठी में कामकाजी दक्षता अनिवार्य करने की घोषणा के बाद, राज्य सरकार ने गैर-मराठी चालकों के लाभ के लिए मराठी का एक पाठ्यक्रम शुरू किया था।
सरकार ने उनके लिए मराठी सीखने के लिए 15 अगस्त की समयसीमा भी तय की थी। आरटीओ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि परिवहन आयुक्त कार्यालय से 16 सवालों की प्रश्नावली मिली है और यह प्रश्नावली कोंकण साहित्य परिषद द्वारा टैक्सी और ऑटोरिक्शा चालकों को दिए गए मराठी प्रशिक्षण पर आधारित है, जो स्वतंत्रता दिवस पर समाप्त हुआ था। मला सीएनजी भरायचे आहे. थोडे थांबावे लागेल (मुझे सीएनजी भरवानी है।
थोड़ा रुकना पड़ेगा), माझी रिक्शा/टैक्सी शेयरिंगची आहे (मेरी ऑटो/टैक्सी शेयरिंग वाली है) और मीटर चालू केले आहे (मीटर चालू कर दिया है) ऐसे सामान्य जवाब हैं, जिनकी अधिकारियों को चालकों से अपेक्षा है। आरटीओ अधिकारियों के अनुसार, सवाल इस तरह तैयार किए गए हैं कि औपचारिक रूप से के ज्ञान की जांच करने के बजाय चालकों को रोजमर्रा के काम के दौरान आने वाली परिस्थितियों को परखा जा सके। इनमें यात्रियों से यह पूछना कि उन्हें कहां जाना है, गंतव्य और दिशा समझना तथा किराए, मीटर, मार्ग और टैक्सी या ऑटोरिक्शा स्टैंड के बारे में बातचीत करना शामिल है।
मध्य मुंबई के दादर में जांच कर रहे एक आरटीओ निरीक्षक ने कहा, हम यह जांच शुरू कर चुके हैं कि चालकों को मराठी आती है या नहीं। जिन लोगों को नहीं आती, उन्हें एक महीने का नोटिस दिया जाएगा और उस अवधि में मराठी सीखने के लिए कहा जाएगा। उन्होंने कहा, अगर एक महीने बाद भी वे सवालों के संतोषजनक जवाब देने में सक्षम नहीं होते हैं, तो उनका बैज तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया जाएगा।
उन्हें सीखने के लिए फिर एक महीने का समय दिया जाएगा। यह कार्रवाई जारी रहेगी। परिवहन विभाग ने आरटीओ अधिकारियों को इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करने का भी निर्देश दिया है।
बुधवार को एक महीने के अभियान की घोषणा करते हुए मंत्री सरनाइक ने कहा था कि सरकार का उद्देश्य किसी की आजीविका प्रभावित करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि मराठी और राज्य की पहचान तथा संस्कृति संरक्षित रहे। उन्होंने कहा था कि 105 दिन चले अभियान के दौरान 1.65 लाख चालक पहले ही मराठी का प्रशिक्षण ले चुके हैं और उन्हें प्रमाण-पत्र जारी किए जा चुके हैं तथा अभियान को अच्छी प्रतिक्रिया मिली। यह कदम राज्य सरकार के टैक्सी और ऑटोरिक्शा चालकों के लिए महाराष्ट्र में मराठी का कामकाजी ज्ञान अनिवार्य करने के फैसले के बाद उठाया गया है।
राज्य सरकार ने हाल में इस आवश्यकता को लागू करने के लिए महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन किया है। टैक्सी और ऑटोरिक्शा चालक यूनियनों के कुछ नेताओं ने नियमों में मराठी के कामकाजी ज्ञान की स्पष्ट परिनहीं होने पर सवाल उठाए हैं। सेवा सारथी टैक्सी यूनियन के नेता डीएम गोसावी ने कहा, महाराष्ट्र सरकार ने हाल में रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी का कामकाजी ज्ञान अनिवार्य करने के लिए कानून में संशोधन किया है, लेकिन कामकाजी ज्ञान से क्या मतलब है, यह स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं है।
जाहिर तौर पर इससे आरटीओ में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। यूनियन नेताओं ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि अभियान के दौरान चालकों का आर्थिक शोषण हुआ तो वे आंदोलन शुरू करेंगे। सेवानिवृत्त आरटीओ अधिकारियों ने भी कहा कि नियमों में कामकाजी ज्ञान के आकलन के लिए विस्तृत परीक्षा या मानकीकृत मानदंड निर्धारित नहीं किए गए हैं।
आरटीओ के एक पूर्व अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, संशोधित नियमों में मराठी के कामकाजी ज्ञान को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है। यह स्पष्ट किया जाना चाहिए था कि बैज जारी करने से पहले आरटीओ को चालकों की मौखिक या लिखित परीक्षा लेनी चाहिए या नहीं। सरनाइक के अनुसार, ऑटो और टैक्सी चलाने के लिए कार्यसाधक मराठी ज्ञान की आवश्यकता महाराष्ट्र में 1989 से मौजूद है, लेकिन इसे सख्ती से लागू नहीं किया गया था।
अब 12 अगस्त को किए गए संबंधित संशोधन के तहत इस प्रावधान को सख्ती से लागू किया जाएगा।
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