यूपी सरकार की उत्कृष्ट कार्यशैली का असर, संस्थागत प्रसव बढ़ने से मातृ मृत्युदर में आई बड़ी गिरावट
लखनऊ, 20 अगस्त (आईएएनएस)। योगी सरकार की ओर से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने और प्रसव के दौरान मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) उत्तर प्रदेश में लगातार असरदार साबित हो रही है।
वर्तमान वित्तीय वर्ष में 1 अप्रैल से 9 अगस्त तक सात लाख से अधिक संस्थागत प्रसव इसका उदाहरण हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक कई जिलों में योजना के बेहतर क्रियान्वयन का असर दिखाई दे रहा है। योगी सरकार के इन प्रयासों से मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) को कम करने में सफलता मिल रही है।
सचिव स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि योगी सरकार की ओर से सुरक्षित प्रसव पर जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती महिलाओं को प्रसव पर आर्थिक सहायता (ग्रामीण क्षेत्र में 1,400 रुपए और शहरी क्षेत्र में 1,000 रुपए) दी जाती है। इसका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को घर पर प्रसव के बजाय अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव कराने के लिए प्रोत्साहित करना है।
योजना से मिलने वाली धनराशि प्रसव से जुड़े खर्चों में मदद करती है और महिलाओं को सुरक्षित प्रसव सेवाओं तक पहुंचने के लिए प्रेरित करती है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में योजना के बेहतर प्रदर्शन से स्पष्ट है कि संस्थागत प्रसव को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। पश्चिम के हाथरस, मैनपुरी, फिरोजाबाद, हरदोई, कानपुर देहात, मुजफ्फरनगर, बागपत तो पूरब से जौनपुर, अम्बेडकरनगर और सोनभद्र ने योजना के क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक भुगतान पहुंचाने में अच्छा प्रदर्शन किया है। सोनभद्र से मुजफ्फरनगर तक का बेहतर प्रदर्शन यह दर्शाता है कि जननी सुरक्षा योजना प्रदेश में सुरक्षित मातृत्व की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) की स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू अग्रवाल के अनुसार संस्थागत प्रसव केवल प्रसव की जगह बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मां और नवजात दोनों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा है। अस्पताल में प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं की समय रहते पहचान और उपचार संभव होता है। जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित चिकित्सक, स्टाफ नर्स, दवाएं, रक्त की उपलब्धता और आपातकालीन सेवाएं भी दी जाती हैं। इससे मातृ एवं नवजात मृत्यु के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।
योजना का लाभ अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुंचाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग के फील्ड कर्मचारियों की भूमिका भी अहम है। गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व जांच, संस्थागत प्रसव और उपलब्ध सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ उन्हें समय पर स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाने का काम किया जाता है।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि जननी सुरक्षा योजना के तहत एक अप्रैल से 9 अगस्त तक कुल संस्थागत प्रसव 7,17,736 के सापेक्ष 5,43,661 लाभार्थियों का भुगतान हो चुका है। इनमें हाथरस, मैनपुरी, फिरोजाबाद, हरदोई, कानपुर देहात, मुजफ्फरनगर, जौनपुर, बागपत, अम्बेडकरनगर व सोनभद्र ने उत्कृष्ट कार्य किया है। इन सभी जिलों में 80 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों का भुगतान हो चुका है। सिर्फ सिद्धार्थनगर, बहराइच व अलीगढ़ में 50 प्रतिशत या उससे कम भुगतान हुआ है, जिसके लिए स्थानीय अधिकारियों को सभी अवरोध दूर कर शत प्रतिशत लाभार्थियों का भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं।
--आईएएनएस
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चंपावत को मिली बड़ी स्वास्थ्य सौगात, CM धामी ने किया ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का शुभारंभ
CM Dhami: उत्तराखंड के चंपावत जिले को बड़ी सौगात मिली है. सीएम पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत के जिला चिकित्सालय में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का शुभारंभ किया. इस नई सुविधा के शुरू होने से जिले के मरीजों को खून से जुड़े जरूरी कंपोनेंट अब स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेंगे. इससे गंभीर मरीजों के इलाज में समय की बचत होगी और जरूरत के समय उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सकेगी.
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह यूनिट चंपावत के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा है. इसके जरिए मरीजों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और समय पर Packed RBC, Plasma और Platelets उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उनके आसपास ही उपलब्ध कराना है, ताकि इलाज के लिए मरीजों और उनके परिवारों को दूसरे शहरों पर निर्भर न रहना पड़े.
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3 प्रमुख ब्लड कंपोनेंट मिल सकेंगे
ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट की खासियत यह है कि एक यूनिट रक्त को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर जरूरत के हिसाब से मरीजों को दिया जा सकता है. इसमें Packed RBC का इस्तेमाल मुख्य रूप से शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी पूरी करने के लिए किया जाता है. वहीं Plasma और Platelets की जरूरत अलग-अलग तरह की गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों में पड़ती है.
इस सुविधा से अस्पताल में भर्ती मरीजों को उनकी जरूरत के अनुसार संबंधित ब्लड कंपोनेंट उपलब्ध कराने में आसानी होगी. खास तौर पर इमरजेंसी और गंभीर मामलों में यह सुविधा काफी उपयोगी साबित हो सकती है.
अब जरूरतमंद मरीजों को नहीं करना पड़ेगा लंबा इंतजार
पहले कई मामलों में ब्लड के अलग-अलग कंपोनेंट की जरूरत पड़ने पर मरीजों को दूसरे बड़े अस्पतालों या शहरों की ओर जाना पड़ता था. इससे इलाज में समय लगता था और मरीज के परिवार पर अतिरिक्त दबाव भी पड़ता था. चंपावत में इस यूनिट के शुरू होने के बाद स्थानीय स्तर पर ही इन जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है.
उद्घाटन करते हुए सीएम धामी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है. सरकार प्रदेश के दूरदराज और पर्वतीय क्षेत्रों में भी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने पर लगातार काम कर रही है.
पहाड़ के मरीजों को मिलेगा सीधा फायदा
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को स्थानीय स्तर पर मजबूत करना बेहद महत्वपूर्ण है. कई पहाड़ी जिलों में मरीजों को गंभीर स्थिति में बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है. ऐसे में स्थानीय अस्पतालों में जरूरी सुविधाएं बढ़ने से मरीजों को समय पर उपचार देने में मदद मिल सकती है.
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी बुनियादी व्यवस्थाओं को लगातार मजबूत कर रही है। उनका कहना है कि प्रदेश के लोगों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और जनसुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है.
आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में कदम
चंपावत जिला चिकित्सालय में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट की शुरुआत को जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था के विस्तार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. इससे अस्पताल की क्षमता बढ़ेगी और डॉक्टरों को गंभीर मरीजों के इलाज में भी बेहतर सुविधा मिल सकेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि उन्हें आधुनिक, सुरक्षित और आम लोगों की पहुंच में लाना है. इसी सोच के साथ अस्पतालों में जरूरी उपकरण, सुविधाएं और बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है.
उन्होंने उम्मीद जताई कि नई यूनिट का लाभ चंपावत जिले के साथ आसपास के क्षेत्रों के जरूरतमंद मरीजों को भी मिलेगा. समय पर ब्लड कंपोनेंट मिलने से कई गंभीर मरीजों के इलाज में मदद मिल सकती है. इस अवसर पर उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल भी मौजूद रहे. मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में किए जा रहे ऐसे प्रयासों का सीधा लाभ प्रदेश के आम नागरिकों तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है. चंपावत में शुरू हुई यह नई सुविधा इसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है.
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