CBSE के तीन-भाषा वाले नियम पर उठाये सवाल, सुप्रीम कोर्ट ने "नेटिव" शब्द पर जताई आपत्ति
जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने "नेटिव" शब्द के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह औपनिवेशिक (colonial) दौर से आया है. जस्टिस बागची ने कहा, "अंग्रेज़ी को किस हद तक गैर-देशी (non-indigenous) भाषा माना जा सकता है? मुझे 'नेटिव' शब्द पर आपत्ति है क्योंकि यह औपनिवेशिक दौर से आया है. इसकी जगह 'इंडिजिनस' (indigenous/देशी) शब्द होना चाहिए. नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 बनाने वालों को 'नेटिव' शब्द के इस्तेमाल को लेकर सावधान रहना चाहिए था."
हमें इसकी संवैधानिक वैधता देखनी होगी
कोर्ट ने कहा कि उसे यह देखना होगा कि क्या भारत में अंग्रेज़ी को देशी या गैर-देशी भाषा माना जा सकता है. जस्टिस बागची ने आगे कहा, "अंग्रेज़ी को देशी कहा जाए या गैर-देशी, हमें इसकी संवैधानिक वैधता देखनी होगी." ये बातें CBSE के तीन-भाषा वाले नियम को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कहीं गईं. इस नीति के तहत, कक्षा 5 से 9 तक के छात्रों को दो भारतीय "देशी" (native) भाषाओं के साथ एक तीसरी भाषा भी पढ़नी होती है.
पर्याप्त योग्य शिक्षक हैं
याचिकाकर्ताओं ने इस नियम को लागू करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि कई स्कूलों में तय भाषाओं को पढ़ाने के लिए ज़रूरी संसाधन, जैसे कि पाठ्यपुस्तकें और योग्य शिक्षक, मौजूद नहीं हैं. कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या स्कूलों के पास इस नीति को लागू करने के लिए ज़रूरी प्रशासनिक और शिक्षण इंफ्रास्ट्रक्चर है. जस्टिस बागची ने केंद्र से पूछा कि क्या हमारे स्कूलों में संस्कृत जैसी देशी भाषाओं को पढ़ाने के लिए पर्याप्त योग्य शिक्षक हैं.
इस नीति पर फिर से विचार
जस्टिस बागची ने पूछा, "हमारे स्कूलों में कितने संस्कृत शिक्षक B.Ed. क्वालिफाइड हैं?" CJI सूर्यकांत ने भी कहा कि सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों और संदेहों को देखते हुए शायद इस नीति पर फिर से विचार करने और इसे बेहतर बनाने की जरूरत पड़ सकती है. CJI ने कहा, "इन संदेहों पर आप फिर से विचार कर सकते हैं. नीति को बेहतर कैसे बनाया जाए? आप एक एक्सपर्ट बॉडी हैं."
वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप: पीवी सिंधू और आयुष शेट्टी बाहर, महिला युगल में त्रीसा-गायत्री ने जगाई उम्मीद
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