वेलनेस टूरिज्म का हब बना गुजरात, आयुर्वेद, पंचकर्म और 'लोक आयुर्वेद' कॉन्सेप्ट से हेल्थ टूरिज्म के मिल रहा बढ़ावा
गांधीनगर, 20 अगस्त (आईएएनएस)। गुजरात की पहचान सिर्फ देश के प्रमुख औद्योगिक राज्य और कल्चरल या रिलीजियस टूरिज्म डेस्टीनेशन के तौर पर ही नहीं है, बल्कि आज गुजरात देश-दुनिया के प्रमुख आयुर्वेदिक, पंचकर्म, नेचुरोपैथी और वेलेनेस हब के रूप में भी उभर रहा है।
राज्य में ऐसे कई नेचुरल वेलनेस सेंटर हैं, जहां देश-विदेश से आए पर्यटक खुद को आराम और तरोताजा महसूस कर रहे हैं। कच्छ के पुनाडी पटिया गांव के पास 40 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला नवजीवन नेचर क्योर सेंटर महात्मा गांधी के नेचर क्योर के विचार पर आधारित है। यहां आयुर्वेदिक और हर्बल उपचार से लेकर पंचकर्म, एक्यूपंक्चर, मेडिटेशन और योग के जरिए कई तरह की बीमारियों का इलाज किया जा रहा है।
नवजीवन नेचर क्योर सेंटर के चिकित्सक गवनी शाह ने बताया, जिस प्रकार की जरूरत मरीज को होती है, उसके अनुसार उनको आयुर्वेदिक फिजियोथेरेपी का ट्रीटमेंट दिया जाता है। मरीजों का सुबह से लेकर शाम तक एक शिड्यूल बनाया जाता है, जैसे कि सुबह उठकर मरीज को क्या खाना है, क्या पीना है, किस प्रकार का योगा करना है और किस प्रकार के उपचार की आवश्यकता है। मरीजों का स्वास्थ्य से लेकर खाने तक का पूरा ध्यान रखा जाता है।
इसी प्रकार खास तौर पर आयुर्वेद की पढ़ाई और रिसर्च के लिए प्रसिद्ध जामनगर के लखवाड़ा इलाके में करीब दो एकड़ में बना वेदगर्भ विहार वेलनेस रिसॉर्ट और इको विलेज लोक आयुर्वेद मॉडल पर आधारित है। यह वेलनेस सेंटर हमारे 5,000 साल पुराने प्रिवेंटिव और प्रोमोटिव हेल्थ के कॉन्सेप्ट को बढ़ावा दे रहा है।
जामनगर की मरीज पूजा डेर ने बताया, उसे प्रेग्नेंसी के समय कॉम्प्लीकेशंस थे। साथ ही, चिंता थी कि बच्चा कैसा होगा, उसके संस्कार कैसे होंगे और स्वास्थ्य कैसा होगा। मैंने वेदगर्भ विहार वेलनेस सेंटर से दवा ली थी। आज मेरा बच्चा स्वस्थ है और मेरी डिलीवरी भी नॉर्मल हुई थी।
वेदगर्भ विहार वेलनेस रिसॉर्ट के फाउंडर हितेश जानी ने कहा, मैंने एक वेलनेस रिसॉर्ट खोला, जिसका नाम वेदगर्भ विहार यानी रेस्ट एंड रीजेनरेट गर्भ संस्कार रखा। इस सेंटर की विशेषता है कि जन्म लेने वाला बच्चा सुंदर बने, तेजस्वी व बुद्धिमान बने और हाई आईक्यू वाला बने। यह सब हम पहले से कर सकते हैं। हम पहले भी ऐसे श्रेष्ठ बच्चों को जन्म देते थे। हमने हजारों सालों के इतिहास को फिर से जिंदा किया है।
आज की भागदौड़ वाली जिंदगी में हर कोई प्राकृतिक वातावरण में रहकर स्वास्थ्य लाभ और मानसिक शांति पाना चाहता है। ऐसे में गुजरात सरकार राज्य में लगातार पंचकर्म, आयुर्वेद और नेचुरोपैथी को बढ़ावा देकर हेल्थ-टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने में जुटी है।
जाहिर है कि कई असाध्य बीमारियों के इलाज में ऑर्गेनिक जीवन पद्धति अपनाना और जड़ी-बूटियों व पंचगव्य पर आधारित नेचुरल ट्रीटमेंट बेहद कारगर होता है। अगर आप भी बीमारी-मुक्त जीवन चाहते हैं, तो अपनी बिजी जिंदगी से ब्रेक लें और गुजरात के इन आयुर्वेदिक वेलनेस सेंटर्स में रहकर अपने शरीर और मन में नई स्फूर्ति का अनुभव जरूर करें।
--आईएएनएस
डीसीएच/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
चीनी की कीमतों में उछाल के बीच सरकार ने थोक उपभोक्ताओं पर लागू की 15 दिन की स्टॉक सीमा
नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। त्योहारी सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने चीनी के बड़े खरीदारों और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा घटाकर 15 दिन कर दी है।
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, नया आदेश 1 सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगा, जिसका उद्देश्य जमाखोरी पर रोक लगाना और बाजार में चीनी की आपूर्ति बनाए रखना है।
नए नियम के तहत, जो भी औद्योगिक या संस्थागत उपभोक्ता हर महीने 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उपयोग कच्चे माल, उत्पादन या उपभोग के लिए करता है, वह अपनी 15 दिनों की आवश्यकता से अधिक चीनी का भंडारण नहीं कर सकेगा।
सरकार ने मिठाई निर्माता, कन्फेक्शनरी उद्योग, शीतल पेय निर्माता, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, हलवाई व्यवसायों और अन्य संस्थागत खरीदारों को इस श्रेणी में शामिल किया है। ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान पिछले एक वर्ष की औसत मासिक खपत के आधार पर की जाएगी।
हालांकि, केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और स्थानीय निकायों से संबंधित संस्थाओं को इस आदेश से छूट दी गई है।
सरकार ने यह भी कहा है कि प्रत्येक चीनी मिल द्वारा बड़े उपभोक्ताओं को सीधे या डीलरों के माध्यम से बेची गई चीनी की मात्रा का सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) रिटर्न और चीनी से संबंधित एचएसएन कोड का उपयोग किया जाएगा, ताकि वास्तविक खपत और खरीदारी का पता लगाया जा सके।
यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब सरकार पहले ही डीलरों के लिए चीनी भंडारण सीमा को 30 दिनों तक सीमित कर चुकी है। इसके बावजूद बाजार में चीनी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 18 अगस्त को चीनी का औसत खुदरा मूल्य बढ़कर 52.30 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया, जबकि एक वर्ष पहले इसी अवधि में यह 46.34 रुपए प्रति किलोग्राम था। यानी चीनी की कीमतों में सालाना आधार पर लगभग 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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