पॉलिटिकल साइंस की नई किताबों पर बड़ा अपडेट, NCERT ने बनाई 20 सदस्यीय कमेटी, RSS का बड़ा रोल
NCERT: एनसीईआरटी ने 11वीं और 12वींम कक्षा के लिए पॉलिटिकल साइंस की किताबों को तैयार करने के लिए नई टीम बनाई गई है. इसमें यूनिवर्सिटी के एकेडमिक्स, स्कूल टीचर्स और NCERT के फैकलटी मैंबर्स शामिल होंगे. बताया जा रहा है कि दोनों में से पहली किताब नवंबर के महीने तक तैयार कर दी जाएगी. किताब के लिए 20 सदस्यों की नई टीम का ऐलान हुआ है, जिसमें JNU, दिल्ली यूनिवर्सिटी, इग्नू, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली, जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल, पांडिचेरी यूनिवर्सिटी और उत्कल यूनिवर्सिटी के फैकल्टी मैंबर्स, स्कूल टीचर्स और NCERT के एकेडमिक्स शामिल हैं. इस टीम में कम से कम चार लोग RSS या बीजेपी संगठनों से जुड़े हुए भी हो सकते हैं.
RSS या बीजेपी का संबंध किससे?
एबीवीपी की पूर्व राष्ट्रीय सचिव और JNU प्रोफेसर वंदना मिश्रा और शिक्षाविद यदुनाथ देशपांडे, जो ABVP में संगठनात्मक पद पर रह चुके हैं और बीजेपी के राजनीतिक सलाहकार भी हैं. टीम में पुणे स्थित ज्ञान प्रबोधिनी के प्रशांत दिवेकर और जेएनयू के एकेडमिक रवि रमेशचंद्र शुक्ला भी शामिल हैं. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेटिक लीडरशिप द्वारा प्रकाशित जर्नल के एडिटोरियल बोर्ड से जुड़े रहने वाले रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी भी कमेटी में है.
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इस पैनल में जेएनयू से प्रकाश कांडपाल और रवि शुक्ला, NLU दिल्ली की निधि गुप्ता, चाणक्य यूनिवर्सिटी के चेतन सिंघई, दिल्ली यूनिवर्सिटी से सुकांक्षिका वत्सा और इग्नू से सतीश कुमार जैसे अन्य लोग भी शामिल किए हैं. यह पैनल काफी बड़ा है.
With a view to further strengthen and streamline the development of the Grade 11 and 12 Political Science textbooks and related Teaching-Learning Material (TLM) as per NCF-SE 2023, the Textbook Development Team (TDT) for Grade 11 and 12 Political Science is hereby reconstituted… pic.twitter.com/7wzswfoUpF
— ANI (@ANI) August 19, 2026
इंडियन नॉलेज सिस्टम को बढ़ावा देंगी नई किताबें
बुक्स में इंडियन नॉलेज सिस्टम पर जोर देने की बात कही है. नई टीम को किताबों में भारतीय संस्कृति और नॉलेज सिस्टम से जुड़ी बातों पर महत्व देने के लिए कहा गया है. इसके लिए टीम को NCERT के उन विभागों से भी सलाह-मशवरा करने के लिए कहा है जो इंडियन नॉलेज सिस्टम, सोशल साइंस, भाषाओं, पर्यावरण शिक्षा और नई शिक्षण पद्धतियों पर काम कर रहे हैं. इन किताबों के अध्याय पूरे होने के बाद टेक्सटबुक कोर ग्रुप इनकी समीक्षा करेगा. समीक्षा के जरिए देखा जाएगा कि भारतीय ज्ञान और संस्कृति से जुड़ाव जैसी चीजें किताबों में है या नहीं.
कब तक तैयार होंगी किताबें?
नई टीम के हेड निट्टे यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर संदीप शास्त्री हैं और डॉ. वंथांगपुई खोबुंग सदस्य और डॉक्टर सुभाष सिंह समन्वयक हैं. क्लास 11 की पॉलिटिकल साइंस की किताब 30 नवंबर 2026 तक तैयार होने का दावा किया जा रहा है और 12वीं की पॉलिटिकल साइंस की किताब 30 जुलाई 2027 तक तैयार हो सकती है.
किताबों में क्या बदलाव हो सकते हैं?
पुरानी किताबों की तुलना में नई किताबों में छात्रों को भारतीय संविधान, लोकतंत्र, भारतीय राजनीतिक परंपराओं, स्थानीय शासन, भारतीय विचारकों और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों की अधिक जानकारी मिलने की बात बताई जा रही है. हालांकि, अब तक इसकी कोई आधिकारीक पुष्टि नहीं हुई है.
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50 साल बाद भी मुकेश की आवाज का जादू कायम, अब Gen Z तक पहुंचेगे उनके संगती का जादू
Mukesh 50th death anniversary: हिंदी सिनेमा में कुछ आवाजें ऐसी रही हैं, जिन्हें वक्त कभी पुराना नहीं कर पाया. मुकेश चंद माथुर, जिन्हें दुनिया प्यार से मुकेश के नाम से जानती है, उन्हीं आवाजों में से एक हैं. उनके गाए गाने आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं।.चाहे ‘कभी कभी मेरे दिल में’, ‘दोस्त दोस्त ना रहा’ जैसे इमोशनल नगमे हों या फिर राज कपूर पर फिल्माए गए उनके गाने, मुकेश की आवाज ने हर दौर के लोगों को अपनी ओर खींचा है. अब उनकी संगीत विरासत को नई पीढ़ी और खासकर Gen Z तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है.
दरअसल, 27 अगस्त 2026 को मुकेश की 50वीं डेथ एनिवर्सरी है. इस मौके पर महाराष्ट्र सरकार ने उनकी संगीत विरासत को याद करने और उसे आगे बढ़ाने के लिए ‘दिवंगत गायक मुकेश गौरव समिति’ का गठन किया है. ये समिति मुंबई में मुकेश के संगीत योगदान को याद करने के साथ-साथ कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी करेगी.
मुकेश के सुरों से Gen Z को जोड़ने का प्लान
मुकेश की पहचान सिर्फ हिंदी फिल्मों के सिंगर के तौर पर नहीं थी. उन्होंने मराठी म्यूजिक में भी अपनी आवाज का रंग बिखेरा था. उनकी सिंगिंग की सबसे खास बात उनकी सादगी और आवाज में महसूस होने वाली भावनाएं थीं. यही वजह है कि उनके गाए गानें आज भी लोगों को अपनी ओर खींचते हैं. अब सरकार चाहती है कि मुकेश की आवाज और संगीत से आज की युवा पीढ़ी भी जुड़े. इसके लिए समिति उनके फेमस हिंदी और मराठी गानों पर बेस्ड संगीत समारोह और खास सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करेगी. इन कार्यक्रमों में मुकेश के गीतों को नए दौर के कलाकारों की आवाज में भी पेश किया जा सकता है.
नए सिंगर्स को मिलेगा ये मौका
मुकेश की विरासत को आगे बढ़ाने की इस पहल में सिर्फ पुराने गानों को याद करना ही शामिल नहीं है. समिति का फोकस नई सिंगर्स को मौका देने पर भी रहेगा. इसके तहत यंग सिंगर्स और म्यूजिक सीखने वाले स्टूडेंट के लिए सिंगिंग कॉम्पिटिशन आयोजित किए जाएंगे. वहीं, जो लोग अच्छा परफॉर्म करेंगे उन्हें गिफ्ट भी दिए जाएंगे. ऐसा करने से एक तरफ मुकेश के सदाबहार गानों को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाएगा, तो दूसरी तरफ उन यंग जनरेशन को भी मंच मिलेगा, जो म्यूजिक की दुनिया में अपना करियर बनाना चाहते हैं.
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ये लोग समिति में शामिल
महाराष्ट्र सरकार की ओर से बनाई गई इस समिति में कई खास नाम शामिल हैं. महाराष्ट्र के कौशल विकास, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है. वहीं शिवसेना नेता अमेय घोले और मुकेश के पोते और अभिनेता नील नितिन मुकेश समिति के सदस्य होंगे. मुंबई शहर के जिलाधिकारी को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है.इसे लेकर मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा कि मुकेश की आवाज आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में जिंदा है.
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